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मोदी ने बिल्कुल ठीक कहा था… यह युद्ध का युग नहीं है, भारत यात्रा से पहले गुतारेस ने किया प्रधानमंत्री का समर्थन

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वॉशिंगटन : संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस टिप्पणी का समर्थन किया है कि यह ‘युद्ध का युग’ नहीं है । उन्होंने साथ ही कहा है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए स्थितियां बनाने की दिशा में प्रयासों का ‘बहुत स्वागत’ किया जाएगा। मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान कहा था कि यह ‘युद्ध का युग नहीं’ है। गुतारेस ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने जो रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा है कि यह युद्ध का समय नहीं है, मेरे ख्याल से बिल्कुल सच है। कोई समय, युद्ध का समय नहीं है। लेकिन यह वक्त विशेष रूप से युद्ध का वक्त नहीं है। अतः मैं इसका पूर्ण समर्थन करता हूं।’

अपनी भारत यात्रा से पहले, पीटीआई-भाषा से बातचीत में गुतारेस ने कहा कि वह यूक्रेन में युद्ध के तेज़ होने से ‘बहुत चिंतित’ हैं, खासकर तब जब इस वजह से बड़ी संख्या में आम लोग हताहत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति पहले से ही बहुत जटिल है । इससे यह और खराब हो रही है। पुतिन ने 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ ‘विशेष सैन्य अभियान’ का आदेश दिया था। इस संघर्ष का असर आर्थिक तौर पर,खासकर, खाद्य और ऊर्जा पर पड़ा है।

भारत आ रहे UN चीफ गुतारेस, पाकिस्तानी पत्रकार ने पूछा- क्या कश्मीर पर भी होगी बातचीत?
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हो समाधान
उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से समाधान के लिए स्थितियां बनाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समाधान का बहुत स्वागत किया जाएगा। गुतारेस की तीन दिवसीय भारत यात्रा मंगलवार से शुरू हो रही है। जनवरी 2022 में दूसरी बार संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बनने के बाद गुतारेस की यह पहली भारत यात्रा है। गुतारेस विश्व संस्था के प्रमुख के तौर पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान अक्टूबर 2018 में भारत गए थे।

समरकंद में पीएम मोदी ने पुतिन को दिया संदेश
समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर सितंबर में राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन में शत्रुता की शीघ्र समाप्ति का आह्वान करते हुए ‘लोकतंत्र, संवाद और कूटनीति’ के महत्व को रेखांकित किया था। इस महीने की शुरुआत में, मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से टेलीफोन पर बातचीत की थी। इसके दौरान उन्होंने इस बात को लेकर ‘अपना दृढ़ विश्वास व्यक्त किया था कि संघर्ष का सैन्य समाधान नहीं हो सकता’ और उन्होंने किसी भी शांति प्रयास में योगदान के लिए भारत की इच्छा को व्यक्त किया था।’

यूक्रेन मुद्दे पर होगी बातचीत?
गुतारेस से पूछा गया कि उनकी यात्रा के दौरान भारतीय नेतृत्व के साथ बातचीत में यूक्रेन युद्ध के बारे में चर्चा हो सकती है? तो उन्होंने कहा, ‘हम बहुत ही विवेकपूर्ण तरीके से बहुत सक्रिय रहे हैं, क्योंकि मैं विवादित मुद्दों पर सार्वजनिक तौर पर बयान देने वाली कूटनीति में विश्वास नहीं करता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि सावधानी से की जाने वाली कूटनीति को अब भी भूमिका निभानी है और हम यूक्रेन में लोगों की पीड़ा को कम करने और दुनिया भर के लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए सभी तरीकों का पता लगाने की कोशिश में बहुत सक्रिय रहे हैं।’



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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज, लोगों के सपोर्ट में बोला UN- ”प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करना सीखे चीन’

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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज

चीन में कोरोना के चलते लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। एक तो कोरोना का प्रकोप ऊपर से सरकार की सख्ती और ना मानने पर पुलिस की कार्रवाई ने लोगों को प्रदर्शन करने पर मजूबर कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चीन को दो टूक सुनाया है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने चीन से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए लोगों को हिरासत में नहीं लेने का आग्रह किया है।

‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ का विरोध 

चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। वहीं कोरोना के चलते पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। 

लोगों को पुलिस की कारों में बांधा गया

शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। 

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दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी फटा, अमेरिका में बह रही आग की नदियां, आसमान हुआ लाल

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World Largest Volcano: दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिया ज्वालामुखी हवाई का मौना लोआ है। ये ज्वालामुखी रविवार को फट गया है। अभी ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा शिखर पर ही है। इससे स्थानीय लोगों को कोई खतरा नहीं है। यूनाइटेट स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे लगातार लावा के बहाव की निगरानी कर रहा है।

 



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चीन में ‘A4 क्रांति’, क्यों सादे कागज लहरा कर जिनपिंग की सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन?

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बीजिंग: चीन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कागज के खाली पन्ने एक प्रतिष्ठित वस्तु बन गए हैं, जिसे कई लोग ‘श्वेत पत्र क्रांति’, ‘कोरी चादर क्रांति’ या ‘ए4 क्रांति’ कहते हैं। देशभर में विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कागज की एक कोरी चादर पकड़े देखा गया। कुछ का कहना है कि यह सेंसरशिप से बचने का एक तरीका है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वायरल वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है, जिसमें नानजिंग के कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक महिला कोरे कागज के एक लंबे टुकड़े का एक छोर पकड़े हुई है और दूसरे छोर को एक अज्ञात व्यक्ति पकड़े हुआ है।

उस रात बाद के एक अन्य वीडियो में कैंपस में दर्जनों और छात्रों को श्वेत पत्र के टुकड़ों को पकड़े हुए देखा गया, जो मौन खड़े थे। सप्ताहांत में अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए। शनिवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला ने बीबीसी को बताया, ‘‘निश्चित रूप से कागज पर कुछ भी नहीं लिखा था, लेकिन हम जानते हैं कि यह किस चीज का प्रतीक है।’’

छात्रों के बीच प्रचलित है विरोध
कागज निर्माता शंघाई एम एंड जी स्टेशनरी ने उन अफवाहों का खंडन किया है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सभी ए4 पेपर को अलमारियों से हटा लिया है। कागज के खाली टुकड़े चीन में प्रदर्शनकारियों के लिए अवज्ञा का प्रतीक बन गए हैं, खासकर विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच। वे देश में लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं।

चीन में हो रहा मौन विरोध
यह मौन विरोध का एक रूप है, लेकिन उनके लिए सेंसरशिप या गिरफ्तार होने से बचने का एक तरीका है। सोमवार को कंपनी ने शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर एक आपातकालीन नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि एक जाली दस्तावेज ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। बीबीसी ने बताया कि एम एंड जी के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। उत्पादन और संचालन कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।



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