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Thailand Epic Story: टॉयलेट ब्रेक में पत्‍नी को भूल गया थाईलैंड का पति, वाइफ को 20 किमी पैदल करना पड़ा सफर

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बैंकॉक: थाइलैंड में एक ऐसी घटना हुई है जिसके बाद आपको समझ नहीं आएगा कि हंसे या फिर हैरान हों। यहां पर एक पति यही भूल गया कि वह कार में अपनी पत्‍नी के साथ रोड ट्रिप पर निकला था। उसकी इस गलती की वजह से पत्‍नी को करीब 20 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ गया। यह खबर सोशल मीडिया काफी वायरल हो रही है। एक जर्नलिस्‍ट की मदद से वह महिला अपने घर पहुंच सकी थी। सारे फसाद की जड़ वह टॉयलेट ब्रेक था जिसकी वजह से पति की याददाश्‍त थोड़ी देर के लिए चली गई थी।

निकले थे होमटाउन को
थाइलैंड के रहने वाले 55 साल के बूनटन चेनसू अपनी पत्‍नी 49 साल की अमनुय चाइमून के साथ 25 दिसंबर को अपने होमटाउन महासारा खाम प्रांत के लिए निकले थे। उनका मकसद नए साल की छुट्टियां घर पर बिताना था। दोनों काफी अच्‍छे से जा रहे थे कि अचानक बूनटन को टॉयलेट ब्रेक लेना पड़ गया। सड़क के किनारे उन्‍होंने अपनी कार तड़के तीन बजे रोकी और टॉयलेट ब्रेक पर रवाना हो गए।

कोई भी पब्लिक टॉयलेट न होने की वजह से पत्‍नी अमनूय को भी कार से बाहर निकलना पड़ा। वह पास के जंगल में चली गईं। जब पति लौटा तो उसे लगा ही नहीं कि उनकी पत्‍नी कार में नहीं हैं। वह कार लेकर आगे बढ़ गए। जब अमनूय वापस आईं तो उन्‍हें कार नजर ही नहीं आई और न ही पति का कुछ पता लगा।
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20 कॉल्‍स भी हो गईं बर्बाद
कुछ मिनट बाद ही उन्‍हें अहसास हो गया था कि उनके पति उन्‍हें छोड़कर चले गए हैं। उनका मोबाइल फोन भी कार में रह गया था। अंधेरा काफी था और वह काफी डरी हुई थीं। उन्‍हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्‍या किया जाए। लेकिन उन्‍होंने तय किया कि वह पैदल ही चलेंगी ताकि उन्‍हें कोई मदद मिल सके। करीब 20 किलोमीटर तक चलने के बाद वह सुबह पांच बजे काबिन बुरी जिले तक पहुंच सकी। यहां पर वह लोकल पुलिस से संपर्क कर सकी। उन्‍होंने पुलिस से अनुरोध किया कि वह उनके पति को कॉल करें। लेकिन उन्‍हें अपने पति का नंबर नहीं याद था। उन्‍होंने अपने मोबाइल पर कॉल किया और 20 बार कॉल करने के बाद भी किसी ने फोन नहीं उठाया।

घर पर पति से होगी बात
सुबह आठ बजे उनका संपर्क अपने पति से हो सका। पति को यह मालूम ही नहीं था कि उनकी पत्‍नी कार में नहीं हैं। वह यही सोचते रहे कि शायद वह पीछे की सीट पर सोने चली गई हैं। जब तक उन्‍हें कॉल किया गया चह 160 किलोमीटर तक ड्राइव कर चुके थे। जैसे ही उन्‍हें सबकुछ पता चला वह फौरन लौट आए। उन्‍होंने अपनी पत्‍नी से सॉरी कहा और उन्‍हें साथ चलने को कहा।

शादी को हुए 27 साल
दोनों की शादी को करीब 27 साल हो चुके हैं और दोनों 26 साल के एक बेटे के माता-पिता हैं। अमनूय का कहना है कि उनके पति बहुत कम ही किसी और से बात करते हैं और न ही उनके ज्‍यादा दोस्‍त हैं। वह काफी सीधे हैं और ऐसे में उन्‍हें भी नहीं मालूम कि यह कैसे हुआ। उन्‍होंने कहा कि घर पहुंचकर पति से बात करेंगी।



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Russia Nuclear War: यूक्रेन में छिड़ सकता परमाणु युद्ध… अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने क्‍यों दे दी चेतावनी ?

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वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर डरावनी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन में परमाणु युद्ध छिड़ सकता है। ट्रंप ने यह चेतावनी ऐसे समय पर दी है जब अमेरिका अपने 31 एम1 अब्राम टैंक को यूक्रेन को देने जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि इससे परमाणु युद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो जाएगा। अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद अब तक अरबों डॉलर के हथियार यूक्रेन को दे चुका है लेकिन दुनिया में सबसे शक्तिशाली कहे जाने वाले एम1 अब्राम टैंक को पहली बार देने जा रहा है।

अमेरिका यूक्रेन को 500 हथियारबंद वाहन दे रहा है जो 26 अरब डॉलर की सहायता से इतर है जिसका वादा बाइडन प्रशासन ने जेलेंस्‍की से एक साल पहले किया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया नेटवर्क ट्रूथ सोशल पर लिखे पोस्‍ट में कहा कि मेरा मानना है कि इससे परमाणु युद्ध छिड़ सकता है। ट्रंप ने कहा, ‘पहले टैंक आए, फिर परमाणु बम। इस पागलपन से भरे युद्ध को अब बंद करो। यह करना बहुत आसान है।’ इससे पहले यू्क्रेन के राष्‍ट्रपति जेलेंस्‍की ने दिसंबर महीने में अमेरिका की यात्रा की थी ताकि टैंक और अन्‍य हथियार मिल सकें।
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जर्मनी लेपर्ड-2 टैंक को यूक्रेन को देने जा रहा

जेलेंस्‍की का मानना है कि यूक्रेन की सेना सोवियत जमाने के टी-72 टैंक की वजह से संघर्ष कर रही है। यह ऐलान ऐसे समय पर हुआ है जब जर्मनी ने भी ऐलान किया है कि वह 14 लेपर्ड-2 टैंक को यूक्रेन को देने जा रहा है। इससे अब यह साफ हो गया है कि अन्‍य पश्चिमी देश भी जर्मनी का अनुसरण कर सकते हैं। इससे पहले जर्मनी और अमेरिका के बीच टैंक भेजने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद अमेरिका को झुकना पड़ा। पिछले साल मार्च में बाइडन ने कहा था कि वह यूक्रेन को आक्रामक हथियार नहीं देने जा रहे हैं क्‍योंकि इससे तीसरे विश्‍वयुद्ध का खतरा है।

बाइडन ने यह भी कहा था कि हम यूक्रेन में तीसरा विश्‍वयुद्ध नहीं लड़ने जा रहे हैं। अब ट्रंप भी बाइडन की चेतावनी को दोहरा रहे हैं। इस बीच यूक्रेन में रूसी सेना की ओर से की गयी ताजा गोलाबारी में यूक्रेन के कम से कम 10 नागरिकों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी। नए हताहतों में दक्षिणी शहर खेरसॉन में हमले में कम से कम दो नागरिकों की मौत होने की घटना शामिल है। खेरसॉन पर यूक्रेन की सेना ने नवंबर में कब्जा कर लिया था।
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यूक्रेन में मिसाइलों और ड्रोन से हमले तेज

इसके अलावा दोनेत्स्क प्रांत में भी दो लोगों की मौत होने की सूचना है। इसके अलावा रूसी सेना ने बृहस्पतिवार को यूक्रेन में मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गयी। रूसी सेना के इन हमलों के बाद अमेरिका और जर्मनी ने यूक्रेन की मदद के लिए उसे शक्तिशाली टैंक देने की घोषणा की है। इसके अलावा अन्य पश्चिमी देशों ने कहा कि वे भी यूक्रेन को शक्तिशाली टैंक की आपूर्ति करेंगे।



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Mirage 2000 IAF: भारत ने फ्रांस से क्‍यों खरीदे थे सेकेंड हैंड मिराज 2000 फाइटर जेट? जानें परमाणु योद्धा की सीक्रेट कहानी

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पेरिस: मिराज 2000 दसॉल्‍ट एविएशन की तरफ से तैयार वह फाइटर जेट जो आज भी फ्रांस की वायुसेना की यादों में जिंदा है। फ्रेंच मल्‍टीरोल, सिंगल इंजन वाले इस फाइटर जेट को सन् 1970 के दशक के अंत में कंपनी की तरफ से तब डिजाइन किया गया जब फ्रेंच वायुसेना ने मिराज III को रिटायर करने का मन बनाया। जून 2022 में फ्रांस ने इसे अलविदा कह दिया लेकिन भारतीय वायुसेना (IAF) आज भी इसे प्रयोग कर रही है। शनिवार को जब यह फाइटर जेट क्रैश हुआ तो कई तरह के सवाल सबके दिमाग में उठने लगे।

एयरफोर्स ने नाम बदलकर किया वज्र

इस फाइटर जेट ने अपनी सबसे पहली उड़ान सन् 1978 में भरी थी और साल 1984 में इसे फ्रेंच एयरफोर्स में शामिल किया गया। साल 1985 में इसे भारतीय वायुसेना में जगह मिली। आईएएफ ने इसका नाम बदलकर वज्र कर दिया था। मिराज 2000 को भारतीय वायुसेना का सबसे खतरनाक फाइटर जेट माना जाता है। भारत ने शुरुआत में इस सिंगल सीटर वाले 36 जेट्स का ऑर्डर फ्रांस को दिया था। इसके बाद साल 1982 में ट्विन सीटर मिराज का ऑर्डर फ्रांस को मिला।

पाकिस्‍तान और अमेरिका को जवाब

पाकिस्‍तान और अमेरिका को जवाब

फ्रांस के साथ इस जेट की डील के साथ ही भारत ने पाकिस्‍तान और अमेरिका को जवाब दिया था। पाकिस्‍तान ने उस समय अमेरिका के साथ एफ-16 की डील की थी जिसे लॉकहीड मार्टिन ने डेवलप किया था। साल 1999 में जब कारगिल की जंग हुई तो इसने युद्ध को भारत की तरफ मोड़ दिया। साल 2004 में फ्रांस को भारत सरकार की तरफ से 50 अतिरिक्‍त जेट्स का ऑर्डर दिया गया। आज मिराज अपग्रेडेशन के बाद दुश्‍मन के अड्डे पर परमाणु बम तक गिरा सकता है।

कुवैत से लेकर सऊदी अरब तक जलवा

कुवैत से लेकर सऊदी अरब तक जलवा

भारत के अलावा फ्रांस, मिस्र, यूएई, पेरू, ताइवान ग्रीस और ब्राजील की सेनाएं इसका प्रयोग कर रही हैं। मिराज का जलवा दुनिया ने सन् 1990-1991 में ऑपरेशन डेजर्ट शील्‍ड और डेजर्ट स्‍ट्रॉम में देखा। उस समय मिराज को कई हमलों के लिए तो प्रयोग किया ही गया साथ ही साथ इसने कुवैत और दक्षिणी इराक में सफल रेकी की। इसके बाद मिराज ने सऊदी अरब में एयर पेट्रोलिंग को अंजाम दिया।

नाटो के एयर ऑपरेशन में शामिल

नाटो के एयर ऑपरेशन में शामिल

इसके बाद मिराज को फारस की खाड़ी में नो-फ्लाई जोन में ऑपरेशन सदर्न वॉच में सेनाओं को मजबूत किया। मिराज ने बाल्‍कन संघर्ष में भी हिस्‍सा लिया था। मिराज ने बोसनिया और हर्जेगोविना में भी एयर पेट्रोलिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया। नाटो के बाल्टिक एयर पुलिसिंग ऑपरेशन में भी मिराज को तीन बार लिथुनिया में तैनात किया गया था।

एफ-16 से बेहतर

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फरवरी 2019 में बालाकोट एयरस्‍ट्राइक के बाद जो लोग मिराज की क्षमताओं पर सवाल उठा रहे थे, उन्‍हें करारा जवाब मिल चुका था। मिराज को पाकिस्‍तान के पास मौजूद एफ-16 फाइटिंग फाल्‍कन से बेहतर करार दिया जाने लगा था। मिराज ऊंचाई पर 2336 किलोमीटर प्रति घंटे की स्‍पीड से उड़ सकता है। जबकि एफ-16 2000 किमी प्रति घंटे की ही स्‍पीड हासिल कर सकता है।

एफ-16 से ज्‍यादा तबाही

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एक मिनट में मिराज 60,000 फीट प्रति मिनट की क्‍लाइम्बिंग स्‍पीड ले सकता है जबकि एफ-16 का आंकड़ा 50,000 फीट प्रति मिनट ही है। एफ-16 1570 किमी के दायरे में 907 किलोग्राम के दो बमों को ड्रॉप कर सकता है जबकि मिराज 1475 किमी के दायरे में मौजूद दुश्‍मन पर 250 किलोग्राम वाले चार बम गिराने की ताकत रखता है।

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मिराज की कहानी



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“टिकटॉक” से अमेरिका की सुरक्षा में सेंध लगा रहा था चीन, भारत की तर्ज पर ह्वाइट हाउस भी लगाएगा बैन

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Image Source : AP
टिकटॉक (फाइल)

America Will Ban Tik Tok: भारत के बाद अब अमेरिका भी चीन को बड़ा झटका देने जा रहा है। इससे चीन परेशान हो उठा है। दरअसल भारत की तर्ज पर जो बाइडन भी अमेरिका में टिकटॉक को बैन करने की तैयारी में है। अमेरिका ने चीनी टिकटॉक को देश की सुरक्षा के लिए खतरा माना है। इसलिए अब इसे प्रतिबंधित करने का सख्त कदम उठाने का फैसला किया गया है। अमेरिका के इस निर्णय ने चीन की हवा खराब कर दी है।

अमेरिका ने चीनी शॉर्ट वीडियो-मेकिंग ऐप टिकटॉक को राष्ट्रव्यापी तौर पर प्रतिबंधित करने की योजना बनाई। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी अगले महीने टिकटॉक के प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से ब्लॉक करने के लिए एक बिल पर वोट करेगी। रिपोर्ट के अनुसार यह बिल व्हाइट हाउस को बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को लेकर टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने की कानूनी शक्ति देगा। पिछले महीने यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा जारी किए गए मोबाइल उपकरणों पर चीनी शॉर्ट-फॉर्म वीडियो मेकिंग ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सदन ने कर्मचारियों को सभी मोबाइल फोन से टिकटॉक हटाने का आदेश दिया।

अमेरिका ने टिकटॉक को माना सुरक्षा के लिए खतरा


अमेरिका ने चीनी एप टिकटॉक को देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना है। आपको बता दें कि अमेरिका के 19 राज्यों में स्थानीय प्रशासन ने पहले ही सरकार द्वारा जारी किए गए उपकरणों में टिकटॉक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। टिकटॉक वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को हल करने के लिए अमेरिकी न्याय विभाग के साथ एक समझौते पर बातचीत कर रहा है। पहले की रिपोर्टों में दावा किया गया था कि टिकटॉक की मूल कंपनी चीन स्थित बाइटडांस ने कम से कम दो अमेरिकी पत्रकारों और उनसे जुड़े अन्य लोगों की ‘छोटी संख्या’ के डेटा तक पहुंच बनाई।

अमेरिकी व्यक्तियों को ट्रैक करने के लिए हुआ टिकटॉक का इस्तेमाल

टिकटॉक पर कई अमेरिकी व्यक्तियों को ट्रैक करने का भी आरोप है। हालांकि पिछले साल अक्टूबर में टिकटॉक ने इस बात से इनकार किया था कि उसने कुछ अमेरिकी व्यक्तियों को ट्रैक करने के लिए विशिष्ट स्थान डेटा का उपयोग किया। फोर्ब्स मैग्जीन की भी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि टिकटॉक ऐसी निगरानी की योजना बना रहा है। जून में टिकटॉक ने कहा था कि उसने ओरेकल के माध्यम से अमेरिकी उपयोगकर्ता डेटा को रूट करना शुरू कर दिया, ताकि चीन स्थित कर्मचारी अमेरिकी जानकारी तक पहुंच सकें। इससे पहले भारत वर्ष 2020 में टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा चुका है।

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