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Plane Landing Video : समुद्री तट पर लोगों के सिर के ऊपर से गुजरा प्लेन, किसी को आई मजा तो किसी के छूट गए पसीने! देखें वीडियो

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Plane Lowest Landing Video : ग्रीस का स्काईथोस एयरपोर्ट अपने खूबसूरत नजारों के लिए प्रसिद्ध है जहां सैकड़ों पर्यटक हर रोज विमानों की लैंडिंग देखने के लिए आते हैं। खबरों की मानें तो मौसम अच्छा होने पर 100 से अधिक लोग विमानों को ऊपर जाते और नीचे आते देखने के लिए लैंडिंग स्ट्रिप पर आते हैं।

 

फोटो : यूट्यूब वीडियो
एथेंस : ग्रीस में समुद्र के किनारे कुछ पर्यटक छुट्टियां मना रहे थे और मौज-मस्ती कर रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि एक विशालकाय यात्री प्लेन उनकी ओर बढ़ता चला आ रहा है। इस नजारे को देखकर लोगों के पसीने छूट गए। विमान ने बेहद नीचे आकर लैंड किया और यह पर्यटकों के सिर से सिर्फ कुछ ही मीटर ऊपर दूर था। दरअसल पर्यटक ग्रीस के स्काईथोस द्वीप पर उतरते एयरबस A321neo को देखने के लिए इकट्ठा हुए थे। प्लेन की लैंडिंग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है जो वाकई हैरतअंगेज है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि एक WizzAir Airbus A321neo प्लेन द्वीप के समुद्र के ऊपर उड़ रहा है और अलेक्जेंड्रोस पापाडियामेंटिस एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा है। प्लेन बेहद नीचे आ जाता है और आखिरी के कुछ सेकेंड में यह पर्यटकों के सिर से सिर्फ कुछ मीटर से दूरी से निकल जाता है। प्लेन को आता देख लोग एयरपोर्ट की दीवार के पास से हट जाते हैं। GreatFlyer नामक चैनल ने यह वीडियो यूट्यूब पर भी शेयर किया है।

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छोटा एयरपोर्ट, छोटे-छोटे रनवे
ग्रीस का स्काईथोस एयरपोर्ट अपने खूबसूरत नजारों के लिए प्रसिद्ध है जहां सैकड़ों पर्यटक हर रोज विमानों की लैंडिंग देखने के लिए आते हैं। खबरों की मानें तो मौसम अच्छा होने पर 100 से अधिक लोग विमानों को ऊपर जाते और नीचे आते देखने के लिए लैंडिंग स्ट्रिप पर आते हैं। यह एयरपोर्ट बाकी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जितना बड़ा नहीं है और छोटे रनवे होने के कारण यहां सबसे बड़ा विमान बोइंग 757 के उतरने की अनुमति है।

लोग बोले- पर्यटकों के साथ खेल रहा पायलट
वीडियो में सिर के ऊपर से गुजरते प्लेन का नजारा हाल ही में पर्यटकों को देखने को मिला है। यूजर्स इसे खूब पसंद कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पायलट लोगों के साथ खेलने की कोशिश कर रहा है। स्काईथोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बोइंग 767-200 के आकार तक के विमानों के लिए सिर्फ 5,341 फुट (1628 मीटर) लंबा रनवे है। इस रनवे को ‘छोटे और पतले’ के रूप में जाना जाता है। इस एयरपोर्ट का संचालन साल 1972 में शुरू हुआ था।

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Web Title : Hindi News from Navbharat Times, TIL Network



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लश्कर और जैश ने अफगानिस्तान में बनाया सुरक्षित ठिकाना, क्या भारत को धोखा दे रहा तालिबान?

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अफगानिस्तान के पूर्व खुफिया प्रमुख रहमतुल्लाह नबील ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन के साथ बातचीत के बावजूद, भारत को अपनी सुरक्षाकम नहीं करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा जैसे भारत को निशाना बनाने वाले पाकिस्तानी आतंकवादी समूहों ने तालिबान की मदद से अफगानिस्तान में अपने ठिकानों को स्थानांतरित कर दिया है।

 



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पाकिस्तान की सेना से क्यों डरे इमरान ?… पार्टी नेताओं को जारी किया ये फरमान

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Image Source : AP
पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान (फाइल फोटो)

Imran Khan & Pakistan Army: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के कट्टर दुश्मन आसिम मुनीर के सेनाध्यक्ष बनते ही देश की राजनीति नया करवट लेने लगी है। इमरान खान ने अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) के नेताओं और सोशल मीडिया टीम को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सेना और नए सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल आसिम मुनीर की कोई आलोचना न होने पाए। द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार पीटीआइ के एक सूत्र के बताया कि पार्टी नेताओं और सोशल मीडिया प्रबंधकों के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में खान ने कहा, “कृपया सुनिश्चित करें कि नए प्रमुख और सेना कर्मियों की कोई आलोचना न हो। जबकि इमरान खान नहीं चाहते थे कि उनके कट्टर दुश्मन आसिम मुनीर को सेना की कमान मिले।

दरअसल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहते आसिम मुनीर आइएसआइ के प्रमुख थे, मगर नाराजगी के चलते इमरान खान ने मुनीर को चीफ के पद से हटा दिया था। तब से मुनीर और इमरान के रिश्ते खराब हो गए थे। अब आसिम मुनीर पाकिस्तान के मौजूदा पीएम शहबाज शरीफ के करीबी हैं। इमरान खान ने सेनाध्यक्ष की नियुक्ति मनमर्जी से करने का आरोप लगाकर पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की जमकर आलोचना की थी। वह नहीं चाहते थे कि मुनीर को सेनाध्यक्ष बनाया जाए। मगर शहबाज शरीफ ने मुनीर को ही इसके लिए उपयुक्त माना। इसके बाद यह माना जा रहा था कि पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान और अधिक हमलावर हो सकते हैं। मगर मौके की नजाकत को देखते हुए इमरान ने पाला बदल लिया है। अब वह सेना प्रमुख और सेना के खिलाफ कोई भी टिप्पणी करने से खुद तो परहेज कर ही रहे हैं। साथ ही पार्टी के अन्य नेताओं को भी यही निर्देश दिया है।

क्यों बदला इमरान का रवैया


इमरान खान का यह निर्देश सैन्य प्रतिष्ठान के साथ बिगड़े रिश्तों को फिर से बनाने की पार्टी की कोशिश समझी जा रही है। पीटीआई सूत्र ने कहा कि जनरल मुनीर की सेना प्रमुख के रूप में नियुक्ति के बाद खान भी नहीं चाहते कि उनके प्रधानमंत्री रहते सेना से संबंध का साया नए सेनाध्यक्ष पर पड़े। पीटीआइ के वरिष्ठ नेता फवाद चौधरी ने अपने नेताओं और सोशल मीडिया टीम को खान के नए निर्देश की पुष्टि या खंडन नहीं किया, लेकिन कहा कि पार्टी की नीति सेना के साथ टकराव नहीं है। बुधवार को खान ने एक ट्वीट में जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को नए सीजेसीएससी और जनरल मुनीर को सीओएएस के रूप में बधाई दी। इमरान जानते हैं कि अब सेना प्रमुख से पंगा लेने का मतलब चुनाव में अपना नुकसान करवाना है। इसलिए अब इमरान ने अपना स्टैंड बदल लिया है.

इमरान ने जताया सेना पर यह भरोसा

इमरान ने उम्मीद जताते कहा, “नया सैन्य नेतृत्व राष्ट्र और राज्य के बीच पिछले 8 महीनों में निर्मित विश्वास की कमी को समाप्त करने के लिए काम करेगा। राज्य की ताकत उसके लोगों से प्राप्त होती है। जबकि खान को शुरू में सेना प्रमुख के रूप में जनरल मुनीर की नियुक्ति के बारे में आपत्ति थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी नीति बदल दी और कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी, भले ही उन्हें सीओएएस बनाया गया हो। द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अपने प्रीमियर के दौरान खान ने समय से पहले ही मुनीर को आइएसआइ के महानिदेशक के पद से हटा दिया था, जब मुनीर ने कथित तौर पर खान के करीबी कुछ लोगों के कथित भ्रष्ट आचरण के बारे में सूचित किया था।

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बिजली जिगजैग करते हुए क्यों गिरती है, वैज्ञानिकों ने आखिरकार ढूंढा इस बडे़ रहस्य का जवाब

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एडिलेड: हर किसी ने बिजली देखी है और इसकी शक्ति पर आश्चर्य किया है। लेकिन इसकी आवृत्ति के बावजूद – दुनिया भर में हर दिन लगभग 86 लाख बार बिजली गिरती है – लेकिन इस बात को लेकर अब तक रहस्य बना हुआ था कि बिजली जब गरजते बादलों के बीच से धरती की तरफ गिरती है तो वह सीधी रेखा में नहीं बल्कि जिगजैग करते हुए आगे बढ़ती है। बिजली पर कुछ पाठ्यपुस्तकें हैं, लेकिन किसी में भी यह नहीं बताया गया है कि ये ‘ज़िगज़ैग’ (जिन्हें सीढ़ियां कहा जाता है) कैसे बनते हैं, और कैसे बिजली किलोमीटर से अधिक यात्रा कर सकती है। मेरा नया शोध एक स्पष्टीकरण प्रदान करता है। गरजने वाले बादलों में तीव्र विद्युत क्षेत्र इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित करते हैं ताकि ‘एकल डेल्टा ऑक्सीजन अणु’ के रूप में जानी जाने वाली ऊर्जा का निर्माण किया जा सके।

ये अणु और इलेक्ट्रॉन एक छोटे, अत्यधिक संवाहक कदम बनाने के लिए निर्मित होते हैं, जो एक सेकंड के दस लाखवें हिस्से के लिए तीव्रता से रोशनी करता है। कदम के अंत में, एक विराम होता है क्योंकि कदम का निर्माण फिर से होता है, उसके बाद एक और उज्ज्वल, चमकती छलांग होती है। प्रक्रिया को बार-बार दोहराया जाता है। चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि का मतलब है कि बिजली से सुरक्षा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। बिजली गिरने की शुरुआत कैसे होती है, यह जानने का मतलब है कि हम यह पता लगा सकते हैं कि इमारतों, हवाई जहाजों और लोगों की बेहतर सुरक्षा कैसे की जाए। इसके अलावा, जबकि विमान में पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों के उपयोग से ईंधन दक्षता में सुधार हो रहा है, इन सामग्रियों से बिजली गिरने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हमें अतिरिक्त सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

बिजली गिरने की वजह क्या है?

बिजली के हमले तब होते हैं जब लाखों वोल्ट की विद्युत क्षमता वाले गरजने वाले बादल पृथ्वी से जुड़ते हैं। जमीन और आसमान के बीच हज़ारों ऐम्पियर की धारा दसियों हज़ार डिग्री के तापमान के साथ बहती है। बिजली की तस्वीरें नग्न आंखों से न देखे गए कई विवरणों को प्रकट करती हैं। आमतौर पर बादल से बिजली की चार या पाँच आड़ी तिरछी रेखाएं धरती की ओर बढ़ती है। पृथ्वी पर पहुंचने वाली इन रेखाओं से सबसे पहले बिजली गिरने की शुरुआत होती है। इसके बाद अगली रेखाएं बनती हैं। पचास साल पहले, हाई-स्पीड फोटोग्राफी ने इस रहस्य से पर्दा हटाने में और भी मदद की। शुरूआती चमकीली रेखाएं लगभग 50 मीटर लंबे ‘कदम’ भरती हुई बादल से नीचे की ओर बढ़ती हैं। प्रत्येक चरण एक सेकंड के दस लाखवें हिस्से के लिए चमकता है, लेकिन तब लगभग पूर्ण अंधकार होता है। एक सेकंड के 500 लाखवें हिस्से के बाद एक और चरण बनता है, पिछले चरण के अंत में, लेकिन पिछले चरण अंधेरे रहते हैं। ऐसे कदम क्यों बनते हैं? कदमों के बीच के अंधेरे काल में क्या हो रहा है? कोई संपर्क दिखाई नहीं देता, फिर भी यह कदम विद्युत रूप से बादलों से कैसे जुड़े होते हैं।

इन सवालों के जवाब यह समझने में निहित हैं कि क्या होता है जब एक ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन एक ऑक्सीजन अणु से टकराता है। यदि इलेक्ट्रॉन में पर्याप्त ऊर्जा है, तो यह अणु को एकल डेल्टा अवस्था में उत्तेजित करता है। यह एक ‘मेटास्टेबल’ स्थिति है, जिसका अर्थ है कि यह पूरी तरह से स्थिर नहीं है – लेकिन यह आमतौर पर 45 मिनट के आसपास कम ऊर्जा की स्थिति में नहीं आती है। इस एकल डेल्टा स्थिति में ऑक्सीजन नकारात्मक ऑक्सीजन आयनों से इलेक्ट्रॉनों (बिजली के प्रवाह के लिए आवश्यक) को अलग करती है। इन आयनों को लगभग तुरंत इलेक्ट्रॉनों (जो एक नकारात्मक चार्ज लेते हैं) द्वारा फिर से ऑक्सीजन के अणुओं से जोड़कर बदल दिया जाता है। जब हवा में एक प्रतिशत से अधिक ऑक्सीजन मेटास्टेबल अवस्था में होती है, तो हवा बिजली का संचालन कर सकती है। तो बिजली डग भरते हुए इसलिए गिरती है क्योंकि महत्वपूर्ण संख्या में इलेक्ट्रॉनों को अलग करने के लिए पर्याप्त मेटास्टेबल स्थितियां बनाई जाती हैं।

उत्तेजित अणु बादल तक बनाते हैं एक स्तंभ

चरण के अंधेरे भाग के दौरान, मेटास्टेबल स्थितियों और इलेक्ट्रॉनों का घनत्व बढ़ रहा है। एक सेकंड के 500 लाखवें हिस्से के बाद, कदम बिजली का संचालन कर सकता है – और कदम की नोक पर विद्युत क्षमता लगभग बादल की क्षमता तक बढ़ जाती है, और एक और कदम उत्पन्न करती है। पिछले चरणों में बनाए गए उत्तेजित अणु बादल तक एक स्तंभ बनाते हैं। पूरा स्तंभ तब विद्युत रूप से संचालित होता है, जिसमें विद्युत क्षेत्र की आवश्यकता नहीं होती है और प्रकाश का थोड़ा उत्सर्जन होता है। लोगों और संपत्ति की रक्षा करना इमारतों, विमानों और लोगों के लिए भी सुरक्षा के डिजाइन के लिए तड़ित निर्माण की समझ महत्वपूर्ण है। हालांकि लोगों पर बिजली गिरना दुर्लभ है, इमारतों पर कई बार चोट लगती है – विशेष रूप से लंबी और अलग-थलग इमारतों पर।

जब बिजली किसी पेड़ से टकराती है, तो पेड़ के अंदर का रस उबल जाता है और परिणामस्वरूप भाप दबाव पैदा करती है, जिससे तना फट जाता है। इसी तरह, जब बिजली किसी इमारत के कोने से टकराती है, तो बारिश का पानी जो कंक्रीट में रिसता है, उबलने लगता है। दबाव इमारत के पूरे कोने को उड़ा देता है, जिससे इमारत गिरने का खतरा पैदा हो जाता है। 1752 में बेंजामिन फ्रैंकलिन द्वारा ईजाद की गई एक बिजली की छड़ मूल रूप से एक इमारत के शीर्ष से जुड़ी और जमीन से जुड़ी एक मोटी बाड़ लगाने वाली तार है। इसे तड़ित को आकर्षित करने और विद्युत आवेश को पृथ्वी से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। तार के माध्यम से प्रवाह को निर्देशित करके, यह भवन को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। ये फ्रैंकलिन छड़ें आज ऊंची इमारतों और चर्चों के लिए आवश्यक हैं, लेकिन यह तय करना मुश्किल है कि प्रत्येक संरचना पर कितने की आवश्यकता है।

(जॉन लोके, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय)



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