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मक्का मस्जिद में हुई ऐसी हरकत, इस मुस्लिम देश में मचा हंगामा; जानें पूरा मामला

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Image Source : SCREENGRAB
Yemen citizen arrested

Saudi Arabia: सऊदी अरब पुलिस ने यमन के एक नागरिक को मक्का से गिरफ्तार किया है। खबरों के मुताबिक, व्यक्ति ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ के निधन के बाद उनके नाम पर उमराह करने पहुंचा था। मक्का की बड़ी मस्जिद में बैनर हाथ में लिए इस व्यक्ति का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके ऊपर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं मिलने लगीं। लोगों ने सोशल मीडिया पर शख्स को गिरफ्तार करने की मांग की। जिसके बाद यमन के शख्स को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

सोशल मीडिया पर उठी व्यक्ति की गिरफ्तारी की मांग

वीडियो में यमन के व्यक्ति ने जिस बैनर को हाथ में लिया हुआ है, उसमें लिखा है कि, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की आत्मा के लिए उमरा। हम खुदा से कहते हैं कि क्वीन को जन्नत में स्थान मिले। यमन के इस व्यक्ति ने वीडियो क्लिप बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर की। जिसके बाद वीडियो जमकर वायरल हो गई। ट्विटर लोगों का वीडियो को देखते ही गुस्सा भड़क गया, जिसके बाद व्यक्ति की गिरफ्तारी की मांग की जाने लगी।

दरअसल, इस्लाम में उमराह 15 दिनों का एक धार्मिक तरीका है, जिस दौरान इंसान सिर्फ नमाज और अल्लाह की बातों पर ध्यान देता है। उमराह के दौरान मर चुके लोगों की आत्मा की शांति के लिए दुआ भी की जाती है। लेकिन मृतक सिर्फ मुस्लिम ही होना चाहिए। 

जो मुस्लिम नहीं, उसके नाम पर उमराह नहीं

ऐसे तो सऊदी अरब के मक्का शहर में श्रद्धालुओं को किसी भी तरह का बैनर या नारे लगाने के लिए मना है। लेकिन अगर किसी का कोई अपना दुनिया में नहीं रहा है तो उसकी आत्मा की शांति के लिए उमराह किया जाता है। हालांकि, सिर्फ मुस्लिम मृतक के लिए ही उमराह किए जाने की अनुमति मिलती है। अगर कोई दूसरे धर्म के व्यक्ति के नाम पर उमराह करना चाहेगा तो उसे अनुमति नहीं दी जाएगी।

पुलिस का तुरंत एक्शन

वीडियो वायरल होने पर सऊदी पुलिस ने इस मामले में बड़ी मस्जिद की क्लिप में दिखने वाले यमन के नागरिक को गिरफ्तार कर लिया। सऊदी अरब सरकार की ओर से बताया गया है कि मस्जिद के अंदर किसी गैर मुसलमान के नाम उमराह करना नियमों के खिलाफ है, इसलिए यमन के नागरिक की गिरफ्तारी की गई है।

हाल ही में हुआ एलिजाबेथ का निधन 

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का 96 साल की उम्र में 8 सितंबर को निधन हो गया। स्कॉटलैंड स्थित अपने किले में उन्होंने अंतिम सांस ली। महारानी एलिजाबेथ के बाद उनके बेटे किंग चार्ल्स के हाथ अब ब्रिटेन की शाही गद्दी की बागडोर आ गई है।

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शी जिनपिंग का इस्तीफा मांगने वालों को मिलेगी यह खौफनाक सजा, सुनकर उड़ जाएंगे होश

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चीन में प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास करती पुलिस (फाइल फोटो)

Protest in China & Xi Jinping: कोविड नीतियों के खिलाफ चीन में विरोध प्रदर्शन करने वालों के दिन बुरे होने वाले हैं। खासकर इस दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग का इस्तीफा मांगने वालों को कड़ी से कड़ी सजा देना पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार चीनी सुरक्षाबलों ने ऐसे सभी लोगों की तलाश शुरू कर दी है, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान शी जिनपिंग का इस्तीफा मांगा था। इसके साथ ही ऐसे लोगों को भी खोजा जा रहा है, जिन्होंने इस्तीफा मांगने वालों का समर्थन प्रत्यक्ष या सोशल मीडिया के माध्यम से किया था। इन लोगों को कई वर्षों की कड़ी सजा सुनाई जा सकती है।

सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी स्वयं कह रही है कि पार्टी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सत्ता छोड़ने की मांग करने वालों को विध्वंसक और वर्षों तक जेल की सजा के दंड को उपयुक्त मानती है। यानि ऐसे सभी लोगों को कई वर्षों के लिए जेल में डाला जा सकता है। मतलब साफ है कि चीन में अब सिर्फ जिनपिंग की तानाशाही चलेगी। कोई भी इस तनाशाही के खिलाफ आवाज उठाएगा तो उसकी सजा जेल होगी।

विरोध प्रदर्शनकारियों का ऐसे होगा दमन


चीन पर जब अपने शासन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात आती है, तो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शासक कोई कोताही बरतते नहीं दिखते। कोविड-19 के खिलाफ सख्त और खत्म होती नहीं दिख रही पाबंदियों के खिलाफ जब बीजिंग और अन्य शहरों में सड़कों पर दशकों में सबसे उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू हुए तो असंतोष को दबाने पर सरकार द्वारा पड़े पैमाने पर हुए खर्च की बानगी नजर आई। बड़े पैमाने पर उथल-पुथल को शांत करने के लिए आवश्यक मशीनरी स्थापित करते हुए सरकार दशकों से ऐसी चुनौतियों के लिए तैयारी कर रही है। शुरुआत में काली मिर्च के स्प्रे और आंसू गैस का इस्तेमाल कर हल्की प्रतिक्रिया देने के बाद, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने शहर की सड़कों पर जीपों, वैनों और बख्तरबंद गाड़ियों के साथ भारी मात्रा में बल का प्रदर्शन किया। लोगों के पहचान पत्रों की जांच के साथ ही असंतुष्टों की पहचान के लिये अधिकारियों ने फोटो, संदेश या प्रतिबंधित ऐप्स के लिए लोगों के मोबाइल फोन भी खंगाले जिससे विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी या यहां तक ​​कि ऐसे लोगों से सिर्फ सहानुभूति तक रखने वाले लोगों की पहचान की जा सके।

चीन में अस्थिर हैं हालात

राष्ट्रपति शी जिनपिंग का इस्तीफा मांगने वाले और विरोध प्रदर्शन करने वााले अज्ञात लोगों को सैकड़ों की संख्या में हिरासत में लिया गया है। अब इनमें से इस्तीफा मांगने वालों को कड़ी सजा सुनाए जाने पर विचार हो रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनमें से सिर्फ कोविड का विरोध करने वालों पर आरोप लगेंगे या नहीं। अधिकांश प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा “शून्य-कोविड” नीति पर केंद्रित रखा था जो व्यापक लॉकडाउन, यात्रा प्रतिबंधों और निरंतर परीक्षण के माध्यम से संक्रमण को खत्म करने का प्रयास करती है, लेकिन कुछ ने पार्टी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग से सत्ता छोड़ने की मांग की जिसे सत्ताधारी दल विध्वंसक और वर्षों तक जेल की सजा के दंड के लिए उपयुक्त मानता है। बड़े पैमाने पर खर्च और व्यापक आंतरिक सुरक्षा नेटवर्क चीन को असंतोष पर नकेल कसने के लिए अच्छी तरह से तैयार करता है। हेरिटेज फाउंडेशन के चीन राजनीति विशेषज्ञ डीन चेंग ने वाशिंगटन डीसी स्थित रूढ़िवादी विचारक संस्था की वेबसाइट पर लिखा, इससे यह भी सुझाव मिलता है कि “चीन का नेतृत्व दुनिया को जो दिखाना चाहता है, देश के वास्तविक हालात उससे कहीं ज्यादा अस्थिर हैं।”

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Baba Vanga Predictions 2023: एलियन अटैक, परमाणु हमला, लैब बेबी… बाबा वेंगा ने 2023 के लिए की हैं डराने वाली भविष्यवाणियां

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baba vanga predictions list: बाबा वेंगा की 2023 की भविष्यवाणियों ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। उन्होंने बताया था कि अगले साल दुनिया में कुछ ऐसा होगा, जिससे न सिर्फ पृथ्वी की कक्षा बदल सकती है, बल्कि दुनिया में व्यापक तबाही भी देखने को मिल सकती है। उन्होंने लैब बेबी की भी भविष्यवाणी की है, जिसकी त्वचा के रंग और शारीरिक क्षमताओं को माता-पिता पहले ही तय कर सकते हैं।

 



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भारत में G-20 कार्यक्रम का करें बहिष्‍कार… कनाडा के सिख नेता की पार्टी का जहरीला बयान

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टोरंटो: कनाडा में एक विपक्षी दल ने सरकार से धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर भारत में जी20 गतिविधियों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। बहिष्कार का आह्वान तब हुआ जब भारत ने गुरुवार को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के विचार के तहत औपचारिक रूप से जी20 की अध्यक्षता ग्रहण की। कनाडा लंबे समय से खालिस्‍तानी आतंकियों का गढ़ रहा है और वहां के प्रधानमंत्री भी इन आतंकियों को शरण देने के लिए विवादों में रहे हैं।

न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के सांसद हीथर मैकफर्सन और ब्लेक देसजरलाइस ने बयान में सत्तारूढ़ लिबरल सरकार से भारत में जी20 गतिविधियों के राजनयिक बहिष्कार में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वे भारत में नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के उल्लंघन की आ रही रिपोर्टों से चिंतित हैं। भारत सरकार अपनी जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर रही।

कनाडा ने भारत को ‘महत्वपूर्ण भागीदार’ करार दिया

भारत की वर्तमान सरकार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए, एनडीपी ने कहा, ‘कनाडा को कश्मीर में नियोजित किसी भी जी 20 गतिविधियों को अस्वीकार करना चाहिए और मानवाधिकारों के हनन जारी रहने तक जी 20 में भाग लेने से इनकार करना चाहिए।’ सिख नेता जगमीत सिंह की अध्यक्षता वाली पार्टी ने कनाडा सरकार से ‘मानवाधिकारों के लिए स्टैंड लेने और भारत के सभी लोगों के साथ एकजुटता दिखाने का आह्वान किया है, जिन्हें स्वतंत्र रूप से और बिना उत्पीड़न के जीने का अधिकार है।’

इस बीच कनाडा ने पिछले सप्ताह जारी अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति के तहत भारत को एक ‘महत्वपूर्ण भागीदार’ करार दिया है। कनाडा का प्रमुख जोर लोगों से लोगों के बीच संबंध बनाने, नई दिल्ली और चंडीगढ़ में वीजा-प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ भारत के साथ शैक्षणिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, युवा और अनुसंधान आदान-प्रदान में अधिक निवेश करने पर है। पिछले महीने इसने भारत के साथ एक विस्तारित हवाई परिवहन समझौते की घोषणा की, जिससे निर्दिष्ट एयरलाइनों को दोनों देशों के बीच असीमित संख्या में उड़ानें संचालित करने की अनुमति मिली।



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