हाल ही में पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली (Brett Lee) को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट हॉल ऑफ फेम (Australian Cricket Hall of Fame) में शामिल किया गया। यह सम्मान उनकी शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर, तेज गति, अद्वितीय कौशल और खेल भावना का प्रमाण है। ली क्रिकेट इतिहास के उन चुनिंदा गेंदबाजों में से हैं जिन्होंने लगातार 160 किमी/घंटा की रफ्तार को छुआ।
क्रिकेट की दुनिया में कुछ ही खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिनकी मैदान पर मौजूदगी मात्र से विपक्षी टीम के बल्लेबाजों में दहशत पैदा हो जाती है। ब्रेट ली उन्हीं दुर्लभ तेज गेंदबाजों की श्रेणी में आते हैं। ऑस्ट्रेलिया के लिए 1999 से 2012 तक अपनी सेवाएं देने वाले ली को हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है, जब उन्हें आधिकारिक तौर पर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में जगह दी गई। यह सम्मान सिर्फ आंकड़ों के लिए नहीं है, बल्कि उस `एंटरटेनमेंट` और जुनून के लिए है जो उन्होंने हर गेंद में भरा।
रफ्तार का सौदागर: 160 किमी/घंटा की रफ्तार और स्विंग का मिश्रण
ब्रेट ली का नाम लेते ही दिमाग में सबसे पहले उनकी तेज रफ्तार आती है। शोएब अख्तर जैसे दिग्गज के साथ ली हमेशा सबसे तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल रहे। ली सिर्फ रफ्तार के भूखे नहीं थे; उनकी सबसे बड़ी कला यह थी कि उन्होंने गति को सटीक स्विंग और यॉर्कर के साथ जोड़ा। उनकी गेंदें अक्सर बल्लेबाजों को हैरान कर देती थीं।
अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में, ली ने ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व 76 टेस्ट मैचों, 221 वनडे और 25 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में किया। सभी प्रारूपों को मिलाकर उनके नाम 718 विकेट दर्ज हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनके 310 विकेट, जबकि वनडे में 221 विकेट, उनकी दीर्घायु और निरंतरता को दर्शाते हैं। एक ऐसा तेज गेंदबाज जो करियर के दौरान चोटों से जूझने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में विकेट लेता है, वह वास्तव में असाधारण है।
विजेता मशीन का अभिन्न अंग
ब्रेट ली का करियर सिर्फ व्यक्तिगत चमक तक सीमित नहीं था। वह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के स्वर्णिम युग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे, जब टीम ने विश्व क्रिकेट पर अपना दबदबा बनाया। ली तीन बार विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे—1999, 2003 और 2007।
2008 में, ली को प्रतिष्ठित एलन बॉर्डर मेडल (Allan Border Medal) से सम्मानित किया गया, जिसके तहत उन्हें ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया। यह पुरस्कार उनकी बहुमुखी प्रतिभा और खेल के प्रति उनके समर्पण को मान्यता देता है, जब टीम के पास पहले से ही ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गज मौजूद थे, तब ली ने अपनी अलग पहचान बनाई।
टी20 क्रांति और भारत में `बिंगा` का जुनून
ब्रेट ली सिर्फ टेस्ट या वनडे के खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि वह टी20 प्रारूप के शुरुआती अग्रदूतों में से एक थे। उन्होंने सिडनी सिक्सर्स के लिए बिग बैश लीग (BBL) का पहला खिताब जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हालांकि, ली की लोकप्रियता ने ऑस्ट्रेलिया की सीमाओं को पार कर लिया और भारत में उन्हें अपार स्नेह मिला। इसका श्रेय इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में उनके प्रदर्शन को जाता है, जहां वह कई टीमों के लिए खेले और अपनी मुस्कान तथा उत्साह से भारतीय प्रशंसकों का दिल जीता। ली का भारत के साथ संबंध सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था; उन्होंने भारतीय संगीत और फिल्म सहयोगों में भी भागीदारी की, जिसने उन्हें एक वैश्विक स्पोर्ट्स एंटरटेनर बना दिया।
यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारत में क्रिकेट का कोई भी प्रशंसक ली के तेज रनअप, हवा में लहराते बालों और विकेट लेने के बाद उनकी ट्रेडमार्क छलांग को कभी नहीं भूल सकता।
एक असाधारण राजदूत की विरासत
हॉल ऑफ फेम में ली के शामिल होने पर, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट हॉल ऑफ फेम के अध्यक्ष पीटर किंग ने कहा कि ली वास्तव में इस सम्मान के हकदार हैं। किंग के अनुसार, ली ने न केवल तेज गेंदबाजी की दुनिया को रोमांचक बनाया, बल्कि वह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के उत्कृष्ट राजदूत भी रहे।
“ब्रेट का प्रभाव केवल आंकड़ों से परे था। उन्होंने जिस तरह से खेल खेला, अपने विरोधियों के प्रति सम्मान दिखाया और अपने देश का प्रतिनिधित्व करने में जो गर्व महसूस किया, उससे उन्होंने दुनिया भर के प्रशंसकों को प्रेरित किया।” पीटर किंग ने बताया।
आज, ब्रेट ली एक सम्मानित कमेंटेटर के रूप में खेल में अपना योगदान देना जारी रखे हुए हैं। हॉल ऑफ फेम में उनकी एंट्री सिर्फ एक करियर का अंत नहीं, बल्कि उस विरासत का उत्सव है जिसने गति को एक कला का रूप दिया और अनगिनत युवा गेंदबाजों को तेज दौड़ने और गेंद को 160 की रफ्तार से फेंकने का सपना देखने के लिए प्रेरित किया।
