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Passport Ranking India: पाकिस्‍तान के लिए एक और शर्म का पल, दुनिया में सबसे खराब पासपोर्ट, जानिए क्‍या है भारत का हाल

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Pakistan India Passport Ranking: पाकिस्‍तान (Pakistan) जो दुनिया के एक खतरनाक देश में शामिल है, अब उसका पासपोर्ट भी अपनी साख गंवा चुका है। यहां तक कि यूएई का पासपोर्ट भी अब उससे आगे है। एक सर्वे की मानें तो पाकिस्‍तानी पासपोर्ट दुनिया में सोमालिया के बराबर रैंकिंग रखता है। उससे नीचे सीरिया जैसे ही देश हैं।

 



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BBC Modi Pakistan: क्‍या बीबीसी के ‘पाकिस्‍तानी’ स्‍टाफ ने बनवाई पीएम मोदी पर विवादित फिल्‍म, ब्रिटेन में उठे सवाल

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लंदन: गुजरात दंगों को लेकर बनाई गई बीबीसी की डॉक्‍यूमेंट्री को लेकर ब्रिटेन से लेकर भारत तक बवाल मचा हुआ है। भारत ने बीबीसी की इस डॉक्‍यूमेंट्री पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है, वहीं देश में कई जगहों पर इसके प्रदर्शन को लेकर विवाद चल रहा है। इस बीच ब्रिटेन की सत्‍तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी के सांसद रमिंदर सिंह रेंगर या लॉर्ड रमी रेंगर ने बीबीसी के डायरेक्‍टर जनरल टिम डवी को पत्र लिखा है। इसमें लॉर्ड रमी ने टिम डवी से यह सवाल किया है कि क्‍या आपका पाकिस्‍तानी मूल का स्‍टॉफ इस मूर्खता के लिए जिम्‍मेदार है।

गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक टोरी नेता लॉर्ड रमिंदर सिंह ने कहा कि यह डॉक्‍यूमेंट्री ‘असंवेदनशील’ और एक तरफा है। उन्‍होंने कहा कि बीबीसी ने हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच घृणा को पैदा करके पुराने घाव पर फिर से नमक छिड़क दिया है। ब्रिटिश सांसद ने कहा कि यह डॉक्‍यूमेंट्री भारतीय प्रधानमंत्री मोदी का अपमान है। वह भी तब जब पीएम मोदी की गुजरात दंगे में कोई भूमिका नहीं थी। पीएम मोदी को साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट की जांच में दोषमुक्‍त करार दिया गया था।
BBC डॉक्यूमेंट्री पर भारत के साथ खुलकर खड़ा हुआ रूस, इंफॉर्मेशन वॉर छेड़ने का लगाया आरोप

भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति का असर ब्रिटेन तक

लार्ड रेंगर ने अपनी टिप्‍पणी के बारे में कहा, ‘मैंने बीबीसी के किसी भी पाकिस्‍तानी मूल के स्‍टाफ का उल्‍लेख किया है। दुर्भाग्‍य से भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति का असर ब्रिटेन पर भी पड़ता रहा है। जो सामाजिक संयोजन और विभिन्‍न नस्‍लों के लागों के बीच रिश्‍ते बनाने के ल‍िहाज से न तो सुखद है और न ही मददगार।’ बता दें कि भारत ने पहले ही इस डॉक्‍यूमेंट्री को दुष्‍प्रचार करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अरिंदम बागची ने इस डॉक्‍यूमेंट्री को पक्षपातपूर्ण करार दिया है।

बागची ने कहा कि बीबीसी की फिल्‍म तथ्‍यों से इतर है और औपनिवेशिक सोच को बढ़ाने वाला है। कंजरवेटिव पार्टी के सांसद डोलर पोपट ने भी बीबीसी के डायरेक्‍टर जनरल को पत्र लिखकर कहा कि यह बहुत ही ज्‍यादा एकतरफा है। उन्‍होंने मांग की कि इस फिल्‍म को हटा लिया जाए। भारत के इस डॉक्‍यूमेंट्री पर बैन लगाए जाने का मामला अब कोर्ट में पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई करेगी। इस बीच रूस ने भी पीएम मोदी की डॉक्‍यूमेंट्री पर खुलकर भारत के रुख का ही समर्थन किया है।



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तालिबान ने महिलाओं पर लगा दिया फिर ये नया प्रतिबंध, संयुक्त राष्ट्र भी हैरान

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Image Source : AP
तालिबानी महिलाएं (फाइल)

नई दिल्ली। तालिबान का जुल्म अफगानी महिलाओं पर लगातार जारी है। पहले अफगानिस्तान की लड़कियों और महिलाओं को उच्च शिक्षा से वंचित करने और उन्हें नौकरी नहीं करने देने के अजीबोगरीफ फरमान जारी करने के बाद तालिबान ने अब एक नया प्रतिबंध लगा दिया है। नए प्रतिबंध में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मिशनों में सहायता कर्मियों के तौर पर काम करने वाली महिलाओं को ड्यूटी करने से रोक दिया गया है। इससे महिलाओं के काम करने का आखिरी द्वार भी बंद हो गया है। इस तालिबानी फरमान से संयुक्त राष्ट्र भी हैरान है।

संयुक्त राष्ट्र के विश्वव्यापी मानवीय अभियानों के प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने सोमवार को आगाह किया कि अफगानिस्तान में महिला सहायता कर्मियों पर तालिबान का प्रतिबंध कई महत्वपूर्ण मानवीय कार्यक्रमों को ‘‘खत्म करने जैसा है। संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान के इस फरमान को खतरे की घंटी माना है। मार्टिन ग्रिफिथ्स ने कहा कि अगर तालिबान ने अपने फरमान में कुछ अपवाद शामिल नहीं किए तो यह बहुत ही विनाशकारी होगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहायता समूहों सहित एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले सप्ताह अफगानिस्तान के विदेश मामलों और वित्त मंत्रियों सहित तालिबान के 9 अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि मानवीय कार्यों में अफगानिस्तानी महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

संयुक्त राष्ट्र को भरोसा तालिबानी मानेंगे निर्देश


ग्रिफिथ्स ने कहाकि अभी हमें धैर्य रखने के लिए कहा गया है, क्योंकि हमें सूचना दी गई है कि तालिबान अधिकारियों द्वारा दिशानिर्देशों पर काम किया जा रहा है, जिसके तहत कथित तौर पर मानवीय कार्यों में महिलाओं की मौजूदगी की अनुमति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि तालिबान का लगातार यह संदेश देना कि ‘‘महिलाओं के काम करने के लिए एक जगह होगी, यह थोड़ा तसल्ली देने वाला महत्वपूर्ण संदेश है। ग्रिफिथ्स ने 24 दिसंबर 2022 को जारी किए गए तालिबान के एक फरमान का जिक्र किया, जिसके बाद से सहायता समूह अफगानिस्तानी महिलाओं को रोजगार नहीं दे पा रहे हैं।

वहीं संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के लिए ‘प्रोग्रामिंग’ के उप कार्यकारी निदेशक उमर आब्दी ने कहा कि 60 लाख से अधिक अफगानिस्तानी आपातकालीन स्तर की खाद्य समस्या का सामना कर रहे हैं। वह लोग अब अकाल से महज एक कदम दूर हैं। ऐसे में अफगानिस्तान बड़े संकट में फंस सकता है। इस साल 875,000 बच्चों के गंभीर कुपोषण से पीड़ित होने की आशंका है। ऐसे में महिलाओं को काम करने से रोकना घातक होगा।

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हद ग्लैमरस हैं रूसी डिप्लोमैट मारिया जाखारोवा, मोदी के सपोर्ट में बीबीसी को मुंह भर सुना दिया

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Priyesh Mishra | Navbharat Times | Updated: 31 Jan 2023, 11:02 am

बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री पर रूस ने भारत का खुलकर समर्थन किया है। रूस ने बीबीसी पर स्वतंत्र नीति अपना रहे देशों के विरूद्ध भी विभिन्न मोर्चों पर सूचना युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन यूनाइटेड किंगडम का राष्ट्रीय प्रसारक है। बीबीसी ने हाल में ही 2002 के गुजरात दंगों को लेकर एक विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री बनाई है।

 



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