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मंत्री नंद गोपाल नंदी को कोर्ट ने दो धाराओं में माना दोषी, इतने हजार का लगाया जुर्माना

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मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी

उत्तर प्रेदश सरकार में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को साल 2014 के लोकसभा चुनाव में दर्ज मुकदमें में प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई है। आईपीसी की धारा 147 और 323 में दोषी करार दिए गए। मंत्री नंदी को एक साल की सज़ा सुनाई गई है और पांच हजार का जुर्माना लगा है।

जेल नहीं जाएंगे मंत्री

मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को सजा मिलने के बावजूद जेल नहीं जाना होगा। दोषी करार दिए जाने और सजा के एलान के बाद भी मंत्री नंदी की विधानसभा की सदस्यता नहीं जाएगी। क्योंकि 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होने पर ही सदस्यता रद्द होती है। मंत्री के साथ दो अन्य लोग भी दोषी करार दिए गए हैं। मंत्री समेत बाकी लोगों को आईपीसी की धारा 148- 504- 506 और एससी एसटी एक्ट में बरी कर दिया गया है। 

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जब एक सेकंड की देरी ने बचाई थी परवेज मुशर्रफ की जान, राष्ट्रपति रहते कार के उड़ गए थे परखच्चे

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Pervez Musharraf Death: पड़ोसी देश पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वह 79 वर्ष के थे। 1999 में उन्होंने तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार का तख्ता पलट कर पाकिस्तान की बागडोर संभाली थी। जब वह राष्ट्रपति थे तो एक भयानक बम विस्फोट में उनका मौत से सामना हुआ था। 

अपनी आत्मकथा ‘In the Line of Fire: A Memoir’ में परवेज मुशर्रफ ने लिखा है कि 14 दिसंबर, 2003 को जब वह राष्ट्रपति थे, तब कराची से चकलाला एयरफोर्स बेस पर उनका विमान लैंड किया था। यह बेस  रावलपिंडी आर्मी हाउस से चार किलोमीटर की दूरी पर था और इस्लामाबाद से 10 किलोमीटर दूर था। बेस पर उतरते ही उन्हें दो बड़े समाचार मिले थे। पहला कि पाकिस्तान ने भारत को पोलो मैच में हरा दिया है, और दूसरा कि सद्दाम हुसैन पकड़े जा चुके हैं।

मुशर्रफ ने लिखा है, “जब हम कार में इस पर अपने मिलिट्री सेक्रेटरी मेजर जनरल नदीम ताज से चर्चा कर रहे थे, जो मेरे दाहिनी तरफ बैठे थे, तभी भयानक विस्फोट की आवाज सुनाई पड़ी। हमारी कार हवा में उछल गई। उसके चारों पहिए निकल कर बिखर चुके थे। उस वक्त कार एक पुलिया पर से गुजर रही थी। मैं तुरंत समझ गया था कि बड़ा बम विस्फोट हुआ है।”

पूर्व तानाशाह ने लिखा है कि तब उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने बताया था कि वह एक बड़ा धमाका था, जिसमें तीन टन वजनी उनकी मर्सिडिज कार हवा में उड़ गई थी। जब थोड़ी देर बाद वह रावलपिंडी के आर्मी पहुंचे तो उनके काफिले के पीछे चल रहे डिप्टी मिलिट्री सेक्रेटरी लेफ्टिनेंट कर्नल असीम बाजवा ने बताया था कि यह हमला उनकी हत्या की एक कोशिश थी, जिसमें वह बाल-बाल बच गए थे।

घर पहुंचते ही परवेज मुशर्रफ ने अपनी पत्नी सेहबा मुशर्रफ को धमाके के बारे में बताया जो कुछ देर पहले धमाके की आवाज सुन चुकी थीं। मुशर्रफ ने बताया कि अगर एक सेकंड पहले उनकी कार ब्रिज पर आई होती तो वह जिंदा नहीं बचते और उनकी कार 25 फीट ऊपर उड़ गई होती। उन्होंने अपनी बूढ़ी मां को इस घटना के बारे में नहीं बताया था।

मुशर्रफ ने इसी किताब में लिखा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कुल पांच बार इसी तरह से मौत का सामना किया है। एक बार तो आतंकियों ने उन्हें घेर लिया था लेकिन किसी तरह जान बच गई। एक बार बचपन में भी पेड़ से गिरने के बाद वो बच गए थे। मुशर्रफ ने लिखा है कि जब 17 अगस्त 1988 को  जियाउल हक का विमान सी-130 क्रैश हुआ था, तब भी किस्मत से वह बच गए थे क्योंकि लास्ट मिनट में उनकी जगह दूसरे अधिकारी को ब्रिगेडियर नियुक्त कर दिया गया था।



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सार्क सम्मेलन में जब मुशर्रफ ने अटल बिहारी वाजपेयी से हैंडशेक का किया था नाटक, मिला था करारा जवाब

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सार्क सम्मेलन में मुशर्रफ ने अटल विहारी वाजपेयी से किया था हैंडशेक

साल 2002…नेपाल में हो रहा था सार्क सम्मेलन…। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ बोलने के लिए उठे और अपने संबोधन में भारत से अच्छे संबंधों की दुहाई दी। फिर अचानक मंच पर ही बैठे भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के पास पहुंचे और अपना हाथ आगे बढ़ाकर हैंडशेक किया। इस पर सभी चौंक गए थे। दरअसल, मुशर्रफ पाकिस्‍तान की सेना के ये वही जनरल थे जिन्‍होंने 1999 में कारगिल की कहानी लिखी और फिर मुंह की खाई थी। 

1999 में ही मुशर्रफ के समय कंधार विमान अपहरण कांड हुआ था। लेकिन इन सबके बाद भी मुशर्रफ ने भारत के साथ अच्छे रिश्ते की बात कहकर अचानक मंच पर ही अटलजी से हाथ मिलाया। ये अलग बात है कि अटलजी ने भी आगे बढ़कर उनसे हाथ मिलाया, पर बात में ऐसा करारा जवाब दिया कि मुशर्रफ इस जवाब को लंबे समय तक नहीं भूले। 

जानिए 2002 सार्क समिट में मुशर्रफ ने भारत के लिए क्या कही थी बात

सन् 1947 में हुए बंटवारे के बाद से ही भारत और पाकिस्‍तान के रिश्‍ते तनावपूर्ण रहे। 4 से 6 जनवरी 2002 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में 11वें सार्क सम्‍मेलन का आयोजन हुआ था। यह सार्क समिट भारत की संसद पर हमले, कारगिल की जंग और एतिहासिक आगरा सम्‍मेलन के बाद हो रही थी। मुशर्रफ इस सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने पहुंचे थे। मुशर्रफ ने अपने भाषण में कहा कि उनका देश भारत के साथ सभी मसलों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहता है। वह भारत के साथ अच्‍छे संबंध चाहते हैं। इसके बाद उन्‍होंने ऐलान किया कि वह इस सम्‍मेलन के जरिए भारत के प्रधानमंत्री वाजपेयी के सामने दोस्‍ती का हाथ बढ़ाते हैं।

मुशर्रफ ने हाथ मिलाकर दुनिया को चौंका दिया था

सार्क सम्‍मेलन के दौरान मुशर्रफ अपना भाषण देकर पोर्डियम से उतर रहे थे। वाजपेयी से हाथ मिलाकर मुशर्रफ ने सबको चौंका दिया था। लेकिन इसके बाद वाजपेयी ने जो कुछ किया, उसकी उम्‍मीद खुद मुशर्रफ को नहीं थी। वाजपेयी ने  कुछ ही सेकेंड्स बाद मुशर्रफ को करारा जवाब भी दिया। वाजपेयी ने इस सम्‍मेलन में कहा था, ‘मुझे खुशी है कि राष्‍ट्रपति मुशर्रफ ने मेरी ओर दोस्‍ती का हाथ बढ़ाया है। मैंने आप सभी की मौजूदगी में उनसे हाथ मिलाया है। अब मुशर्रफ को अपने इसी भाव को आगे बढ़ाना होगा।’ वाजपेयी ने कहार् ‘मुशर्रफ को वादा करना होगा कि वह पाक या इससे लगी सीमाओं में उन आतंकी गतिविधियों को पनपने नहीं देंगे जो भारत के खिलाफ हों।’

मुशर्रफ को वाजपेयी ने याद दिलाई थी ये बात

वाजपेयी ने तल्‍ख लहजे में कहा कि लाहौर के बाद भारत को कारगिल युद्ध का तोहफा मिला। काठमांडू से भारतीय एयलाइंस के विमान को हाइजै‍क कर लिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस घटना के एक महीने बाद यानी फरवरी 2002 में मुशर्रफ ने जब एक जापानी मीडिया को इंटरव्‍यू दिया तो उन्‍होंने माना वाजपेयी से हाथ मिलाना उनके जीवन का सबसे मुश्किल फैसला था।

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अमेरिकी वीजा का लंबे समय से इंतजार कर रहे भारतीय अब विदेशों में भी कर सकते हैं आवेदन

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अमेरिकी वीजा का लंबे समय से इंतजार कर रहे भारतीय विदेशों में भी अब आवेदन कर सकते हैं.

नई दिल्ली:

भारत में अमेरिकी वीजा के लिए अप्वाइंटमेंट की प्रतीक्षा अवधि (waiting period)अभी भी 500 दिनों से अधिक है. भारत में अमेरिकी दूतावास ने आज कहा कि जो भारतीय विदेश यात्रा कर रहे हैं, वे वहां के अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास में जाकर वीजा अप्वाइंटमेंट प्राप्त कर सकते हैं. थाईलैंड का उदाहरण देते हुए अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वहां बी1 और बी2 वीजा (यात्रा और कारोबार) के लिए अप्वाइंटमेंट की क्षमता उपलब्ध है.

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भारत स्थित अमेरिकी दूतावास का ट्वीट

भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने ट्वीट किया, “क्या आपकी आगामी यात्रा अंतर्राष्ट्रीय है? यदि ऐसा है, तो आप अपने गंतव्य में अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास में वीजा अप्वाइंटमेंट प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, @USEmbassyBKK ने थाईलैंड में आने वाले महीनों में यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए B1/B2 नियुक्ति क्षमता खोली है.”

“विशेष शनिवार साक्षात्कार दिवस” ​​​​आयोजित किया

वीजा प्रसंस्करण में देरी को कम करने के लिए, अमेरिका ने हाल ही में नई पहल शुरू की. इसमें पहली बार आवेदकों के लिए विशेष साक्षात्कार निर्धारित करना और कांसुलर स्टाफ की संख्या बढ़ाना शामिल है. वीजा बैकलॉग को कम करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण के तहत, दिल्ली में अमेरिकी दूतावास और मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में वाणिज्य दूतावासों ने भी 21 जनवरी को “विशेष शनिवार साक्षात्कार दिवस” ​​​​आयोजित किया. अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले अमेरिकी वीजा वाले आवेदकों के लिए साक्षात्कार छूट मामलों की दूरस्थ प्रक्रिया को भी लागू किया है.

“अपनी ऊर्जा का हर औंस लगा रहे”

भारत में अमेरिकी मिशन ने दो सप्ताह पहले 2,50,000 से अधिक अतिरिक्त बी1/बी2 अप्वाइंटमेंट जारी किए. एक वरिष्ठ अमेरिकी वीजा अधिकारी ने हाल ही में समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि अमेरिका भारत में लंबे वीजा प्रतीक्षा समय को समाप्त करने के लिए “अपनी ऊर्जा का हर औंस लगा रहा है.” इसमें भारत में कांसुलर अधिकारियों का एक कैडर भेजना और भारतीय वीजा आवेदकों के लिए जर्मनी और थाईलैंड के रूप में अपने अन्य  विदेशी दूतावासों को खोलना शामिल है.

प्रतीक्षा अवधि पिछले साल तीन साल थी

भारत उन बहुत कम देशों में से एक था, जहां कोरोनोवायरस से संबंधित यात्रा प्रतिबंध हटाए जाने के बाद अमेरिकी वीजा के लिए आवेदनों में बड़ी तेजी देखी गई. पहली बार वीजा आवेदकों के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि को लेकर भारत में चिंताएं बढ़ रही हैं. विशेषकर बी1 (व्यवसाय) और बी2 (पर्यटक) श्रेणियों के तहत आवेदन करने वालों के लिए. भारत में पहली बार बी1/बी2 वीजा आवेदकों के लिए प्रतीक्षा अवधि पिछले साल अक्टूबर में तीन साल के करीब थी.

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