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F-16 vs Rafale: कितना ताकतवर है पाकिस्तान का F-16 फाइटर जेट, जानें राफेल के मुकाबले कितना खतरनाक

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अमेरिका ने भारत के विरोध को खारिज करते हुए पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमान के पैकेज को मंजूरी दे दी है। बाइडेन प्रसाशन ने हाल में ही 450 मिलियन डॉलर मूल्य की इस डील के बारे में अमेरिक कांग्रेस को सूचित किया है। अब अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी मिलते ही पाकिस्तानी एफ-16 की ओवरहॉलिंग, इंजन की मरम्मत और दूसरे उपकरण देने का काम तुरंत शुरू किया जा सकता है। भारत ने नई दिल्ली आए अमेरिका के शीर्ष अधिकारी डोनाल्ड लू के साथ बैठक के दौरान इस मामले को उठाया था। लेकिन, अमेरिका ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इसमें विमानों में नई कार्यक्षमता की कोई योजना नहीं है और इससे जुड़े नए हथियार भी नहीं दिए जाएंगे। बाइडेन प्रशासन का दावा है कि पाकिस्तान को दिए जा रहे पैकेज से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर असर नहीं पड़ेगा।

अमेरिका ने एफ-16 डील को बताया द्विपक्षीय संबंधों का अहम हिस्सा

बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान को 45 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता देने के कदम को जायज ठहराते हुए कहा है कि एफ-16 लड़ाकू विमान कार्यक्रम अमेरिका-पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों का अहम हिस्सा है। अमेरिकी सरकार ने कहा कि इन लड़ाकू विमानों के बेड़े से पाकिस्तान को आतंकवाद रोधी अभियान के संचालन में मदद मिलेगी। बाइडेन प्रशासन ने आठ सितंबर को पाकिस्तान को एफ-16 युद्धक विमानों के वास्ते 45 करोड़ डॉलर की मदद देने की मंजूरी दी थी। पिछले चार वर्षों में वाशिंगटन की ओर से इस्लामाबाद को दी गई यह पहली बड़ी सुरक्षा सहायता है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि हमने हाल ही में कांग्रेस (संसद) को अवगत कराया है कि हम पाकिस्तानी वायु सेना के एफ-16 विमानों की मरम्मत और रखरखाव के लिए 45 करोड़ डॉलर देने जा रहे हैं।

पाकिस्तान को कैसे मिले थे एफ-16 लड़ाकू विमान

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अफगानिस्तान पर सोवियत संघ के हमले के वक्त पाकिस्तान और अमेरिका में गाढ़ी दोस्ती हुआ करती थी। उस समय 1981 में अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमान बेचने की डील फाइनल की थी। लेकिन इसके बाद पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण को लेकर दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ने लगे। अमेरिका को डर था कि पाकिस्तान परमाणु हमला करने के लिए उसके लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर सकता है। अमेरिका से 28 एफ-16 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए पाकिस्तान ने पहले ही 65.8 करोड़ डॉलर चुका दिए थे, जिसे बाद में वापस लौटा दिया गया था। लेकिन, साल 2001 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले के बाद दोनों देशों रे रिश्ते में फिर गरमाहट आई। आतंकवाद के खिलाफ अभियान में पाकिस्तान के सहयोग को देखते हुए अमेरिका ने प्रतिबंध हटाए और 18 एफ-16 लड़ाकू विमान बेचे। 2016 में अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ करीब 70 करोड़ डॉलर का सौदा किया। इसके तहत उसे आठ एफ-16 ब्लॉक 52 विमान बेचे।

पाकिस्तान के पास कितने एफ-16 हैं

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पाकिस्तानी वायु सेना के पास कुल 85 एफ-16 लड़ाकू विमान हैं। इसका दावा फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के एरॉन स्टीन और रॉबर्ट हैमिल्टन की साल 2020 की रिपोर्ट में किया गया है। इनमें से 66 पुराने ब्लॉक 15 के हैं और 19 आधुनिक ब्लॉक 52 मॉडल हैं। पाकिस्तान अपने एफ-16 फ्लीट को भारत से लगी सीमाओं पर तैनात कर रखा है। इन्हीं लड़ाकू विमान की बदौलत पाकिस्तान बार-बार हवाई श्रेष्ठता के गुणगान करते रहता है। 2019 में 27 फरवरी को पाकिस्तान ने भारत-पाकिस्तान सीमा के पास एफ-16 विमान के जरिए भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की थी। जिसकी जवाबी कार्रवाई में स्वाड्रन लीडर अभिनंदर वर्धमान ने मिग-21 बाइसन से पाकिस्तान के एक एफ-16 को नौशेरा सेक्टर में मार गिराया था। हालांकि, बेइज्जती से बचने के लिए पाकिस्तान ने कभी भी इस घटना को स्वीकार नहीं किया।

एफ-16 फाइटर जेट कितना खतरनाक

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जनरल डायनेमिक्स एफ-16 फाइटिंग फाल्कन एक सिंगल इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है। इसे मूल रूप से अमेरिकी वायु सेना के लिए जनरल डायनेमिक्स ने विकसित किया है। इसे एयर सुपिरियॉरिटी ऑल वेदर मल्टीरोल फाइटर जेट के तौर पर बनाया गया था। 1976 में उत्पादन को मंजूरी मिलने के बाद से अब तक 4,600 से अधिक विमानों का निर्माण किया जा चुका है। हालांकि, अमेरिकी वायु सेना अब अपने लिए एफ-16 को नहीं खरीदती है। बल्कि, इसका निर्माण दूसरे देशों को निर्यात करने के लिए किया जाता है। 1993 में जनरल डायनेमिक्स ने अपने विमान निर्माण व्यवसाय को लॉकहीड कॉर्पोरेशन को बेच दिया था। इसके बाद जनरल डायनेमिक्स मार्टिन मैरिएटा के साथ 1995 के विलय के बाद लॉकहीड मार्टिन का हिस्सा बन गया।

25 देशों की वायु सेना में शामिल है एफ-16

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एफ-16 लड़ाकू विमान का वजन 9,207 किलोग्राम है। इसकी रेंज 4,220 किलोमीटर की बताई जाती है। एफ-16 के एक यूनिट की कीमत 14600000 से 18800000 डॉलर के बीच है। इस विमान का इस्तेमाल अमेरिका के अलावा दुनियाभर के 25 देशों की वायु सेनाएं करती हैं। यह विमान अडवांस एयरोडायनेमिक्स और एवियॉनिक्स से लैस है। इस विमान को हवा में पैतरेबाजी में माहिर बनाने के लिए फ्लाई-बाय-वायर और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम से भी लैस किया गया है। F-16 पहला लड़ाकू विमान था जिसे 9-जी प्रेशर पैदा करने वाले मनुवर को करने के लिए बनाया गया था। यह मैक 2 से अधिक की अधिकतम स्पीड तक पहुंच सकता है। पालयट को बेहतर दृश्यता प्रदान करने के लिए इसमें फ्रेमलेस कैनोपी, साइड माउंटेड कंट्रोल स्टिक और पायलट पर जी फोर्स के प्रभाव को कम करने के लिए एक स्पेशल सीट भी लगाई गई है।

इन हथियारों से लैस है एफ-16 लड़ाकू विमान

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प्रारंभित तौर पर बनाए गए एफ-16 लड़ाकू विमानों पर रडार गाइडेड एआईए-7 स्पैरो मिसाइल के अलावा कई दूसरी हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों से लैस किया गया था। बाद के वेरिएंट्स AIM-120 AMRAAM को भी फायर कर सकते हैं। इसके अलावा यह लड़ाकू विमान कई तरह की दूसरी मिसाइलों, रॉकेट और बम की विस्तृत रेंज के साथ उड़ान भर सकता है। इस विमान के नौ हार्ड पाइंट्स पर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेशर्स (ईसीएम), नेविगेशन, टारगेटिंग या हथियार पॉड और फ्यूल टैंक लगाए जा सकते हैं। इनमें से 6 हार्ड पाइंट्स पंखों के नीचे, दो विंगटिप्स पर और एक फ्यूजलॉर्ज के नीचे दिया गया है। फ्यूजलॉर्ज के नीचे दो अन्य स्थान सेंसर या रडार पॉड्स के लिए उपलब्ध हैं। F-16 में 20 मिमी (0.787 इंच) M61A1 वल्कन कैनन लगी हुई है, जिसे कॉकपिट के बाईं ओर फ्यूजलॉर्ज के अंदर लगाया गया है।

राफेल के मुकाबले एफ-16 कितना ताकतवर

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भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे हैं। पाकिस्तान ने तब यह दलील दी थी कि भारत क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ने के लिए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद कर रहा है। इससे ही समझा जा रहा है कि राफेल पाकिस्तान के एफ-16 की तुलना में ज्यादा ताकतवर है। पाकिस्तान का एफ-16 3.5 जेनरेशन का लड़ाकू विमान है जबकि, राफेल 4.5 जेनरेशन का है। राफेल में कई अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है जो एफ-16 में नहीं है। राफेल की मनुवर करने की ताकत, मिसाइल लॉन्चिंग क्षमता गजब की है। यह लड़ाकू विमान बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल दागने में महिर है। एफ-16 की तुलना भारत के सुखोई एसयू-30 एमकेआई और मिराज-2000 से की जा सकती है।



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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज, लोगों के सपोर्ट में बोला UN- ”प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करना सीखे चीन’

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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज

चीन में कोरोना के चलते लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। एक तो कोरोना का प्रकोप ऊपर से सरकार की सख्ती और ना मानने पर पुलिस की कार्रवाई ने लोगों को प्रदर्शन करने पर मजूबर कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चीन को दो टूक सुनाया है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने चीन से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए लोगों को हिरासत में नहीं लेने का आग्रह किया है।

‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ का विरोध 

चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। वहीं कोरोना के चलते पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। 

लोगों को पुलिस की कारों में बांधा गया

शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। 

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दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी फटा, अमेरिका में बह रही आग की नदियां, आसमान हुआ लाल

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World Largest Volcano: दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिया ज्वालामुखी हवाई का मौना लोआ है। ये ज्वालामुखी रविवार को फट गया है। अभी ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा शिखर पर ही है। इससे स्थानीय लोगों को कोई खतरा नहीं है। यूनाइटेट स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे लगातार लावा के बहाव की निगरानी कर रहा है।

 



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चीन में ‘A4 क्रांति’, क्यों सादे कागज लहरा कर जिनपिंग की सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन?

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बीजिंग: चीन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कागज के खाली पन्ने एक प्रतिष्ठित वस्तु बन गए हैं, जिसे कई लोग ‘श्वेत पत्र क्रांति’, ‘कोरी चादर क्रांति’ या ‘ए4 क्रांति’ कहते हैं। देशभर में विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कागज की एक कोरी चादर पकड़े देखा गया। कुछ का कहना है कि यह सेंसरशिप से बचने का एक तरीका है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वायरल वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है, जिसमें नानजिंग के कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक महिला कोरे कागज के एक लंबे टुकड़े का एक छोर पकड़े हुई है और दूसरे छोर को एक अज्ञात व्यक्ति पकड़े हुआ है।

उस रात बाद के एक अन्य वीडियो में कैंपस में दर्जनों और छात्रों को श्वेत पत्र के टुकड़ों को पकड़े हुए देखा गया, जो मौन खड़े थे। सप्ताहांत में अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए। शनिवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला ने बीबीसी को बताया, ‘‘निश्चित रूप से कागज पर कुछ भी नहीं लिखा था, लेकिन हम जानते हैं कि यह किस चीज का प्रतीक है।’’

छात्रों के बीच प्रचलित है विरोध
कागज निर्माता शंघाई एम एंड जी स्टेशनरी ने उन अफवाहों का खंडन किया है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सभी ए4 पेपर को अलमारियों से हटा लिया है। कागज के खाली टुकड़े चीन में प्रदर्शनकारियों के लिए अवज्ञा का प्रतीक बन गए हैं, खासकर विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच। वे देश में लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं।

चीन में हो रहा मौन विरोध
यह मौन विरोध का एक रूप है, लेकिन उनके लिए सेंसरशिप या गिरफ्तार होने से बचने का एक तरीका है। सोमवार को कंपनी ने शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर एक आपातकालीन नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि एक जाली दस्तावेज ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। बीबीसी ने बताया कि एम एंड जी के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। उत्पादन और संचालन कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।



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