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Benazir Bhutto: लादेन, मुशर्रफ या कोई और… बेनजीर भुट्टो को किसने मारा, 15 साल बाद भी है पाकिस्‍तान में सबसे बड़ा रहस्‍य

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रावलपिंडी: पाकिस्‍तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो अपनी मौत के 15 साल बाद भी यहां की जनता के बीच काफी लोकप्रिय हैं। रावलपिंडी के लियाकत बाग में हुई एक चुनावी रैली में भुट्टो को निशाना बनाया गया था। माना गया कि एक 15 साल की आत्‍मघाती हमलावर ने उनकी जान ले ली थी। अभी तक भुट्टो के कातिलों को सजा नहीं मिली है और उनके चाहने वालों को इंसाफ का इंतजार है। भुट्टो की हत्‍या आज भी एक रहस्‍य बनी हुई है। राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कई जांच हुई मगर कोई नहीं जान पाया कि उस दिन किसने और क्‍यों बेनजीर की हत्‍या कर दी?

पूरब की बेटी बेनजीर
‘पूरब की बेटी’ के नाम से जानी जाने वाली बेनजीर किसी भी मुसलमान देश की पहली महिला और दो बार पाकिस्‍तान की पीएम बनने वाली पहली राजनेता थीं। सीनियर जर्नलिस्‍ट हामिद मीर की मानें तो बेनजीर ने अपनी हत्‍या के कुछ ही दिनों पहले इस बात की आशंका जता दी थी कि उन्‍हें मार दिया जाएगा। सिर्फ इतना ही नहीं उन्‍हें यह भी मालूम था कि उन्‍हें कौन मार सकता है। हामिद उस दिन को याद करते हुए लिखते हैं, ‘आपको मेरी हत्‍या के बाद मेरे हत्‍यारों को सामने लाना होगा।’ हामिद के मुताबिक बेनजीर जानती थीं कि उनके दुश्‍मन उन्‍हें पाकिस्‍तान में रहने नहीं देना चाहते हैं। लेकिन उन्‍होंने तानाशाह परवेज मुशर्रफ के आदेशों को मानने से इनकार कर दिया था। जान पर खतरा होने के बाद भी बेनजीर कभी भागना नहीं चाहती थीं।
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बेनजीर ने लिया मुशर्रफ का नाम
बेनजीर ने अपनी मौत से दो महीने पहले हामिद मीर से कहा था कि अगर उनकी हत्‍या हुई तो सब तालिबान या फिर अल कायदा को दोष देंगे लेकिन उन्‍हें मुशर्रफ उनकी हत्‍या के जिम्‍मेदार होंगे। बेनजीर मानती थीं कि मुशर्रफ उन्‍हें चुनावों से पहले देश लौटते हुए नहीं देखना चाहते थे। जब उन्‍होंने तानाशाह की बात नहीं मानी तो मुशर्रफ ने उन्‍हें फोन पर धमकाया। मुशर्रफ ने बेनजीर से कहा था कि उनकी सुरक्षा राज्‍यों के साथ उनके आपसर संबंध पर आधारित है। विदेशी सरकारों ने उन्‍हें पाकिस्‍तान न लौटने की सलाह भी दी थी।

आज भी अटका है केस

लाहौर हाई कोर्ट की रावलपिंडी ब्रांच में आज भी भुट्टो की हत्‍या का केस अटका हुआ है। दिसंबर 2007 में हुए उस हमले में भुट्टो की पार्टी के 20 कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी और 71 गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले के बाद चार बार इनक्‍वॉयरी हुई थी। पुलिस ज्‍वॉइटन इनवेस्टिगेशन टीम, फेडरल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (FIA), यूनाइटेड नेशंस और यहां तक की स्‍कॉटलैंड यार्ड तक इस केस की जांच के लिए आगे आए। लेकिन सभी इनक्‍वॉयरी और जांच किसी भी नतीजे पर पहुंच नहीं सकी। बेनजीर के परिवार ने भी इस केस को स्‍पेशल एंटी-टेररिज्‍म कोर्ट तक न ले जाने का फैसला कर लिया था। केस के सिलसिले में 12 चालान जारी किए गए थे। 355 गिरफ्तारियां हुईं, 10 जज बदले और 141 गवाहों से पूछताछ हुई जिनमें से 68 अभियोजन पक्ष के गवाह थे।
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सिर्फ आठ की गिरफ्तारी

इस केस में 16 आरोपियों के नाम तय हुए थे। इनमें से सिर्फ आठ की गिरफ्तारी हो सकी थी। तालिबान कमांडर बैतुल्‍ला महसूद जो मुख्‍य आरोपी था, उसके ड्रोन हमले में ढेर कर दिया गया। इसके बाद चार और आरोपी नादिर खान उर्फ कारी, अब्‍दुल्‍ला उर्फ सद्दाम, इकरमुल्‍ला, फैज मोहम्‍मद कासकात भी एनकाउंटर में मारे गए थे। 15 साल की जिस आत्‍मघाती हमलावर ने भुट्टो को निशाना बनाया, उसकी पहचान सईद बलाकेल के तौर पर हुई थी। एफआईए ने मुशर्रफ को गिरफ्तार किया था।

नवाज ने बंद किया केस
मुशर्रफ के अलावा इस सिलसिने में पूर्व सिटी पुलिस ऑफिसर सौद अजीज और और एसपी रावल खुर्रम शहजाद को आरोपी बनाया गया था। लेकिन इन्‍हें बाद में जमानत दे दी गई थी। मुशर्रफ इस समय दुबई में हैं और भुट्टो की हत्‍या के बाद उनकी पार्टी सत्‍ता में भी आई। लेकिन पांच साल के कार्यकाल में भी वह इस केस को आगे नहीं बढ़ा पाई। इसके बाद पूर्व पीएम नवाज शरीफ के कार्यकाल में आखिर में केस को खत्‍म ही कर दिया गया। केस को अभी सुप्रीम कोर्ट पहुंचना है लेकिन कोई नहीं जानता है कि यह कब होगा और कब तक भुट्टो को इंसाफ के लिए इंतजार करना पड़ेगा।



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अल्लाह हू अकबर… अजान देते चली गई 61 नमाजियों की जान, पेशावर मस्जिद का हाल देख हैरान रह जाएंगे

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उन्होंने आशंका प्रकट की कि धमाके से पहले बम हमलावर पुलिस लाइंस में रह रहा होगा क्योंकि पुलिस लाइंस के अंदर फैमिली क्वाटर्स भी हैं। पेशावर पुलिस, आतंकवाद निरोधक विभाग, फ्रंटियर रिजर्व पुलिस, इलीट फोर्स एवं संचार विभाग के मुख्यालय भी इसी विस्फोट स्थल के आसपास हैं।



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यहां खुलेआम बिक रहा महाविनाश से बचाने वाला “परमाणु बंकर”, क्या वाकई होने वाला है तीसरा विश्वयुद्ध?

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ब्रिटेन के ग्रामीण क्षेत्रों में बिकने को तैयार खेतनुमा परमाणु बंकर

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के आरंभ होने के बाद से ही तीसरे विश्वयुद्ध की आशंकाओं ने पूरी दुनिया को घेर रखा है। यूक्रेन पर रूस की ओर से परमाणु हमला किए जाने को लेकर अमेरिका समेत पूरा यूरोप चिंतित है। अब जिस तरह से युद्ध में हारते यूक्रेन को बचाने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ सामने आया है, उसने तीसरे विश्वयुद्ध के खतरे को और भी बढ़ा दिया है। इस बीच ब्रिटेन से चौंकाने वाली खबर आई है। ब्रिटेन के ग्रामीण इलाकों में खुले आम धरती पर होने वाले महाविनाश से बचाने के लिए “परमाणु बंकर” 70 हजार पाउंड में बेचे जा रहे हैं। ऐसे में क्या माना जाए कि दुनिया में परमाणु युद्ध होने तय हो गया है, जिसके बाद इस तरह खुलेआम ग्रामीण क्षेत्रों में परमाणु बंकर बेचे जा रहे हैं। यह देखने में बिलकुल खेतनुमा हैं।

परमाणु बंकर में क्या है


ब्रिटेन के डर्बीशायर स्थित ग्रामीण इलाकों में 12 फीट गहरा एक भूमिगत परमाणु बंकर 70,000 पाउंड में बेचा जा रहा है, जिसमें दो कमरे हैं। इसे परमाणु हमले का सामना करने के लिए प्रबलित कंक्रीट से बनाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे भूमिगत रूप से छिपा हुआ यह परमाणु बंकर भूखंड के तौर पर बिक्री को तैयार है। 70 हजार पाउंड देकर इसे आप भी हासिल कर सकते हैं।

ब्रिटेन के ग्रामीण इलाकों में परमाणु कयामत के दिन बंकर के लिए छिपा हुआ भूखंड 70,000 पाउंड में बेचा जा रहा है।

खुली आंखों से देखा जा सकता है परमाणु बंकर

डर्बीशायर के बोल्सोवर में ऑब्जर्वर पोस्ट फील्ड व्हिटवेल स्थित है। खुली आंखों से देखा जा सकने वाला यह परमाणु बंकर भूखंड उसके मौजूदा मालिक द्वारा फसल उगाने के लिए दलदलनुमा क्षेत्र किसान के खेत के तौर पर दिखाई देगा। यह दो अलग-अलग लॉट से बना है। डर्बीशायरलाइव की रिपोर्ट के अनुसार, पहला लगभग 21.55 एकड़ में फैला है। इसमें करीब चार परमाणु बंकर हैं और यह £280,000 मूल्य का है। यहां खेत के मालिक ने हाल के वर्षों में अपनी फसलें भी रखी हैं। वहीं दूसरा भाग 4.61 एकड़ खंड में है, जिसमें शीतयुद्ध का एक आश्रय भी शामिल है। ऐसे में परमाणु बंकर युक्त इस खेत की कुल कीमत 3 लाख 50000 पाउंड हो जाती है।  70 हजार पाउंड देकर इसमें से एक बंकर खरीदा जा सकता है। डर्बीशायर काउंटी काउंसिल ने इसे आश्रय के रूप में पंजीकृत किया है, जिसे स्मारक के तौर पर सील कर दिया गया है।

प्राधिकरण की वेबसाइट ने किया अलग दावा

ब्रिटेन के ग्रामीण इलाकों में खुले आम बिकने को तैयार इन परमाणु बंकरों के बारे में खुलासा होने से दुनिया भर में हलचल पैदा हो गई है। वहीं डर्बीशायर के प्राधिकरण की वेबसाइट कहती है कि “पिछली डेढ़ शताब्दी में इस साइट का उपयोग इसके अच्छे वैंटेज प्वाइंट के लिए किया गया है। व्हिटवेल लोकल हिस्ट्री ग्रुप के अनुसार इसे रॉयल ऑब्जर्वर कॉर्प्स द्वारा  1939 के बाद से एक ऑब्जर्वेशन प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल किया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हर दिन इसका उपयोग इसी उद्देश्य के लिए किया गया था।

परमाणु बंकर के पास बना आश्रय स्थल 1970 के दशक का

प्राधिकरण के अनुसार 1970 के दशक में परमाणु हमले के स्थिति में इसके पास में एक भूमिगत आश्रय स्थल भी बनाया गया था। आश्रय के अंदर दो कमरे हैं। ब्रिटेन के गृहमंत्रालय ने परमाणु हमले के खिलाफ एक कम्युनल एरिया डब्ल्यू/सी (1) के तौर पर पूरे देश में कुल 870 थर्मो-न्यूक्लियर फॉलआउट शेल्टर सामरिक रक्षा के हिस्से के रूप में बनाए गए थे। यह ऑब्जर्वेशन प्वाइंट के तौर पर भी इस्तेमाल होते थे। साइज में 18 फीट x 10 फीट माप वाले इन बंकरों को 12 फीट नीचे भूमिगत बनाया गया था। जो कि प्रबलित कंक्रीट से बने थे और प्रत्येक की लागत £2,000 पाउंड थी। 1992 में आश्रयों का विमोचन किया गया था जब तत्कालीन गृह सचिव ने फैसला किया था कि वे अब आवश्यक नहीं थे।”

अब खेत व घुड़सवारी के रूप में हो सकता है इस्तेमाल

चेस्टरफ़ील्ड में स्थित डब्ल्यूटी पार्कर एस्टेट एजेंटों के एजेंट कहते हैं कि अब इसके आसपास की भूमि “अन्य कृषि / घुड़सवारी प्रकार के उपयोग के लिए इस्तेमाल की जा सकती है, जो नियोजन सहमति प्राप्त करने के अधीन है”। एजेंट कहते हैं कि “अप्रयुक्त बंकर के लिए एक ओवरहेड लाइन है। हालांकि हमें किसी भी मुख्य सेवा से जुड़े होने की जानकारी नहीं है। “प्लान में हरे रंग से दिखाया गया भूमि का एक क्षेत्र अपंजीकृत प्रतीत होता है। यह चारों ओर संभवतः बंकर के हिस्से को घेर रखा है। जो कि विक्रेता के पंजीकृत शीर्षक संख्या DY431357 के तहत आता है। यह कई वर्षों से विक्रेता के स्वामित्व में है। “इस प्रकार, विक्रेता भविष्य में किए गए किसी भी तीसरे पक्ष के स्वामित्व के दावों के खिलाफ खरीदार को क्षतिपूर्ति करेगा। हम हरे रंग की भूमि के स्वामित्व से अवगत नहीं हैं और यह बिक्री में शामिल नहीं है।”

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हिबतुल्लाह अखुंदजादा को सुप्रीम कमांडर पद से हटाएगा तालिबान, लेकिन क्यों? जानिए किसे मिलेगी कमान

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तालिबान का शीर्ष नेतृत्व सुप्रीम कमांडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा को पद से हटाने पर विचार कर रहा है। नेतृत्व का मानना है कि अखुंदजादा के कारण तालिबान सरकार के दो फाड़ होने का खतरा बढ़ गया है। हिबतुल्लाह किसी भी कीमत पर महिला शिक्षा पर लगे प्रतिबंध को हटाने के पक्ष में नहीं हैं।

 



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