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Pakistan ने मसूद अजहर को गिरफ्तार करने के लिए अफगानिस्तान को लिखा पत्र, FATF ने दी बड़ी जानकारी | News & Features Network

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Pakistan ने जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर को गिरफ्तार करने के लिए अफगानिस्तान को एक पत्र लिखा है. CNN-News18 को टॉप ऑफिशियल ने बताया कि पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने तालिबान को लिखे अपने पत्र में दावा किया है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में छिपा है. सूत्रों के मुताबिक वह नंगरहार और कुनार क्षेत्रों में हो सकता है, इसलिए उसे ढूंढा जाना चाहिए, गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उसके बारे में सूचना दी जानी चाहिए.

यह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के आदेश का पालन करने और अंतर सरकारी संगठन की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने का पाकिस्तान का प्रयास हो सकता है.सूत्रों की मानें तो यह दूसरी बार है जब पाकिस्तान ने मसूद अजहर को लेकर अफगानिस्तान को पत्र लिखा गया है.

बताया जाता है कि पहली बार पत्र इस साल जनवरी में लिखा गया था जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ मंत्री स्तर पर इस मुद्दे को उठाया था. तो वहीं दूसरा पत्र एफएटीएफ की 28 अगस्त से 3 सितंबर तक हुई पाकिस्तान की साइट पर यात्रा से ठीक पहले लिखा गया था. पाकिस्तान के एफएटीएफ की अक्टूबर में होने वाली बैठक में ग्रे सूची से बाहर होने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए 34 सूत्रीय कार्य सूची का पालन करना होगा.

सूत्रों ने बताया कि FATF की टीम को पाकिस्तान के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान में नहीं है क्योंकि वह काफी समय पहले अफगानिस्तान भाग गया है. इधर, भारत में शीर्ष अधिकारियों ने इसे साजिद मीर की ‘गिरफ्तारी’ का नाटक बताया है. एक दूसरे अधिकारी ने कहा, ‘नंगरहार में मसूद अजहर को खोजने के बजाय, उन्हें बहावलपुर और रावलपिंडी के अपने सुरक्षित घरों में ढूंढना चाहिए.’

 

Courtesy: This article is extracted with thanks & zero benefits from: Source link BY Reported By: MANOJ GUPTA & ARUNIMA



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Pakistan Army India: बालाकोट… पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए खतरा बना भारत! परमाणु बम की बात क्यों कर रहे ना’पाक’ सैन्य एक्सपर्ट

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इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तानी सेना के मुखिया जनरल असीम मुनीर सत्‍ता संभालने के बाद ही भारत को गीदड़ भभकी देने में जुट गए हैं। जनरल मुनीर ने कहा कि अगर भारत जंग शुरू करता है तो हम करारा जवाब देंगे। जनरल मुनीर चाहे जो भी धमकी दें लेकिन पाकिस्‍तानी सेना के ही विशेषज्ञ यह खुलकर मानने लगे हैं कि मोदी राज में भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए बड़ा खतरा बन गया है। पाकिस्‍तानी सेना जुड़े रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि सर्जिकल स्‍ट्राइक, बालाकोट जैसी कार्रवाई‍यों ने भारत ने अब पाकिस्‍तान को अपने अस्तित्‍व को बचाने के लिए कठिन विकल्‍प चुनने को मजबूर कर दिया है।

पाकिस्‍तान की आजादी पर आयोजित इस्‍लामाबाद कान्‍क्‍लेव 2022 चर्चा में पाकिस्‍तान के पूर्व ज्‍वाइंट चीफ ऑफ स्‍टॉफ कमिटी रिटायर जनरल जुबैर हयात ने अपने भाषण में कहा कि भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व को स्‍वीकार नहीं करता है और विभिन्‍न मोर्चों पर हमारे के लिए चुनौती पेश करता है। इस वजह से भारत का खतरा अभी खत्‍म नहीं हुआ है। जुबैर हयात ने कहा कि भारत के नेता भी 1947 के बंटवारे को ऐतिहासिक गलती मानते हैं। जुबैर ने भारत के सर्जिकल स्‍ट्राइक और साल 2019 में ऑपरेशन बालाकोट का भी जिक्र किया।
जनरल जुबैर ने कहा कि पाकिस्‍तान की धरती पर पहली बार हमला किया गया। उन्‍होंने ब्रह्मोस मिसाइल के दुर्घटनावश पाकिस्‍तान में गिरने का भी उल्‍लेख किया। बांग्‍लादेश के जन्‍म पर जनरल जुबैर की हताशा साफ झलकी। उन्‍होंने रिटायर जनरल बाजवा के उस बयान से अपनी सहमति जताई जिसमें उन्‍होंने कहा था कि पूर्वी पाकिस्‍तान में हुई हार सेना के कारण नहीं बल्कि राजनीतिक नेताओं की वजह से हुई थी। बता दें कि जनरल बाजवा के बयान को खुद उन्‍हीं के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी खारिज कर चुके हैं।

पाकिस्‍तान के एयर यूनिवर्सिटी इस्‍ला‍माबाद में विशेषज्ञ डॉक्‍टर आदिल सुल्‍तान ने कहा कि विदेशी माहौल ऐसा है कि पाकिस्‍तान को आर्थिक संकट के बाद भी परमाणु और परंपरागत हथियारों पर अपना फोकस बरकरार रखना होगा। सुल्‍तान ने कहा कि भारत बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम, एंटी सैटलाइट वेपन, हाइपरसोनिक मिसाइल, एक साथ कई परमाणु बम ले जाने वाली मिसाइल, पनडुब्‍बी से दागे जाने वाली मिसाइल जैसी नई तकनीक को शामिल कर रहा है। यह पाकिस्‍तान की प्रतिरोधक क्षमता की परेशानी को बढ़ाएगा। वहीं पाकिस्‍तानी लेखक जावेद जब्‍बार ने सलाह दी कि पाकिस्‍तान को अपनी जनसंख्‍या की बढ़त को कंट्रोल करने की जरूरत है।



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Passport Ranking India: पाकिस्‍तान के लिए एक और शर्म का पल, दुनिया में सबसे खराब पासपोर्ट, जानिए क्‍या है भारत का हाल

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Pakistan India Passport Ranking: पाकिस्‍तान (Pakistan) जो दुनिया के एक खतरनाक देश में शामिल है, अब उसका पासपोर्ट भी अपनी साख गंवा चुका है। यहां तक कि यूएई का पासपोर्ट भी अब उससे आगे है। एक सर्वे की मानें तो पाकिस्‍तानी पासपोर्ट दुनिया में सोमालिया के बराबर रैंकिंग रखता है। उससे नीचे सीरिया जैसे ही देश हैं।

 



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Pakistan Food Crisis: कंगाल पाकिस्‍तान के पास सब्जियां खरीदने के पैसे नहीं, बंदरगाह पर सड़ रहा टनों प्‍याज

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कराची: पाकिस्‍तान की सरकार इस समय मुश्किल में है। वह यह तय नहीं कर पा रही है कि देश में जारी खाद्यान्‍न आपूर्ति संकट का समाधान करे या फिर विदेशी मुद्रा भंडार बचाए। कराची बंदरगाह पर इस समय सैंकड़ों ऐसे कंटेनर्स यूं ही पड़े हैं जिन पर सब्जियां लदी हुई हैं। पाकिस्‍तान के अखबार द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की तरफ से बताया गया है कि प्‍याज के 250 कंटेनर्स जिनकी कीमत 107 लाख डॉलर है, 816,480 डॉलर की कीमत वाली अदरक का कंटेनर और 2.5 लाख डॉलर वाले लहसुन के कंटेनर बंदरगाह पर ऐसे ही पड़े हैं। व्‍यापारी परेशान हैं और उन्‍हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्‍या किया जाए। अखबार की मानें तो 0.6 मिलियन टन सोयाबीन भी ऐसे ही अटका है क्‍योंकि सरकार की तरफ से साख पत्र जारी नहीं किया जा रहा है।

पहुंच से बाहर प्‍याज
सीमित साख पत्र की वजह से इन कंटेनर्स को ऐसे ही पड़े रहने दिया जा रहा है। प्‍याज के कंटेनर्स कराची बंदरगाह के कई टर्मिनल्‍स पर पड़े हुए हैं। देश के बैंक विदेशी मुद्रा के अभाव में साख पत्र जारी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से कंटेनर्स को ऐसे ही पड़े रहने दिया जा रहा है। पाकिस्‍तान फ्रूट एंड वेजीटेबल एक्‍सपोटर्स इंपोटर्स एंड मर्चेंट्स एसोसिएशन (PFVA) के सदस्‍य वाहीन अहमद की मानें तो साख पत्रों को जारी करने में हो रही देरी की वजह से कंटेनर्स की कीमत पर अलग असर पड़ रहा है, टर्मिनल और शिपिंग चार्जेस बढ़ जाएंगे। प्‍याज के कंटेनर्स पहले से ही महंगे हैं और इसकी वजह से एक आम आदमी पर बुरा असर पड़ने वाला है। आम आदमी की पहुंच से ही प्‍याज बाहर हो जाएगा।Pakistan Army : भारत नहीं पाकिस्‍तानी सेना के सामने ये हैं 5 बड़े खतरे, भारतीय सेना को गीदड़भभकी दे रहे जनरल असीम मुनीर
270 रुपए किलो प्‍याज
उन्‍होंने कहा कि आज प्‍याज 175 रुपए किलो थोक बाजार में और खुदरा बाजार में 250 से 270 रुपए किलो तक बिक रहा है। क्‍लीयरेंस में देरी से प्‍याज की कीमतें और बढ़ जाएंगी। सब्जियां भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएंगी। फेडरेशन ऑफ पाकिस्‍तान चैंबर्स आफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री (FPCCI) के कार्यवाहक प्रेसीडेंट सुलेमान चावला ने भी इस पर चिंता जताई है।
Indian Navy Day: भारत के विक्रांत को डुबोने आई पाकिस्‍तान की पनडुब्‍बी गाजी, कैसे समंदर में समाई, 1971 के जंग की शौर्य गाथा
उन्‍होंने कहा है कि पोल्‍ट्री और डेयरी प्रॉडक्‍ट्स पहले ही आम आदमी खरीद नहीं पा रहा है।कुछ ही दिनों पहले कीमतों में थोड़ी स्थिरता आई थी लेकिन अब इन हालातों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। उनकी मानें तो आयात काफी महंगा है और टर्मिनल चार्जेस भी दोगुने हो जाएंगे।

डॉलर न होने का खामियाजा
डॉलर देश में है नहीं और इसकी वजह से स्थिति बेकाबू हो सकती है। आयातकों को इसकी वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जिसकी भरपाई भी मुश्किल हो जाएगी। उन्‍होंने सरकार से मांग की है कि इस मसले को तेजी से सुलझाया जाए ताकि देश में गहराते खाद्यान्‍न संकट को टाला जा सके। चावला ने यह भी कहा कि अमेरिका से आयात होने वाले सोयाबीन को लेकर कभी कोई लाइसेंसिंग और अनुवंशिक संशोधन कोई मुद्दा नहीं रहा है। पिछले कई सालों से देश के वही सप्‍लायर्स सोयाबीन का आयात कर रहे हैं।



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