कर्नाटक के आलुर में विजय हजारे ट्रॉफी (2025/26) का रोमांच अपने चरम पर है, जहां दिल्ली और सौराष्ट्र के बीच एक दिलचस्प मुकाबला खेला जा रहा है। दिल्ली की टीम लगातार दो जीत के बाद आत्मविश्वास से भरी हुई है, लेकिन इस मुकाबले में उसकी सबसे बड़ी ताकत—विराट कोहली—मैदान पर नहीं होंगे। कप्तान ऋषभ पंत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का साहसिक फैसला लिया है। यह निर्णय न केवल मौसम पर आधारित है, बल्कि यह दिल्ली के युवा गेंदबाजों और बल्लेबाजों के लिए भी एक बड़ा इम्तिहान है कि वे एक सुपरस्टार की छाया के बिना कैसे प्रदर्शन करते हैं।
दिल्ली की रणनीति: पंत का `पहले गेंदबाजी` का साहसिक फैसला
दिल्ली के कप्तान ऋषभ पंत ने टॉस जीता और बिना किसी हिचकिचाहट के सौराष्ट्र को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। आलुर की पिचें अक्सर शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद देती हैं, और पंत स्पष्ट रूप से नई गेंद का लाभ उठाना चाहते थे। इस निर्णय का सीधा मतलब है कि दिल्ली की बल्लेबाजी लाइनअप, जो पिछले मैचों में कोहली के शतकों पर निर्भर थी, अब दूसरी पारी में दबाव को संभालने के लिए तैयार है।
हालांकि, सौराष्ट्र के सलामी बल्लेबाजों—हार्विक देसाई (Harvik Desai) और विश्वराज जडेजा (Vishvaraj Jadeja)—ने दिल्ली के मंसूबों पर पानी फेरते हुए एक मजबूत शुरुआत दी है। शुरुआती 5 ओवरों में सौराष्ट्र बिना विकेट खोए 28 रन बना चुका है। देसाई खास तौर पर आक्रामक दिख रहे हैं, और तेज गेंदबाज इशांत शर्मा (Ishant Sharma) और नवदीप सैनी (Navdeep Saini) को पहले ब्रेकथ्रू (breakthrough) की सख्त तलाश है। पंत की तेज गेंदबाजी इकाई के लिए यह एक मुश्किल परीक्षा है, क्योंकि अगर शुरुआती विकेट नहीं गिरे तो मध्य ओवरों में सौराष्ट्र एक बड़ा स्कोर खड़ा कर सकता है।
कोहली का शून्य: दिल्ली की मध्यक्रम की अग्निपरीक्षा
यह मैच दिल्ली के लिए सिर्फ सौराष्ट्र के खिलाफ मुकाबला नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा है कि टीम अपने सबसे बड़े स्तंभ के बिना कैसी दिखती है। पिछले दो मैचों में 37 वर्षीय दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने धुआंधार 208 रन बनाकर यह सुनिश्चित कर दिया था कि दिल्ली को जीत मिले। लिस्ट ए क्रिकेट में उनकी क्लास अभी भी `ऑल टाइम ग्रेट` वाली है।
लेकिन, खबर है कि कोहली इस मैच के लिए उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि वह अपने पहले दो मैचों का `कोटा` पूरा करके मुंबई लौट चुके हैं। वह न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज से पहले संभवतः 6 जनवरी को रेलवे के खिलाफ एक और मैच खेलेंगे।
कोहली की गैरमौजूदगी से दिल्ली के मध्यक्रम में एक विशाल शून्य पैदा हो गया है। अब सारा दारोमदार युवा प्रियांश आर्य (Priyansh Arya), आयुष डोसेजा (Ayush Doseja), और अनुभवी नीतीश राणा (Nitish Rana) पर होगा। उन्हें यह साबित करना होगा कि टीम सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। अगर दिल्ली को यह मैच जीतना है, तो उन्हें कोहली की बल्लेबाजी की कमी को सामूहिक प्रयास से भरना होगा—जो क्रिकेट की दुनिया में शायद सबसे मुश्किल काम है।
सौराष्ट्र की तैयारी: संतुलन और अनुभव
सौराष्ट्र की टीम संतुलन के साथ मैदान पर उतरी है। उनकी टीम में अनुभवी ऑलराउंडर चिराग जानी (Chirag Jani) और स्पिन गेंदबाज धर्मेन्द्रसिंह जडेजा (Dharmendrasinh Jadeja) शामिल हैं, जो घरेलू सर्किट में काफी प्रभावशाली रहे हैं। चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) के टीम में न होने के बावजूद, सौराष्ट्र की लाइनअप मजबूत दिखती है।
सौराष्ट्र की प्रमुख शक्तियां:
- हार्विक देसाई (विकेटकीपर/बल्लेबाज) द्वारा तेज शुरुआत।
- चिराग जानी और प्रेरक मांकड़ (Prerak Mankad) का ऑलराउंड प्रदर्शन, जो रन रेट को नियंत्रित कर सकते हैं।
- तेज गेंदबाज चेतन सकारिया (Chetan Sakariya), जो दिल्ली के बल्लेबाजों को दूसरी पारी में चुनौती दे सकते हैं।
टॉस हारने के बाद भी, सौराष्ट्र ने जिस तरह से शुरुआत की है, उससे स्पष्ट है कि वे दिल्ली को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं। आलुर की पिच पर पावरप्ले में बिना विकेट गंवाए खेलना उनकी रणनीति का सफल क्रियान्वयन दिखाता है।
निष्कर्ष: क्या दिल्ली जीत का रथ जारी रख पाएगी?
यह मुकाबला विजय हजारे ट्रॉफी के ग्रुप चरण में दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यदि वे लगातार तीसरी जीत दर्ज करते हैं, तो उनकी नॉकआउट चरण की राह आसान हो जाएगी। लेकिन, उन्हें यह जीत अपने `सुपरमैन` के बिना हासिल करनी होगी।
ऋषभ पंत पर कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों का दोहरा दबाव होगा। उनकी गेंदबाजी इकाई को न केवल विकेट लेने होंगे, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सौराष्ट्र का स्कोर 250 के नीचे रहे। क्रिकेट विशेषज्ञ इस बात पर गौर कर रहे हैं कि क्या दिल्ली कोहली की कमी को झेलकर भी विजय हजारे ट्रॉफी में अपनी पकड़ बनाए रखती है या नहीं। यह सिर्फ मैच नहीं, यह दिल्ली के रिजर्व खिलाड़ियों की योग्यता का सख्त परीक्षण है।
