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हम वैश्विक चिंताओं के बीच भारत पर सतर्क हैं

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अमेरिका में अनुमान के मुकाबले नरम मुद्रास्फीति से अगले साल अनुकूल वैश्विक तरलता को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन यूबीएस अभी भी भारत पर सतर्क है। यूबीएस सिक्योरिटीज इंडिया के रणनीतिकार सुनील तिरुमलाई ने समी मोडक के साथ बातचीत में कहा कि भारत का ऊंचा मूल्यांकन और रुपये में गिरावट से घरेलू बाजारों के लिए समस्या पैदा हो सकती है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

पिछले साल के मुकाबले भारत के बेहतर प्रदर्शन की मुख्य वजह क्या हैं?

इस साल अब तक (वाईटीडी) भारत ने उभरते बाजारों (ईएम) के मुकाबले 20 प्रतिशत (भारत में 5 प्रतिशत की गिरावट, जबकि ईएम इंडेक्स में 25 प्रतिशत की कमजोरी) तक मात दी है।  मौजूदा आर्थिक, राजनीतिक और भूराजनीतिक अनिश्चितता के परिवेश में भारत को अभी भी बेहतर परिवेश वाले देश के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी वजह मूल्यांकन है। हालांकि आंकड़ों से इसे मजबूती नहीं मिल रही है। वाईटीडी आधार पर भारत में एफपीआई बिकवाली काफी बढ़ी है। 

क्या भारत लगातार अच्छा प्रदर्शन करेगा? क्या मजबूत घरेलू तरलता बनी रहेगी?

भारत का मूल्यांकन मौजूदा समय में 12 महीने की पीई के आधार पर ईएम के मुकाबले 100 प्रतिशत ऊपर है। मेरी नजर में, ये मूल्यांकन बाजार में ऊंचे घरेलू प्रवाह का संकेत हैं। हम यह रुझान बरकरार रहने के लिहाज से दो मुख्य जोखिम देख रहे हैं। पहला, अर्थव्यवस्था में सुधार आ रहा है और परिवारों के लिए खर्च वृद्धि के अवसर बढ़ रहे हैं, जिससे अतिरिक्त बचत घट रही है। दूसरा, बैंक जमाएं परिवारों के लिए परंपरागत तौर पर मुख्य बचत हैं। ब्याज में बदलाव के संकेतों से शेयरों की रेटिंग में बदलाव को बढ़ावा मिल सकता है।

अमेरिका में ताजा मुद्रास्फीति आंकड़े पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए यूबएस का आर्थिक नजरिया 2023 के मध्य तक सतर्क बना रहेगा और फिर 2023 की दूसरी छमाही के दौरान मंदी की स्थिति पर नजर बनी रहेगी। इसलिए, उस समय के आसपास वैश्विक तरलता को लेकर अनुकूल हालात दिख सकते हैं। लेकिन उस समय हम चीन में सुधार की भी उम्मीद कर सकते हैं और भारत में घरेलू ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। ईएम के नजरिये से हम भारत पर सतर्क बने रहेंगे।

भारत को लेकर वैश्विक निवेशकों का नजरिया कैसा है? एफपीआई प्रवाह की स्थिति कैसी है?

वैश्विक वित्तीय संकट की वजह से वर्ष की पहली छमाही में एफपीआई बिकवाली बढ़ गई गई थी। हालांकि एफपीआई प्रवाह कुछ हद तक सुधरा, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन और रुपये में गिरावट को देखते हुए, हमें ऊंचे स्तर पर एफपीआई प्रवाह की संभावना नहीं दिख रही है। हमारे आय अनुमानों से पता चलता है कि भारत की आय रफ्तार अन्य ईएम से ज्यादा अलग नहीं है। यूबीएस को 2023 की पहली छमाही में चीन में हालात सामान्य होने की संभावना है और पूंजी प्रवाह चीन की तरफ आकर्षित हो सकता है।

वित्त वर्ष 2023 और 2023-24 के लिए आपके आय अनुमान क्या हैं? कौन से क्षेत्र वृद्धि में अहम योगदान देंगे?

हालांकि हम भारतीय इक्विटी को लेकर आशंकित हैं, और यह आशंका आय के बजाय मूल्यांकन से जुड़ी हमारी चिंताओं से पैदा हुई है। हम वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2024 के लिए बाजार आय अनुमानों के अनुरूप हैं। बढ़ते दर चक्र में बैंक अच्छा प्रदर्शन करेंगे। 

क्या अगले एक साल में आपने निफ्टी के लिए कोई लक्ष्य तय किया है?

हमने 2023 के मध्य तक निफ्टी-50 के लिए 15,500 का लक्ष्य रखा है। अपने आय अनुमानों को देखते हुए, हम बैंकों पर उत्साहित और मैटेरियल खंड पर नकारात्मक हैं। 



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यूपी में होगा ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन

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उत्तर प्रदेश में हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक क्लस्टर बनाकर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा। प्रदेश में ग्रीन वैली की स्थापना कर ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक नीति का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित नीति के तहत हाइड्रोजन व अमोनिया जैसी गैसों का उत्पादन करने वाले निवेशकों को कई तरह की सहूलियतें व छूट दी जाएंगी।

अगले साल फरवरी में होने वाले वैश्विक निवेशक सम्मेलन से पहले योगी सरकार ग्रीन हाइड्रोजन नीति लागू कर निवेश के नए दरवाजे खोलेगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य 2028 तक खाद कारखानों व तेल शोधन संयंत्रों में कुल हाइड्रोजन के उपभोग का 20 फीसदी ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल का है। इसे 2035 तक बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया जाएगा।

इसके चलते प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन नीति में पूंजीगत व्यय में इलेक्ट्रोलाइजर के विकास पर 2023 में 60 फीसदी, 2024 में 55 फीसदी व 2025 में 45 फीसदी की सब्सिडी देने की योजना है। ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण में इलेक्ट्रोलाइजर सबसे अहम घटक है।

प्रस्तावित नीति के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया के परिवहन और स्टोरेज क्षमता को भी विकसित किया जाएगा। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जल्दी ही मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी दी जाएगी। प्रस्तावित नीति के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध, अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। 

ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया का उत्पादन करने वाले निवेशकों को 15 दिन के भीतर सिंगल विंडो पोर्टल के जरिए जरूरी मंजूरी दी जाएगी। तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 30 फीसदी या 5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया का उत्पादन संयंत्र लगाने वाले निवेशकों को स्टांप शुल्क एवं भूउपयोग शुल्क में सौ फीसदी की छूट दी जाएगी जबकि पानी के इस्तेमाल पर लगने वाले शुल्क में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी।



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क्रेडिट कार्ड से खर्च 1.29 लाख करोड़

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि त्योहारी सीजन के दौरान क्रेडिट कार्ड के खर्च ने अक्टूबर में वृद्धि की गति को जारी रखा और 1.29 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लिया। यह पिछले महीने की तुलना में 5.5 फीसदी अधिक है, तब कुल खर्च 1.22 लाख करोड़ रुपये था। 

उच्च आधार के बावजूद पिछले साल की समान अवधि की तुलना में खर्च 25 फीसदी ज्यादा रहा। पिछले साल अक्टूबर में त्योहारी सीजन के कारण क्रेडिट का खर्च पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये पहुंचा था। साथ ही एक साल से निष्क्रिय कार्डों को निरस्त करने के रिजर्व बैंक के नियम के बाद पिछले दो माह में क्रेडिट कार्ड संख्या में शुद्ध कमी आई। बैंकिंग व्यवस्था में 16.6 लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड जोड़े गए, जिसके बाद कुल कार्डों की संख्या 7.93 करोड़ हो गई। 

आरबीआई के नए मानदंड के लागू होने से पहले उद्योग एक महीने में औसतन 15 लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड जोड़ रहा था, क्योंकि महामारी में बैंकों ने असुरक्षित ऋण देने का कारोबार तेज कर दिया था। अक्टूबर के दौरान सबसे अधिक एसबीआई कार्ड्स और भुगतान सेवाओं ने 3,39,160 कार्ड जोड़े। इसके बाद ऐक्सिस बैंक ने 2,61,367 कार्ड्स और आईसीआईसीआई बैंक ने 2,21,280 कार्ड्स जोड़े। देश के सबसे बड़े क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता एचडीएफसी बैंक ने इस अवधि के दौरान 2,17,979 कार्ड जोड़े। 

जुलाई-सितंबर (दूसरी तिमाही) तिमाही में कार्ड की संख्या में 25.5 लाख की गिरावट आई। प्रमुख जारीकर्ताओं में देश के सबसे बड़े कार्ड जारीकर्ता एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट कार्डों की संख्या में वित्त वर्ष 23 की दूसरी तिमाही में 16.2 लाख की शुद्ध गिरावट आई। ई-कॉमर्स लेन-देन की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण पिछले आठ महीनों में कार्ड खर्च लगातार 1 लाख करोड़ रुपये के ऊपर रहा है। महामारी में कम हुए यात्रा और आतिथ्य खर्च मजबूती से वापस आ गए हैं।



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4.5 गीगावॉट बिजली आपूर्ति के लिए बोली आमंत्रित

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देश के सभी इलाकों में अगले साल खासकर ज्यादा मांग वाले गर्मी के महीनों में बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के वास्ते  केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने 4.5 गीगावॉट बिजली खरीदने के लिए बिजली उत्पादन कंपनियों (जेनको) से बोली आमंत्रित की है। आपूर्ति की अवधि 5 साल होगी। साथ ही इस योजना में पात्र पाई जाने वाली उत्पादन कंपनियों को अतिरिक्त कोयले का आवंटन किया जाएगा। 

बिजली मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘ पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड (पीएफसी लिमिटेड की पूर्ण मालिकाना वाली सहायक इकाई) को बिजली मंत्रालय की नोडल एजेंसी बनाया गया है। योजना के तहत पीएपसी कंसल्टिंग लिमिटेड ने 4,500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति के लिए बोली आमंत्रित की है। बिजली की आपूर्ति अप्रैल 2023 से शुरू होगी। कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया गया है कि वह सालाना करीब 2.7 करोड़ टन कोयले का आवंटन करे।’ 

यह बोली शक्ति योजना के तहत आमंत्रित की गई है, जिसे केंद्र ने 2017 में शुरू किया था, जिससे देश भर में बिजली की भरपूर आपूर्ति के लिए कोयला लिंकेज सुनिश्चित किया जा सके। बिजली मंत्रालय ने वित्त, स्वामित्व और संचालन (एफओओ) के आधार पर शक्ति (भारत में पारदर्शी रूप से कोयले के उपयोग और आवंटन की योजना) नीति के तहत बोली आमंत्रित की है। इसमें यह भी कहा गया है कि राज्यों के समूह भी बिजली की जरूरतों के मुताबिक किसी एजेंसी के माध्यम से बिजली की खरीद कर सकेंगे। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 21 दिसंबर 2022  तक है।



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