Connect with us

International

Queen Elizabeth II Funeral: ताबूत की अंतिम यात्रा के पहले जुटी लाखों की भीड़, कई लोगों ने दिया श्रद्धांजलि

Published

on


Image Source : AP
Queen Elizabeth II Funeral

Highlights

  • द मॉल पर और टेम्स नदी के किनारे हजारों लोग जुट रहे
  • मंगलवार रात को भी हजारों लोग इंतजार में बैठे रहे
  • घुड़सवारों को अंतिम संस्कार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है

Queen Elizabeth II Funeral: ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ II का निधन हो गया। वह काफी लंबे समय से बीमार चल रही थी। 96 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। महारानी एलिजाबेथ II सबसे लंबे समय शासन करने वाले शासक बनी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के बाद उनके बेटे चार्ल्स को नया राजा बनाया गया। चार्ल्स की लगभग उम्र 73 साल हो गई है। महारानी एलिजाबेथ II बाल्मोरल में समर की छुट्टियां बिताने के लिए आई थी इसी जगह पर उनकी निधन हुई।

बकिंघम पैलेस बुधवार को महारानी ऐलिजाबेथ को अंतिम विदाई देगा। महारानी के प्रशासनिक मुख्यालय और शाही आवास बकिंघम पैलेस से दिवंगत महारानी के ताबूत को तोप गाड़ी पर रखकर संसद भवन ले जाया जाएगा जहां महारानी की पार्थिव देह चार दिन तक रखी जाएगी। इस तोप गाड़ी को घोड़ें खींचेंगे। महारानी के आधिकारिक लंदन आवास बकिंघम पैलेस से संसद के ऐतिहासिक वेस्टमिंस्टर हॉल तक की ताबूत यात्रा के लिए महल के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा है। महाराजा चार्ल्स तृतीय और शाही परिवार के अन्य सदस्य ताबूत गाड़ी के पीछे चलेंगे। 

देशभर में है शोक की लहर 


ताबूत यात्रा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही बकिंघम पैलेस के बाहर द मॉल पर और टेम्स नदी के किनारे हजारों लोग जुट रहे। यह भीड़ महारानी के प्रति सम्मान और उनके निधन पर देशभर में फैली शोक की लहर की ताजा झलक है। महारानी का बृहस्पतिवार को उनके बाल्मोरल स्थित ग्रीष्मकालीन आवास पर निधन हो गया। वह 96 वर्ष की थीं। महारानी के अंतिम संस्कार से जुड़ी कुछ जिम्मेदारियां संभाल रहे मेजर जनरल क्रिस्टोफर घीका ने कहा कि यह बहुत दुखद दिन है लेकिन यह महारानी के लिए हमारा कर्तव्य अदा करने का आखिरी मौका है वहीं महाराजा के लिए कुछ करने का हमारा पहला अवसर है। हमारे लिए यह बहुत सम्मान की बात है। ताबूत यात्रा में शामिल होने वाले सैनिक महारानी के निधन के बाद से ही इसके लिए तैयारी कर रहे थे।

ध्वज में लिपटा था ताबूत 

इसी तरह महाराजा की ट्रूप रॉयल हॉर्स आर्टिलरी के घुड़सवारों को अंतिम संस्कार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है जिनमें रोते बिलखते शोकग्रस्त लोगों को संभालना और साथ ही ताबूत यात्रा के गुजरने के दौरान श्रद्धांजलि स्वरूप फेंके जाने वाले फूलों आदि को संभालना भी शामिल है। रास्तों में अवरोधकों के पीछे जमा लोग फोल्डिंग कुर्सियों पर बैठे हैं। उनके पास छाते हैं और कुछ के हाथों में कॉफी के मग हैं। मंगलवार रात को भी हजारों लोग इंतजार में बैठे रहे।

महारानी के पार्थिव शरीर को लाने वाले वाहन के भीतर लाइटें जल रही थीं और उनका ध्वज में लिपटा ताबूत बाहर से देखने पर नजर आ रहा था। टैक्सी ड्राइवर ज्यौफ कोलगान छुट्टी लेकर अपने नन्हें बच्चे को गोदी में लिए महारानी की ताबूत यात्रा को देखने के लिए आए थे । उन्होंने कहा कि आपको पता होता है कि एक दिन ऐसा होना ही है लेकिन जब होता है तो आप यकीन नहीं कर पाते।

Latest World News





Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

International

भारत का प्रवेश द्वार बनेगा ईरान, रूस संग मिलाया हाथ, एशिया में पुतिन का है बड़ा प्‍लान

Published

on

By


तेहरान: भारत और रूस की दोस्‍ती को और मजबूत करने में ईरान बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। ईरान और रूस के बीच 12 मिलियन टन रूसी सामान के ट्रांजिट के लिए सहमति बनी है। यह रूसी सामान ईरान के इंटनैशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के रास्‍ते भारत जाएगा। यूक्रेन युद्ध के बीच भारत और रूस दोनों ही व्‍यापार को बढ़ाना चाहते थे और इसमें यह कॉरिडोर गेम चेंजर साबित हो रहा है। ईरानी रेलवे के प्रमुख मियाद सालेही की मास्‍को यात्रा के दौरान रूसी रेलवे के प्रमुख से मुलाकात में ट्रेड को बढ़ाने पर सहमति बनी।

इससे पहले दोनों देशों के बीच 10 मिलियन टन सामान का समझौता हुआ था। ईरान भारत के लिए रूसी सामानों का प्रवेश द्वार बनकर उभर रहा है। मास्‍को से मुंबई के बीच कॉरिडोर में ईरान बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह इंटनैशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर अभी भी विकसित हो रहा है। रूसी अधिकारियों का अनुमान है कि इस कॉर‍िडोर की कुल क्षमता 15.4 मिलियन टन तक पहुंच सकती है। यही नहीं वे इसे डबल करके सालाना 35 मिल‍ियन टन तक पहुंचाने का इरादा रखते हैं।

रूस से ईरान के रास्‍ते चीन तक सामान भेजने का प्‍लान
यह डबल करने का काम नए रास्‍तों को शुरू करने और पूरब से पश्चिम में पश्चिम एशिया, दक्षिण पूर्वी एशिया और एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों को भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों को 35 मिलियन टन ट्रांजिट क्षमता पहुंचने में संदेह है। रूसी अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया है कि अगर ईरान के बंदर अब्‍बास के रास्‍ते रूस के सेंटपीटर्सबर्ग को चीन से जोड़ दिया जाए तो व्‍लादिवोस्‍तोक-येकतेरिनबर्ग-मास्‍को के बीच रेल मार्ग पर दबाव कम हो सकता है।

रूसी अधिकारियों ने कहा कि रेलमार्ग से चीन और रूस के बीच सबसे ज्‍यादा सामान आता जाता है। इस रास्‍ते से चीन को सामान भेजने में बहुत ज्‍यादा समय भी नहीं लगेगा। रेलमार्ग से जहां 40 से 45 दिन लगता है वहीं बंदरअब्‍बास के रास्‍ते इसमें 49 से 59 दिनों का समय लगेगा। हालांकि फायदा इससे यह होगा कि रेलमार्ग में आने वाली परेशानियां कम हो जाएंगी। विश्‍लेषकों का कहना है कि इस ट्रांजिट मार्ग से मास्‍को-मुंबई कॉरिडोर स्‍पष्‍ट हो गया है। बड़ी संख्‍या में कंपनियां इस कॉरिडोर की संभावना को तलाश करने के लिए प्रयास कर रही हैं। उन्‍होंने कहा कि अगर आधा प्‍लान भी लागू हो जाता है तो भी यह बहुत बड़ी सफलता होगा।



Source link

Continue Reading

International

अंतरिक्ष में सूर्य खेल रहा ‘लुका छुपी’, सैटेलाइट को दिखाई दिया अद्भुत सूर्य ग्रहण

Published

on

By


वॉशिंगटन: धरती पर दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण के बारे में आपने खूब सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी अंतरिक्ष में सूर्य ग्रहण के बारे में सुना है। दरअसल सूर्य ग्रहण तब लगता है जब सूर्य के बीच में कोई चीज आ जाए। अंतरिक्ष में कुछ ऐसा ही नजारा एक सैटेलाइट ने देखा है। ये ग्रहण तब दिखा है जब सूर्य को देख रहे सैटेलाइट के आगे से चंद्रमा गुजरा। इसके कारण सूर्य की धधकती सतह का दिखना बंद हो गया। सैटेलाइट की नजर से ये एक ग्रहण की तरह था।

GOES उपग्रह और उसके सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजर उपकरण (SUVI) ने सूर्य के गर्म बाहरी वातावरण या कोरोना का अवलोकन करते हुए इस शानदार नजारे को देखा। हालांकि ये नजारा सिर्फ अंतरिक्ष में दिखाई दिया है। सैटेलाइट ने कई घंटों तक इस नजारे को देखा है। ये सैटेलाइट सूर्य से निकलने वाली ज्वालाओं के उत्सर्जन का अवलोकन करता है। यही सौर उत्सर्जन पृथ्वी पर ब्लैकआउट का कारण बन जाते हैं। अर्थ स्काई की रिपोर्ट में कहा गया, ‘कोरोनल होल से निकलने वाली सौर हवाओं के प्रभाव के कारण मामूली स्तर के भू-चुंबकीय तूफान को अलग-अलग अवधि में देख सकते हैं।’

सौर तूफान की हो सकती है जानकारी
भारतीय समय के मुताबिक शाम 4 बजे से 5.30 बजे तक ये सूर्य ग्रहण दिखाई दिया। ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की गई है, जिसमें दिख रहा है कि चंद्रमा सूर्य के हिस्से को अवरुद्ध कर रहा है। लोगों ने कहा, ‘ये नजारा ऐसा लग रहा है जैसे चांद सूर्य को काट रहा है।’ सौर उत्सर्जन के अवलोकन से सौर ज्वालाओं, कोरोनल मास इजेक्शन (CME) और भू-अंतरिक्ष पर्यावरण को प्रभावित करने वाली अन्य घटनाओं के बारे में शीघ्र पता लगाया जा सकता है।

लगभग 15 घंटे पहले मिल जाती है चेतावनी
SUVI लगभग 15 घंटे पहले पृथ्वी की ओर आने वाले सौर तूफान की चेतावनी देता है। CME सूरज के कोरोना से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के बड़े उत्सर्जन हैं। इनसे अरबों टन सामग्री बाहर निकल सकती है। भले ही यह ग्रहण पृथ्वी पर नहीं दिखा था, लेकिन अमेरिका में लाल रंग का चांद जरूर देखने को मिला। अमेरिका में 8 नवंबर को लाल रंग के चांद का आश्चर्यजनक नजारा देखने को मिला। इसे ब्लड मून कहते हैं।



Source link

Continue Reading

International

पाकिस्‍तान में गर्त में पहुंची आर्मी की प्रतिष्‍ठा, जाते-जाते बाजवा ने बताया सम्‍मान बढ़ाने का फॉर्मूला

Published

on

By


रावलपिंडी: पाकिस्तान के निवर्तमान थल सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल कमर जावेद बाजवा का मानना है कि सेना के ‘अराजनीतिक’ रहने का फैसला उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाने में मदद करेगा। जियो न्यूज के एक विशेष साक्षात्कार में जनरल बाजवा के हवाले से कहा, ‘राष्ट्रीय निर्णय लेने में पाकिस्तानी सेना हमेशा एक प्रमुख खिलाड़ी रही है। देश की राजनीति में अपनी ऐतिहासिक भूमिका के कारण सेना को जनता और राजनेताओं की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।’ जनरल मंगलवार को जनरल असीम मुनीर को सेना की कमान सौंपेंगे, जिन्हें पिछले हफ्ते सरकार ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किया था। जनरल बाजवा 29 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। वह पहले भी कह चुके हैं कि सेना को राजनीतिक मसलों से दूर रहना चाहिए।

आलोचना की बड़ी वजह
जनरल बाजवा ने कहा, ‘हालांकि यह निर्णय समाज के एक वर्ग द्वारा नकारात्मक रूप से देखा जा रहा है और व्यक्तिगत आलोचना का कारण बना है, लेकिन यह लोकतांत्रिक संस्कृति को फिर से मजबूत करने में मदद करेगा। राज्य के अंगों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शन करने में सहायता करेगा। इन सबसे ऊपर यह निर्णय सेना की प्रतिष्ठा को बढ़ाने में मदद करेगा दीर्घावधि।’ निवर्तमान सेना प्रमुख ने कहा कि पूरे देश के इतिहास में सेना ने पाकिस्तानी राष्ट्र का बेजोड़ सम्मान और विश्वास हासिल किया है। ‘भारतीय सेना से तुलना कर पाकिस्तान को आईना दिखा गए जनरल बाजवा, इमरान को दी नसीहत
जनता का समर्थन
उन्‍होंने कहा, ‘पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास में सेना की सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका को हमेशा जनता का अटूट समर्थन मिला है। मेरा मानना है कि जब सेना को राजनीतिक मामलों में शामिल देखा जाता है तो सशस्त्र बलों के प्रति जनता का समर्थन और आत्मीयता कम हो जाती है। इसलिए राजनीति की अनिश्चितता से पाकिस्तानी सेना को बचाना बुद्धिमानी है।’ उन्होंने आश्वासन दिया कि बड़े पैमाने पर प्रचार के माध्यम से सशस्त्र बलों की कुछ आलोचना और अनुचित निंदा के बावजूद और झूठे आख्यानों को सावधानीपूर्वक तैयार किया गया, संस्था अपनी गैर-राजनीतिक भूमिका के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

पहले भी कही ऐसी बात
जनरल बाजवा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल कि दिनों में सेना ने कहा है कि वह राजनीतिक मसलों से दूर रहेगी। पाकिस्‍तान की सेना पर हमेशा किसी न किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करने के आरोप लगते रहते हैं। जनरल बाजवा ने 23 नवंबर को अपने आखिरी विदाई भाषण में भी कुछ इसी तरह की बात कही थी। उन्‍होंने कहा कि सेना ने जिस तरह से पिछले 70 सालों से देश की राजनीति में ‘असंवैधानिक’ हस्‍तक्षेप किया है, उसकी वजह से उसे खासी आलोचना का सामना करना पड़ा है।



Source link

Continue Reading