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महाराष्ट्र में सियासी वर्चस्व की लड़ाई बनी दशहरा रैली, क्या छाप छोड़ पाएगा शिंदे गुट?

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे।

Highlights

  • 5 अक्टूबर को बीकेसी ग्राउंड में है शिंदे गुट की दशहरा रैली।
  • रैली के लिए मैदान की हालत सुधारने पर तेजी से हो रहा काम।
  • ठाकरे परिवार के निवास ‘मातोश्री’ के ठीक पीछे है बीकेसी मैदान।

मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना की दशहरा रैली का खास महत्व रहा है। फिलहाल दो फाड़ में बंट चुकी शिवसेना के दोनों गुट 5 अक्टूबर को होने वाली दशहरा रैली में अपनी ताकत दिखाने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। बांद्रा के BKC ग्राउंड पर भीड़ जमा कर पाना हर राजनीतिक दल के लिए एक चुनौती रहा है। एक लाख से ज्यादा की क्षमता वाले इस ग्राउंड में कार्यक्रम करने की हिम्मत आमतौर पर कोई भी राजनीतिक दल नहीं जुटाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा को छोड़ दे तो इस ग्राउंड में कभी भी इसकी क्षमता के हिसाब से लोगों की भीड़ इकट्ठा नहीं हुई है।

अन्ना हजारे के आंदोलन के समय भी नहीं भर पाया था मैदान

बीकेसी ग्राउंड की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ समाजसेवी अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान भी यह पूरा नहीं भर पाया था, जबकि यह आंदोलन का केंद्र था। इस ग्राउंड में तब भी अपेक्षा के मुताबिक लोगों की भीड़ इकट्ठा नहीं हो पाई थी। यही वजह है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए इस मैदान में एक लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ इकट्ठा करना किसी चुनौती से कम नहीं है। हालांकि शिंदे समर्थक पूरे जोश में हैं और दावा कर रहे हैं कि मैदान पर एक लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ इकट्ठा होगी।

5 अक्टूबर को ‘शिंदे सेना’ की रैली के लिए जोर-शोर से चल रहा काम
बीकेसी ग्राउंड में 5 अक्टूबर को शिंदे सेना की रैली के लिए काम जोरों पर चल रहा है। करीब दर्जन भर जेसीबी रोलर, डंपर ग्राउंड पर नजर आ रहे हैं। मुंबई में रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते मैदान न सिर्फ गीला है बल्कि कई जगहों पर कीचड़ और दलदल-सा हो गया है। ऐसे में मैदान को सुखाने और उसको बराबर करने का काम चल रहा है।

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे।

मातोश्री के ठीक पीछे स्थित है बीकेसी ग्राउंड
बता दें कि बीकेसी ग्राउंड ठाकरे परिवार के निवास स्थान ‘मातोश्री’ के ठीक पीछे स्थित है। बता दें कि उद्धव ठाकरे शिवाजी पार्क में दशहरा रैली करेंगे जबकि उनके घर के ठीक पीछे शिंदे गुट की रैली होगी। मातोश्री के बाहर कला नगर सिग्नल पर वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे को कट आउट और बैनर पोस्टर से पाट दिया गया है। जगह-जगह पर उद्धव सेना की तरफ से पोस्टर लगाए गए हैं कि ये वजूद की लड़ाई है। इन पोस्टरों में बालासाहेब ठाकरे, उध्दव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और रश्मि ठाकरे की तस्वीरें हैं।

बीजेपी ने कहा, सफल होगी शिंदे की रैली
भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि एकनाथ शिंदे कि रैली के सफल होने में कोई शक ही नहीं है। पार्टी का कहना है कि आम जनमानस से जुड़े शिवसेना के विधायक और सांसद अब शिंदे खेमे में है। पार्टी ने कहा कि आम जनता जिससे जुड़ी है, वही अपनी रैली को सफल बना पायेगा। बीजेपी ने यह भी कहा कि अपनी रैली को सफल बनाने के लिए उद्धव ठाकरे एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं से कटोरा लेकर भीख मांग रहे हैं कि उनके कार्यकर्ता दशहरा रैली में भेजे जाएं ताकि शिवाजी पार्क को भरा जा सके।





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भारत-चीन संबंधों को सामान्य देखना चाहता है रूस…ताकि तीसरा विश्वयुद्ध हो तो…

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भारत के पीएम मोदी और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश और अमेरिका-चीन में भीषण होता टकराव, ईरान-इराक युद्ध,आर्मीनिया-अजरबैजान युद्ध और चीन-ताइवान तनाव जैसे मुद्दों ने तीसरे विश्व युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। ऐसे में रूसी राष्ट्रपति पुतिन अपनी किसी भुजा को कमजोर नहीं होने देना चाहते। रूस और चीन के संबंध काफी मजबूत हैं और दोनों ही देशों की अमेरिका से कट्टर दुश्मनी है। इधर भारत से भी रूस की पारंपरिक और बेहद गहरी दोस्ती है। साउथ-ईस्ट एशिया में भारत और चीन सबसे मजबूत और ताकतवर देश हैं, जो किसी भी देश को नाको चने चबवा सकते हैं। मगर भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं। ऐसे में भारत-चीन भिड़े तो इसका साइड इफेक्ट रूस को भी उठाना पड़ सकता है, क्योंकि इससे रूस वैश्विक लड़ाई में कमजोर होगा। इसलिए रूस भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य होते देखना चाहता है।

रूस को पता है कि यदि भारत और चीन दोनों देश मजबूती से उसके साथ खड़े रहे तो अमेरिका और पूरा यूरोप मिलकर भी पुतिन का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। रूस ने सोमवार को अमेरिका पर अपने फायदे के लिए भारत और चीन के बीच ‘‘विरोधाभासों’’ का ‘‘सक्रियता’’ से दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। रूस का कहना है कि कि मॉस्को और नई दिल्ली ने दशकों पुराने संबंधों पर आधारित परस्पर विश्वास हासिल किया है जिससे दोनों पक्षों को मौजूदा भूराजनीतिक अशांति से निपटने में मदद मिलेगी। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने एक सम्मेलन में कहा कि यूक्रेन संघर्ष पर अमेरिका की अगुवाई में पश्चिमी देशों के ‘‘अहंकारी’’ और ‘‘लड़ाकू’’ रवैये से बनावटी भू-राजनीतिक बदलाव के कारण भारत-रूस के संबंध ‘‘तनाव’ में हैं। उन्होंने कहा कि मॉस्को इस्लामाबाद के साथ अपनी आर्थिक भागीदारी बढ़ाना चाहता है क्योंकि एक ‘‘कमजोर’’ पाकिस्तान, भारत समेत पूरे क्षेत्र के लिए सही नहीं है। बाद में एक ट्वीट में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब था कि एक ‘‘अस्थिर’’ पाकिस्तान क्षेत्र में किसी के भी हित में नहीं है। वह ‘इंडिया राइट्स नेटवर्क’ और ‘सेंटर फॉर ग्लोबल इंडिया इनसाइट्स’ द्वारा आयोजित ‘भारत-रूस सामरिक साझेदारी में अगले कदम: पुरानी मित्रता नए क्षितिज’ पर एक सम्मेलन में बोल रहे थे।

भारत-चीन के सामान्य संबंधों से पूरी दुनिया को होगा फायदा


एक सवाल के जवाब में अलीपोव ने कहा कि रूस, भारत-चीन के संबंधों को सामान्य देखना चाहता है और इससे न केवल एशिया की सुरक्षा बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा को काफी फायदा पहुंचेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि इसमें बहुत गंभीर बाधाएं हैं, दोनों देशों के बीच बहुत गंभीर सीमा समस्या है। हमारी चीन के साथ सीमा समस्या है, एक वक्त चीन के साथ सशस्त्र संघर्ष हुआ, बातचीत करने में हमें करीब 40 साल लग गए लेकिन आखिरकार एक समाधान तलाशने का यही एकमात्र रास्ता है।’’ अलीपोव ने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कहने जा रहा हूं कि भारत या चीन को क्या करना चाहिए। यह भारत और चीन के बीच पूरी तरह से एक द्विपक्षीय मामला है और हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करते हैं। लेकिन जितना जल्दी दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य हो, उतना ही पूरी दुनिया के लिए यह बेहतर होगा। अगर हमारे प्रयासों की आवश्यकता पड़ी तो हम यह करेंगे।

भारत और रूस के संबंध में आया तनाव

भारत-रूस संबंधों के ‘तनाव’ में होने की अपनी टिप्पणियों को स्पष्ट करते हुए रूसी राजूदत ने दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक भागीदारी पर पश्चिमी प्रतिबंधों के असर की ओर इशारा किया। अलीपोव ने कहा कि रूस भारत के साथ सहयोग में विविधता लाना चाहता है और दोनों देशों के बीच संबंध किसी के खिलाफ नहीं हैं। भारत के साथ रूस के समग्र संबंधों पर उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के विपरीत हमें एक-दूसरे को तथा दुनिया को यह बताने की जरूरत नहीं है कि कुछ वजहों से अतीत में हमारे बीच करीबी साझेदारी संभव नहीं हो पायी। अलीपोव ने दावा किया कि अगर अमेरिका का चीन के साथ तालमेल बैठ जाता है या नयी दिल्ली बीजिंग के साथ संबंध सुधारने में कामयाब हो जाता है तो भारत के प्रति अमेरिका का रवैया बदल सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए वह अपने फायदे के लिए भारत और चीन के बीच विरोधाभासों का सक्रियता से दुरुपयोग कर रहा है।

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भूकंप के तीन झटके, 2300 से ज्यादा मौतें…अब तुर्की के सामने खड़ा है कौन सा संकट?

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तुर्की में सोमवार भोर से शुरू हुआ भूकंप का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सुबह से शाम तक तीन भूकंप के जोरदार झटकों से अब तक करीब 2000 लोग यहां पर जान गंवा चुके हैं और हजारों घायल हैं।



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तुर्की में बीते 24 घंटे में आए तीन शक्तिशाली भूकंप, 1900 से अधिक लोगों की मौत, 10 बातें

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झटकों से सन्न तुर्की के लोग बर्फ से ढके गलियों में पजामे में भागते दिखे.

इस्तांबुल:
तुर्की और सीरिया में सोमवार की अहले सबुह अत्यधिक शक्तिशाली भूकंप आया. भूकंप के कारण 1,904 लोग जो सो रहे थे के मारे जाने की खबर है. तेज झटकों के कारण इमारतें ध्वस्त हो गईं. ग्रीनलैंड तक झटको को महसूस किया गया. 

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  1. रात को आए भूकंप की तीव्रता 7.8 मैग्निट्यूड की थी. वहीं इसके कुछ घंटे बाद दो और शक्तिशाली भूकंप आए, जिसने सीरिया और अन्य संघर्षों में गृह युद्ध से भागे लाखों लोगों से भरे क्षेत्र तुर्की के प्रमुख शहरों के तहस नहस कर दिया. 

  2. सीरिया के राष्ट्रीय भूकंप केंद्र के प्रमुख रायद अहमद ने इसे “केंद्र के इतिहास में दर्ज सबसे बड़ा भूकंप” कहा. स्टेट मीडिया और मेडिकल सूत्रों ने कहा कि सीरिया के बागी और सरकार शासित क्षेत्रों में कम से कम 783 लोगों के मारे जाने की सूचना है. 

  3. इधर, राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के अनुसार, तुर्की में 1,121 लोगों की मौत हो गई, जो सत्ता में अपने दो दशकों की सबसे बड़ी आपदाओं को झेल रहे हैं. 

  4. प्रारंभिक भूकंप के बाद 50 से अधिक आफ्टरशॉक्स आए, जिनमें 7.5 और 6-तीव्रता के झटके शामिल थे. इसने सोमवार दोपहर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच क्षेत्र को झटका दिया. 

  5. एएफपी के संवाददाताओं और प्रत्यक्षदर्शियों ने दूसरे भूकंप के झटकों को तुर्की की राजधानी अंकारा और इरबिल के इराकी कुर्दिस्तान शहर तक में महसूस किया. 

  6. झटकों से सन्न तुर्की के लोग बर्फ से ढके गलियों में पजामे में भागते दिखे. इस दौरान उन्होंने बचावकर्मियों को क्षतिग्रस्त घरों के मलबे को अपने हाथों से खोदते हुए देखा. 

  7. तुर्की के कुर्द शहर (अस्पष्ट) दियारबकीर में जीवित बचे मुहित्तिन ओराकसी ने एएफपी को बताया, “मेरे परिवार के सात सदस्य मलबे में दबे हुए हैं.” उन्होंने कहा, “मेरी बहन, उसके तीन बच्चे, उसका पति और सास-ससुर सारे वहीं दबे हुए हैं.”

  8. बता दें कि सर्दियों के बर्फ़ीले तूफ़ान से बचावकार्य में बाधा आ रही थी. लगातर हुए बर्फबारी ने प्रमुख सड़कों को बर्फ से ढक दिया था.

  9. अधिकारियों ने कहा कि भूकंप ने क्षेत्र में तीन प्रमुख हवाईअड्डों को निष्क्रिय कर दिया, जिससे महत्वपूर्ण सहायता की डिलीवरी और मुश्किल हो गई है. 

  10. एर्दोगन ने अपनी सहानुभूति व्यक्त की और राष्ट्रीय एकता का आग्रह करते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि हम इस आपदा से एक साथ जल्द से जल्द और कम से कम क्षति के साथ रिकवर करेंगे.”

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कर्नाटक में एक युवक को पुलिस ने गोली मारी. वो आम लोगों को चाकू से धमका रहा था



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