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Prostatitis: प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन के कारण लक्षण और इलाज | News & Features Network

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Prostatitis: वृद्ध पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रन्थि के बढ़ जाने के कारण मूत्र आना रुक जाता है । मूत्राशय मूत्र से भर जाता है जिसके फलस्वरूप मूत्र वेग के समय अत्यधिक दर्द होता है । रोगी व्याकुल होकर तिलमिला उठता है।

कारण :

यह रोग सुजाक के आक्रमण से हो जाता है। कभी-कभी पथरी की रगड़ और खराश एवं गुदा के रोगों के कारण भी हो जाता है। इस रोग का कारण ‘‘स्ट्रेप्टो कोक्कस’ नामक कीटाणु हैं। टान्सिल, मसूढ़ों या शरीर के किसी गह्वर (Cavity) के इन्फेक्शन व सड़ांध रक्त में मिल जाने पर भी यह रोग हो जाया करता है।

लक्षण :

✦तीव्र (Acute) रोग में रोगी को ज्वर भी हो जाया करता है।
✦गुदा और इन्द्रिय के मध्य की सींवन में भारीपन, बार-बार मूत्र आना।
✦आरम्भ में मूत्र का रुकना तथा मूत्र शुरू हो जाने पर खुलकर आना। (सूजाक होने पर मूत्र बड़ी कठिनाई से आया करता है)
✦गुदा में ऊगली डालकर परीक्षण करने से पौरुष ग्रन्थि बढ़ी हुई और पिलपिली सी प्रतीत होती है, जिसमें दर्द भी होता है,
✦मूत्र करते समय अत्यधिक दर्द एवं जलन,
✦रोगी का भय के मारे पाखाना न कर सकना आदि लक्षण हुआ करते हैं।
✦मूत्र में इस ग्रन्थि का तरल भी आने लगता है।
✦समय पर चिकित्सा न करने से सूजी हुई ग्रन्थि में पूय उत्पन्न होकर फोड़ा बन जाता है।
✦प्रोस्टेट ग्रन्थि बड़ी हो चुकी है तो वह समतल और लचीली प्रतीत होगी, परन्तु कैंसर हो जाने पर यह ग्रन्थि कठोर होगी और उसमें लचक नहीं होगी।
✦इसमें फोड़ा बन जाने पर हर समय ज्वर रहेगा तथा मूत्र-त्याग करते समय जिस रोगी को दर्द, मूत्र मार्ग में टीस प्रतीत हो, उसके मूत्राशय में पथरी का सन्देह हो सकता है।
✦यदि मूत्र में पीप आने लग जाये तो प्रोस्टेट ग्लैन्ड में फोड़ा (ProstaticAbscess) का प्रमाण है।
✦रोग पुराना हो जाने पर मूत्र में सूत के रेशों (तन्तुओं) के सदृश पदार्थ आने लगता है और बाकी लक्षण भी पाये जाते हैं।

प्रोस्टेट में परहेज :

केक, पेस्ट्री, पनीर, पुलाव, पराठे, टमाटर, सिरका, नीबू, चाय और तमाम गर्म, तेज, उत्तेजक, कब्ज करने वाले, गरम मसाले युक्त भोजन रोगी को बिल्कुल न दें । तीव्र रोग में रोगी को केवल जौ का पानी (बार्ले-वाटर) माल्टा या मौसमी और सन्तरे का रस ही पिलायें। शराब बिल्कुल न पिलायें तथा मैथुन से परहेज करें व भूलकर भी खड़े होकर न पानी पीये न ही मूत्रत्याग

बढ़ते प्रोस्टेट के लक्षणों को कम करने के लिए अपने खानपान में निम्नलिखित बदलाव करें –

शाम के वक़्त ज़्यादा पानी ना पिए – बेहतर यह है कि आप सोने के दो-तीन घंटे पहले कुछ भी न पिए | इससे आपको रात में शौचाल्य कम जाना परेगा |

रोज़ सेहतमंद भोजन खाएं – ज़्यादा तेल वाले खाने से दूर रहे | वह मोटापा का प्रमुख कारण है | मोटापे से प्रोस्टेट का आकार और भी बढ़ सकता है | रोज़ ताज़ी हरी सब्ज़ियों का सेवन करें | और तो और लाल मांस जैसे की गोश्त और सुअर के गोश्त से परहेज़ करें |

कैफ़ीन और शराब से दूर रहें – यह चीज़ें ज़्यादा पीने से पेशाब ज़्यादा बनता है | इससे आपके लक्षण बद से बत्तर हो सकते है |

पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) का बढ जाना ,सुजन Prostatitis का इलाज :

1- रोगी को चलने-फिरने से रोक दें। बिस्तर पर लिटाये रखें। थोड़े गर्म पानी को टब में डालकर रोगी को इस प्रकार बिठायें कि उसकी गुदा, इन्द्रिय और कुल्हे गर्म पानी में रहें, बाकी सारी शरीर पानी से बाहर रहे। ऐसा करना दर्द व सूजन में लाभकारी है।

2- गर्म पानी में पोस्ट के डोडा डालें और उबालकर गुदा, सवन और इन्द्रिय के ऊपरी भाग की गर्म-गर्म टकोर और सिंकाई करें। अलसी की गर्म-गर्म पुल्टिस की गुदा र्सीवन पर टकोर करना और बाँधना भी लाभकारी है।

4-गुदा और अन्डकोषों के बीच की सीवन पर 5-6 जोंके लगाकर रक्त निकलना लाभकारी है।

5- पीली कौड़ी या (मुक्ता-शुक्ति) जलाकर 1-2 ग्राम जल के साथ खिलायें। पेट में वायु अधिक पैदा होने पर लवण भास्कर या हिंग्वाष्टक चूर्ण 2-3 ग्राम खिलायें ।

6- पुरस्थ वृद्धि हर वटी, शोभांजन की जड़ की छाल, शोभान्जन की गोंद, नीम पत्र, सिन्दुआर पत्र, श्वेत पुनर्नवा मूल, प्रत्येक 100 ग्राम तथा श्वेत फिटकरी भस्म 25 ग्राम एवं कन्टकारी भस्म 10 ग्राम लें । सभी को कूट पीस व कपड़छन कर त्रिफला के काढ़े से संयुक्त करके 250 मि.ग्रा. की गोलियाँ बनाकर सुरक्षित रखलें । यह 1-2 गोली दिन में 3 बार त्रिफला के काढ़ा से सेवन करें।

7-सहजन की जड़ की ताजी अन्तर छाल, श्वेत पनर्नवा मल, नीम की अन्तर छाल और रोहितक छाल–प्रत्येक समभाग लेकर त्रिफला क्वाथ के साथ सूक्ष्म पीसकर लेप बनालें । इस लेप को शिश्नमूल और समस्त शिश्न पर मोटा लेप दिन में 2-3 बार लगाया करें । लेप काफी देर तक लगाये रखें

8-श्वेत पुनर्नवा सर्वांग तथा नीम के ताजे पत्ते (बिना कीड़े खाये) समभाग लेकर एक बड़ी कड़ाही में डालकर उसमें इतना पानी डाल लें कि पुनर्नवा, नीम आदि डूब जाए। फिर खूब उबलने पर इसकी भाप से शिश्न पुरस्थ प्रदेश को दिन में 3-4 बार 2-3 दिन तक सेकें । अति लाभप्रद योग है।

9-3 4 खजूर या छुहाड़ा एक कप पानी में 5 6 घण्टे भिगोकर बीज निकालकर इसी पानी में एक कप दूध मिलाकर खजूर या छुहाड़े को डालकर पकाये एक कप रहने तक व पहले छुहाड़ा या खजूर खाएं व दूध पीये नियमित्त 3 से 6 माह व अपनी तकलीफ के अनुसार

10- सिनुआर : सिनुआर के पत्तो का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम खायें। साथ ही सिनुआर, करंज, नीम और धतूरे के पत्तों को पीसकर, हांडी में गरम कर, मूत्राशय पर लेप करें।

*सुबह शाम चौथाई कप गौमुत्र का सेवन जरूर करें

हुरहुर सफेद : सफेद फूलों वाली हुरहुर के पत्तों को पीसकर पौरुष ग्रंथि पर ऊपर से लेप करें।

गोरखमुण्डी : गोरखमुण्डी के पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में खाने से गर्मी के रोग दूर हो जाते हैं।

गुग्गुल : गुग्गुल लगभग आधे से एक ग्राम सुबह-शाम गुड़ के साथ खाने से लाभ होता है।

मुनियारा : मुनियारा के जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम खाने से पौरुष ग्रंथि की सूजन दूर होती है।

नागदन्ती : 5 ग्राम नागदन्ती की जड़ की छाल को सिनुआर के पत्ते का रस और करंज के साथ सुबह-शाम खाने से लाभ होता है।

हुरहुर पीला : पीले हुरहुर के पत्तो को पीसकर नाभि के नीचे लगाने से या बांधने से लाभ होता है।

राई : राई को नाभि के नीचे पेडु पर पीसकर लेप करने से पौरुष ग्रंथि की सूजन दूर हो जाती है।

भाई राजीव दीक्षित जी के ज्ञान से ज्ञानित व प्रोत्साहित हो निःस्वार्थ स्वस्थसमृद्ध परिवार निर्माण के पहल प्रयास में आप सभी के सहयोग आशीर्वाद के लिए सभी को दिल से धन्यवाद

निरोगी रहने हेतु महामन्त्र

मन्त्र 1 :-

• भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें

• ‎रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें

• ‎विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)

• ‎वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)

• ‎एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)

• ‎मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें

• ‎भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें

मन्त्र 2 :-

• पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)

• ‎भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)

• ‎सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये

• ‎ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें

• ‎पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये

• ‎बार बार भोजन न करें आर्थत एक भोजन पूर्णतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें

उस भोजन को ग्रहण कदापि न करें जिसे बनते हुए सूर्य प्रकाश न मिला हो अर्थात (कुकर का, फ्रीज़ का रखा व माइक्रोवेव का बना हो)

भाई राजीव दीक्षित जी के सपने स्वस्थ समृद्ध स्वदेशी स्वावलंबी स्वाभिमानी परिवार समाज भारत राष्ट्र के निर्माण में एक पहल आप सब भी अपने अपने जीवन मे भाई राजीव दीक्षित जी के व्यख्यानों को अवश्य सुनें व यथसम्भव प्रचार प्रसार करें



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डायबिटीज में पिएं दालचीनी की चाय, इंसुलिन बढ़ाने के साथ कई लक्षणों को कम करने में है मददगार

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Dalchini_ki_chai

डायबिटीज में दूध की चाय नुकसानदेह मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी कौन सी चाय है जिसे हम डायबिटीज में पी सकते हैं। ऐसे में दालचीनी की चाय आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। जी हां, दालचीनी की चाय (cinnamon tea good for diabetes in hindi) फास्टिंग ब्लड शुगर को कम करने  में मदद कर सकती है। ये शुगर स्पाइक्स को रोकने और शरीर में इसके असर को कम करने में भी कारगर हो सकती है। साथ ही ये डायबिटीज में होने वाली कई समस्याओं को कम करने में भी कारगर है। कैसे, जानते हैं।

डायबिटीज में दालचीनी की चाय-Cinnamon tea in diabetes

डायबिटीज में दालचीनी की चाय आपकी कई समस्याओं को कम करने वाला हो सकती है। दरअसल, दालचीनी (Cinnamon) लो ग्लाइसेमिक हर्ब है जो कि शरीर में इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ाती है और शुगर स्पाइक को कम करने में मददगार है। ये दालचीनी आपके पेंनक्रियाज के काम काज को भी तेज करती है और शुगर मेटाबोलिज्म में मदद करती है। इसलिए डायबिटीज में दालचीनी की चाय लाभदायक हो सकती है।

 सर्दियों में गुलाबी त्वचा का राज छिपा है अनार और दही में, जानिए इसके इस्तेमाल से जुड़ी बातें

डायबिटीज में दालचीनी की चाय पीने के फायदे- cinnamon tea benefits for diabetes

1. शुगर कंट्रोलव करने में मददगार

डायबिटीज में दालचीनी की चाय का सेवन शुगर कम करने में मदद करती है। ये इंसुलिन के प्रोडक्शन के साथ बॉडी को शुगर रेगुलेट करने में मदद करती है। इससे फास्टिंग ब्लड शुगर कम रखने में मदद मिलती है। 

2. मेटाबोलिज ठीक रखती है्म सही रखत 

मेटाबोलिज्म ठीक करने में दालचीनी की चाय काफी तेजी से मदद करती है। ये डाइजेस्टिव एंजाइम्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा देती है जिससे मेटाबोलिक रेट बढ़ता है, मोटापा नहीं होता, कब्ज नहीं होती और शुगर मैनेज रहता है। 

भीगे चने का पानी पीने के फायदे हैं कई, पैरों में अकड़न और कब्ज जैसी समस्याओं में है मददगार

3.  न्यूरोपैथी से बचाव

डायबिटीज के मरीजों को अक्सर न्यूरोपैथी की समस्या हो जाती है। ऐसे में दालचीनी का सेवन नसों को हेल्दी रखने और डायबिटीज न्यूरोपैथी को कम करने में मदद करती है। इसलिए अगर आप डायबिटीज न्यूरोपैथी की समस्या से बचना चाहते हैं तो दालचीनी की चाय आपके लिए फायदेमंद है।

ऐसे बनाएं दालचीनी की चाय

दालचीनी की चाय आप दो तरीके से बना सकते हैं। पहले में आप इसे गर्म पानी में उबाल कर और नींबू की चाय की तरह बना कर पी सकते हैं। दूसरा आप दूध वाली चाय में भी दालचीनी शामिल कर सकते हैं। दोनों, ही चाय आपके लिए फायदेमंद होगी। 

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

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Hair care: बालों के लिए भी फायदेमंद है कद्दू के बीज, ऐसे करें इस्तेमाल

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Healthy Hair Tips: कद्दू के बीजों में कई पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो सेहत के साथ-साथ बालों के लिए भी किसी चमत्कारिक फायदे से कम नहीं होते। इनके सीड्स में क्यूक्रबिटासिन एमिनो एसिड पाया जाता है, जो बालों को घना और मजबूत बनाने में हमारी मदद करते हैं। यही नहीं कद्दू के बीजों में विटामिन ई और विटामिन सी उच्च मात्रा में मौजूद होते हैं, जो बालों को पोषण देने में और इनके तेजी से विकास करने में सहायता करते हैं। अगर आप कद्दू इस्तेमाल करने के बाद इसके बीजों को फेंक देते हैं तो आप इनके फायदों के बारे में जानकर कभी भी इनको फेंकना पसंद नहीं करेंगें।

कद्दू के बीजों से बनाएं शानदार हेयर मास्क

जो लोग ऑइली स्कैल्प से परेशान होते हैं, उनके लिए यह बेस्ट तरीका है। ऑइलीनेस को दूर करने के लिए आप घर पर ही इस रेसिपी को तैयार कर सकते हैं। इसे बनाने के लिए सबसे पहले कद्दू के बीजों को साफ करके इसे मिक्सी में डालकर स्मूथ पेस्ट बना लें और इसमें कुछ बूंदे नींबू के रस की मिक्स करें। इस मिश्रण को अपने बालों में 15 मिनट तक लगाएं। इसके बाद अपने बालों को नार्मल पानी से धो लें। 

Hair Dandruff: सर्दी में डैंड्रफ की समस्या से हैं परेशान? ये 5 घरेलू नुस्खे दूर करेंगे आपकी टेंशन

पंपकिन सीड्स हेयर पैक

अगर आप झड़ते बालों से परेशान हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है। इसे बनाने के लिए दो चम्मच कद्दू के बीजों को मिक्सी में डालकर पीस लीजिए और पेस्ट में दही व शहद को भी मिक्स करें और तीनों चीजों को आपस में अच्छी तरीके से फेंटें। अब इस तैयार मिश्रण को आपको अपने बालों में अप्लाई करना है। आधे घंटे हो जाने के बाद अपने बालों को सादे पानी से धो लीजिए।

कद्दू के बीजों से घर पर तैयार करें होममेड ऑयल

कद्दू के बीजों से ऑयल बनाने के लिए सबसे पहले कद्दू के अंदर से बीजों को निकालकर उसे अच्छी तरह साफ कर लें और इसे तेज धूप में सुखाएं। इसके बाद कोकोनट आयल और कद्दू के सीड्स को मिलाकर एक मिक्सर में पीस लीजिए। अब इस घोल को एक कटोरी में निकाल लें ।  फिर गैस पर एक पैन गर्म होने के लिए रख दीजिए। इसके बाद इसमें नारियल तेल और कद्दू के बीजों का पेस्ट डालें। इसे थोड़ी देर के लिए इसी तरीके से छोड़ दें, लेकिन इस रेसिपी के दौरान गैस की आंच धीमी ही रखें। जब पेस्ट में से तेल अलग हो जाए तो गैस बंद कर दें और इस तेल को छन्नी के माध्यम से छानकर किसी साफ बोतल में स्टोर कर लें।

(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारियों के आधार पर लिखी गई है। इंडिया टीवी इनके सफल होने या इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इनके इस्तेमाल से पहले चिकित्सक का परामर्श जरूर लें।)

 

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चेहरे के दाग-धब्बों को कम कर सकता है केले का छिलका, जानें कैसे लगाएं और फायदे

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Banana peel for face: अक्सर लोग केला खाते हैं और इसका छिलका फेंक देते हैं। जबकि, यह आपके लिए काफी काम की चीज हो सकती है। जी हां, इसे आप पीस कर या फेस पैक बना कर अपनी स्किन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल, केले के छिलके में  एंटीऑक्सीडेंट, पॉलीफेनोल्स और  कैरोटीनॉयड  होते हैं जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करते हैं। साथ ही इसका पोटेशियम ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा भी चेहरे के लिए इसके कई फायदे। तो, जानते हैं केले का छिलका चेहरे पर कैसे लगाएं और फिर जानेंगे  केले का छिलका के फायदे। 

केले का छिलका चेहरे पर कैसे लगाएं-How to use banana peel for skin in hindi

केले का छिलका चेहरे के लिए काफी कारगर तरीके से काम कर सकता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए पहले तो केले के छिलके को मैश कर लें या फिर इसका पेस्ट बना लें। फिर इसमें एलोवेरा मिला लें और इसे अपने चेहरे पर लगाएं। अगर आपकी स्किन ड्राई है तो आप इसमें शहद मिला कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

अलसी कौन सी बीमारी में काम आती है? जानें 5 बीमारियां जिनमें अलसी का सेवन है कारगर 

केले के छिलके के फायदे-banana peel benefits for skin

1. दाग-धब्बों को कम करता है-banana peel for dark patches 

दाग-धब्बों को कम करने में केले का छिलका काफी कारगर है। दरअसल, इसके पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स आपकी स्किन पोर्स खोल देते हैं, ऑक्सीजन को जगह देते हैं और हीलिंग में मदद करते हैं। इस तरह ये दाग-धब्बों को कम करने में मददगार है। 

2. पिगमेंटेशन को हल्का करता है-banana peel good for skin whitening

पिगमेंटेशन को हल्का करने में केले का छिलका आपकी मदद कर सकता है। इसमें विटामिन सी होता है जो कि चेहरे को साफ करने और गंदगी को कम करने में मदद करते हैं। इसलिए, पिगमेंटेशन को हल्का करने में यह मददगार है। 

सर्दियों में पानी की कमी से शरीर को हो सकते हैं ये 3 नुकसान, बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

3. झुर्रियों को कम करता है-banana peel for face wrinkles

केले का छिलका, झुर्रियों को कम करने में मददगार है। इसमें मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं जो कि त्वचा में कोलेजन बूस्ट करते हैं और नमी को लॉक करते हैं। ऐसे में ये झुर्रियों को कम करने में हमारी मदद कर सकते हैं। 

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

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