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27 साल का इंतजार अब होगा पूरा! जब लालू की पार्टी RJD ने फाड़ दी थी महिला आरक्षण बिल

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मोदी कैबिनेट ने मंजूर किया महिला आरक्षण बिल

मोदी कैबिनेट ने महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने वाला विधेयक को मंजूरी दे दी है, 19 सितंबर को नए संसद भवन में जब विशेष सत्र की कार्यवाही पहले दिन शुरू होगी तो ये बिल संसद में पारित किया जाएगा और अगर संसद से इसे मंजूरी मिल जाती है तो पिछले 27 साल से लटका महिला आरक्षण बिल कानून बन जाएगा जो महिलाओं के पक्ष में एक बड़ा फैसला है। राजनीतिक तौर पर कहें तो ये  सब जानते हैं कि कोई भी राजनीतिक दल आधी आबादी यानी महिलाओं से जुड़े मसले का सीधे सीधे विरोध तो नहीं कर सकता, शायद इसलिए बीजेपी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, BRS, BJD ओर BSP जैसे तमाम दल महिला आरक्षण बिल को सपोर्ट करने की बात कह रहे हैं। अभी बिल नहीं आया है लेकिन सभी पार्टियां महिला आरक्षण का क्रेडिट लेने की कोशिश कर रही हैं लेकिन सवाल ये है कि ये सारी पार्टियां तो पहले भी इसको सपोर्ट कर रही थी फिर ये मामला अब तक क्यों लटका है?

जानिए क्यों 27 सालों से अटका है महिला आरक्षण बिल

सबसे पहले 1996 में देवेगौड़ा की सरकार इसे लाई थी, फिर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के वक्त 1998,1999 और 2002 में महिला आऱक्षण का बिल लाया गया था। बता दें कि 1998 में तो लालू यादव की पार्टी ने बिल की कॉपी आडवाणी जी के हाथ से छीन कर फाड़ दी थी और बिल पेश करने का विरोध किया था। इसके बाद डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार ने 2008 में इसे राज्यसभा में पेश किया। उस वक्त बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी में भेज दिया गया, फिर इस बिल को 2010 में राज्यसभा ने पारित कर दिया लेकिन इस बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया, तब से बिल लटका पड़ा है।

पीएम मोदी कैसे पास करवा पाएंगे?

अब सवाल ये है कि जब इतनी कोशिशों के बाद भी ये बिल पास नहीं कर पाया तो नरेन्द्र मोदी इसे कैसे पास करवा लेंगे। तो इसका जबाव ये है कि इससे पहले की सरकार गठबंधनों की सरकारें थीं और राजनीतिक दलों में विल पावर नहीं थी लेकिन नरेन्द्र मोदी की सरकार पूर्ण बहुमत की सरकार है और नरेन्द्र मोदी ने अगर फैसला करते हैं तो पहले ये सुनिश्चित करते हैं कि उसे लागू कैसे करना है।

आर्टिकिल 370 उन्होंने पास करवाया, GST लागू किया, आर्थिक आधार पर गरीबों को दस परशेंट का रिजर्वेशन दिया। इसलिए अगर मोदी ने तय कर लिया होगा कि महिला आरक्षण लागू करना है, तो ये होगा। विरोधी दल भी ये बात जानते हैं इसलिए वो अपने-अपने मुद्दे उठा रहे हैं लेकिन महिला रिजर्वेशन का विरोध कोई नहीं कर रहा है क्योंकि विरोधी दल ये कभी नहीं चाहेंगे की इसका क्रेडिट मोदी को मिले।

 

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मराठा कोटा के लिए भूख हड़ताल करने वाले ने लगाई फांसी, 13 महीने का है बच्चा

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खुदकुशी करने वाले शख्स की पहचान सुदर्शन देवराय के रूप में की है। देवराय ने नांदेड़ जिले की हिमायतनगर तहसील में रविवार आधी रात के बाद कथित तौर पर खुदकुशी कर ली।



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भारत ने कनाडा के राजनयिक को निकाला, 5 दिन में देश छोड़ने का आदेश

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Image Source : PTI/AP
भारत-कनाडा।

कनाडा और भारत के बीच कूटनीतिक रिश्ते बुरे दौर में जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर अनर्गल आरोपों के बाद कनाडा ने भारतीय राजनयिक को बर्खास्त कर दिया था। अब इस कदम के जवाब में भारत सरकार ने भी कनाडा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार ने भी एक वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को बर्खास्त कर दिया है और उन्हें 5 दिनों में देश छोड़ने का आदेश दिया है। 

उच्चायुक्त तलब


कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो के भारत विरोधी कदमों के बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने विरोध जताने के लिए भारत में कनाडा के उच्चायुक्त कैमरून मैकेई को तलब किया था। ऐसा माना जा रहा था कि कनाडा को जवाब देने के लिए भारत सरकार भी कड़ा कदम उठा सकती है। 

विदेश मंत्रालय का बयान

भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी किए गए बयान में कहा है कि भारत में कनाडा के उच्चायुक्त कैमरून मैकेई को आज तलब किया गया। उन्हें भारत में रह रहे एक वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को निष्कासित करने के भारत सरकार के फैसले के बारे में सूचित किया गया। संबंधित राजनयिक को अगले पांच दिनों के भीतर भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय हमारे आंतरिक मामलों में कनाडाई राजनयिकों के हस्तक्षेप और भारत विरोधी गतिविधियों में उनकी भागीदारी पर भारत सरकार की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

क्यों तल्ख हुए रिश्ते?

G-20 समिट में फटकार खाने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत विरोधी कदमों में जुट गए हैं। ट्रू़डो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का कनेक्शन भारत से जोड़ते हुए भारत के एक राजनयिक को निकाल दिया था। हालांकि, भारत सरकार ने कनाडाई पीएम के आरोपों को बेबुनियाद और आधारहीन करार दिया है। भारत ने साथ ही कनाडा से आतंकी तत्वों पर कार्रवाई करने की मांग की है। भारत ने कहा है कि इस तरह के बयान खालिस्तानियों से ध्यान हटाने के लिए दिए गए हैं।

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Parliament Session New Bill: महिला आरक्षण से ही होगा नई संसद का ‘श्रीगणेश’, आज ही पेश करने की तैयारी

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महिला आरक्षण बिल को लेकर स्थिति लगभग साफ होती नजर आ रही है। खबर है कि सरकार मंगलवार को ही संसद में बिल पेश कर सकती है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। सोमवार को कैबिनेट बैठक में विधेयक पर मुहर लगा दी गई थी। इधर, महिला आरक्षण का श्रेय लेने के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में होड़ लगती नजर आ रही है।

खास बात है कि मंगलवार से ही विशेष सत्र नए संसद भवन में पहुंच रहा है। ऐसे में अगर सरकार महिला आरक्षण बिल आज पेश कर देती है, तो नई संसद में पेश होने वाला यह पहला बिल होगा। हालांकि, यह बिल करीब 27 सालों से लंबित है और कांग्रेस की अगुवाई वाली UPA सरकार ने साल 2010 में इसे राज्यसभा में पास करा लिया था।



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