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Coal India ने हरित क्षेत्र विकसित करने के लक्ष्य को समय से पहले ही पूरा किया

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भाषा / नई दिल्ली November 25, 2022






Coal India ने कहा है कि हरित क्षेत्र विकसित करने का वार्षिक लक्ष्य उसने नवंबर महीने के मध्य में ही पार कर लिया। दुनिया की सबसे बड़ी खनन कंपनी ने उम्मीद जताई है कि वह 70 करोड़ टन के उत्पादन लक्ष्य को भी पा लेगी। 


Coal India ने कहा कि 2022-23 के लिए उसका लक्ष्य 1,510 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का था लेकिन उसने 15 नवंबर तक 1,526 हेक्टेयर भूमि में पौधारोपण किया जो लक्ष्य से अधिक है। 


कंपनी ने कहा, ‘अधिक पौधारोपण से प्रतिवर्ष 76,544 टन कार्बन को अवशोषित करने में मदद मिलेगी। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए हाल के वर्षों में कोल इंडिया ने अपने खनन क्षेत्रों को हरित बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।’ 


Coal India का पौधारोपण वाला क्षेत्र 2020-21 के 862 हेक्टेयर से अब तक 77 फीसदी बढ़ चुका है। बीते पांच वर्षों में, इस वर्ष मार्च माह तक 4,392 हेक्टेयर क्षेत्र को हरित बनाने से प्रतिवर्ष 2.2 लाख टन कार्बन सोखने की क्षमता विकसित हो गई है। 


कंपनी के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने कहा, ‘कोल इंडिया का लक्ष्य 2026-27 तक पूरी तरह से शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली कंपनी बनना है।’ कोल इंडिया ने 2021-22 तक 30.42 लाख पौधे रोपे हैं जिसके साथ खनन वाले इलाकों में हरित क्षेत्र बढ़कर 1,468.5 हेक्टेयर हो गया है। दूसरी ओर कंपनी का उत्पादन 24 नवंबर तक सालाना आधार पर 17 फीसदी बढ़कर 40 करोड़ टन हो गया। 



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हफ्ते के पहले कारोबारी दिन तेजी के साथ हो सकती है घरेलू बाजार की शुरुआत

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SGX Nifty इस समय 34 अंकों के उछाल के साथ 18695 के स्तर पर है।
बीएस वेब टीम / नई दिल्ली November 28, 2022






फेडरल रिजर्व मिनट्स में ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की बात के बाद से वैश्विक बाजार में मजबूती का माहौल बना हुआ है। घरेलू बाजार की बात करें तो बीते हफ्ते बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया और रिकॉर्ड स्तर बंद हुआ।

 

SGX Nifty इस समय 34 अंकों के उछाल के साथ 18695 के स्तर पर है।  इससे हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है।

 

अन्य एशियाई बाजार की बात करें तो जापान के NIKKEI  में 0.4 फीसदी और कोरिया के KOSPI में 0.75 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। 

 

डाओ जोन्स फ्यूचर में 0.28 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है।  बीते हफ्ते सेंसेक्स 62293 के नए ऑल टाइम हाई पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 18512 के नए 52 हफ्ते की ऊंचाई पर बंद हुआ था। 

 

इस बीच, हफ्ते के पहले कारोबारी दिन व्यापार के लिहाज से इन शेयरों पर रखें नजर- 

Pharma:

अप्रैल-अक्टूबर की अवधि में उच्च निर्यात की रिपोर्ट के बाद फार्मा कंपनियों के शेयरों के फोकस में रहने की संभावना है। अप्रैल-अक्टूबर की अवधि के दौरान भारत से फार्मास्युटिकल निर्यात में 4.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 14.57 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 

HFCL:

कंपनी ने की वाराणसी में ईपीसी सेवाएं प्रदान करने के लिए एसडब्ल्यूएसएम से 1,770 करोड़ रुपये की डील।  उक्त परियोजना को कंपनी द्वारा JWIL Infra के साथ कंसोर्टियम पार्टनर के रूप में क्रियान्वित किया जाएगा।

Insurance:

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने शुक्रवार को बीमा कंपनियों को पंजीकृत करने और उनमें निवेश करने के नियमों में ढील देने के लिए संशोधनों को मंजूरी दे दी। नए नियमों के अनुसार, निजी इक्विटी (पीई) फंड अब सीधे बीमा कंपनियों में पैसा लगा सकते हैं, और उनके द्वारा विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) के माध्यम से निवेश को वैकल्पिक बना दिया गया है, इस प्रकार लचीलापन प्रदान किया गया है। अधिक पढ़ें

Castrol:

कंपनी ने ऑटोमोबाइल आफ्टरमार्केट प्लेयर, की मोबिलिटी सॉल्यूशंस में 7.09 प्रतिशत हिस्सेदारी 487.5 करोड़ रुपये में हासिल करने की योजना बनाई है।



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हर तिमाही 1 हजार करोड़ रुपये वसूली हमारा लक्ष्य

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शाइन जैकब /  November 27, 2022






इंडियन ओवरसीज बैंक का शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में 33 प्रतिशत बढ़ा है। बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी पार्थ प्रतिम सेनगुप्ता ने शाइन जैकब से वृद्धि के खाके, संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार की योजना और भारत पर वैश्विक वित्तीय संकट के प्रभाव के बारे में बात की। संपादिश अंशः 

दूसरी तिमाही में आपका लाभ 33 फीसदी बढ़ गया। वृद्धि के मुख्य कारक क्या थे? 

सबसे पहले पिछले ढाई साल की आईओबी की यात्रा को देखें। हमने मार्च 2020 में 18 तिमाहियों के नुकसान के बाद पहली बार मुनाफा दर्ज करना शुरू किया। इसके बाद से लगातार हम सालाना आधार पर अच्छी वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। यह हर तिमाही में करीब 20-30 फीसदी के दायरे में रहा है। इस तिमाही में भी मुख्य रूप से ब्याज आय में वृद्धि से लाभ देखा गया है। ऋण पोर्टफोलियो में अच्छी वृद्धि हुई है। जमा के मोर्चे पर, जमा की लागत में बढ़ोतरी हुई है।

कुल मिलाकर एनआईएम (ब्याज से शुद्ध मुनाफा) बढ़ा है और यह हमेशा चिंता का विषय रहा है। हमारा एनआईएम पहले करीब 2.5 फीसदी था और यह बढ़कर करीब 2.79 फीसदी हो गया है। यह वृद्धि में योगदान देने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। इससे परिसंपत्तियों की वापसी में अच्छी वसूली में भी मदद मिली है। इससे हमें आंकड़े सुधारने में मदद मिली। हमारा लक्ष्य एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) और तकनीकी बट्टे खाते में डालने से मिलाकर तिमाही लगभग 1,000 करोड़ रुपये वसूली का है। 

आप सितंबर 2021 में पीसीए से बाहर आए। उसके बाद से आप बैंक की प्रगति को किस तरह देखते हैं? 

यह काफी कठिन सफर रहा है क्योंकि हम 6 साल से पीसीए में थे। पिछली कुछ तिमाहियों में आरबीआई ने हमें पीसीए से बाहर निकालने के बाद भी बहुत ध्यान से देखा। हम सितंबर 2021 के बाद से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हम चारों तिमाहियों की बैलेंस शीट लेकर आए हैं। सभी मोर्चों पर प्रगति हुई है, चाहे वह एनपीए की वसूली हो या ऋण वृद्धि।

मार्च 2022 तक बैंक की ओर से दिया गया कुल कर्ज 1.55 लाख करोड़ रुपये था। आगे आप इसे कहां देखते हैं?

जब हमने चालू वर्ष के लिए अपना बजट बनाया था, उसका ऋण लक्ष्य लगभग हासिल कर लिया गया है। मार्च 2022 तक एडवांस पोर्टफोलियो उस साल के लिए 1.55 लाख करोड़ रुपये था। हमने 18,000 करोड़ रुपये की वृद्धि का लक्ष्य रखा था, जिसमें से लगभग 17,000 करोड़ रुपये हासिल कर लिए गए हैं। जैसा कि रुझान जारी है, हम देखते हैं कि बुनियादी ढांचे में अच्छा निवेश हो रहा है। हमें विश्वास है कि यह जारी रहेगा। हम इस साल 7,000-8,000 करोड़ रुपये की और वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।

इस वर्ष के लिए आपकी पूंजी जुटाने की योजना की स्थिति क्या है?

हमारे पास पहले से ही क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के जरिए करीब 1,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। हमने निवेशकों से बात करना शुरू कर दिया है और बाजार की अच्छी स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। हम एक और अच्छे तिमाही परिणाम के साथ आना चाहते हैं जो निवेशकों में अधिक विश्वास पैदा कर सके। दिसंबर तिमाही तक हमारा लक्ष्य अपने निवेशकों को अच्छी बैलेंस शीट और भरोसा देना है।

सकल एनपीए में सुधार के लिए आपकी क्या योजना है?

हमने अपनी यात्रा उस समय शुरू की जब हमारा सकल एनपीए 25 फीसदी से अधिक था। हम आज 8.53 फीसदी पर हैं। एक साल पहले हमारा जीएनपीए 10.21 फीसदी था। हमारा लक्ष्य इसे घटाकर 7.5 से 8 फीसदी पर लाने का है।



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प्रत्यक्ष विदेशी इक्विटी निवेश घटा

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श्रेया नंदी / नई दिल्ली 11 27, 2022






भारत में निवेश करने वाले शीर्ष 10 देशों में से 6 देशों मॉरिशस, अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स, जर्मनी और केमन आईलैंड्स से पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही की तुलना में इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रत्यक्ष विदेशी इक्विटी निवेश कम हुआ है। निवेश में यह गिरावट मुख्य रूप से बाहरी क्षेत्र में चुनौतियों, मौद्रिक सख्ती और प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के डर की वजह से आई है। 

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यहां तक कि क्रमिक आधार पर भी एफडीआई इक्विटी निवेश अप्रैल से लगातार नीचे की ओर रहा है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों के अनुसार दो साल तक मजबूत वृद्धि के बाद अप्रैल-सितंबर छमाही के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी इक्विटी निवेश 14 फीसदी घटकर 26.9 अरब डॉलर रह गया। कुल एफडीआई, जिसमें अनिगमित निकायों की इक्विटी पूंजी, पुनर्निवेश आय और अन्य पूंजी शामिल है, अप्रैल-सितंबर के दौरान 8 फीसदी घटकर 38.95 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले 42.2 अरब डॉलर था। 

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं, ‘अगर आप अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से एफडीआई प्रवाह को देखें, तो उसमें गिरावट आ रही है। ये वे देश हैं जहां मात्रात्मक सख्ती की गई है। इसका मतलब है कि उभरते बाजारों में निवेश करने के लिए कम संसाधन हैं। यह एक सीधी प्रतिक्रिया है कि दुनिया भर में ब्याज दरें सख्त हो रही हैं।’ सबनवीस ने साफ करते हुए कहा, ‘यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इससे पहले जब एफडीआई प्रवाह में वृद्धि हुई थी, मौद्रिक नरमी थी और निवेशकों के लिए बहुत सारे फंड उपलब्ध थे।’

एफडीआई के मामले में, एक कंपनी दूसरे देश में एक व्यवसाय में नियंत्रित स्वामित्व लेती है। इससे उस देश में पैसा, कौशल और प्रौद्योगिकी आती है। यह आमतौर पर लंबी अवधि के विकास में परिणत होता है। साथ ही यह उस देश के लिए ठोस निवेश गंतव्य के रूप में उसकी वैश्विक छवि बनाता है। 

विशेषज्ञों ने कहा कि निवेशकों के हाथ में सीमित संसाधनों के साथ, मंदी के रुझान के बीच एफडीआई कम से कम मार्च तक धीमा होने की उम्मीद है। खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अतुल पांडेय ने कहा कि देश में एफडीआई प्रवाह कम होने के दो कारण हैं। पांडेय कहते हैं, ‘प्रमुख कारण वैश्विक मंदी है और रूस-यूक्रेन के संघर्ष के बीच यह भी निश्चित नहीं है कि यह कब तक चलेगी।

जबकि दूसरा कारण यह है कि अमेरिका में बांड बाजार बेहतर परिणाम दे रहा है। नतीजतन, निवेशक भारत और चीन जैसे विकासशील देशों के बजाय घरेलू बाजार या विकसित देशों में अपना पैसा लगा रहे हैं।’ आंकड़े दर्शाते हैं कि सकारात्मक वृद्धि दिखाने वाले देशों में सिंगापुर (24.38 फीसदी), संयुक्त अरब अमीरात (378.13 फीसदी), साइप्रस (916 फीसदी) और जापान (47.14 फीसदी) शामिल हैं।

Keyword: भारत, निवेश,


























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