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हिरोशिमा और नागासाकी की हवाओं में तैर रहा रेडिएशन! परमाणु हमले के 77 साल बाद जापानी शहरों में रहना सुरक्षित?

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टोक्यो : तबाही मचाने वाली अपार शक्ति और लोगों को बीमार कर देने वाला रेडिएशन, परमाणु बमों से पूरी दुनिया यूं ही नहीं डरती। एक बार विस्फोट होने पर परमाणु बम का असर कई साल तक लोगों को परेशान कर सकता है। 6 और 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के दो शहरों, क्रमशः हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। इन हमलों में 1,10,000 से 2,10,000 लोग मरे थे। ये मौतें भयानक ब्लास्ट, जोरदार आग और जहरीले रेडिएशन की वजह से हुईं। धमाका और सीधे प्रभाव के अलावा आज बात रेडिएशन की करेंगे जो परमाणु बम को अन्य बमों से कई गुना खतरनाक बना देता है।

रैपिड न्यूक्लियर रिएक्शन की वजह से परमाणु हथियारों में विस्फोट होता है। इस रिएक्शन में परमाणु या तो अलग हो जाते हैं या एक साथ जुड़ जाते हैं। इससे रेडियोएक्टिव कण और गामा जैसी हानिकारक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें बाहर निकलती हैं। ये न सिर्फ ब्लास्ट के तुरंत बाद बल्कि रेडिएशन के रूप में लंबे समय तक लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। परमाणु विस्फोट के बाद रेडियोएक्टिव कण वातावरण में जाते हैं और धरती पर वापस आते हैं।

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हिरोशिमा और नागासाकी में आज भी रेडिएशन?
रेडियोएक्टिव सामग्री समय के साथ खत्म हो जाती है जिसे हाफ-लाइफ के रूप में जाना जाता है। लेकिन इसका क्षरण सामग्री पर आधारित होता है, जिसमें एक सेकेंड या कई दशकों का भी समय लग सकता है। तो क्या इसका मतलब है कि हिरोशिमा और नागासाकी आज भी रेडियोएक्टिव हैं? इसका जवाब है- नहीं। हिरोशिमा और नागासाकी में विस्फोट के बाद रेडिएशन मौजूद था जो तेजी से खत्म हो गया।

24 घंटे के भीतर 80 फीसदी कम हो गया खतरा
हिरोशिमा शहर की स्थानीय सरकार की वेबसाइट के अनुसार, रिसर्च ने संकेत दिया कि बमबारी के 24 घंटों के भीतर 80 फीसदी रेडिएशन का क्षरण हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आम वैज्ञानिक सहमति यह है कि ज्यादातर रेडिएशन जल्दी ही खत्म हो गया होगा। यह 24 घंटे में 1/1000 और एक हफ्ते में 1/10,00,000 तक नीचे आ गया होगा। आज दोनों शहरों में घनी आबादी है और वहां रेडिएशन का स्तर ‘सामान्य’ है।



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Passport Ranking India: पाकिस्‍तान के लिए एक और शर्म का पल, दुनिया में सबसे खराब पासपोर्ट, जानिए क्‍या है भारत का हाल

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Pakistan India Passport Ranking: पाकिस्‍तान (Pakistan) जो दुनिया के एक खतरनाक देश में शामिल है, अब उसका पासपोर्ट भी अपनी साख गंवा चुका है। यहां तक कि यूएई का पासपोर्ट भी अब उससे आगे है। एक सर्वे की मानें तो पाकिस्‍तानी पासपोर्ट दुनिया में सोमालिया के बराबर रैंकिंग रखता है। उससे नीचे सीरिया जैसे ही देश हैं।

 



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Pakistan Food Crisis: कंगाल पाकिस्‍तान के पास सब्जियां खरीदने के पैसे नहीं, बंदरगाह पर सड़ रहा टनों प्‍याज

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कराची: पाकिस्‍तान की सरकार इस समय मुश्किल में है। वह यह तय नहीं कर पा रही है कि देश में जारी खाद्यान्‍न आपूर्ति संकट का समाधान करे या फिर विदेशी मुद्रा भंडार बचाए। कराची बंदरगाह पर इस समय सैंकड़ों ऐसे कंटेनर्स यूं ही पड़े हैं जिन पर सब्जियां लदी हुई हैं। पाकिस्‍तान के अखबार द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की तरफ से बताया गया है कि प्‍याज के 250 कंटेनर्स जिनकी कीमत 107 लाख डॉलर है, 816,480 डॉलर की कीमत वाली अदरक का कंटेनर और 2.5 लाख डॉलर वाले लहसुन के कंटेनर बंदरगाह पर ऐसे ही पड़े हैं। व्‍यापारी परेशान हैं और उन्‍हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्‍या किया जाए। अखबार की मानें तो 0.6 मिलियन टन सोयाबीन भी ऐसे ही अटका है क्‍योंकि सरकार की तरफ से साख पत्र जारी नहीं किया जा रहा है।

पहुंच से बाहर प्‍याज
सीमित साख पत्र की वजह से इन कंटेनर्स को ऐसे ही पड़े रहने दिया जा रहा है। प्‍याज के कंटेनर्स कराची बंदरगाह के कई टर्मिनल्‍स पर पड़े हुए हैं। देश के बैंक विदेशी मुद्रा के अभाव में साख पत्र जारी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से कंटेनर्स को ऐसे ही पड़े रहने दिया जा रहा है। पाकिस्‍तान फ्रूट एंड वेजीटेबल एक्‍सपोटर्स इंपोटर्स एंड मर्चेंट्स एसोसिएशन (PFVA) के सदस्‍य वाहीन अहमद की मानें तो साख पत्रों को जारी करने में हो रही देरी की वजह से कंटेनर्स की कीमत पर अलग असर पड़ रहा है, टर्मिनल और शिपिंग चार्जेस बढ़ जाएंगे। प्‍याज के कंटेनर्स पहले से ही महंगे हैं और इसकी वजह से एक आम आदमी पर बुरा असर पड़ने वाला है। आम आदमी की पहुंच से ही प्‍याज बाहर हो जाएगा।Pakistan Army : भारत नहीं पाकिस्‍तानी सेना के सामने ये हैं 5 बड़े खतरे, भारतीय सेना को गीदड़भभकी दे रहे जनरल असीम मुनीर
270 रुपए किलो प्‍याज
उन्‍होंने कहा कि आज प्‍याज 175 रुपए किलो थोक बाजार में और खुदरा बाजार में 250 से 270 रुपए किलो तक बिक रहा है। क्‍लीयरेंस में देरी से प्‍याज की कीमतें और बढ़ जाएंगी। सब्जियां भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएंगी। फेडरेशन ऑफ पाकिस्‍तान चैंबर्स आफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री (FPCCI) के कार्यवाहक प्रेसीडेंट सुलेमान चावला ने भी इस पर चिंता जताई है।
Indian Navy Day: भारत के विक्रांत को डुबोने आई पाकिस्‍तान की पनडुब्‍बी गाजी, कैसे समंदर में समाई, 1971 के जंग की शौर्य गाथा
उन्‍होंने कहा है कि पोल्‍ट्री और डेयरी प्रॉडक्‍ट्स पहले ही आम आदमी खरीद नहीं पा रहा है।कुछ ही दिनों पहले कीमतों में थोड़ी स्थिरता आई थी लेकिन अब इन हालातों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। उनकी मानें तो आयात काफी महंगा है और टर्मिनल चार्जेस भी दोगुने हो जाएंगे।

डॉलर न होने का खामियाजा
डॉलर देश में है नहीं और इसकी वजह से स्थिति बेकाबू हो सकती है। आयातकों को इसकी वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जिसकी भरपाई भी मुश्किल हो जाएगी। उन्‍होंने सरकार से मांग की है कि इस मसले को तेजी से सुलझाया जाए ताकि देश में गहराते खाद्यान्‍न संकट को टाला जा सके। चावला ने यह भी कहा कि अमेरिका से आयात होने वाले सोयाबीन को लेकर कभी कोई लाइसेंसिंग और अनुवंशिक संशोधन कोई मुद्दा नहीं रहा है। पिछले कई सालों से देश के वही सप्‍लायर्स सोयाबीन का आयात कर रहे हैं।



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ISIS India Kashmir: आईएस के नए ‘खलीफा’ को कश्‍मीरी आतंकियों ने किया सलाम, भारत के लिए बड़ा खतरा विलायाह हिंद

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बेरूत: दुनिया के सबसे क्रूर आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट के सरगना अबू हसन अल हाशिमी अल कुरैशी की मौत के बाद अबू अल हुसैन अल हुसैनी अल कुरैशी ने आईएस की कमान संभाल ली है। इस्‍लामिक स्‍टेट के इस नए खलीफा को समर्थन देने के लिए दुनियाभर से आईएस समर्थक उसके पास पहुंच रहे हैं। इस कड़ी में भारत के कश्‍मीर राज्‍य में सक्रिय आतंकी संगठन व‍िलायाह हिंद भी शामिल हो गया है। कश्‍मीरी आतंकियों ने इस्‍लामिक स्‍टेट के नए ‘खलीफा’ के प्रति अपने समर्थन का ऐलान किया है।

इससे पहले इस्‍लामिक स्‍टेट ने ऐलान किया था कि उसके सरगना अबू हसन अल हाशिमी अल कुरैशी की जंग के दौरान मौत हो गई है। उसने बस इतना बताया था कि अल्‍लाह के दुश्‍मनों के साथ जंग में अबू हसन अल हाशिमी की मौत हो गई। वह एक इराकी नागरिक था। कुरैशी से तात्‍पर्य पैगंबर मोहम्‍मद साहब के एक कबीले से है। किसी भी इस्‍लामिक स्‍टेट के सरगना के लिए इस कबीले से जुड़ा होना जरूरी होता है। साल 2014 में बहुत तेजी से उभार के बाद अब इस्‍लामिक स्‍टेट का ‘साम्राज्‍य’ ढह गया है।

व‍िलायाह हिंद के आतंकी भी समर्थन देने पहुंचे

अबू अल हुसैन अल हुसैनी अल कुरैशी के इस्‍लामिक स्‍टेट की कमान संभालने के बाद दुनियाभर से आईएस समर्थक आतंकी गुट उसे अपना समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। आईएस के नए सरगना को कश्‍मीर में खून बहाने वाले आतंकी संगठन व‍िलायाह हिंद के आतंकी भी समर्थन देने पहुंचे हैं। आईएस ने कश्‍मीरी आतंकियों की तस्‍वीर जारी करके बताया कि उन्‍होंने नए खलीफा के साथ गठजोड़ का प्रण किया है। दरअसल, इस्‍लामिक स्‍टेट ने भारत में भी एक ‘प्रांत’ बनाया है।

आईएस के ये आतंकी अक्‍सर कश्‍मीर में सुरक्षाबलों पर हमले करते रहते हैं। आईएस इस प्रांत का नाम ‘विलायाह ऑफ हिंद’ दिया है। इस आतंकी संगठन ने कई भारतीय सैनिकों की शोपियां और अन्‍य जिलों में अब तक हत्‍या कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईएस ने भारत में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए कश्‍मीर में नए ‘प्रांत’ का गठन किया है। उसकी कोशिश कश्‍मीर में इराक और सीरिया जैसे ‘साम्राज्‍य’ का गठन करना है। आईएस ने श्रीलंका में भी ईस्‍टर संडे के दिन भीषण हमला किया था जिसमें कम से कम 253 लोग मारे गए थे।

भारतीय सुरक्षा बलों की बढ़ सकती है टेंशन

कश्‍मीर में सोफी नामक आतंकी पिछले करीब एक दशक से सक्रिय था और उसने भी आईएस के साथ हाथ मिला लिया था। उसे सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। सेना के अधिकारियों ने उम्‍मीद जताई थी कि सोफी आईएस में सक्रिय एकमात्र आतंकी था लेकिन अब नए आतंकियों के आईएस के खलीफा से मिलने से यह उम्‍मीद खत्‍म हो गई है। इस्‍लामिक स्‍टेट पूरी दुनिया में मुस्लिम साम्राज्‍य स्‍थापित करना चाहता है और अब इस ताजा खुलासे से भारतीय सुरक्षा बलों की टेंशन बढ़ सकती है।



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