Connect with us

International

रूस को बड़ा झटका! जर्मनी यूक्रेन को देगा 14 लेपर्ड-2 युद्धक टैंक की मदद

Published

on


Image Source : FILE/AP
जर्मनी ने यू-टर्न लेते हुए की बड़ी घोषणा

बर्लिन: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान जर्मनी ने बड़ी घोषणा की है। जर्मनी ने अपनी पिछली स्थिति से यू-टर्न लेते हुए कहा है कि यूक्रेन में अपने 14 टैंक भेजने और दूसरों को ऐसा करने की अनुमति देने के लिए वह तैयार है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने बुधवार को घोषणा की कि जर्मनी यूक्रेन को अपने बुंडेसवेहर (जर्मन सशस्त्र बल) के स्टॉक से 14 लेपर्ड-2 टैंक देगा। एक सरकारी बयान में, स्कोल्ज़ ने कहा कि जर्मनी यूक्रेन के लिए सैन्य समर्थन में वृद्धि जारी रखेगा और यूक्रेनी सशस्त्र बलों को 14 लेपर्ड-2 टैंक देगा। चांसलर ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बारीकी से काम कर रहे हैं। 

यूक्रेन काफी समय से कर रहा था इस टैंक की मांग 

यूक्रेन लगातार इस टैंक की मांग कर रहा था। उसने जर्मनी में बना ये टैंक इसलिए मांगा था क्योंकि वह इसे रूस के खिलाफ अपने युद्ध में इस्तेमाल करना चाहता था। ऐसे में यूरोपीय देशों पर भी इस बात का प्रेशर था कि वो यूक्रेन से दोस्ती को निभाते हुए ये टैंक उपलब्ध करवाएं। ऐसे में हालही में जर्मनी की विदेश मंत्री अन्ना बेयरबॉक ने कहा था कि अगर पोलैंड यूक्रेन को लेपर्ड-2 टैंक देना चाहता है तो वो रास्ते में नहीं आएंगी।

लेपर्ड-2 टैंक की क्या है खासियत?

जर्मनी की क्रौस-मफेई वेगमैन ने लेपर्ड-2 टैंक को बनाया है। इसकी रेंज लगभग 450 किलोमीटर तक है। ये टैंक 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। कंपनी की ओर से किए गए दावे के मुताबिक, ये सबसे खतरनाक बैटल टैंक है, जो करीब 50 सालों तक बरकरार रहता है। इस टैंक का वजन 55 टन है, जिसमें 4 जवान बैठ सकते हैं। इस टैंक का पहला वैरिएंट 1979 में आया था और अब तक इसके 4 वैरियंट सामने आ चुके हैं। इसकी खासियत ये है कि अगर इस पर हमला होता है तो अंदर बैठे सैनिक सुरक्षित रहते हैं। 

ये भी पढ़ें- 

रूस ने नाटो को दी खुली धमकी- ‘उड़ा देंगे सारे टैंक और रॉकेट’, अमेरिका को बताया सबसे बड़ा दुश्मन

पाकिस्तान के बाद आर्थिक संकट से बेहाल हुआ मिस्र, अंतरिक्ष को छू रहे चावल-आटा के दाम, अंडा बना लग्जरी आइटम

Latest World News

India TV पर हिंदी में ब्रेकिंग न्यूज़ Hindi News देश-विदेश की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट और स्‍पेशल स्‍टोरी पढ़ें और अपने आप को रखें अप-टू-डेट। Europe News in Hindi के लिए क्लिक करें विदेश सेक्‍शन





Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

International

तुर्की और सीरिया में भूकंप से बड़ी तबाही, अबतक 3800 लोगों की मौत, जानें पल-पल की खबर

Published

on

By


Image Source : ANI
तुर्की और सीरिया में भूकंप से बड़ी तबाही

Turkey and Syria Earthquake Live Updates: तुर्की और सीरिया में सोमवार को आए विनाशकारी भूकंप ने बड़ी तबाही मचाई है। भूकंप से अबतक कम से कम 3,800 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। चारों तरफ मलबा ही मलबा नजर आ रहा है, मलबे से लोगों को निकाला जा रहा है । मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। राहत और बचाव कार्य भी जारी हैं। मिली जानकारी के मुताबिक तुर्की में 24 घंटे के भीतर तीन बार आए भूकंप के बड़े झटकों से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,379 हो गई है, जबकि सीरिया में मृतकों की संख्या 1,444 बताई गई है। इससे अब तक मरने वालों की कुल संख्या 3,823 से अधिक हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी का कहना है, ‘ज़रूरतमंद लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है और संकट गहराता जा रहा है।’

Latest World News

India TV पर हिंदी में ब्रेकिंग न्यूज़ Hindi News देश-विदेश की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट और स्‍पेशल स्‍टोरी पढ़ें और अपने आप को रखें अप-टू-डेट। Asia News in Hindi के लिए क्लिक करें विदेश सेक्‍शन





Source link

Continue Reading

International

आरएसपी के समर्थन वापस लेने के बाद नेपाल सरकार में भूचाल, तीन मंत्रियों के इस्तीफे से प्रचंड परेशान

Published

on

By


Image Source : PTI
पुष्प कमल दहल प्रचंड, नेपाल के प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। नेपाल में सत्तारूढ़ गठबंधन से आरएसपी के समर्थन वापसी के बाद प्रचंड की सरकार लगातार मुश्किलों का सामना कर रही है। लामिछाने के जाने के बाद उनकी पार्टी के तीन और मंत्रियों ने सरकार से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामीछाने को नेपाल के गृहमंत्री के पद पर पुन: आसीन करने से प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ द्वारा इनकार कर दिये जाने के बाद आरएसपी ने रविवार को देश के सत्तारूढ़ गठबंधन से हट जाने का फैसला कर लिया। पार्टी के केंद्रीय सदस्यों और सांसदों की संयुक्त बैठक में सरकार से अलग होने का फैसला लिए जाने के बाद आरएसपी के तीन मंत्रियों ने रविवार को इस्तीफा दे दिया था।

श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डी़ प्रसाद अरयल, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री शिशिर खनाल और स्वास्थ्य एवं जनसंख्या राज्य मंत्री तोषिमा कार्की ने अपने इस्तीफे प्रधानमंत्री को सौंपे। लामीछाने (48) पिछले साल नवंबर में चुनाव में चितवन-2 निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। नेपाल के उच्चतम न्यायालय के 27 जनवरी के फैसले के बाद वह संसद की अपनी सदस्यता गंवा बैठे। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि संसदीय चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने जो नागरिकता प्रमाणपत्र जमा किया था, वह अवैध है। ऐसे में उनका मंत्री पद एवं पार्टी अध्यक्ष पद भी चला गया, क्योंकि इन पदों पर आसीन रहने के लिए व्यक्ति का नेपाली नागरिक होना जरूरी है। उनतीस जनवरी को उन्होंने पुन: नागरिकता हासिल की और उसके बाद प्रचंड से मिलकर उन्होंने मांग की कि उन्हें फिर से गृहमंत्री बनाया जाए, लेकिन प्रधानमंत्री ने ऐसा करने से मना कर दिया। लामीछाने को पिछले साल 26 दिसंबर को उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री नियुक्त किया गया था। उससे पहले उनकी पार्टी आरएसपी संघीय चुनाव में 20 सीट जीतकर संसद में चौथी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी थी।

टेलीविजन हस्ती लामीछाने ने 2013 में सबसे लंबे समय के टॉकशॉ की मेजबानी कर गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने की कोशिश की थी और तब सुर्खियों में आये थे। लामीछाने ने आरएसपी की केंद्रीय समिति की संयुक्त बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अतीत में भी उन्हें कई विवादों में फंसाने की कोशिश की गयी, लेकिन वह उनसे बाहर आने में सदैव सफल रहे। गठबंधन सरकार से हटने के आरएसपी के फैसले का प्रधानमंत्री प्रचंड के राजनीतिक भविष्य पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि भले ही आरएसपी ने अपने मंत्रियों को वापस बुलाने का निर्णय ले लिया हो, लेकिन पार्टी इस सरकार को समर्थन देती रहेगी।

Latest World News

India TV पर हिंदी में ब्रेकिंग न्यूज़ Hindi News देश-विदेश की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट और स्‍पेशल स्‍टोरी पढ़ें और अपने आप को रखें अप-टू-डेट। Asia News in Hindi के लिए क्लिक करें विदेश सेक्‍शन





Source link

Continue Reading

International

पर्यावरण के लिहाज से G-20 में ये दो मुद्दे होंगे भारत के लिए अहम, पूरी दुनिया को होगा

Published

on

By


Image Source : AP
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत

नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन से पैदा हुए पर्यावरण के खतरे के मद्देनजर जी-20 सम्मेलन में भूमि संरक्षण और संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल भारत के लिए दो अहम मुद्दे होंगे। भूमि क्षरण, जैव विविधता की हानि, समुद्री प्रदूषण, मैंग्रोव व कोरल रीफ का संरक्षण, संसाधानों का अति उपयोग और कूड़े के निस्तारण में खामी वे अहम पर्यावरण चिंताएं हैं, जिनके समाधान की कोशिश भारत की अध्यक्षता में जी-20 की प्राथमिकता होगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को प्रोत्साहित करेगा और जी-20 में लचीले विकास प्रतिमान को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य जी-20 की अध्यक्षता करने के दौरान जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए एक एकीकृत, व्यापक और सर्वसम्मति से संचालित दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। अधिकारियों ने बताया कि जलवायु वित्त के मुद्दे को भी चर्चा में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत जी-20 की अध्यक्षता के दौरान ‘‘भूमि क्षरण से निपटने के लिए जी-20 मसौदा’ स्वीकार करने और ‘‘जी-20 ऑनलाइन ज्ञान और समाधान आदान-प्रदान मंच’ के विकास को प्रोत्साहित करेगा। अधिकारियों ने बताया कि भारत समुद्री परिसंपत्ति का सह लाभ के साथ बेहतरीन प्रबंध, स्थायी विकास लक्ष्य 14 के लिए वित्त व्यवस्था करने के लिए ‘समुद्र 20 संवाद’ करना चाहता है। इसका उद्देश्य समुद्र, सागर और समुद्री संसधान का संरक्षण और स्थायी इस्तेमाल है।

बेंगलुरु में 9 फरवरी से पहली बैठक


शेरपा ट्रैक के अधीन गठित 13 कार्य समूहों में से एक पर्यावरण व जलवायु स्थायित्व कार्यसमूह फरवरी और मई के बीच चार बार बैठक करेगा। पहली बैठक बेंगलुरु में नौ से 11 फरवरी के बीच होगी, दूसरी बैठक गांधीनगर में 27 से 29 मार्च के बीच प्रस्तावित है, तीसरी बैठक मुंबई में 21 से 23 मई के बीच होगी और चौथी बैठक के लिए चेन्नई को चुना गया है जहां पर 26 और 27 मई को समूह की बैठक प्रस्तावित है। समूह की मंत्रिस्तर की बैठक 28 जुलाई को चेन्नई में आयोजित करने की योजना है। अतिरिक्त सचिव रिचा शर्मा ने कहा, ‘‘भूमि क्षरण, जैव विविधिता को हो रही हानि को रोकने और पारिस्थितिकी को बहाल करने की तत्काल जरूरत है क्योंकि दुनिया की 23 प्रतिशत भूमि अब संसाधनों के अतिदोहन और बंजर होने की वजह से कृषि उत्पादन के अनुकूल नहीं है।’’ सितंबर 2020 में जारी ‘डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ‘लिविंग प्लैनट रिपोर्ट’ के मुताबिक वर्ष 1970 से अब तक स्तनपायी, पक्षियों, उभचरों, सरीसृपों और मछलियों की संख्या में गिरावट आई है। अधिकारी ने बताया कि दूसरी प्राथमिकता स्थायी और जलवायु अनुकूल नीली अर्थव्यवस्था है।

सर्कुलर अर्थव्यवस्था

रिचा शर्मा ने बताया कि भारत नीली अर्थव्यवस्था के लिए नीति बनाने के अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, ‘‘यह अहम मुद्दा है और हम इंडोनिशया की अध्यक्षता से इसे जारी रखना चाहते हैं। इसलिए समुद्री प्रदूषण, मैंग्रोव और कोरल रीफ का सरंक्षण वे मुद्दे हैं जिन पर भारत की अध्यक्षता के दौरान चर्चा होगी।’’ अधिकारी ने बताया कि भारत विशेष तौर पर समुद्र में कचरे के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित कराना चाहता है और वह समन्वित समुद्र तट सफाई अभियान शुरू करेगा जिसमें जी-20 समूह के सभी देश और मेहमान देश 21 मई को हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि तीसरी प्राथमिकता संसाधनों का उचित उपयोग और ‘सर्कुलर अर्थव्यवस्था’ भारत सरकार की एक अन्य प्रमुख नीतिगत प्राथमिकता है।

Latest World News





Source link

Continue Reading