Connect with us

International

मुझे भारत में अमेरिकी राजदूत बनवा दो… 500 दिनों से गुहार लगा रहे एरिक गार्सेटी, कब मिलेगी नौकरी?

Published

on


वॉशिंगटन: अमेरिका में बाइडन सरकार को आए डेढ़ साल से ज्‍यादा का समय हो गया है लेकिन अभी तक भारत में एक स्‍थायी राजदूत की नियुक्ति नहीं हो पाई है। जो बाइडन ने भारत के साथ रिश्‍ते के महत्‍व को देखते हुए लॉस एंजिलिस के मेयर एरिक गार्सेटी को नई दिल्‍ली में राजदूत नियुक्‍त किया था लेकिन अभी तक उन्‍हें मंजूरी नहीं मिल पाई है। यही वजह है कि 500 दिन बीत जाने के बाद भी एरिक गार्सेटी अपनी नौकरी के लिए गुहार लगा रहे हैं। यही नहीं उनका मेयर का कार्यकाल भी अब केवल एक महीने ही बचा है।

इस बीच अमेरिकी राष्‍ट्रपति कार्यालय वाइट हाउस ने कहा है कि बाइडन प्रशासन एरिक गार्सेटी को भारत में अमेरिका का राजदूत नियुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। वाइट हाउस ने उम्मीद जतायी कि जल्द ही सीनेट गार्सेटी के नामांकन पर अपनी मुहर लगा देगी। 51 साल के गार्सेटी साल 2013 से ही लॉस एंजिलिस शहर के मेयर हैं। उन्‍हें राष्ट्रपति बाइडन का बेहद करीबी माना जाता है। मात्र एक महीने में बेरोजगारी के डर से अब गार्सेटी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है ताकि उन्‍हें लॉस एंज‍िलिस का मेयर बना दिया जाए।
अमेरिका-भारत संबंधों के इतिहास में 2022 रहा बड़ा साल, वाइट हाउस ने दिल खोलकर की पीएम मोदी की तारीफ
जानें कहां फंसा है पूरा मामला
दरअसल, गार्सेटी के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी के एक सीनेटर अभियान चला रहे हैं। सीनेटर का कहना है कि गार्सेटी ने अपने स्‍टाफ के यौन उत्‍पीड़न के मामले को ठीक से संभाला नहीं। इसी वजह से 16 महीने बाद भी गार्सेटी को भारत में अमेरिका का प्रतिनिधित्‍व करने का मौका नहीं मिल रहा है। आलम यह है कि सीनेट में गार्सेटी की नियुक्ति पर मतदान का नंबर ही नहीं आ रहा है। गार्सेटी और उनके सहयोगी सीनेट में मंजूरी के लिए जरूरी 50 वोट ही नहीं जुटा पा रहे हैं।

बाइडन ने अब तक जितने भी राजदूतों की नियुक्ति की है, उनमें गार्सेटी को सबसे ज्‍यादा लंबा समय तक के लिए इंतजार करना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक पूर्णकालिक राजदूत की नियुक्ति नहीं करके अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को गलत संदेश दे रहा है। इस बीच गार्सेटी ने कहा है कि भारत और अमेरिका के संबंध महत्‍वपूर्ण हैं। इसलिए मैं आशावादी हूं क्‍योंकि कई लोगों ने मुझसे कहा था कि चुनाव बीत जाने तक का इंतजार करो। अब चुनाव के बाद हम इस पर फोकस कर सकते हैं और मैं भारत में सेवा करने के लिए तैयार हूं।
G-20 में रूस की ‘आलोचना’ एशिया में नई शक्ति भारत का उदय है… मोदी का कायल हुआ पश्चिमअगले साल तक के लिए करना पड़ सकता है इंतजार
वाइट हाउस और सीनेट में बहुमत के नेता चुक चूमर यह फैसला करेंगे कि क्‍या और कब गार्सेटी के भारत के नामांकन को पेश किया जाए। हालांकि इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। अमेरिकी संसद में कई महत्‍वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी है, ऐसे में गार्सेटी को अगले साल तक के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। कहा जा रहा है कि गार्सेटी का मुद्दा सत्तारूढ़ डेमोक्रेट्स सीनेट के समक्ष लाने से इनकार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पास इसके लिए पर्याप्त वोट नहीं हैं।



Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

International

China Lockdown Jinping: शी जिनपिंग का तख्‍तापलट कर सकती थी चीनी जनता? क्रूर जीरो कोविड नीति में दी ढील तो उठे सवाल

Published

on

By


बीजिंग: चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने जीरो कोविड नीति के तहत लागू सख्‍त नियमों में ढील देने का फैसला कर दिया है। जीरो कोविड नीति के खिलाफ चीन के कई हिस्‍सों में बड़े स्‍तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इन प्रदर्शनों में छात्रों की संख्‍या हैरान करने वाली थी। छात्र, अपने उस राष्‍ट्रपति से पद छोड़ने की मांग कर रहे थे जो अजीवन शासन का सपना पाल रहा है। चीन मामलों के जितने भी विशेषज्ञ थे, वह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि प्रदर्शन इस हद तक एतिहासिक हो रहे हैं कि ये तियानमेन स्‍क्‍वॉयर की याद दिला रहे हैं। अप्रैल 1989 में हुआ तियानमेन आज भी एतिहासिक प्रदर्शनों में शामिल है। विशेषज्ञों की मानें तो कोविड नीति में ढील के फैसले को राहत के तौर पर तो देखना ही चाहिए। साथ ही साथ इन्‍हें जिनपिंग की एक कमजोरी के तौर पर भी देखा जाना चाहिए।

जिनपिंग से नाराज छात्र
बीजिंग, शंघाई और ऐसे कई शहरों में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। जीरो कोविड नीति को लेकर दंगे हो रहे थे और जनता का गुस्‍सा बढ़ता जा रहा था। ऐसे में जिनपिंग का झुकना लाजिमी था। पूर्व राजनयिक और ‘चाइना कूप’ के लेखक रोजर गारसाइड की मानें तो जिनपिंग का शासन इतने बड़े स्‍तर पर हो रहे प्रदर्शनों की वजह से खत्‍म होने की कगार पर आ गया था।

लगातार प्रदर्शनों की वजह से उन पर दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी में सीनियर रैंक्‍स पर मौजूद दूसरे नेता भी उनके खिलाफ विद्रोह कर सकते थे। गारसाइड ने कहा है कि कोविड नीति में ढील को जिनपिंग की कमजोर नस के तौर पर देखा जाएगा। न सिर्फ उनकी पार्टी के नेता बल्कि अब देश और विदेश में मौजूद चीनी नागरिक भी उन्‍हें कमजोर नेता के तौर पर देखेंगे। उनका कहना है कि जिनपिंग को जीरो कोविड नीति का मास्‍टरमाइंड माना जाता है।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद झुका चीन, क्रूर जीरो कोविड नीति में दी ढील, दुनिया के लिए खतरनाक है जिनपिंग का ऐलान!
नियमों में ढील

चीन ने कोविड-19 की रोकथाम के लिए लागू प्रतिबंधों में कई ढील देने की घोषणा की है। इसमें लॉकडाउन के नियमों को पूरे जिले या इलाके के बजाय किसी इमारत या उसकी विशेष मंजिल पर लागू किए जाने का नियम शामिल है। नए नियमों के तहत कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले लोग अस्पतालों में भर्ती होने के बजाय घर पर ही क्‍वारंटाइन में रह सकेंगे। इसके अलावा, जिन स्कूलों में संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है, वहां ऑफलाइन क्‍लासेज शुरू हो सकेंगी। ये रियायतें सख्त ‘जीरो कोविड’ नीति को लेकर चीन के विभिन्न शहरों में हुए प्रदर्शनों के मद्देनजर दी गई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में तीन साल से लागू इन प्रतिबंधों के चलते आम जनजीवन, यात्रा और रोजगार प्रभावित हुआ है, साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है।

जिनपिंग पर था दबाव
नए नियमों के तहत कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले लोग अस्पतालों में भर्ती होने के बजाय घर पर ही क्‍वारंटाइन में रह सकेंगे। इसके अलावा, जिन स्कूलों में संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है, वहां ऑफलाइन क्‍लासेज शुरू हो सकेंगी। जीरो कोविड नीति ने दुनिया की दूसरी आर्थिक महाशक्ति चीन में आम जनजीवन को रोक दिया था। एतिहासिक प्रदर्शनों की वजह से जिनपिंग पर दबाव बढ़ता ही जा रहा था। साथ ही अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी इनका असर नजर आने लगा था।

जहां कुछ प्रतिबंध कायम रहेंगे तो कुछ हटा लिए गए हैं। नए ऐलान के बाद रोजाना की गतिविधियों जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करना के लिए कोविड-19 के निगेटिव टेस्‍ट की जरूरत अब नहीं होगी। साथ ही बड़े पैमाने पर टेस्टिंग को भी रोक दिया गया है। कुछ शहरों में कुछ कड़े नियम हटाए जा रहे हैं। जहां नियमों में ढील आम जनता के लिए राहत की बात है तो कुछ विशेषज्ञों इससे घबराहट हो रही है।
अमेरिका से किनारा और जिनपिंग का शाही स्‍वागत, आखिर क्‍या चाल चल रहे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान
संकट की तरफ है देश

गारसाइड का कहना है कि जीरो कोविड नीति में ढील सामाजिक और राजनीतिक संकट की तरफ इशारा करती है। वृद्धों के बीच कोविड वैक्‍सीनेशन में तेजी लाने की जरूरत है। उनकी मानें तो ढील की वजह से अगर देश में बड़े पैमाने पर मौत हुई तो फिर सामाजिक और राजनीतिक संकट बढ़ जाएगा। ऐसे में हो सकता है जिनपिंग को अपनी सत्‍ता तक छोड़नी पड़ी।

टला नहीं प्रदर्शन का खतरा
जीरो कोविड नीति में ढील के बाद अगर मौतों का आंकड़ा बढ़ा तो फिर नए सिरे से प्रदर्शन शुरू हो जाएंगे। माना जा रहा है कि कोविड नीति में ढील के बाद चीन में महामारी से होने वाली मौतों का खतरा कई गुना तक बढ़ गया है। झाहू जियातोंग जो गुआंगक्‍सी में स्थित सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुखिया हैं, उनका कहना है कि ढील के बाद चीन में 20 लाख लोगों की जान महामारी की वजह से जा सकती है।



Source link

Continue Reading

International

Pakistan Army India: बालाकोट… पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए खतरा बना भारत! परमाणु बम की बात क्यों कर रहे ना’पाक’ सैन्य एक्सपर्ट

Published

on

By


इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तानी सेना के मुखिया जनरल असीम मुनीर सत्‍ता संभालने के बाद ही भारत को गीदड़ भभकी देने में जुट गए हैं। जनरल मुनीर ने कहा कि अगर भारत जंग शुरू करता है तो हम करारा जवाब देंगे। जनरल मुनीर चाहे जो भी धमकी दें लेकिन पाकिस्‍तानी सेना के ही विशेषज्ञ यह खुलकर मानने लगे हैं कि मोदी राज में भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए बड़ा खतरा बन गया है। पाकिस्‍तानी सेना जुड़े रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि सर्जिकल स्‍ट्राइक, बालाकोट जैसी कार्रवाई‍यों ने भारत ने अब पाकिस्‍तान को अपने अस्तित्‍व को बचाने के लिए कठिन विकल्‍प चुनने को मजबूर कर दिया है।

पाकिस्‍तान की आजादी पर आयोजित इस्‍लामाबाद कान्‍क्‍लेव 2022 चर्चा में पाकिस्‍तान के पूर्व ज्‍वाइंट चीफ ऑफ स्‍टॉफ कमिटी रिटायर जनरल जुबैर हयात ने अपने भाषण में कहा कि भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व को स्‍वीकार नहीं करता है और विभिन्‍न मोर्चों पर हमारे के लिए चुनौती पेश करता है। इस वजह से भारत का खतरा अभी खत्‍म नहीं हुआ है। जुबैर हयात ने कहा कि भारत के नेता भी 1947 के बंटवारे को ऐतिहासिक गलती मानते हैं। जुबैर ने भारत के सर्जिकल स्‍ट्राइक और साल 2019 में ऑपरेशन बालाकोट का भी जिक्र किया।
जनरल जुबैर ने कहा कि पाकिस्‍तान की धरती पर पहली बार हमला किया गया। उन्‍होंने ब्रह्मोस मिसाइल के दुर्घटनावश पाकिस्‍तान में गिरने का भी उल्‍लेख किया। बांग्‍लादेश के जन्‍म पर जनरल जुबैर की हताशा साफ झलकी। उन्‍होंने रिटायर जनरल बाजवा के उस बयान से अपनी सहमति जताई जिसमें उन्‍होंने कहा था कि पूर्वी पाकिस्‍तान में हुई हार सेना के कारण नहीं बल्कि राजनीतिक नेताओं की वजह से हुई थी। बता दें कि जनरल बाजवा के बयान को खुद उन्‍हीं के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी खारिज कर चुके हैं।

पाकिस्‍तान के एयर यूनिवर्सिटी इस्‍ला‍माबाद में विशेषज्ञ डॉक्‍टर आदिल सुल्‍तान ने कहा कि विदेशी माहौल ऐसा है कि पाकिस्‍तान को आर्थिक संकट के बाद भी परमाणु और परंपरागत हथियारों पर अपना फोकस बरकरार रखना होगा। सुल्‍तान ने कहा कि भारत बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम, एंटी सैटलाइट वेपन, हाइपरसोनिक मिसाइल, एक साथ कई परमाणु बम ले जाने वाली मिसाइल, पनडुब्‍बी से दागे जाने वाली मिसाइल जैसी नई तकनीक को शामिल कर रहा है। यह पाकिस्‍तान की प्रतिरोधक क्षमता की परेशानी को बढ़ाएगा। वहीं पाकिस्‍तानी लेखक जावेद जब्‍बार ने सलाह दी कि पाकिस्‍तान को अपनी जनसंख्‍या की बढ़त को कंट्रोल करने की जरूरत है।



Source link

Continue Reading

International

Passport Ranking India: पाकिस्‍तान के लिए एक और शर्म का पल, दुनिया में सबसे खराब पासपोर्ट, जानिए क्‍या है भारत का हाल

Published

on

By


Pakistan India Passport Ranking: पाकिस्‍तान (Pakistan) जो दुनिया के एक खतरनाक देश में शामिल है, अब उसका पासपोर्ट भी अपनी साख गंवा चुका है। यहां तक कि यूएई का पासपोर्ट भी अब उससे आगे है। एक सर्वे की मानें तो पाकिस्‍तानी पासपोर्ट दुनिया में सोमालिया के बराबर रैंकिंग रखता है। उससे नीचे सीरिया जैसे ही देश हैं।

 



Source link

Continue Reading