भारतीय शतरंज प्रेमियों के लिए गोवा में आयोजित FIDE विश्व कप 2025 किसी बड़े उत्सव से कम नहीं था। लेकिन यह घरेलू उत्साह तब निराशा में बदल गया जब क्वार्टर फाइनल में, बचे हुए एकमात्र भारतीय खिलाड़ी अर्जुन एरिगैसी को चीन के वेई यी के खिलाफ टाई-ब्रेक में हार का सामना करना पड़ा। यह हार केवल एक मैच का नतीजा नहीं थी, बल्कि यह 2025 के दो सबसे बड़े टूर्नामेंट्स—विश्व कप और FIDE ग्रैंड स्विस—में भारतीय पुरुष खिलाड़ियों के सामूहिक संघर्ष को दर्शाती है।
अर्जुन एरिगैसी की हार: अति उत्साह का परिणाम
विश्व कप में भारत की उम्मीदों का बोझ अर्जुन एरिगैसी के कंधों पर था। उनकी हार के साथ, 2026 FIDE कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करने का उनका सपना कम से कम दो साल के लिए टल गया है। विडंबना देखिए, अर्जुन की हार का कारण उनका जीत के लिए अति-आक्रामक रवैया रहा।
उनके प्रतिद्वंद्वी, वेई यी के अनुसार, अर्जुन ने टाई-ब्रेक के रैपिड गेम्स के पहले सेट में ही जीत हासिल करने के लिए एक ऐसी स्थिति में अनावश्यक दबाव बनाया जहां इसकी आवश्यकता नहीं थी। 41वीं चाल पर उनका रुक (Rook) को f2 पर चेक देने के लिए आगे बढ़ाना एक निर्णायक गलती साबित हुई। यह दर्शाता है कि उच्च दांव वाले छोटे प्रारूपों में, जीत की अत्यधिक ललक अक्सर आपको नुकसान पहुंचा सकती है।
संख्याओं की कहानी: 24 प्रतिभागी और शून्य सेमी-फाइनलिस्ट
FIDE विश्व कप में भारतीय पुरुष शतरंज दल की संख्या 24 थी। यह एक रिकॉर्ड संख्या थी, जो भारत की वर्तमान प्रतिभा की गहराई को दर्शाती है। हालांकि, यह संख्या फाइनल फोर (सेमी-फाइनल) तक आते-आते शून्य हो गई। अंतिम आठ में केवल एक भारतीय था, अंतिम 16 में दो, और अंतिम 32 में पाँच।
यह प्रदर्शन केवल विश्व कप तक सीमित नहीं था। सितंबर में हुए FIDE ग्रैंड स्विस में भी भारतीय शीर्ष खिलाड़ी, जिनमें विश्व चैंपियन डी. गूकेश भी शामिल थे, अपनी अपेक्षित रैंकिंग तक नहीं पहुंच पाए। जबकि महिलाओं के कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में तीन भारतीय मौजूद हैं, पुरुष वर्ग में शायद केवल रमेशबाबू प्रज्ञानानंदा ही जगह बना पाएंगे। यह परिणाम आत्म-निरीक्षण की मांग करता है।
आखिर कमी कहाँ रह गई? प्रारूप की अस्थिरता या थकान?
इस अप्रत्याशित परिणाम पर भारतीय शतरंज ओलंपियाड टीम के कप्तान, ग्रैंडमास्टर श्रीनाथ नारायणन ने अपनी राय दी। उन्होंने तर्क दिया कि विश्व कप का नॉकआउट प्रारूप, विशेष रूप से टाई-ब्रेक, स्वाभाविक रूप से उच्च `विचरण` (Variance) वाला होता है, यानी अप्रत्याशित परिणाम आने की संभावना अधिक होती है।
नारायणन इस प्रारूप की तुलना टेनिस ग्रैंड स्लैम से करते हैं, जहाँ पाँच सेट के बजाय केवल एक सेट का मैच खेला जाए। उनका मानना है कि रैपिड टाई-ब्रेक में कम से कम चार गेम होने चाहिए, ताकि खिलाड़ियों को हर रंग के साथ दो रोटेशन मिलें और बेहतर खिलाड़ी अपनी श्रेष्ठता अधिक बार सिद्ध कर सकें। वर्तमान प्रारूप में, कम रेटिंग वाले खिलाड़ियों (जैसे गूकेश को हराने वाले फ्रेडरिक स्वाने या प्रज्ञानानंदा को हराने वाले डेनियल डुबोव) के लिए भी बड़े उलटफेर करना संभव हो जाता है।
“शेड्यूल बिल्कुल पागलपन भरा है”: प्रमुख कारण
हालांकि, परिणाम की अस्थिरता से बड़ा कारण जो सामने आया, वह है भारतीय युवा सितारों पर अत्यधिक खेल का दबाव। ग्रैंडमास्टर श्रीनाथ नारायणन ने स्पष्ट रूप से कहा:
`शेड्यूल बिल्कुल पागलपन भरा है, और इसने निश्चित रूप से उन्हें, खासकर प्रज्ञ (प्रज्ञानानंदा) को थका दिया है।`
साल भर बड़े क्लासिकल टूर्नामेंट्स, ग्रैंड चेस टूर और फ्रीस्टाइल चेस टूर में लगातार खेलने से, गूकेश, प्रज्ञानानंदा और एरिगैसी जैसे प्रमुख खिलाड़ी साल के अंत तक मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके थे। यह थकान, साल के दो सबसे बड़े आयोजनों में प्रदर्शन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बनी।
आगे की राह: योजना और रणनीति
2025 के परिणाम ने भारतीय शतरंज को एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया है: प्रतिभा होने के बावजूद, खेल में कोई दिव्य अधिकार (Divine Right) नहीं होता है। यदि आप अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर नहीं हैं, तो दुनिया में पर्याप्त प्रतिद्वंद्वी मौजूद हैं जो इसका फायदा उठाएंगे।
अगला साल भी बेहद व्यस्त रहने वाला है, जिसमें उज़्बेकिस्तान में ओलंपियाड और संभावित विश्व चैम्पियनशिप मैच शामिल हैं (जो दो भारतीयों के बीच भी हो सकता है)। 2025 ने स्पष्ट कर दिया है कि युवा एथलीटों को सीज़न के सबसे बड़े इवेंट्स में शिखर पर पहुंचाने के लिए केंद्रित और रणनीतिक योजना आवश्यक है।
जिस तरह कुछ साल पहले 19 नवंबर को एक भारतीय सपना टूटा था, उसी तरह इस बार भी 19 नवंबर को घरेलू विश्व कप जीतने का एक और सपना टूट गया। महान विश्वनाथन आनंद के बाद पहले भारतीय पुरुष विश्व कप विजेता का इंतजार अभी जारी है। अब देखना यह है कि भारतीय शतरंज संघ इस तकनीकी समीक्षा के आधार पर 2026 के लिए क्या योजना बनाता है।
