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Masood Azhar News: भारत के मोस्ट वांटेड मसूद अजहर की गिरफ्तारी के लिए बेचैन हुआ पाकिस्तान, तालिबान को लिखी चिट्ठी

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर की गिरफ्तारी के लिए अफगानिस्तान को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में कहा गया है कि अफगानिस्तान की इस्लामिक अमीरात मसूद अजहर का पता लगाने, रिपोर्ट करने और गिरफ्तारी में पाकिस्तान की मदद करे। पाकिस्तान ने दावा किया है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान के नंगरहार या कुनार प्रांत में छिपा हो सकता है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान का यह कदम अपने देश को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से निकालने से जुड़ा हुआ है। मसूद अजहर को 31 दिसंबर, 1999 को इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC 814 के अपहरण के बाद एक भारतीय जेल से रिहा कर दिया गया था। मसूद अजगर संयुक्त राष्ट्र का नामित आतंकी और भारत का मोस्ट वांडेट भी है।

पाकिस्तान बोला- अफगानिस्तान में छिपा है मसूद अजहर
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि हमने अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय को एक पेज का पत्र लिखा है। इसमें मसूद अजहर का पता लगाने, रिपोर्ट करने और उसे गिरफ्तार करने के लिए कहा गया है। अधिकारी ने कहा कि हमारा मानना है कि वह अफगानिस्तान में कहीं छिपा हुआ है। हालांकि पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी करने से परहेज किया है। उधर तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने भी पाकिस्तान से ऐसी कोई चिट्ठी मिलने से साफ इनकार किया है। मुजाहिद ने कहा कि हमें अभी तक कोई चिट्ठी प्राप्त नहीं हुई है।

2002 में पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर लगाया था प्रतिबंध
पाकिस्तान के भेजे एक पेज की चिट्ठी में कहा गया है कि मसूद अजहर नंगरहार या कुनार प्रांत में छिपा हो सकता है। अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि तालिबान के काबुल पर कब्जा करने से पहले या उसके बाद अजहर अफगानिस्तान चला गया था या नहीं। पाकिस्तान ने जनरल परवेज मुशर्रफ के शासन के दौरान 14 जनवरी, 2002 को आतंकवाद के आरोपों को लेकर जैश ए मोहम्मद को प्रतिबंधित कर दिया था। जिसके बाद उसका सरगना आईएसआई की प्रोटेक्टिव कस्टडी में चला गया था।

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2019 में मसूद अजहर के 2 ट्रस्ट को किया गया था प्रतिबंधित
जैश ए मोहम्मद पर 17 साल के प्रतिबंध के बाद पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने खुफिया जानकारी के आधार पर 10 मई, 2019 को अल-रहमत ट्रस्ट, बहावलपुर और अल-फुरकान ट्रस्ट, कराची नामक दो और संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया। यह दोनों ट्रस्ट मसूद अजहर की आतंकी संगठन के मुखौटा थे। इनके जरिए ही जैश एक मोहम्मद को फंडिंग प्राप्त होती थी। हालांकि, अपने ट्रस्ट पर प्रतिबंध लगने के बाद भी मसूद अजहर ने कई दूसरे संगठन और ट्रस्ट खोल रखे हैं, जिनके जरिए उसे पाकिस्तान और बाहरी मुल्कों से भारी मात्रा में चंदा प्राप्त होता है।

वैश्विक आतंकवादी है मसूद अजहर
मसूद अजहर को फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के बाद उसे एक वैश्विक आतंकवादी नामित किया गया था। सूत्रों का कहना है कि यह दूसरी बार है, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को पत्र लिखकर मसूद अजहर की गिरफ्तारी की मांग की है। इस साल जनवरी में अफगानिस्तान के साथ मंत्री स्तर की वार्ता के दौरान पाकिस्तान ने मसूद अजहर की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया था।

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एफएटीएफ से निकलने के लिए तड़प रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान बीते चार साल से लगातार एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में बना हुआ है। अभी पिछले महीने ही 28 अगस्त से 3 सितंबर के बीच एफएटीएफ की एक टीम जमीनी हकीकत को जानने के लिए पाकिस्तान पहुंची थी। इस दौरान पाकिस्तान ने एफएटीएफ को बताया था कि मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान में नहीं है क्योंकि वह काफी समय पहले अफगानिस्तान भाग गया है। पाकिस्तान को एफएटीएफ की अक्टूबर पूर्ण बैठक में ग्रे सूची से बाहर होने की उम्मीद है। लेकिन, इसके लिए 34 सूत्रीय कार्य सूची का पालन करना होगा।



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नेपाल चुनाव में ओली को एक और बड़ा झटका, सभी 7 राज्‍यों में सरकार बना सकती है नेपाली कांग्रेस

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काठमांडू: नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को एक और बड़ा झटका लगा है। नेपाल की संघीय सरकार की तरह से प्रांतों में भी केपी ओली की पार्टी हार की ओर बढ़ रही है। नेपाली कांग्रेस के नेतृत्‍व वाला गठबंधन सभी 7 प्रांतों में बहुमत की ओर बढ़ रहा है। विश्‍लेषकों का कहना है कि अगर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्‍व वाला गठबंधन केंद्र में सरकार बना लेता है तो प्रांतों में भी पैकेज डील के तहत इसी गठबंधन की सरकार बन सकती है।

नेपाली कांग्रेस के गठबंधन ने दावा करना शुरू कर दिया है कि 5 दलों का उनका अलांयस संघीय सरकार बनाएगा। नेपाल कांग्रेस के नेता और गृहमंत्री बालकृष्‍ण खांड ने कहा कि 5 दलों वाला गठबंधन संघीय सरकार बनाएगा और यह गठबंधन अगले 5 साल तक चलेगा। शनिवार को प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और और पुष्‍प कमल दहल के बीच बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने गठबंधन को जारी रखने का फैसला किया और अगले कदम पर चर्चा की।
नेपाल में सरकार बनाने की कोशिशें हुईं तेज, शेर बहादुर देउबा फिर बन सकते हैं PM, गठबंधन से मिला समर्थन
रिजल्‍ट पर भारत, चीन और अमेरिका तीनों की ही नजरें

काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह होता है तो ताजा चुनावी नतीजों से इस बात के ज्‍यादा चांस हैं कि नेपाली कांग्रेस सभी 7 प्रांतों में सरकार बना सकती है। प्रचंड की पार्टी सीपीएन माओवादी के नेता गनेश शाह ने कहा कि 5 दलों के गठबंधन में जनता समाजवादी पार्टी के नेता उपेंद्र यादव भी शामिल होंगे। उन्‍होंने कहा कि दोनों ही मधेसी पार्टियों की मदद से हम आसानी से सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल कर लेंगे।

नेपाली कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले इस गठबंधन में प्रधानमंत्री देउबा, सीपीएन माओवादी के नेता प्रचंड, सीपीएन यूनिफाइड सोसलिस्‍ट के माधव नेपाल, महंत ठाकुर की पार्टी लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी और चित्र बहादुर के नेतृत्‍व वाला राष्‍ट्रीय जनमोर्चा शामिल है। सत्‍तारूढ़ गठबंधन को अब तक चुनाव में 82 सीटें मिली हैं। वहीं केपी ओली के गठबंधन को सीधे हुए चुनाव में 52 सीटें मिली हैं। इस चुनाव पर भारत, चीन और अमेरिका तीनों की ही नजरें हैं। चीन ने चुनाव से पहली ओली और प्रचंड को फिर से मिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई है।



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भारत के दो दोस्‍तों ने निभाई दोस्‍ती, हिंद महासागर पर खास मीटिंग से दूर रहकर चीन को दिखाया आईना

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चीन (China) ने 21 नवंबर को हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में आने वाले 19 देशों के साथ एक खास मीटिंग की। इस मीटिंग में भारत तो इनवाइटेड नहीं था लेकिन उसके दो दोस्‍तों ने भी इससे बाहर रहना बेहतर समझा। ऑस्‍ट्रेलिया की तरफ से भारत के साथ एक खास दोस्‍ती निभाई गई और मीटिंग का बहिष्‍कार किया गया।

 



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इन्होंने बना दिया दुनिया में लंबी अवधि तक राष्ट्रपति बने रहने का विश्व रिकॉर्ड, फिर बंपर मतों से जीते

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तियोदोरो ओबियांग (इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति)

Longest Serving President in the World: क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे लंबी अवधि तक निर्वाचित राष्ट्रपति बने रहने का रिकॉर्ड किसके पास है?…क्या आप जानते हैं कि हर बार चुनाव में एक ही शख्स आखिर किन वजहों से राष्ट्रपति के चुनाव में बार-बार जीत जाता है? …आखिर कुछ तो वजह होगी जो यह व्यक्ति हर बार चुनाव में विजय पताका फहराता आ रहा है। इस बार वर्ष 2022 के चुनाव में भी जीत हासिल कर 43 वर्षों तक लगातार राष्ट्रपति बने रहने का दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। आइए आपको बताते हैं कि यह शख्स है कौन?

अफ्रीकी देश इक्वेटोरियल गिनी का नाम आपने शायद सुना होगा। यह देश 1968 में स्पेन से आजाद हुआ था। इस देश के पहले राष्ट्रपति फ्रांसिस्को मैकियास थे। वर्ष 1979 में पहली बार तियोदोरो ओबियांग अपना चाचा फ्रांसिस्को का तख्तापलट कर सत्ता में आ गए। तब से वह लगातार राष्ट्रपति चुने जा रहे हैं। हर बार उन्हें 90 फीसदी से भी अधिक वोट मिलता है। वह करीब 43 वर्षों से इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति हैं। इस बार के चुनाव में भी ओबियांग को 95 फीसदी मत मिले हैं।

लगातार छठवीं बार ओबियांग ने जीता चुनाव


वर्ष 2022 में ओबियांग ने लगातार छठवीं बार राष्ट्रपति का चुनाव जीता है। इक्वोटोरियल गिनी को जब से आजादी मिली है तब से अब तक केवल दो ही राष्ट्रपति हुए हैं। ओबियांग दूसरे और मौजूदा राष्ट्रपति हैं। पिछले 43 वर्षों से उनका देश पर शासन है। वह काफी सख्त मिजाज के माने जाते हैं। उनका अपने विरोधियों पर पूर्ण नियंत्रण है। उनकी अफ्रीकी देशों में भी काफी अच्छी पकड़ बताई जाती है। ओबियांग वर्ष 2011 से 2012 तक अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

14 लाख है देश की आबादी

इक्वेटोरियल गिनी आबादी के लिहाज से बहुत छोटा देश है। यहां की कुल आबादी केवल 14 लाख है। बावजूद यहां के लोग गरीबी का जीवन जी रहे हैं। इस देश में लोगों की आय का कोई खास साधन नहीं है। वर्ष 1996 में यहां तेल का विशाल भंडार खोजा गया था। मगर उसका फायदा सिर्फ राजनीतिक लोगों को ही मिला। इससे उनकी आर्थिक तरक्की हुई, लेकिन जनता की हालत जस की तस है। यहां की जनता बदहाली की जिंदगी जी रही है। ओबियांग तानाशाह किस्म के बताये जाते हैं, उनका विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया जाता है।

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