Connect with us

Business

सीडीएसएल में साइबर हमला

Published

on


डीमैट खातों के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी डिपोजिटरी सेट्रल डिपोजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) शुक्रवार को साइबर हमले का शिकार हो गई। इस कारण निपटान गतिविधियों पर असर पड़ा। डिपोजिटरी ने अपनी कुछ आंतरिक मशीनों में मालवेयर पकड़ा। इसके बाद कंपनी ने उन कंप्यूटर को अलग कर दिया और पूंजी बाजार के अन्य घटक भी इससे दूर कर दिए। सीडीएसएल ने एक बयान में कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि निवेशक आंकड़ों या किसी तरह की गोपनीय जानकारी को नुकसान नहीं हुआ है। 

इस घटना के बारे में अधिकारियों को बता दिया गया है। सिक्योरिटीज डिपोजिटरी की आधिकारिक वेबसाइट ठप रही और शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक वह एरर दिखाती रही। सीडीएसएल ने कहा कि वह घटना से हुए नुकसान का विश्लेषण करने के लिए अपने साइबर सुरक्षा सलाहकारों के साथ काम कर रही है। इसका समाधान करने की प्रक्रिया जारी है, उसके बाद ही निपटान की गतिविधियों को संपन्न कराया जाएगा।

खबरों के अनुसार, अक्टूबर, 2021 में सीडीएसएल की सहायक कंपनी सीडीएसएल वेंचर्स लिमिटेड (सीवीएल) में भी आशंकाएं सामने आई थीं। उस दौरान 4.3 करोड़ से ज्यादा निवेशकों के निजी और वित्तीय आंकड़े उजागर हो गए। इस तरह की दो घटनाएं महज 10 दिन के भीतर हुईं। साइबर सुरक्षा सलाहकार स्टार्टअप साइबरएक्स9 ने दावा किया कि सिक्योरिटीज डिपोजिटरी को इसे ठीक करने में करीब सात दिन लग गए जबकि इसे तुरंत हल किया जा सकता था।

अगस्त के अंत तक, सीडीएसएल के पास 7.16 करोड़ डीमैट खाते थे, जिनमें 3.85 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां थीं। अपनी 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बाजार से जुड़ी सभी संस्थाओं (एमआईआई) की विशेष साइबर जांच कराने का प्रस्ताव किया है, जिससे कि किसी साइबर हमले से निपटने में उनकी तैयारियों का आकलन किया जा सके। 

सेबी के अनुसार, विभिन्न साइबर सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर बाजार से जुड़ी संस्थाओं, किसी निर्गम के रजिस्ट्रार और शेयर ट्र्रांसफर एजेंट, केवाईसी करने वाली एजेसियां और प्रमुख ब्रोकिंग कंपनियों को निर्देश दिया जाएगा कि वे अपनी सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट और इस पर कितना अमल हुआ, इसकी जानकारी सेबी को दें, ताकि वह इसका व्यापक विश्लेषण कर सके।



Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Business

सेबी शेयर ब्रोकरों के लिए लेकर आई समाधान योजना

Published

on

By


भाषा / नई दिल्ली 11 28, 2022






पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने प्रवर्तन प्रक्रियाओं का सामना कर रहे शेयर ब्रोकरों के लिए एक विवाद समाधान योजना लाने का फैसला किया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सार्वजनिक सूचना में कहा है कि प्रवर्तन कार्रवाई का सामना कर रहे और BSE पर अचल स्टॉक संपत्तियों में लेनदेन से रोके गए 150 शेयर ब्रोकरों के लिए समाधान योजना लाने का फैसला किया गया है। 

समाधान योजना के लिए देना होगा शुल्क 

योजना के दायरे में आने वाले शेयर ब्रोकर शर्तों का पालन कर इसका लाभ उठा सकते हैं। यह समाधान योजना 19 दिसंबर को शुरू होगी और 19 जनवरी, 2023 इसकी अंतिम तारीख होगी। सेबी ने इच्छुक ब्रोकरों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का प्रावधान कर समाधान योजना को सुगम बनाने की कोशिश की है। समाधान राशि के तौर पर अधिकांश ब्रोकरों को मात्र एक लाख रुपये का शुल्क ही देना होगा। 



Source link

Continue Reading

Business

सरकार को ONGC से 5,001 करोड़ रुपये का डिविडेंट मिला

Published

on

By


 












भाषा / नई दिल्ली 11 28, 2022






सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) से डिविडेंट (Dividend) के रूप में 5,001 करोड़ रुपये मिले है। इस तरह चालू वित्त वर्ष में सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSE) से कुल 23,797 करोड़ रुपये का डिविडेंट मिल चुका है।

निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने ट्वीट किया,‘सरकार को ONGC से डिविडेंट के रूप में करीब 5,001 करोड़ रुपये मिले हैं।’ DIPAM ने 2020 में CPSE को एक सुसंगत लाभांश नीति का पालन करने और लाभप्रदता, निवेश की आवश्यकताओं, नकद/आरक्षित और निवल मूल्य जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए उच्च डिविडेंट का भुगतान करने का प्रयास करने की सलाह दी थी।

दिशानिर्देशों के अनुसार CPSE को कर के बाद लाभ का 30 फीसदी (पीएटी) या निवल मूल्य का पांच फीसदी, जो भी अधिक हो, का न्यूनतम वार्षिक डिविडेंट देना आवश्यक है। DIPAM की वेबसाइट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अबतक कुल डिविडेंट प्राप्ति 23,796.55 करोड़ रुपये हो गई हैं। 

Keyword: ONGC,, Dividend, DIPAM, CPSE, ONGC Dividend,


























Source link

Continue Reading

Business

सोयाबीन का उत्पादन पहले से कम होने का अनुमान

Published

on

By


 












बीएस रिपोर्टर / नई दिल्ली November 28, 2022






इस साल सोयाबीन का उत्पादन उम्मीद से कम रह सकता है। इसके उत्पादन में पहले लगाए गए अनुमान से गिरावट आ सकती है। सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट की वजह बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान होना है। राजस्थान में उत्पादकता में 15 फीसदी कमी आई है। ओरिगो कमोडिटीज के अंतिम आंकड़ों में वर्ष 2022—23 के खरीफ सीजन में कुल खरीफ फसलों के उत्पादन में 1.7 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया है। खरीफ फसलों का उत्पादन 64.26 करोड़ टन रहने का अनुमान है।ओरिगो कमोडिटीज में सीनियर मैनेजर (कमोडिटी रिसर्च) इंद्रजीत पॉल ने बताया कि इस साल सितंबर में 124.80 लाख टन सोयाबीन पैदा होने का अनुमान लगाया गया था, जो पिछले साल से करीब 4.5 फीसदी ज्यादा था। लेकिन बीते महीनों में बेमौसम बारिश से सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ। जिससे सोयाबीन की उत्पादकता में कमी आई है। इसलिए अब इस साल सोयाबीन उत्पादन घटने का अनुमान है।

ओरिगो कमोडिटीज के अंतिम अनुमान के मुताबिक 123.30 लाख टन सोयाबीन पैदा हो सकता है, जो पहले लगाए गए अनुमान से करीब 1.2 फीसदी कम है। हालांकि सोयाबीन का उत्पादन पिछले साल से 3.30 फीसदी ज्यादा है। पॉल कहते हैं कि बेमौसम बारिश से राजस्थान में सोयाबीन की फसल को काफी नुकसान हुआ है और राजस्थान में सोयाबीन की उत्पादकता में 15 फीसदी कमी आने का अनुमान है। जिससे राजस्थान में सोयाबीन उत्पादन 1.5 लाख टन घटने का अनुमान है। वर्ष 2022—23 में राजस्थान में अब 8.30 लाख टन सोयाबीन पैदा होने का अनुमान है, जबकि पहले 9.80 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। मध्य प्रदेश में 47.90 लाख टन, महाराष्ट्र में 57.40 लाख टन सोयाबीन उत्पादन होने अनुमान है। इन दोनों में राज्यों में उत्पादन पहले लगाए गए अनुमान के मुताबिक ही है।

 

Keyword: soybean, soybean production, soybean yield,


























Source link

Continue Reading