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Bihar News: मिशन 2024 के लिए CM नीतीश का बड़ा कदम ! प्रशांत किशोर से की मुलाकात

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Nitish kumar and Prashant Kishor

Bihar News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) बीजेपी (BJP) को छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ महागठबंधन की सरकार बनाने के बाद अब जोर-शोर से मिशन 2024 की तैयारियों में जुटे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने दिल्ली का दौरा किया था और कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मुलाकात की थी। इस बीच कल शाम नीतीश कुमार और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुलाकात हुई। इन दोनों के बीच करीब दो घंटे तक मुख्यमंत्री आवास में बातचीत हुई। इस मुलाकात के दौरान पवन वर्मा भी साथ थे। बताया जाता है कि प्रशांत किशोर को साथ लाने की जिम्मेदारी पवन वर्मा को दी गई थी।

नीतीश को बताया था फेविकॉल’ का ब्रांड एंबेसडर 

 हालांकि इससे पहले प्रशांत किशोर अपने बयानों में नीतीश कुमार पर लगातार हमले कर रहे थे। प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के बारे में कहा था कि उन्हें  ‘फेविकॉल’ का ब्रांड एंबेसडर होना चाहिए। प्रशांत किशोर ने कहा था- ‘अगर फेविकॉल कंपनी वाले मुझसे मिलेंगे तो मैं उनको सलाह दूंगा कि नीतीश कुमार को अपना ब्रांड एंबेसडर बना लें। किसी की भी सरकार हो लेकिन वह कुर्सी से चिपके हुए रहते हैं।’ 

इस बात की गारंटी कोई नहीं दे सकता कि नीतीश फिर से इधर-उधर नहीं होंगे

वहीं इंडिया टीवी को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगला विधानसभा चुनाव भी मौजूदा फॉर्मेशन में नहीं लड़ा जाएगा, यानी कि महागठबंधन के घटक दल एक साथ नहीं रह जाएंगे। प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि इस बात की गारंटी कोई नहीं दे सकता कि नीतीश कुमार फिर से इधर-उधर नहीं होंगे।

बिहार में सियासी बदलाव का असर राष्ट्रीय राजनीति पर नहीं पड़ेगा

 जब प्रशांत किशोर से पूछा गया कि क्या देश की राजनीति पर बिहार में हुई सियासी घटनाओं का असर होगा, उन्होंने कहा, ‘मेरे ख्याल से ऐसा नहीं होगा। यह एक राज्य विशेष में हुई घटना है। इसका असर बिहार तक सीमित होना चाहिए। राष्ट्रीय राजनीति पर इसका कोई बड़ा असर पड़ेगा, ऐसा मैं नहीं मानता। मैं अपनी राजनीतिक समझ के आधार पर इतना जरूर कह सकता हूं कि बिहार में अगला विधानसभा चुनाव इस फॉर्मेशन में नहीं होगा। मतलब कि एक तरफ बीजेपी और दूसरी तरफ महागठबंधन के 7 दल, अगला विधानसभा चुनाव ऐसे नहीं होगा।’

पहले भी पलट चुके हैं नीतीश कुमार

यह पूछे जाने पर कि क्या नीतीश कुमार फिर से इधर-उधर हो सकते हैं, उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल हो सकते हैं। इसमें संदेह की क्या बात है? आज बिहार में कौन इस बात की गारंटी ले सकता है कि नीतीश कुमार इधर-उधर नहीं हो सकते। मैं यह नहीं कह रहा कि वह होंगे, लेकिन इस बात की भी गारंटी कोई नहीं ले सकता कि नीतीश इधर-उधर नहीं होंगे। यहां तक कि खुद नीतीश कुमार ने भी नहीं कहा कि कुछ भी हो जाए मैं इधर-उधर नहीं करूंगा। पहले वह ऐसा कहके भी पलट चुके हैं, हालांकि वह अलग बात है।’





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हिमाचल में BJP की हार पर बोले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, करेंगे मंथन, कांग्रेस में सीएम बनने की होड़

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Himachal Election: भाजपा को सूबे में मिली शिकस्त पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि उनकी पार्टी हार की वजहों पर मंथन करेगी। कांग्रेस में सीएम बनने की होड़ है शायद इसलिए ही उसके नेता डरे हुए हैं।



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AAP और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के बीच गुजरात में मुस्लिम वोट बंटने से बीजेपी की हुई ‘बल्‍ले-बल्‍ले’

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गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने धमाकेदार प्रदर्शन कर सत्‍ता में वापसी की है

Gujarat Election Results 2022 : गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी की धमाकेदार जीत में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों ने भी अहम भूमिका निभाई. यह बात अलग है कि भगवा पार्टी ने चुनाव में एक भी मुस्लिम उम्‍मीदवार नहीं उतारा है. अब तक के रुझानों में राज्‍य की कई मुस्लिम बहुल सीटों पर सत्‍ताधारी पार्टी को कांग्रेस की जगह जीत हासिल करती नजर आ रही है. बड़ी आबादी वाली राज्‍य के 17 में से 12 सीटों पर बीजेपी बढ़त बनाए हुए है. यह संख्‍या वर्ष 2017 की तुलना में छह ज्‍यादा है.  कांग्रेस को इनमें से केवल सीटों पर ही बढ़त हासिल हुई है. खास बात यह है कि इसमें से अधिकांश सीटें कांग्रेस के वर्चस्‍व वाली रही हैं. 

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उदाहरण के तौर पर मुस्लिम बहुल दरियापुर सीट पर कांग्रेस का 10 सालों से कब्‍जा है, यहां कांग्रेस प्रत्‍याशी गयासुद्दीन शेख को बीजेपी के कौशिक जैन से हार मिली है. आम आदमी पार्टी (AAP), एक दर्जन से अधिक इन मुस्लिम बहुल सीटों में से किसी भी सीट पर बढ़त या जीत हासिल करने में नाकाम रही है. हालांकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP और असदुद्दीन ओवैसी की  AIMIM ने इन सीटों पर कांग्रेस के खाते में जाने वाले परंपरागत वोटों को विभाजित करने का काम किया है. AIMIM ने 13 प्रत्‍याशी उतारे थे जिसमें से दो गैर मुस्लिम थे जिन्‍होंने जमालपुर-खाड़‍िया और वडगाम सीट पर कांग्रेस के वोट बांटने का काम किया. जमालपुर-खाड़‍िया सीट से इमरान खेडावाला और वडमान सीट पर जिग्‍नेश मेवानी बारीक अंतर से पिछड़ रहे हैं.

गौरतलब है कि गुजरात के अब तक रुझानों में बीजेपी 157 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है जबकि विपक्षी पार्टियां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को उसने कोसों पीछे छोड़ दिया है. कांग्रेस जहां इस समय केवल 17 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है जबकि अरविंद केजरीवाल की AAP केवल पांच सीटों पर ही आगे है. पीएम मोदी का गृहराज्‍य होने के नाते गुजरात के नतीजों पर पूरे देश की नजर थी.  

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गुजरात में BJP की रिकॉर्ड जीत पर क्या बोले हार्दिक पटेल?



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Mainpuri ByPoll: डबल इंजन की सरकार पर भारी ‘नेताजी‘ की सहानुभूति लहर, डिंपल यादव जीत की ओर

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Dimple Yadav

मैनपुरी उपचुनाव: उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित मैनपुरी सीट से मुलायम सिंह यादव की बहू और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव जीत की ओर अग्रसर हैं। वे इस समय सवादो लाख से अधिक वा मुलायम सिंह यादव यानी ‘नेताजी‘ के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई थी। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारा था। 

चुनाव में आरजेडी, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम जैसी पार्टियों ने मुलायम सिंह यादव की रही इस सीट पर सहानुभूति के रूप में अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे थे। हालांकि बीजेपी ने इस सीट को जीतने की भरसक कोशिश की। बीजेपी ने रघुराज शाक्य को मैदान में उतारा, लेकिन यूपी की बीजेपी सरकार यानी बीजेपी की केंद्र और राज्य की डबल इंजन की सरकार पर ‘नेताजी‘ की सहानुभूति लहर भारी पड़ी।

मैनपुरी उपचुनाव की मतगणना में शुरू से ही डिंपल यादव ने अपने प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के रघुराज शाक्य से बढ़त बनाए रखी। पहले 24 हजार, फिर 50 हजार से अधिक और फिर 1 लाख से अधिक वोट, फिर सवा दो लाख से अधिक वोटों से वे आगे रहीं। जैसे जैसे मतगणना आगे बढ़ती रही,ए डिंपल और शाक्य के वोटों का अंतर भी आगे बढ़ता रहा। 

सपा के लिए मुलायम सिंह यादव की सहानुभूति लहर

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जिस तरह से अपनी पत्नी डिंपल को मैदान में उतारा और हाल ही में चाचा शिवपाल यादव ने भी अपनी बहू के लिए प्रचार में जितना जोर लगाया है, उससे सपा इस बात पर आश्वस्त थी कि मैनपुरी चुनाव का परिणाम उनके पक्ष में ही जाएगा। दरअसल, यूपी में मुलायम सिंह यादव, का राजनीतिक कद काफी बड़ा था। उनके निधन के बाद सहानुभूति की लहर में डिंपल यादव के पक्ष में ये सीट चली गई। 

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