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India Nepal Relations : नेपाल में आई ‘प्रचंड’ सरकार, लोगों को क्यों याद आ रहे प्रमोद महाजन? वायरल हो रहा 1997 का यह वीडियो

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काठमांडू : लंबी राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहे नेपाल को एक बार फिर नया प्रधानमंत्री मिल गया है। नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की नियुक्ति के बाद सोमवार को पुष्प कमल ‘प्रचंड’ ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। नेपाल में लोकतंत्र को आए हुए अभी 14 साल ही हुए हैं। देश की कमान पर हिंदू राजतंत्र के खिलाफ एक दशक तक खूनी विद्रोह करने वाले पूर्व माओवादी गुरिल्ला और ‘प्रचंड’ के नाम से लोकप्रिय पुष्प कमल दहल के हाथ में है। वह तीसरी बार इस गद्दी पर बैठे हैं। नेपाल में यह बड़ा राजनीतिक बदलाव इसलिए चर्चा में है क्योंकि 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में प्रचंड की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी सेंटर) के सिर्फ 32 सांसद हैं।1990 के दशक में एक दौर आया जब ऐसी ही स्थिति भारतीय राजनीति में भी बन गई थी।

प्रचंड को समर्थन देने वाले नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनाइटेड मार्क्सवादी लेनिनवादी) के पास 78 सीटें हैं। नेपाल में पिछले महीने हुए चुनाव में प्रचंड और नेपाली कांग्रेस एक साथ थे। इन चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामन आई नेपाली कांग्रेस के पास 89 सीटें हैं लेकिन आज वह सत्ता से बाहर हैं जबकि सबसे कम सीटों वाले प्रचंड नेपाल के प्रधानमंत्री हैं। नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बीच भारतीय जनता पार्टी के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन का 1997 में लोकसभा में दिया एक भाषण जमकर वायरल हो रहा है।

Prachanda Oath Nepal: नेपाल के प्रधानमंत्री बने प्रचंड, राष्‍ट्रपति ने दिलाई शपथ, भारत-चीन संग रिश्‍तों पर रहेगी सबकी नजर

जब भारत में 13 दलों के समर्थन से बनी सरकार

इसमें वह देवगौड़ा सरकार पर तंज कसते नजर आ रहे हैं। एच. डी. देवगौड़ा 1 जून 1996 को भारत के प्रधानमंत्री बने थे। तब उनकी पार्टी जनता दल के पास सिर्फ 46 सीटें थे। ‘संयुक्त मोर्चा’ नामक उस सरकार को 13 राजनीतिक दलों का समर्थन मिला हुआ था। प्रमोद महाजन ने देवगौड़ा सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ‘एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मैं जब चीन गया तो वहां हमसे पूछा गया कि भारत में लोकतंत्र कैसे काम करता है। मैंने उन्हें एक उदाहरण देकर भारत के लोकतंत्र के बारे में बताया।’

प्रमोद महाजन ने सुनाया किस्सा

महाजन ने कहा, ‘चीन के एक सांसद से मैंने कहा कि मेरा नाम प्रमोद महाजन है, मैं लोकसभा सांसद हूं और मेरी पार्टी संख्या बल में सदन की सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन हम विपक्ष में बैठते हैं। फिर मैंने पानीग्रही की ओर इशारा करते हुए कहा कि इनकी पार्टी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और यह सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। फिर मैंने एमए देवी को उठाते हुए कहा कि इनकी पार्टी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और ये संयुक्त मोर्चा के सदस्य हैं लेकिन सरकार के बाहर हैं।’

महाजन से भाषण से गूंज उठे ठहाके

प्रमोद महाजन बोले, ‘फिर मैंने कहा कि यह रामाकांत खलप हैं। यह अपनी पार्टी के इकलौते सांसद हैं और यह सरकार में हैं।’ महाजन के इस भाषण पर सदन काफी देर तक ठहाकों से गूंजता रहा। देवगौड़ा जब प्रधानमंत्री बने तब वह संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। वह तब कनार्टक के मुख्यमंत्री थे। नेपाल को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता में कोई भी सरकार क्यों न आए, सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक नजदीकी के चलते नेपाल और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है।

‘भारत के साथ अच्छे संबंध जरूरी’

भारत में नेपाल के राजदूत रह चुके नीलांबर आचार्य ने कहा कि नई सरकार को भारत के साथ सौहार्द्रपूर्ण संबंध बनाए रखने की जरूरत है, हालांकि हर शासन की कार्य शैली में अंतर हो सकते हैं। आचार्य ने कहा, ‘बेशक, भारत के साथ हमारी कुछ समस्याएं हैं और इस तरह के मुद्दे से निपटने की मौजूदा सरकार की शैली पूर्ववर्ती सरकार से अलग हो सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘सीमा विवाद सहित इन सभी मुद्दों को राजनयिक माध्यमों से हल किए जाने की जरूरत है।’



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Pervez Musharraf Death News: तुमसे ना हो पाएगा कश्मीर पर कब्जा… जब पाकिस्तानी पत्रकार ने परवेज मुशर्रफ को हड़काया था

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पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ काम से ज्यादा बहसबाजी में विश्वास करते थे। उन्होंने एक बार दावा किया था कि अगर मंजूरी मिली तो वह तीन दिन में कश्मीर पर कब्जा कर सकते हैं। उनके इस दावे पर पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खूब खरीखोटी सुनाई थी।

 



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Pervez Musharraf Death: कारगिल के मास्‍टरमाइंड परवेज मुशर्रफ की वजह से पाकिस्‍तान पर भारत करने वाला था परमाणु हमला, आज गुमनामी में हो गया निधन

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इस्‍लामबाद: पाकिस्‍तान के तानाशाह रहे और पूर्व राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ का लंबी बीमारी के बाद दुबई में निधन हो गया। मुशर्रफ 79 साल के थे और पिछले काफी सालों से पाकिस्‍तान से बाहर रह रहे थे। मुशर्रफ वह शख्‍स थे जिनकी वजह से साल 1999 में भारत और प‍ाकिस्‍तान कारगिल की जंग में आमने सामने थे। मुशर्रफ उस समय पाकिस्‍तान आर्मी के चीफ थे और करीब एक साल से जंग की तैयारी में लगे हुए थे। कारगिल वह युद्ध था जिसकी वजह से पाकिस्‍तान पर परमाणु हमले का खतरा बढ़ गया था। अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन के करीबी और सीआईए के पूर्व अधिकारी ब्रूस रीडिल ने दावा किया था कि अगर अमेरिका बीच में नहीं आता और पाकिस्‍तान को ना समझाता तो भारत परमाणु हमला कर देता।

मुशर्रफ का एक आदेश और आतंकियों दाखिल
मुशर्रफ कारगिल की जंग के मास्‍टरमाइंड थे। मार्च 1999 से मई 1999 तक उन्‍होंने आतंकियों को कारगिल में घुसपैठ का आदेश दिया। पाकिस्‍तान की नॉर्दन लाइट इनफेंट्री ने कारगिल की कई चौंकियों पर कब्‍जा कर लिया था। ढाई महीने तक दोनों देशों की सेनाएं जंग कर रही थी। पाकिस्‍तानी सैनिकों और आतंकियों ने जबरन भारतीय चौकियों पर कब्‍जा कर लिया था। ऊंचाई पर लड़ी जा रहा युद्ध रोज नई चुनौतियां लेकर आता। इस युद्ध ने अमेरिका का रुख भारत के लिए बदलकर रख दिया और पाकिस्‍तान को जमकर घुड़की दी। पांच जुलाई 1999 का दिन अमेरिका को भी कभी नहीं भुलता है।

पाकिस्‍तान से भारत था नाराज
जंग के समय बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्‍ट्रपति थे। ब्रुस रीडिल ने इस वाकये का ए‍क जिक्र वॉशिंगटन पोस्‍ट के आर्टिकल में किया था। रीडिल ने लिखा था कि भारत के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी काफी नाराज थे। वाजपेयी लगातार मांग कर रहे थे कि पाकिस्‍तान को अपनी सेनाओं को पीछे करना पड़ेगा। वाजपेयी की जिद के आगे तत्‍कालीन नाक पीएम नवाज ने हार मानी। रीडिल के मुताबिक भारत पूरी तरह से तैयार था कि वह पाकिस्‍तान पर परमाणु हमला कर देगा।

क्लिंटन ने दी वॉर्निंग
4 जुलाई 1999 को नवाज ने क्लिंटन से मुलाकात की। इसी मीटिंग में क्लिंटन ने नवाज को बताया कि वाजपेयी काफी नाराज हैं। क्लिंटन ने बताया कि वाजपेयी ने उनसे कहा है कि उन्‍हें मालूम है कि परमाणु हमले में भारत का भी 50 फीसदी हिस्‍सा खत्‍म हो जाएगा लेकिन पाकिस्‍तान का भी नामोनिशान मिट जाएगा। नवाज इस बात से काफी नाराज हुए। तीन जुलाई को शरीफ ने क्लिंटन से कहा कि वह मदद के लिए तुरंत वॉशिंगटन पहुंच रहे हैं। क्लिंटन ने भी उन्‍हें चेतावनी देते हुए कहा था कि वह तभी अमेरिका आएं तब सेनाओं की वापसी का फैसला लेने को तैयार हों।

एक-दूसरे पर दोष
क्लिंटन ने 4 जुलाई को शरीफ से बातचीत शुरू की और उन्‍हें शिकागो ट्रिब्‍यून का एक कार्टून पकड़ाया। इस कार्टून में पाकिस्‍तान और भारत को आपस में परमाणु बम से लड़ते हुए दिखाया गया था। अमेरिका और अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय के दबाव में पाकिस्‍तान को झुकना पड़ा। नवाज शरीफ को मजबूर होना पड़ा कि वह अपनी सेनाओं को वापस बुलाएं। 1999 में मुशर्रफ का प्‍लेन पाकिस्‍तान में लैंड करने ही वाला था कि नवाज ने उन्‍हें आर्मी चीफ के पद से हटा दिया। मुशर्रफ इस जंग के लिए नवाज को दोष देते रहे और नवाज इसे मुशर्रफ के दिमाग की खुराफात बताते रहे।



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कारिगल जंग के जिम्मेदार थे मुशर्रफ, नवाज शरीफ को हटाकर पाकिस्तान की सत्ता पर हुए थे काबिज

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Image Source : PTI
कारिगल जंग के जिम्मेदार थे मुशर्रफ

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का दुबई के अस्पताल निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार थे। उन पर काफी लंबे समय से मुकदमा चल रहा था। राजद्रोह के मामले में उन्हें एक विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। वे लंबे समय से पाकिस्तान से बाहर ही रह रहे थे। लेकिन पिछले कुछ अरसे से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। ये विडंबना है कि वे पाकिस्तान के पहले ऐसे सैन्य शासक रहे, जिन्हें अब तक के इतिहास में मौत की सजा सुनाई गई थी। 

भारत के खिलाफ कारगिल की जंग के लिए उन्हें कसूरवार माना जाता है। 1999 में जब कारगिल युद्ध हुआ, तब वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख थे। ऐसा कहा जाता है कि  उन्होंने करगिल युद्ध के बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ को भी अंधेरे में रखा था। 

कारगिल जंग पर नवाज शरीफ को अंधेरे में रखा

नवाब शरीफ और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री के बीच रिश्तों की बर्फ पिघल रही थी, अटलजी शांति की बस में सवार होकर लाहौर गए थे। लेकिन  1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट करके नवाज शरीफ को सत्‍ता से बेदखल कर दिया। उस समय नवाज शरीफ को पता ही नहीं चला, क्योंकि वे श्रीलंका में थे। इसके बाद मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध शुरू कर दिया। हालांकि भारत ने मुशर्रफ के इरादों को नेस्तनाबूत कर दिया और ​कारगिल पर जीत हासिल कर ली थी। 

नवाज शरीफ को हटाकर परवेज मुशर्रफ ने संभाली थी कमान

जनरल परवेज मुशर्रफ श्रीलंका में थे तो नवाज शरीफ ने शक के आधार पर सेनाध्यक्ष के पद से हटा दिया। शरीफ ने मुशर्रफ के स्थान पर जनरल अजीज को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया। नवाज यहीं गलती कर बैठे और यह नहीं समझ पाए कि जनरल अजीज भी परवेज मुशर्रफ के ही वफादार हैं। आखिरकार शरीफ जिस सैन्य तख्तापलट की आशंका से घिरे थे वह हो ही गया।

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