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शीर्ष अदालत का ‘RTI पोर्टल’ जल्द शुरू हो जाएगा: जस्टिस चंद्रचूड़

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प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय से जुड़ी जानकारियां हासिल करने में लोगों की मदद के लिए शीर्ष अदालत का ‘आरटीआई पोर्टल’ जल्द शुरू हो जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश ने एक याचिका पर सुनवाई की शुरुआत में कहा कि ‘पोर्टल’ 15 मिनट में काम करना शुरू कर देगा। प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने वकीलों से तकनीकी खामियों पर गौर करने और ‘पोर्टल’ को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ विधि के छात्रों आकृति अग्रवाल और लक्ष्य पुरोहित द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें शीर्ष अदालत में आरटीआई आवेदन ऑनलाइन दाखिल करने के लिए एक पोर्टल शुरू करने का अनुरोध किया गया था।

पीठ में न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला भी शामिल हैं।



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स्टाफिंग कंपनियों के लिए अल्पावधि चिंता बरकरार

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राम प्रसाद साहू / मुंबई 11 28, 2022






स्टाफिंग सॉल्युशन कंपनियों के शेयरों ने नवंबर में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया। जहां इस क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियों – क्वेस कॉर्प और टीमलीज सर्विसेज में 14-22 प्रतिशत की गिरावट आई, वहीं एसआईएस के समान अव​धि के दौरान 7 प्रतिशत की कमजोरी आई। इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2022 की सितंबर तिमाही का परिणाम मिश्रित रहा और सुस्त अल्पाव​धि परिदृश्य से शेयरों में गिरावट को बढ़ावा मिला। 

हालांकि टीमलीज का प्रदर्शन अनुमानों के अनुरूप रहा, लेकिन क्वेस और एसआईएस के परिचालन प्रदर्शन ने बाजार ​को निराश किया। टीमलीज ने 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, क्योंकि उसे कर्मियों की संख्या में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत तक की वृद्धि से मदद मिली, जबकि क्वेस के लिए वृद्धि 32 प्रतिशत रही। एसआईएस ने सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

हालांकि क्वेस की राजस्व वृद्धि मजबूत थी, लेकिन आईआईएफएल सिक्योरिटीज के विदित शाह का कहना है कि कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन कमजोर रहा, क्योंकि उसके अच्छे योगदान वाले सेगमेंट (वर्कफोर्स मैनेजमेंट) का मार्जिन अमेरिकी स्टाफिंग में किए गए निवेश और आईटी नियु​क्तियों में सुस्ती की वजह से खराब रहा। 

टीमलीज का मार्जिन 1.6 प्रतिशत रहा और यह अनुमान से कम था।  एसआईएस का राजस्व बाजार अनुमानों के अनुरूप रहा, हालांकि उसका परिचालन मार्जिन उसके अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में दबाव को देखते हुए कमजोर रहा। आस्ट्रेलिया में पारिश्रमिक वृद्धि की वजह से कंपनी के अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में तिमाही आधार पर 170 आधार अंक की गिरावट आई।

घरेलू सुरक्षा व्यवसाय ने 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अपना सर्वा​धिक तिमाही राजस्व दर्ज किया। इसे कर्मियों की संख्या में13 प्रतिशत वृद्धि और 6 प्रतिशत की प्रति कर्मचारी राजस्व वृद्धि से मदद मिली। क्षेत्र के लिए मुख्य चिंता टेक्नोलॉजी क्षेत्र के लिए समस्याओं को देखते हुए सुस्त अल्पाव​​धि परिदृश्य और प्रबंधन का सतर्क रुख है। 

टीमलीज ने भविष्य में कमजोर तिमाही प्रदर्शन का संकेत दिया है और इससे नियु​क्ति प्रक्रिया प्रभावित होने का अनुमान है।कोटक इंस्टीट्यूशनल इ​क्विटीज की गरिमा मिश्रा और शुभांगी निगम का कहना है कि टीमलीज स्वयं जोड़े गए कर्मचारियों के अनुपात में वृद्धि के बावजूद पीएपीएम बढ़ाने में सक्षम नहीं रही है। कंपनी को निर्माण क्षेत्र में पैठ बढ़ाने की जरूरत है।

ब्रोकरेज फर्म ने कम मार्जिन अनुमानों की वजह से कंपनी के वित्त वर्ष 2023-25 के आय अनुमानों में 2-9 प्रतिशत तक की कमी की है। दूसरी तिमाही के कमजोर प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने क्वेस कॉर्प के वित्त वर्ष 2023-25 के आय अनुमानों में 10-21 प्रतिशत तक की कमी की है।



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सितंबर तिमाही में बैंकों का लोन कारोबार 17.2 फीसदी बढ़ा: RBI

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भाषा / नई दिल्ली 11 28, 2022






Bank Credit Growth: बैंकों का लोन कारोबार जुलाई-सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 17.2 फीसदी बढ़ा है। एक साल पहले समान तिमाही में बैंकों का लोन कारोबार सात फीसदी रहा था। बैंक ऋण में बढ़ोतरी से आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत मिलता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को ‘सितंबर-2022 के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की जमा और ऋण का तिमाही आंकड़ा जारी करते हुए कहा, ‘ऋण में वृद्धि व्यापक रही है। सभी जनसंख्या समूहों और बैंक समूहों ने सितंबर, 2022 के दौरान ऋण में 10 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की है।’

ये आंकड़े सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCB) से जुटाए जाते है। इसमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB, लघु वित्त बैंक (SFB) और भुगतान बैंक (PB) शामिल हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, कर्ज में सितंबर तिमाही में 17.2 फीसदी की वृद्धि हुई। इससे पिछली अप्रैल-जून तिमाही में कर्ज वृद्धि 14.2 फीसदी थी। वहीं एक साल पहले समान तिमाही में यह सात फीसदी थी। 

आंकड़ों के अनुसार, जून 2021 से कुल जमा वृद्धि (साल-दर-साल) लगातार 9.5 और 10.2 फीसदी के दायरे में रही है। हालांकि यह सितंबर, 2022 में 9.8 फीसदी थी। ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी क्षेत्रों की तुलना में महानगरीय क्षेत्रों में बैंक शाखाएं दिसंबर, 2020 से ऊंची सालाना वृद्धि दर्ज कर रही हैं। 

RBI ने कहा कि निजी क्षेत्र के बैंक समूह जमा जुटाने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, विदेशी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पीछे छोड़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, सावधि जमा वृद्धि सालाना आधार पर सितंबर, 2022 में बढ़कर 10.2 फीसदी हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 6.4 फीसदी थी। हालांकि चालू और बचत जमा वृद्धि एक साल पहले के क्रमशः 17.5 फीसदी और 14.5 फीसदी से घटकर 8.8 फीसदी और 9.4 फीसदी रह गई। RBI ने कहा कि कुल जमा में बचत जमा की हिस्सेदारी नवीनतम तिमाही में मामूली रूप से घटकर 34.7 फीसदी रह गई। यह जून, 2019 के 32.4 फीसदी से बढ़कर जून, 2022 में 35.2 के उच्चस्तर पर पहुंची थी।

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इस साल धान खरीद अबतक नौ प्रतिशत बढ़कर 306 लाख टन पर

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भाषा / नई दिल्ली 11 28, 2022






केंद्रीय पूल के लिए सरकार की धान खरीद मौजूदा खरीफ विपणन सत्र 2022-23 में अब तक नौ प्रतिशत बढ़कर 306.06 लाख टन हो गई है। खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से अधिक मात्रा में धान खरीदा गया है। आमतौर पर धान की खरीद अक्टूबर से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के बाद शुरू होती है। हालांकि, दक्षिणी राज्यों में, विशेषकर केरल और तमिलनाडु में यह काम सितंबर से शुरू होता है।


सरकार का लक्ष्य खरीफ विपणन सत्र 2022-23 (अक्टूबर-सितंबर) में 775.72 लाख टन धान खरीद का है। पिछले खरीफ विपणन सत्र में वास्तविक खरीद रिकॉर्ड 759.32 लाख टन हुई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ विपणन सत्र 2022-23 में 27 नवंबर तक कुल धान खरीद बढ़कर 306.06 लाख टन हो गई है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 280.51 लाख टन थी।


पंजाब में धान की खरीद इस विपणन वर्ष में अबतक 2.76 प्रतिशत घटकर 181.62 लाख टन रह गई है, जो कि साल भर पहले की इसी अवधि में 186.79 लाख टन थी। हरियाणा में धान की खरीद 8.18 प्रतिशत बढ़कर 58.96 लाख हो गई है जो पिछले साल इस दौरान 54.50 लाख टन रही थी।


आंकड़ों से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में इस साल अबतक 16.88 लाख टन धान खरीदा जा चुका है, जबकि पिछले साल इस अवधि के दौरान धान की खरीद शुरू भी नहीं हुई थी। तेलंगाना में धान की खरीद इस साल अबतक 16.18 लाख टन रही है, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 10.94 लाख टन थी। इसी तरह उत्तर प्रदेश में उक्त अवधि में धान की खरीद पहले के 9.20 लाख टन से बढ़कर 10.28 लाख टन हो गई है।


धान की खरीद सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और निजी एजेंसियों दोनों द्वारा की जाती है। किसानों से सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद की जाती है और कई कल्याणकारी योजनाओं के तहत मांग को पूरा करने के लिए इनका उपयोग किया जाता है।


धान खरीफ (गर्मी) और रबी (सर्दियों) दोनों मौसमों में उगाया जाता है। लेकिन देश के कुल धान उत्पादन का 80 प्रतिशत हिस्सा खरीफ सत्र से आता है। कृषि मंत्रालय के पहले अनुमान के अनुसार, देश का धान उत्पादन खरीफ सत्र 2022-23 में छह प्रतिशत घटकर 10 करोड़ 49.9 लाख टन रहने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण उत्पादक राज्यों विशेषकर झारखंड में कमजोर बारिश के मद्देनजर धान के रकबे का कम होना है।

 



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