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महाराष्ट्र में एक बार फिर गूंजा शिवशक्ति और भीमशक्ति का नारा, बीजेपी ने कहा- ”गठबंधन से हम नहीं डरते”

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Image Source : PTI
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे

मुंबई: महाराष्ट्र के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी बगावत कर एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को खोखला कर दिया, ऐसे में मुंबई समेत 18 महानगर पालिकाओं के चुनाव और आने वाले अन्य चुनाव को देख अब उद्धव ठाकरे राज्य के छोटे-छोटे राजनीतिक संगठनों से हाथ मिला रहे हैं। पहले कट्टर मराठा संगठन सम्भाजी ब्रिगेड और अब दलित वोट बैंक को कैश करने के लिए प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी से गठबंथन करना चाहते हैं । उद्धव ठाकरे ने दो दिन पहले मुम्बई में एक कार्यक्रम में प्रकाश आंबेडकर के साथ मंच साझा कर उनसे हाथ मिलाने की गुहार लगाई।

कानून मंत्री किरेन रिजिजू पर साधा निशाना

उद्धव ठाकरे ने कहा, ”कानून मंत्री किरेन रिजिजू बोल रहे हैं कॉलेजियम में पारदर्शिता नहीं है। ऐसे में फिर कॉलेजियम के तहत अब तक जो जज बने उन्होंने जो फैसले दिए वो सही थे कि गलत ? देश के मंत्री अगर न्याय व्यवस्था के प्रति शंका जता रहें हैं तो ये गंभीर बात है। ये साफ होना चाहिए कि ये उनका व्यक्तिगत मत है कि सरकार का ? क्या अब पीएम जज अप्वाइंट करेंगे? अगर ऐसा है तो कोर्ट बन्द कर दें उन्हें गुलाम बनाना चाहते हो तो । मेरे इस बयान पर कहेंगे मैंने कोर्ट का अपमान किया। मुझपर कार्रवाई करें लेकिन पहले रिजूजू पर भी कार्रवाई हो। इसलिए हमें एक साथ आना ही होगा प्रकाश अंबेडकर जी देश दहशत में है। तानाशाही चल रही है। इसलिए हमें एक साथ आने की जरूरत है।”

 ‘बीजेपी से लड़ने के लिए गठबंधन जरूरी’

उद्धव ठाकरे की इस बयान को शिवसेना के अन्य नेता भीमशक्ति और शिवशक्ति को समय की जरूरत बता रहे हैं और केंद्र की बीजेपी सरकार की नीतियों के खिलाफ लड़ने के लिए गठबंधन का होना आवश्यक बता रहे हैं।

क्या बोले कांग्रेस नेता?

शिवसेना और वंचित बहुजन आघाड़ी गठबंधन की कोशिशों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है, कि क्या महाविकास आघाड़ी और अन्य घटक दल प्रकाश आंबेडकर से हाथ मिलाने को उत्सुक है? कांग्रेस नेता इस बारे में अलग-अलग बयान दे रहे हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि जब चुनाव सामने आएगा तब गठबंधन के बारे में सोचा जाएगा, ये कहते हुए उन्होंने गठबंधन की चर्चाओं को टाल दीया।

वहीं मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष और विधायक भाई जगताप का कहना है कि अगर प्रकाश आंबेडकर महाविकास आघाड़ी में शामिल होते हैं, तो महाविकास आघाड़ी को इसका फायदा ही होगा। 

गठबंधन से नहीं डरती बीजेपी

इस पर बीजेपी का कहना है कि प्रकाश आंबेडकर और उद्धव ठाकरे अगर एक साथ भी आते हैं, तो बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को कोई भी नुकसान नहीं होगा। बीजेपी और शिंदे शिवसेना 51 प्रतिशत वोट लेकर हर चुनाव में जीत हासिल करेंगे।

कोई असर नहीं होगा: शिंदे गुट

एकनाथ शिंदे की शिवसेना का कहना है कि रामदास आठवले जैसे कदावर नेता एनडीए के साथ में हैं, इसलिए उद्धव ठाकरे और प्रकाश आंबेडकर गठबंधन करते भी हैं, तो कोई असर नहीं होगा।

गठबंधन पर प्रकाश आंबेडकर ने साधी चुप्पी

बहरहाल उद्वव ठाकरे और उनके नेता प्रकाश आंबडेकर से हाथ मिलाने की पुरजोर कोशिश में हैं । वो जानते हैं कि डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर के पोते उनकी शिवसेना के साथ आते हैं तो दलित और मराठी वोटों से उद्वव ठाकरे की शिवसेना को बीएमसी और अन्य चुनाव में फायदा ही होगा। पर इस गढ़बंधन के सवाल पर जब हमने प्रकाश आंबेडकर से पूछा तो उन्होंने चुप्पी साध ली और इस मुद्दे पर बात करने से मना कर दिया । जाहिर सी बात है प्रकाश आंबेडकर अभी इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आना चाहते न अपने पत्ते खोलना चाहते हैं । बता दें, प्रकाश आंबेडकर ने इसके पहले ओवैसी की पार्टी AIMIM और उसके बाद मुस्लिम लीग से भी गठबंधन किया था।





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उत्तर प्रदेश के बदायूं में पुलिस से भिड़ी भीड़,पथराव किया गया

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यूपी के बदायूं में पुलिस और भीड़ के बीच संघर्ष हुआ.

लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के ककराला कस्बे में शुक्रवार को स्थानीय लोगों के एक गुट की पुलिस से झड़प हो गई और पुलिस पर पथराव किया गया. पुलिस ने कहा कि एक व्यक्ति ने भीड़ को इकट्ठा किया क्योंकि वह रुटीन चेकिंग के लिए रोके जाने से नाराज था.जिला पुलिस प्रमुख ओपी सिंह ने कहा कि दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बाकी की वीडियो फुटेज के जरिए तलाश की जा रही है.

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पता चला है कि रात तक इलाके की सड़कें सुनसान थीं और कई लोग पुलिस की कार्रवाई के डर से अपने घरों को बंद करके चले गए थे.

पुलिस प्रमुख ने कहा कि, “पुलिस की एक टीम पैदल गश्त के लिए इलाके में थी. नियमित चेकिंग चल रही थी. तब एक व्यक्ति ने अपने वाहन की जांच करने पर आपत्ति जताई. बाद में वह अपने परिवार के पुरुषों और महिलाओं के साथ लौटा और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. जब उन्होंने ट्रैफिक जाम कर दिया तो पुलिस ने उनसे ऐसा नहीं करने के लिए कहा. इसके बाद कई लोगों ने पथराव शुरू कर दिया.”

उन्होंने कहा कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और दो लोगों को गिरफ्तार किया. उन्होंने कहा,मामला दर्ज किया जा रहा है.

स्थानीय मीडिया ने बताया कि इस घटना में छह पुलिसकर्मी घायल हो गए और कुछ पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं.

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TMC नेता साकेत गोखले को मिली बेल, गुरुवार को दोबारा हुई थी गिरफ्तारी



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FIFA World Cup 2022: फुटबॉल विश्व कप में बड़ा उलटफेर, ब्राजील को हराकर सेमीफाइनल में क्रोएशिया

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क्रोएशियाई गोलकीपर डॉमिनिक ने रोड्रिगो और मार्किन्होस के गोल बचाए। नेमार ने पहले हाफ के अतिरिक्त समय में ब्राजील को बढ़त दिलाई थी, लेकिन क्रोएशिया ने ब्रुनो पेतकोविच के गोल से बराबरी हासिल की।



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पुरानी पेंशन व्यवस्था को अपनाना राज्यों के लिए नासमझी भरा कदम: 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन

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नई दिल्ली:

15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने शुक्रवार को कहा कि बहुत विचार-विमर्श के बाद लागू की गई नई पेंशन योजना को छोड़ना राज्यों के लिये ‘नासमझी’ भरा कदम होगा और यह उन्हें ‘कठिनाइयों और दबाव’ में डाल देगा. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के कार्यक्रम के दौरान अलग से बातचीत में सिंह ने कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद नई पेंशन योजना को अपनाया गया था.

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कांग्रेस और आप जैसे राजनीतिक दल मतदाताओं से पुरानी पेंशन योजना लागू करने का वादा कर रहे हैं. राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे कुछ राज्यों में कांग्रेस पहले ही पुरानी पेंशन योजना को बहाल कर चुकी है. वहीं आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब में पुरानी पेंशन को लागू करने की बात कही है.

कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने का वादा किया है. यह पार्टी का बड़ा चुनावी वादा था और कांग्रेस गुरुवार को घोषित नतीजों में बहुमत हासिल करने में सफल रही.

यह पूछे जाने पर कि राज्य पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर रहे हैं, सिंह ने कहा, ‘‘नई पेंशन योजना को छोड़ना और पुरानी व्यवस्था को अपनाना नासमझी भरा कदम है.” उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान इस पर बहुत सावधानी के साथ चर्चा हुई थी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसके पक्ष में थे.

सिंह ने कहा, ‘‘मेरे सहयोगी मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इस विषय पर विस्तार से टिप्पणी की है कि नई पेंशन योजना से पीछे हटना और पुरानी पेंशन योजना को अपनाना राज्य के लिए वित्तीय आपदा होगी. कुछ राज्य जो इसे लागू कर रहे हैं, वास्तव में वे प्रदेश की वित्तीय स्थिति को ‘बड़ी कठिनाइयों और दबाव में’ डाल रहे हैं. नई पेंशन योजना के पीछे ठोस आर्थिक तर्क हैं.”

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