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भू-जल स्तर रिपोर्ट में भू-जल की सही तस्वीर नहीं: विशेषज्ञ

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जल विशेषज्ञों का कहना है कि भू-जल स्तर के आकलन के लिए बनाई गई इकाइयां काफी बड़ी हैं और उनकी संख्या �
रुचिका चित्रवंशी /  11 22, 2022






देश में भू-जल स्तर के ताजा आंकड़ों से रीचार्ज में वृद्धि और निकासी में कमी आने का संकेत मिलता है लेकिन इससे भारत में वास्तविक स्थिति की सही तस्वीर संभवत: नहीं मिलती है। जल विशेषज्ञों का कहना है कि भू-जल स्तर के आकलन के लिए बनाई गई इकाइयां काफी बड़ी हैं और उनकी संख्या भी काफी कम है। ऐसे में सूक्ष्म स्तर की तस्वीर नहीं दिख सकती है।

भारत में गतिशील भू-जल संसाधन की 2022 की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल के दौरान देश भर में कुल वार्षिक भू-जल रीचार्ज में 2020 के पिछले आकलन के मुकाबले 1.29 अरब घन मीटर (बीसीएम) की वृद्धि हुई। जबकि निकालने योग्य कुल वार्षिक भू-जल संसाधनों में भी 0.56 बीसीएम की बढ़ोतरी हुई है।

सिंचाई, घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग के लिए वार्षिक भूजल निकासी में भी इस दौरान 5.76 बीसीएम की कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मुख्य तौर पर मापदंडों में संशोधन, कुओं की गणना के आंकड़ों में संशोधन और भू-जल व्यवस्था में बदलाव के कारण इस प्रकार के अंतर दिख रहे हैं। ‘

साउथ एशिया नेटवर्क ऑफ डैम्स ऐंड रिवर्स के हिमांशु ठक्कर ने कहा, ‘जमीनी वास्तविकता में कोई बदलाव नहीं हुआ है जिससे अतिरिक्त कमी दिखेगी। वृहद स्तर पर पिछले छह दशकों से वृद्धि की रुझान दिख रहा है। रीचार्ज में वृद्धि से भी समस्या है क्योंकि आर्द्र भूमि और नदी की तलछटी जैसी व्यवस्थाएं नष्ट हो रही हैं।

हमें पुख्ता सबूत चाहिए जो रिपोर्ट में मौजूद नहीं है।’ कृषि क्षेत्र भू-जल संसाधनों का प्रमुख उपयोगकर्ता क्षेत्र है। भू-जल की कुल वार्षिक निकासी में सिंचाई की हिस्सेदारी करीब 87 फीसदी है। घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग के लिए महज 30.69 बीसीएम भू-जल की निकासी होती है जो कुल निकासी का लगभग 13 फीसदी है।

जल-स्तर की तस्वीर साफ नहीं

कई जल विशेषज्ञों ने आकलन इकाइयों के चयन के संदर्भ में उपयोग की गई पद्धति पर सवाल उठाए हैं। आकलन तालुक अथवा तहसील जैसे प्रशासनिक स्तर पर किए गए हैं और इससे सूक्ष्म स्तर के परिदृश्य का पता नहीं चलता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार या समुदाय द्वारा बनाई जाने वाली किसी भी उपयोग योजना के लिए सूक्ष्म स्तर का डेटा होना आवश्यक है। 

पूर्व जल सचिव शशि शेखर ने कहा, ‘भू-जल प्रशासनिक सीमाओं में नहीं बंधता है बल्कि यह आकार-प्रकार एवं जल-स्तर तक पहुंचने की क्षमता पर निर्भर करता है। इसलिए प्रशासनिक सीमाओं के दायरे में किए गए आकलन से सही उद्देश्य पूरा नहीं होगा।’ शेखर ने कहा कि भारत भू-जल का सबसे अधिक दोहन होता है और इसलिए भू-जल स्तर के आकलन के लिए देश को एक किलोमीटर लंबी और एक किलोमीटर चौड़ी इकाइयों में विभाजित करना होगा और हरेक इकाई में पीजोमीटर के साथ एक अवलोकन कुआं हो ताकि भू-जल स्तर का निरीक्षण किया जा सके।

उन्होंने कहा, ‘इस प्रकार की जानकारियों से मानव एवं मवेशियों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए फसलों के चयन में सरकार और समुदाय को मदद मिलेगी।’अध्ययन में कुल 7,089 आकलन इकाइयों को शामिल किया गया। शेखर ने कहा कि ये आंकड़े सही नहीं हैं क्योंकि इनमें से लगभग आधी इकाइयां तमिलनाडु क्षेत्र में हैं और शेष देश के अन्य हिस्सों को कवर करती हैं। उन्होंने कहा, ‘तमिलनाडु में आंकड़े फिरका स्तर पर जुटाए गए जो तालुक के मुकाबले छोटे हैं।

तमिलनाडु के एक तालुक में कई फिरकों के आंकड़े शामिल हैं। यही कारण है कि आंकड़ों से राज्य में भू-जल स्तर की बेहतर तस्वीर मिलती है।’ विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक जिले में औसतन 9 आकलन इकाइयां हैं। ठक्कर ने कहा, ‘वे मुख्य तौर पर तहसील स्तर की इकाइयां हैं। जाहिर तौर पर ये इकाइयां बड़ी हैं जो निष्कर्ष का प्रभावित कर सकती हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना भी महत्त्वपूर्ण है कि जल भराव वाले क्षेत्रों में कितनी वृद्धि हुई है।

देश में कुल 7,089 आकलन इकाइयों में से 1,006 इकाइयों यानी करीब 14 फीसदी क्षेत्र को अत्यधिक दोहन वाली श्रेणी में रखा गया है। इसी प्रकार 260 इकाइयों यानी करीब 4 फीसदी क्षेत्र को गंभीर श्रेणी में, 885 इकाइयों यानी करीब 12 फीसदी क्षेद्ध को कम गंभीर और 4,780 इकाइयों यानी 67 फीसदी क्षेत्र को सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।

आईआईटी दिल्ली  के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर एके गोसाईं ने भी कहा कि मौजूदा तकनीक कहीं अधिक परिष्कृत हैं और उससे कहीं अधिक सटीक आंकड़े मिल सकते हैं जबकि रिपोर्ट में आंकड़े लगभग में दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘भूमि और मृदा के उपयोग के आधार पर अब आप वास्तविक रीचार्ज के आंकड़े निकाल सकते हैं।’

बहरहाल, जल विशेषज्ञों ने हरेक दो साल बाद किए जा रहे आकलन का स्वागत किया है। उनका कहना है कि समुदायों के बीच ये आंकड़े जारी किए जाने चाहिए ताकि वे भू-जल स्तर के आधार पर अपनी जल उपयोगिता को निर्धारित कर सकें।केंद्रीय भू-जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) साल में चार बार जनवरी, अप्रैल या मई, अगस्त और नवंबर के दौरान भू-जल स्तर की निगरानी करता है।



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JSW Steel की अमेरिकी इकाई के प्रमुख मार्क बुश ने इस्तीफा दिया

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बयान में कहा गया है कि बुश ने अन्य अवसरों की तलाश के लिए सीईओ के पद से इस्तीफा दिया है
भाषा / नई दिल्ली December 08, 2022






जेएसडब्ल्यू स्टील की अमेरिकी इकाई जेएसडब्ल्यू स्टील यूएसए के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मार्क बुश ने इस्तीफा दे दिया है।

कंपनी ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि उनका इस्तीफा कंपनी की 2023 में बेटाउन में इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण परियोजना के पूरा होने से पहले आया है। बुश, 2020 में समूह की अमेरिकी इकाई के सीईओ के रूप में शामिल हुए थे।

बयान में कहा गया है कि बुश ने अन्य अवसरों की तलाश के लिए सीईओ के पद से इस्तीफा दिया है। कंपनी ने कहा कि नए सीईओ की नियुक्ति तक जेएसडब्ल्यू स्टील यूएसए के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) ग्रेग मैनफ्रेडी, मिंगो जंक्शन और बेटाउन समूहों का नेतृत्व करेंगे।

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UP By Poll Result 2022: मैनपुरी में डिंपल यादव को भारी बढ़त, रामपुर और खतौली में भी गठबंधन प्रत्याशी आगे

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भाषा / नई दिल्ली December 08, 2022






उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना के ताजा रुझानों में समाजवादी पार्टी (SP) की उम्मीदवार डिंपल यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रघुराज सिंह शाक्य पर एक लाख से अधिक मतों की बेहद मजबूत बढ़त बना ली है। रामपुर विधानसभा उपचुनाव में भी सपा के उम्मीदवार आगे हैं जबकि खतौली में उसकी सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रत्याशी भी बढ़त बनाए हुए हैं। 

 

मैनपुरी लोकसभा सीट और दोनों विधानसभा सीटों के उपचुनाव की मतगणना जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक डिंपल यादव शाक्य से 1.11 लाख के करीब मतों से आगे हैं। फिलहाल, वह बेहद मजबूत स्थिति में दिख रही हैं। खतौली सीट पर रालोद प्रत्याशी मदन भैया ने मतगणना के ताजा आंकड़ों में भाजपा उम्मीदवार राजकुमारी सैनी पर 8,534 मतों से बढ़त बना ली है। रामपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझान में सपा के आसिम राजा अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के आकाश सक्सेना से 5,100 मतों से आगे हैं। 

 

सपा के विधायक और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने एक ट्वीट में कहा, ‘मैनपुरी संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं से मिले आशीर्वाद, स्नेह और अपार जनसमर्थन के लिये सम्मानित जनता, शुभचिंतकों, मित्रों और कर्मठ कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार। जसवंत नगर की सम्मानित जनता द्वारा डिंपल यादव को दिये गये आशीर्वाद के लिये जसवंतनगर वासियों को सहृदय धन्यवाद।’

 

शिवापाल ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की समाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की और कहा कि परिवार एकजुट होकर लड़ा, इसलिए पार्टी ‘बड़ी जीत’ की ओर अग्रसर है। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और समाजवादी सरकार ने मैनपुरी में जो विकास किया है, उसकी वजह से यह ‘बड़ी जीत’ मिली है। मैनपुरी में आज भी नेताजी का जलवा कायम है।’

 

सपा अध्यक्ष से अपने सभी गिले-शिकवे भुलाकर मैनपुरी उपचुनाव में डिंपल के पक्ष में प्रचार करने वाले शिवपाल ने कहा, ‘अब जो भी चुनाव होगा, हमारा पूरा परिवार एक होकर ही लड़ेगा। हमारी बहू (डिंपल) एक बड़ी जीत की ओर इसलिए अग्रसर है, क्योंकि पूरा परिवार एक होकर लड़ा।’ शिवपाल ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के निर्देश पर मैनपुरी के अधिकारियों ने सपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न किया। उन्होंने कहा कि जनता ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए सपा को रिकॉर्ड वोट दिए। 

 

सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर निशाना साधते हुए कहा कि उपचुनाव के जो रुझान आ रहे हैं, उससे जाहिर होता है कि सपा अगले लोकसभा चुनाव में बढ़त बनायेगी। मौर्य ने एक ट्वीट में कहा था कि उपचुनाव के नतीजे वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से दूरगामी संकेत देंगे।

 

मैनपुरी लोकसभा सीट मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण रिक्त हुई है जबकि रामपुर सदर और खतौली विधानसभा सीट क्रमशः सपा विधायक आजम खां और भाजपा विधायक विक्रम सैनी को अलग-अलग मामलों में सजा सुनाए जाने के कारण खाली हुई हैं। इनमें से मैनपुरी लोकसभा और रामपुर सदर विधानसभा क्षेत्र सपा के गढ़ माने जाते हैं। इन सीटों के उपचुनाव के तहत इसी महीने पांच दिसंबर को मतदान हुआ था। 



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Air india 40 करोड़ डॉलर के निवेश से विमानों के पुराने बेड़े को करेगी अपग्रेड

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भाषा / नई दिल्ली 12 08, 2022






विमानन कंपनी एयर इंडिया (Air India) ने गुरुवार को कहा कि उसकी योजना 40 करोड़ डॉलर का निवेश करके 27 बोइंग बी787-8 विमानों और 13 बी777 विमानों समेत चौड़े आकार के अपने दोनों बेड़ों को नए जैसा बनाने की है।


एयरलाइन ने एक बयान में बताया कि इसके तहत केबिन के मौजूदा इंटीरियर को पूरी तरह से बदल दिया जाएगा और नए किस्म की सीट और विमान के भीतर मनोरंजन की सबसे अच्छी व्यवस्था सभी श्रेणियों में की जाएगी।


इसमें बताया गया कि दोनों बेड़ों में महंगे एवं सुविधाजनक इकोनॉमी केबिन की शुरुआत की जाएगी तथा बी777 में प्रथम श्रेणी का केबिन बहाल किया जाएगा। 



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