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भारत में पिछले 24 घंटों में सामने आए कोरोना के 2124 नए केस, 17 लोगों की मौत

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India Covid-19 Cases: भारत में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) की स्थिति फिलहाल स्थिर नजर आ रही है. पिछले कुछ दिनों से देश में रोजाना दो हजार के आसपास नए मामले सामने आ रहे हैं. पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 2124 नए मामले सामने आए हैं. वहीं 17 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है. जानिए कोरोना की ताजा स्थिति क्या है.

संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4,31,42,192 हुई

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) द्वारा जारी आकड़ों के मुताबिक, भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 2,124 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4,31,42,192 हो गई है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या 14,971 हो गई है.

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के कारण 17 और मरीजों के जान गंवाने से देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 5,24,507 हो गई है. वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.03 प्रतिशत है, जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर 98.75 प्रतिशत है.

पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन रोगियों की संख्या में 130 की वृद्धि हुई है. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, देश में दैनिक संक्रमण दर 0.46 प्रतिशत और साप्ताहिक संक्रमण दर 0.49 प्रतिशत है. वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,26,02,714 हो गई है, जबकि मृत्यु दर 1.22 प्रतिशत दर्ज की गई है. सरकार द्वारा चलाए जा रहे कोरोना रोधी टीकाकारण अभियान के तहत देश में अब तक 192.67 करोड़ से अधिक डोज दी जा चुकी हैं.

भारत में धीमी पड़ी कोरोना की रफ्तार

गौरतलब है कि देश में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित मरीजों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी. संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर 2020 को 90 लाख के पार चले गए थे.

देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गए थे. पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी. इस साल 26 जनवरी को मामले चार करोड़ के पार हो गए थे.

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विदेशी निवेशकों ने 8 साल में जो भारतीय बाजारों में किया निवेश, 7 महीने में निकाल लिया वापस

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Foreign Investors: भारतीय शेयर बाजार ( Indian Stock Market) में गिरावट का सिलसिला जारी है. हर दिन वैश्विक कारणों ( Global Factors) या फिर स्थानीय कारणों के चलते विदेशी पोर्टपोलियो निवेशक ( Foreign Portfolio Investors) बिकवाली कर रहे हैं. अक्टूबर 2021 के बाद से विदेशी निवेशकों ( Foreign Investors) ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये यानि 32 अरब डॉलर के शेयरों की बिकवाली कर अपने निवेश को वापस ले लिया है. 

बीते 7 महीनों से कर विदेशी निवेशक बिकवाली
एनएसडीएल ( National Securities Depository Limited)  के डाटा के मुताबिक 2014 से लेकर 2020 के बीच भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों ने 2.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था. वहीं 2010 से 2020 के बीच कुल 4.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था. लेकिन 7 महीने में इन निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली के चलते निवेश घटकर केवल आधा रह गया है. 

रिटेल निवेशकों ने संभाला बाजार को
अगर कोरोना महामारी काल ( Covid 19 Pandemic) के दौरान रिटेल निवेशकों ( Retail Investors) ने भारतीय शेयर बाजार में निवेश नहीं किया हुआ होता तो बाजार और नीचे गिरकर कारोबार कर रहा होता. बीते दो सालों 2020 और 2021 में रिटेल निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 2.1 लाख करोड़ रुपये निवेश किया है. बीते दो सालों में डिमैट खातों की संख्या दोगुनी हो गई है. वहीं इस अवधि में विदेशी निवेशकों ने 2.2 लाख करोड़ रुपये वापस निकाल लिए. घरेलू म्यूचुअल फंड ( Mutual Fund) ने भी भारतीय शेयर बाजार में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दो सालों में निवेश किया है. रिटेल निवेशकों ( Retail Investors) और म्यूचुअल फंड ( Mutual Fund) के निवेश के चलते भारतीय बाजारों विदेशी निवेशकों के बड़े पलायन के बावजूद बड़ी गिरावट नहीं देखने को मिली है. 

महंगाई और वैश्विक कारणों के चलते ले रहे निवेश वापस
अक्टूबर के बाद से ही भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दौर शुरू हुआ है. दरअसल दुनिया भर के देशों में महंगाई ( Inflation) में बढ़ी है जिसके चलते वहां के सेंट्रल बैंकों ( Central Bank) को ब्याज दरें ( Interest Rate) बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है. बैंक ऑफ इंग्लैंड ( Bank Of England)  के अलावा फेडरल रिजर्व ( Federal Reserve) और अब भारतीय रिजर्व बैंक ( Reserve Bank Of India) ने भी ब्याज दरें बढ़ाया है. जिसके बाद विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है. आग में घी का काम किया यूक्रेन पर रूस ( Russia Ukraine Conflict) के हमले ने. जिसके चलते सप्लाई बाधित हुई है इससे भी महंगाई बढ़ी है. कच्चा तेल समेत कई कमोडिटी ( Commodity) के दाम आसमान छू रहे हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों सेंट्रल बैंक और भी ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं. ऐसे में शेयर बाजार में और अस्थिरता आ सकती है जिसके चलते विदेशी निवेशक शेयर बाजार की जगह सुरक्षित ठिकानों पर निवेश करने को प्राथमिकता देंगे.  

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कोरोना महामारी फैलने के बाद पहली बार हुआ ऐसा काम, जानकर होगी खुशी

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Covid-19 in India: देश में कोरोना महामारी (Corona Pandemic) को फैले 2 साल से ज्यादा हो गए हैं. देश में महामारी फैलने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि कोरोना (Corona) की वजह से एक भी मौत रिपोर्ट (Death Report) नहीं हुई. कोरोना से मौतों का सिलसिला मंगलवार को थम गया. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण की वेबसाइट (Central Health and Family Welfare) के मुताबिक देश के किसी भी राज्य में कोरोना से मौत की सूचना नहीं मिली. हालांकि केरल से 31 मौतों की सूचना जरूर मिली लेकिन ये मामले पुराने बताए जा रहे हैं जिन्हें समायोजित किया गया है. इसे अब कोरोना महामारी के अंत (End Of Corona Pandemic) के रूप में देखा जा रहा है.

बता दें कि देश में कोरोना का पहला केस 30 जनवरी 2020 को पहला केस दर्ज किया गया था और 13 मार्च 2020 कोरोना से पहली मौत हुई थी. इसके बाद से कोविड-19 की वजह से मौतों का सिलसिला नहीं थमा. देश में अब तक कोरोना की वजह से 5 लाख 24 हजार 490 लोगों की मौत हो चुकी है.

ये हैं ताजा आंकड़े

तो वहीं मंगलवार को देश में कोरोना संक्रमण की वजह से नए मामलों की संख्या 2 हजार से नीचे आ गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सुबह 8 बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटे में 1675 नए मामले मिले हैं और 31 लोगों की मौत हुई है. अगर सक्रिय मामलों की बात करें तो ये संख्या 14481 रह गई है जो कुल मामलों का 0.03 फीसदी है.

      

बी.4 और बी.5 सब-वैरिएंट से नई लहर की आशंका नहीं

जैसा कि पता हो की भारत में ओमिक्रोन के दो नए सब-बैरिएंट बी.4 और बी.5 मिले थे इसके बावजूद कोरोना की नई लहर आने की कोई आशंका नहीं है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय कार्यबल के सह-अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा है कि कोरोना के नए सब-वैरिएंट मिलने से कोरोना के मामलों में ज्यादा बढ़ोतरी की आशंका नहीं है. लेकिन फिर भी हमें सावधान रहने की आवश्यकता है. हम सभी को पता है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में ओमिक्रॉन के चलते महामारी तेजी से फैली है.

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कोरोना महामारी के दौरान अमीरी-गरीबी के इस खेल को समझिए, सिस्टम तोड़कर बने अमीर

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Profiting From Pain: कोरोना महामारी (Corona Pandemic) ने पिछले दो साल में न जाने कितनों कि जिंदगियों को तबाह कर दिया होगा और न जाने कितनों के घरों को उजाड़ दिया. लेकिन कुछ अमीर लोगों के लिए ये महामारी एक वरदान साबित हुई. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं. ये बात एक रिपोर्ट में सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक कोविड 19 (Covid-19) ने अमीरी-ग़रीबी की खाई को और चौड़ा करने का काम किया है. एक तरफ जहां हर 33 घंटे में 10 लाख से ज़्यादा लोग एक्सट्रीम पॉवर्टी यानी बहुत ज़्यादा ग़रीबी का शिकार हो रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ इसी महामारी के दौर में हर 30 घंटे में एक अरबपति पैदा हुआ है.

ये जानकारी ऑक्सफैम इंटरनेशनल (Oxfam International) की एक रिपोर्ट में सामने आई है. ऑक्सफैम की इस रिपोर्ट का नाम ‘प्रॉफिटिंग फ्रॉम पेन’ (Profiting From Pain) है. रिपोर्ट को स्विट्जरलैंड (Switzerland) के दावोस (Davos) में रिलीज़ किया गया. ऑक्सफैम एक संस्था है जो समानता के लिए काम करती है. और इस संस्था ने ये रिपोर्ट तब जारी की है जब दावोस में World Economic Forum 2022 की सालाना बैठक के लिए दुनिया के अमीर और ताकतवर लोग इकट्ठा हो रहे हैं.

बताते हैं इस रिपोर्ट में आगे क्या कहा गया है

रिपोर्ट में कहा गया है कि ज़रूरी चीज़ों की कीमतों में आग़ लगी है. ये भी कहा गया है इतनी भयानक हालत कई दशकों बाद देखने को मिल रही है. डेटा देते हुए इस संस्था ने बताया कि फूड और एनर्जी के सेक्टर में जो अरबपति हैं वो अपनी संपत्ति में हर दो दिन में एक बिलियन डॉलर का इज़ाफा कर रहे हैं. आपको बता दें कि वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (World Economic Forum) पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है. कोविड की वजह से इनकी ये मीटिंग दो सालों के गैप के बाद हो रही है. ऑक्सफैम की इस रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी के दौरान 573 नए अरबपति बने. उनके गणित के हिसाब से इस महामारी के दौरान हर 30 घंटे में एक नया व्यक्ति अरबपति बना. रिपोर्ट में आगे आशंका जताई गई है कि इस साल 26 करोड़ से ज़्यादा लोग भयानक ग़रीबी का शिकार हो सकते हैं. एक आंकड़ा ये भी दिया गया है कि जो अरबपति हैं उनकी संपत्ति में 24 महीनों में जो इज़ाफा हुआ है वो 23 साल के इज़ाफे के बराबर है.

सिस्टम को तोड़कर बने अमीर

एक और चौंकाने वाला आंकड़ा है. ये आंकड़ा साल 2000 में दुनिया की जीडीपी में अरबपतियों का हिस्सा 4.4 पर्सेंट का था. अब ये बढ़कर 13.9 पर्सेंट हो गया है. अब आपका एक सवाल हो सकता है. सवाल ये कि इनकी ये अमीरी किस कीमत पर बढ़ रही है. इस पर एक बयान में ऑक्सफैम का कहना है कि कम पैसों और ख़राब कंडीशन में लोगों को ज़्यादा देर तक कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है. जो बेहद अमीर लोग हैं उन्होंने सिस्टम को अपने हिसाब से तोड़ा मरोड़ा है और अब इसका फायदा उठा रहे हैं. अमीरों के पास जो बेतहाशा दौलत आई है वो प्राइवेटाइज़ेशन और मोनोपोली की वजह से आई है. ये सब ऑक्सफैम का कहना है.

तीन सेक्टर्स ने कमाया सबसे ज्यादा मुनाफा

ऑक्सफैम ने आगे कहा कि इतनी अमीरी तक पहुंचने के लिए अमीरों ने वर्कर्स राइट को भी बेहद कमज़ोर बनवाने का काम किया. और अपने पैसे जो हैं वो टैक्स हेवन्स में छुपाए. ऑक्सफैम की तरफ से ये भी कहा गया है कि ये सब होने में सरकारों का बराबर का योगदान रहा है. रिपोर्ट के एक फैक्ट के मुताबिक एनर्जी, फूड और फार्मास्युटिकल ये वो तीन सेक्टर्स हैं जिन्होंने सबसे ज़्यादा मुनाफा कमाया है. अकेले फूड के सेक्टर में 62 नए अरबपति बने हैं. पहले पैंडेमिक के फूड के सेक्टर में महज़ 8 अरबपति थे. श्रीलंका से सूडान तक भयानक ग़रीबी की वजह से हाहाकार मचा है. लो इनकम वाले 60 फीसदी देशों को डेट ट्रैप यानी कर्ज़ के जाल में फंसने का भयानक ख़तरा बना हुआ है. एक आंकड़ा ये भी दिया गया है कि अमीर देशों की तुलना में ग़रीब देशों के लोगों को खाने पर कम से कम दोगुना ख़र्च करना पड़ता है.

इसके अलावा एक और आंकड़ा सामने आया है जिसमें दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों के पास 40 फीसदी जो सबसे ग़रीब लोग हैं उनसे ज़्यादा संपत्ति है. इसको आसानी से समझें तो दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों की अमीरी 3 खरब से ज़्यादा लोगों पर भारी है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर बॉटम 50 पर्सेंट यानी नीचे से 50 पर्सेंट लोगों की बात करें तो वो अपनी मेहनत से 112 साल में जितना कमाएंगे. टॉप के वन पर्सेंट यानी सबसे अमीर उतना एक साल में कमा लेते हैं.

फार्मा सेक्टर की बात करें तो इस सेक्टर में 40 नए अरबपति बने. कोविड (Covid) से जहां 20 करोड़ के करीब लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, अर्थव्यवस्थाएं (Economy) बर्बाद हो गईं. ऐसे में दावोस (Davos) में जुट रहे नेताओं को ऑक्सफैम (Oxfam) की तरफ से दो सुझाव दिए गए हैं जिसमें पहला ये कि अमीर लोग प्रॉक्सी की तरह काम करें और लोगों को बर्बाद होने दें और दूसरा अपनी ग्रेट मेजॉरिटी को ऐसी स्थिति से निकालने का काम करें.

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