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China Covid Quarantine: चीन 3 साल बाद खोलेगा बॉर्डर, क्‍वारंटाइन और पीसीआर टेस्‍ट खत्‍म, दुनिया के खिलाफ ड्रैगन की कौन सी साजिश?

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बीजिंग: चीन में 20 दिन में 25 करोड़ लोगों के कोविड-19 से संक्रमित होने की खबरें आ रही हैं लेकिन इसके बाद भी उसे कोविड बी ग्रेड बीमारी लग रही है। उस पर से चीनी सरकार का एक बड़ा फैसला हैरान करने वाला है। तीन साल बाद चीन ने तय किया है कि वह सभी सीमाओं को खोल देगा। आठ जनवरी से देश आने वाले लोगों के के लिए कोई क्‍वारंटाइन नहीं होगा। अधिकारियों की तरफ से इस बात की जानकारी मगलवार को दी गई है। जीरो कोविड पॉलिसी को मानने वाले चीन का यह फैसला सबको डरा रहा है। चीनी सरकार की मानें तो ऐसे लोग जो काम या स्‍टडी वीजा पर देश आ रहे हैं या फिर अपने परिवार वालों से मिलना चाहते हैं, उन्‍हें अब ज्‍यादा परेशानीं नहीं होगी।

कोविड के साथ बढ़ेगा आगे
चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है। अब उसने फैसला कर लिया है कि वह कोविड के साथ ही आगे बढ़ेगी। ऐसे में तीन साल के बाद लॉकडाउन हटाने, बॉर्डर को खोलने और अनिवार्य क्‍वारंटाइन को खत्‍म करने का फैसला किया गया है। चीनी विशेषज्ञों की मानें तो जीरो कोविड नीति की वजह से देश की अर्थव्‍यवस्‍था को काफी नुकसान हुआ। साथ ही लोगों में नाराजगी भी बढ़ गई थी। नवंबर में चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए और उनसे पद छोड़ने तक की मांग की जाने लगी थी। इसके बाद दिसंबर में तय किया गया कि जीरो कोविड नीति को खत्म किया जाएगा।
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फिर से खुलेंगे बॉर्डर
मार्च 2020 से चीन ने अपनी सीमाओं को बंद किया हुआ था। बॉर्डर को फिर से खोलना सबसे बड़ा फैसला बताया जा रहा है। अब जो भी चीन में दाखिल होगा उसे किसी भी तरह से क्‍वारंटाइन की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहले नियमों के तहत तीन हफ्तों तक क्‍वारंटाइन में रहना पड़ता था। इसे घटाकर हाल ही में पांच दिन तक के लिए किया गया था। सोमवार को राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य आयोग ने तय किया कि वह आठ जनवरी से कोविड को क्‍लास बी संक्रामक बीमारी के तौर पर समझेगी। अब न तो पीसीआर टेस्‍ट की जरूरत पड़ेगी और न ही क्‍वारंटाइन की। साथ ही चीन में आने वाली फ्लाइट्स की संख्‍या को भी पहले सीमित कर दिया गया था और अब इस सीमा को खत्‍म कर दिया गया है।
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कैसे थमेगा वायरस

चीन के लिए यह एक संघर्ष का विषय है कि वह तेजी से फैलते वायरस को प्रतिबंधों के अभाव में कैसे नियंत्रित करेगा। देश के अस्‍पताल भरे पड़े हैं और शवों के अंतिम संस्‍कार में भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। देश में इस समय कितने कोविड केसेज आ रहे हैं और कितने लोगों की मौत हो रही है, इस बारे में भी अब कोई जानकारी नहीं हैं। पिछले दिनों चीन ने कोविड कं आंकड़ो को जारी करना बंद कर दिया है। शुक्रवार तक देश में 4000 नए कोविड केसेज आए थे लेकिन अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक किसी की मौत नहीं हुई थी। रविवार को चीन ने फैसला किया कि अब कोविड आंकड़े जारी नहीं किए जाएंगे। ब्रिटिश फर्म एयरफिनिटी के मुताबिक चीन एक दिन में 10 लाख से ज्‍यादा केसेज और 5हजार से ज्‍यादा मौतों का सामना कर रहा है।



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Pervez Musharraf Death: कारगिल के मास्‍टरमाइंड परवेज मुशर्रफ की वजह से पाकिस्‍तान पर भारत करने वाला था परमाणु हमला, आज गुमनामी में हो गया निधन

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इस्‍लामबाद: पाकिस्‍तान के तानाशाह रहे और पूर्व राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ का लंबी बीमारी के बाद दुबई में निधन हो गया। मुशर्रफ 79 साल के थे और पिछले काफी सालों से पाकिस्‍तान से बाहर रह रहे थे। मुशर्रफ वह शख्‍स थे जिनकी वजह से साल 1999 में भारत और प‍ाकिस्‍तान कारगिल की जंग में आमने सामने थे। मुशर्रफ उस समय पाकिस्‍तान आर्मी के चीफ थे और करीब एक साल से जंग की तैयारी में लगे हुए थे। कारगिल वह युद्ध था जिसकी वजह से पाकिस्‍तान पर परमाणु हमले का खतरा बढ़ गया था। अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन के करीबी और सीआईए के पूर्व अधिकारी ब्रूस रीडिल ने दावा किया था कि अगर अमेरिका बीच में नहीं आता और पाकिस्‍तान को ना समझाता तो भारत परमाणु हमला कर देता।

मुशर्रफ का एक आदेश और आतंकियों दाखिल
मुशर्रफ कारगिल की जंग के मास्‍टरमाइंड थे। मार्च 1999 से मई 1999 तक उन्‍होंने आतंकियों को कारगिल में घुसपैठ का आदेश दिया। पाकिस्‍तान की नॉर्दन लाइट इनफेंट्री ने कारगिल की कई चौंकियों पर कब्‍जा कर लिया था। ढाई महीने तक दोनों देशों की सेनाएं जंग कर रही थी। पाकिस्‍तानी सैनिकों और आतंकियों ने जबरन भारतीय चौकियों पर कब्‍जा कर लिया था। ऊंचाई पर लड़ी जा रहा युद्ध रोज नई चुनौतियां लेकर आता। इस युद्ध ने अमेरिका का रुख भारत के लिए बदलकर रख दिया और पाकिस्‍तान को जमकर घुड़की दी। पांच जुलाई 1999 का दिन अमेरिका को भी कभी नहीं भुलता है।

पाकिस्‍तान से भारत था नाराज
जंग के समय बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्‍ट्रपति थे। ब्रुस रीडिल ने इस वाकये का ए‍क जिक्र वॉशिंगटन पोस्‍ट के आर्टिकल में किया था। रीडिल ने लिखा था कि भारत के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी काफी नाराज थे। वाजपेयी लगातार मांग कर रहे थे कि पाकिस्‍तान को अपनी सेनाओं को पीछे करना पड़ेगा। वाजपेयी की जिद के आगे तत्‍कालीन नाक पीएम नवाज ने हार मानी। रीडिल के मुताबिक भारत पूरी तरह से तैयार था कि वह पाकिस्‍तान पर परमाणु हमला कर देगा।

क्लिंटन ने दी वॉर्निंग
4 जुलाई 1999 को नवाज ने क्लिंटन से मुलाकात की। इसी मीटिंग में क्लिंटन ने नवाज को बताया कि वाजपेयी काफी नाराज हैं। क्लिंटन ने बताया कि वाजपेयी ने उनसे कहा है कि उन्‍हें मालूम है कि परमाणु हमले में भारत का भी 50 फीसदी हिस्‍सा खत्‍म हो जाएगा लेकिन पाकिस्‍तान का भी नामोनिशान मिट जाएगा। नवाज इस बात से काफी नाराज हुए। तीन जुलाई को शरीफ ने क्लिंटन से कहा कि वह मदद के लिए तुरंत वॉशिंगटन पहुंच रहे हैं। क्लिंटन ने भी उन्‍हें चेतावनी देते हुए कहा था कि वह तभी अमेरिका आएं तब सेनाओं की वापसी का फैसला लेने को तैयार हों।

एक-दूसरे पर दोष
क्लिंटन ने 4 जुलाई को शरीफ से बातचीत शुरू की और उन्‍हें शिकागो ट्रिब्‍यून का एक कार्टून पकड़ाया। इस कार्टून में पाकिस्‍तान और भारत को आपस में परमाणु बम से लड़ते हुए दिखाया गया था। अमेरिका और अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय के दबाव में पाकिस्‍तान को झुकना पड़ा। नवाज शरीफ को मजबूर होना पड़ा कि वह अपनी सेनाओं को वापस बुलाएं। 1999 में मुशर्रफ का प्‍लेन पाकिस्‍तान में लैंड करने ही वाला था कि नवाज ने उन्‍हें आर्मी चीफ के पद से हटा दिया। मुशर्रफ इस जंग के लिए नवाज को दोष देते रहे और नवाज इसे मुशर्रफ के दिमाग की खुराफात बताते रहे।



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कारिगल जंग के जिम्मेदार थे मुशर्रफ, नवाज शरीफ को हटाकर पाकिस्तान की सत्ता पर हुए थे काबिज

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Image Source : PTI
कारिगल जंग के जिम्मेदार थे मुशर्रफ

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का दुबई के अस्पताल निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार थे। उन पर काफी लंबे समय से मुकदमा चल रहा था। राजद्रोह के मामले में उन्हें एक विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। वे लंबे समय से पाकिस्तान से बाहर ही रह रहे थे। लेकिन पिछले कुछ अरसे से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। ये विडंबना है कि वे पाकिस्तान के पहले ऐसे सैन्य शासक रहे, जिन्हें अब तक के इतिहास में मौत की सजा सुनाई गई थी। 

भारत के खिलाफ कारगिल की जंग के लिए उन्हें कसूरवार माना जाता है। 1999 में जब कारगिल युद्ध हुआ, तब वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख थे। ऐसा कहा जाता है कि  उन्होंने करगिल युद्ध के बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ को भी अंधेरे में रखा था। 

कारगिल जंग पर नवाज शरीफ को अंधेरे में रखा

नवाब शरीफ और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री के बीच रिश्तों की बर्फ पिघल रही थी, अटलजी शांति की बस में सवार होकर लाहौर गए थे। लेकिन  1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट करके नवाज शरीफ को सत्‍ता से बेदखल कर दिया। उस समय नवाज शरीफ को पता ही नहीं चला, क्योंकि वे श्रीलंका में थे। इसके बाद मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध शुरू कर दिया। हालांकि भारत ने मुशर्रफ के इरादों को नेस्तनाबूत कर दिया और ​कारगिल पर जीत हासिल कर ली थी। 

नवाज शरीफ को हटाकर परवेज मुशर्रफ ने संभाली थी कमान

जनरल परवेज मुशर्रफ श्रीलंका में थे तो नवाज शरीफ ने शक के आधार पर सेनाध्यक्ष के पद से हटा दिया। शरीफ ने मुशर्रफ के स्थान पर जनरल अजीज को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया। नवाज यहीं गलती कर बैठे और यह नहीं समझ पाए कि जनरल अजीज भी परवेज मुशर्रफ के ही वफादार हैं। आखिरकार शरीफ जिस सैन्य तख्तापलट की आशंका से घिरे थे वह हो ही गया।

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Pervez Musharraf Passed Away: पाकिस्तानी सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ का निधन, बंदूक के दम पर किया था देश पर राज

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Pervez Musharraf Death: पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ का दुबई में निधन हो गया है। मुशर्रफ करगिल युद्ध के वक्त पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख थे। उन्होंने ही सरकार को बिना बताए इस युद्ध की प्लानिंग की थी। बाद में मुशरर्फ को देश निकाला दिया गया और वह दुबई में जाकर बस गए थे।

 



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