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भारत को भी मिल चुका है FIFA वर्ल्ड कप का टिकट! फिर क्यों टूर्नामेंट में कभी हिस्सा नहीं ले पाई टीम?

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1948 ओलंपिक वाली भारतीय फुटबॉल टीम

FIFA World Cup: फुटबॉल के महासंग्राम यानी फीफा वर्ल्ड कप के 22वें संस्करण की शुरुआत 20 नवंबर से कतर में होने जा रही है। दुनियाभर की 32 टीमें इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही हैं लेकिन भारत में इस मेगा ईवेंट का क्रेज बहुत ज्यादा नहीं है। उसका एक कारण यह भी है कि हमारे देश की टीम ही इसका हिस्सा नहीं है। गौरतलब है कि भारतीय फुटबॉल टीम की गिनती दुनिया की टॉप टीमों में नहीं होती है और यही कारण है कि हम फीफा वर्ल्ड कप को तिरंगा लहराकर एनजॉय नहीं कर पाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एक बार भारत को फीफा वर्ल्ड कप का टिकट मिल चुका है?

जी हां, सही सुना आपने भारत को फीफा वर्ल्ड कप का टिकट मिल चुका है लेकिन उस समय के मैनेजमेंट की कुछ गलतियों या फिर कहें समय की विवशता रही होगी कि टीम हिस्सा नहीं ले पाई। कह सकते हैं कि उसका खामियाजा हम आज भी भुगत रहे हैं और आज तक हम फीफा वर्ल्ड कप के एक भी संस्करण में नहीं खेल पाए हैं। अब आप यह सोच रहे होंगे कि आखिरी ऐसा कब हुआ? बताते हैं पूरी कहानी विस्तार से कि कब भारत को फीफा वर्ल्ड कप खेलने का मौका मिला था और टीम किन कारणों के चलते शायद नहीं जा पाई। 

फीफा वर्ल्ड कप 2022

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फीफा वर्ल्ड कप 2022

वो बात है 1950 की…

वो बात है 1950 के फीफा वर्ल्ड कप की जिसका आयोजन ब्राजील में हुआ था। यह वर्ल्ड कप 12 साल के इंतजार के बाद हो रहा था, क्योंकि 1942 और 1946 में द्वितीय विश्व युद्ध के चलते इसका आयोजन नहीं हो पाया था। इस टूर्नामेंट के लिए पहले क्वालीफाइंग राउंड का आयोजन हुआ जिसमें 33 टीमों ने अपना नाम दिया। इस राउंड के ग्रुप 10 में भारत को बर्मा (म्यांमार) और फिलीपींस के साथ जगह मिली, लेकिन इन दोनों ही देशों ने क्वालिफाईंग राउंड शुरू होने से पहले ही अपना नाम वापस ले लिया। यानी भारत की हुई बल्ले-बल्ले और मिल गई उसे 1950 फीफा वर्ल्ड कप की टिकट।

मौका शानदार था…

भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी और उस वक्त के कुछ गिने-चुने फुटबॉल फैंस काफी खुश थे। टीम इंडिया फीफा वर्ल्ड कप खेलने जा रही थी स्क्वॉड का ऐलान हो गया और 15 जून को टीम को ब्राजील रवाना होना था। मेन राउंड के पूल-3 में भारत को पराग्वे, इटली और स्वीडेन के साथ जगह मिली थी। 25 जून को टीम का पहला मैच भी पराग्वे से होना था। मौका शानदार था क्योंकि उस वक्त पराग्वे की टीम बहुत अच्छी नहीं थी, इटली अपने मेन खिलाड़ियों के बिना आई थी और 1948 ओलंपिक में मजबूत फ्रांस को 1-2 से टक्कर देकर हारने वाली भारतीय टीम भी अच्छा खेल खेलने के लिए जानी जाती थी। एकमात्र स्वीडेन की टीम भारत से अच्छी दिख रही थी यानी भारत दूसरे स्थान पर समाप्त कर सकता था। लेकिन इस शानदार मौके को भुनाने का टीम को मौका ही नहीं मिला।

1950 के दौर में नंगे पांव खेलते थे भारतीय फुटबॉलर्स

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1950 के दौर में नंगे पांव खेलते थे भारतीय फुटबॉलर्स

ऐसा क्या हो गया?

अचानक टीम ब्राजील रवाना नहीं हुई और हर तरफ चर्चा शुरू हो गई कि आखिर क्यों टीम ने फीफा वर्ल्ड कप खेलने का सुनहरा मौका गंवा दिया? हर कहीं यही सवाल था, हर तरफ यही चर्चा थी। कई अटकलें लग रही थीं लेकिन आज तक कहीं भी इसका प्रमुख कारण नहीं सामने आ पाया। कई फुटबॉल एक्सपर्ट्स की किताबों में भी कई कारण बताए गए लेकिन कोई सटीक वजह कभी नहीं सामने आ पाई। कहा यह भी जाता है कि उस वक्त फुटबॉल का वो ग्लैमर नहीं था जैसा आज है। हॉकी को उस वक्त ज्यादा तवज्जो मिलती थी। लेकिन भविष्य की तब किसी ने नहीं सोची और उसका खामियाजा आज भी भारत कभी भी फीफा वर्ल्ड कप नहीं खेलने वाला देश बनकर भुगत रहा है।

वैसे तो कई स्पष्ट कारण कभी भी सामने नहीं आ पाया लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबकि कुछ वजह समय-समय पर सामने आती रहीं:-

  1. नंगे पांव खेलना– उस वक्त भारतीय टीम के पास कुछ ऐसे शानदार खिलाड़ी थे जिनके नाम आज भी फुटबॉल प्रेमी शायद जानते हों। अहमद खान, एस रमन, ताज मोहम्मद सरीखे खिलाड़ी थे वो। ज्यादातर खिलाड़ी उस टीम के नंगे पांव खेलते नजर आते थे लेकिन फीफा के नियमों में ऐसा नहीं था। हालांकि, बाद में कुछ रिपोर्ट ऐसी भी आईं जिसमें खिलाड़ियों ने बताया कि उनकी किट में स्पाइक शूज थे लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ जो टीम रवाना नहीं हुई?
  2. आर्थिक कारण– इसका दूसरा कारण आर्थिक स्थिति का भी आया। यह कहा गया कुछ रिपोर्ट में कि आर्थिक तंगी के कारण भारतीय फुटबॉल टीम ब्राजील नहीं गई। लेकिन इसके विपरीत भी कुछ ऐसी रिपोर्ट सामने आईं जिसमें पता चला कि राज्यस्तरीय फुटबॉल संघों ने तो मदद का दावा किया ही था साथ ही ब्राजील के फेडरेशन ने भी मदद का हाथ बढ़ाते हुए खर्चा माफ करने और चुकाने की बात कही थी। ब्राजील के भारत से संबंध अच्छे थे और वह चाहते थे की इंडियन टीम उनके देश आकर खेले। लेकिन फिर भी ऐसा क्या रहा कि टीम नहीं गई?
  3. ओलंपिक पर ध्यान– मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कहा यह भी जाता है कि उस वक्त भारतीय हॉकी टीम अपने गोल्डन पीरियड में थी। हर किसी का ध्यान हॉकी पर था। साथ ही ओलंपिक खेलों में प्रदर्शन ही सफलता का मानक बन गया था। कहा यह भी जाता था कि, अगर फीफा वर्ल्ड कप खेला तो खिलाड़ी प्रोफेशनल हो सकते हैं जिसके कारण वो ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। लेकिन इसे काटने के लिए भी एक नियम था कि खिलाड़ियों को सेना का बताया जाए और इस कारण उन्हें प्रोफेशनल नहीं घोषित किया जा सकता। शायद उस वक्त के मैनेजमेंट को इन नियमों की सही से जानकारी नहीं रही और यह भी एक बड़ा कारण ब्राजील नहीं जाने का बनकर उमड़ा।
  4. 1951 एशियाई खेलों को तवज्जो– साथ ही भारत में उस वक्त ओलंपिक के साथ-साथ एशियाई खेल भी काफी तवज्जो रखते थे। भारतीय फुटबॉल टीम को हॉकी टीम के नजरिए से देखा जाने लगा था। हॉकी टीम जैसे जादू बिखे रही थी वैसा ही फुटबॉल से भी उम्मीद थीं। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया आज तक भी। 1951 में एशियाई खेल होने थे उन पर ध्यान देने के लिए टीम को ब्राजील नहीं भेजना भी इसके पीछे का एक कारण बनकर उमड़ा।

कारण, वजह, अटकलें….

कई सारे अनुमान ही लगाए जा सकते हैं लेकिन आज तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर क्यों तब भारतीय फुटबॉल टीम को ब्राजील नहीं भेजा गया था। भारत आज दुनियाभर के कई प्रतिष्ठित खेलों में अपनी ढाक जमा चुका है। लेकिन फुटबॉल की दुनिया में हम अभी भी काफी पीछे हैं। शायद 72 साल पहले अगर हुई इस गलती को देखा जाए तो अगर ऐसा ना हुआ होता तो वहां से भारतीय फुटबॉल की तस्वीर बदल सकती थी। यही कारण है कि आज भी जब चार साल बाद फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन होता है तो भारत में इसकी धूम नहीं होती है।

आज की भारतीय फुटबॉल टीम सुनील छेत्री की कप्तानी वाली

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आज की भारतीय फुटबॉल टीम सुनील छेत्री की कप्तानी वाली

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Pro Kabaddi League: बंगाल वॉरियर्स के खिलाफ यूपी की शानदार जीत, प्रदीप नरवाल ने किया कमाल

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Pro Kabaddi League: प्रो कबड्डी लीग के एक रोमांचक मुकाबले में यूपी योद्धा ने बंगाल वारियर्स को 33-32 से हराकर प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करने की अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। यूपी की टीम फिलहाल 18 मैचों में 60 अंकों के साथ लीग टेबल में तीसरे स्थान पर है। इस मैच में शुरुआत से यूपी की टीम ने बढ़त बना रखी थी, लेकिन आखिर में बंगाल की टीम बराबरी के काफी करीब पहुंच गई। हालांकि यूपी के स्टार रेडर प्रदीप नरवाल ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए अपनी टीम को जिता दिया।

प्रदीप नरवाल के दम पर जीती यूपी 

इस मैच में यूपी योद्धा ने पांचवें मिनट में 5-3 से बढ़त बना ली। हालांकि, वॉरियर्स ने सुपर टैकल किया और स्कोर को 5-5 से बराबर कर दिया। थोड़ी देर बाद, आशीष सांगवान ने रोहित तोमर का सामना किया। वारियर्स ने 9वें मिनट में 7-6 से बढ़त बना ली थी। हालांकि, विनोद कुमार एक रेड से चूक गए, जिससे योद्धाओं ने स्कोर 8-8 से बराबर कर लिया। योद्धाओं ने बेहतर प्रदर्शन करना जारी रखा और 15वें मिनट में 13-10 पर ऑल आउट कर दिया। योद्धाओं के आगे बढ़ने के साथ नरवाल ने टच पॉइंट लेना जारी रखा। स्टार रेडर ने एक मल्टी-पॉइंट रेड किया और अपनी टीम को हाफ-टाइम के स्ट्रोक पर 19-11 तक पहुंचाने में मदद की।

दूसरा हाफ शुरू होते ही बंगाल की टीम हुई ऑलआउट

योद्धाओं ने दूसरे हाफ के शुरुआती मिनट में ऑल आउट कर दिया और 22-11 से बड़ी बढ़त बना ली। यूपी की ओर से मनिंदर सिंह ने 23वें मिनट में 24-13 से मैच पर अपना दबदबा कायम रखा। योद्धाओं ने 27वें मिनट में 26-16 से बढ़त बना ली। मनिंदर सिंह के लिए योद्धाओं के डिफेंस को तोड़ना मुश्किल था क्योंकि यूपी की ओर से वॉरियर्स को मैट पर सिर्फ तीन सदस्यों तक सीमित कर दिया गया था।  मनिंदर ने 35वें मिनट में शानदार रेड की, लेकिन वॉरियर्स 22-32 पर बहुत पीछे रह गई। हालांकि, वॉरियर्स ने उम्मीद नहीं खोई। मनिंदर ने सुपर रेड की और उनकी टीम को 39वें मिनट में ऑल आउट करने में मदद की और 29-32 पर केवल तीन अंक पीछे रह गए।

इसके बाद एक रेड पर नरवाल ने सुनिश्चित किया कि पकड़े जाने से पहले उन्होंने एक बोनस अंक हासिल किया और यह सुनिश्चित किया कि उनकी टीम मैच के अंतिम सेकंड में 33-31 पर आगे रहे। मनिंदर ने एक और रेड मारा, जिससे अंतिम रेड से पहले योद्धा 32-33 पर सिर्फ एक अंक पीछे रह गए। लेकिन, तोमर ने सावधानी से कदम रखा और सुनिश्चित किया कि योद्धा मैच के अंत में विजेता के रूप में उभरे।





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Cristiano Ronaldo: मैनचेस्टर यूनाइटेड से करार टूटने के बाद रोनाल्डो को मिला बंपर ऑफर, यह क्लब 1837 करोड़ देने को तैयार

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लिस्बन (पुर्तगाल): पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo) फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं। लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने के साथ ही उनके लिए बुरी खबर आ गई थी। उनके क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड ने रोनाल्डो के साथ करार समाप्त करने की घोषणा कर दी थी। रोनाल्डो पिछले साल ही इटैलियन क्लब युवेंट्स को छोड़कर इंग्लिश क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड से जुड़े थे। लेकिन एक इंटरव्यू में उन्होंने क्लब के खिलाफ कई बड़े बयान दिए। जिसके बाद क्लब ने उनके साथ अपना करार समाप्त कर दिया।

सऊदी के क्लब से मिला ऑफर

क्रिस्टियानो रोनाल्डो को सऊदी अरब के क्लब ने बड़ा ऑफर दिया है। अल-नासर एफसी ने रोनाल्डो को तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट का ऑफर दिया है। इसके लिए क्लब ने रोनाल्डो को 1837 करोड़ रुपये देने की पेशकश की है। अब रोनाल्डो को यह फैसला करना है कि वह क्लब के साथ जुड़ना चाहते हैं या नहीं। उनके पास यह ऑफर फीफा वर्ल्ड कप के बाद तक रहेगा।

नौ लीग खिताबों के साथ, अल नासर सऊदी अरब की सबसे सफल और सम्मानित टीमों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार क्लब ने सीजन की शुरुआत में ही रोनाल्डो को यह ऑफर दिया था। वह सिर्फ रोनाल्डो की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। अगर दिग्गज फुटबॉलर क्लब के लिए खेलने को राजी हो जाते हैं तो यह डील कुछ ही दिनों में फाइनल हो जाएगी। अगर रोनाल्डो ऑफर के लिए हामी भर देते हैं तो उनके यूरोपिन फुटबॉल करियर की समाप्ति भी हो जाएगी।

यूरोपियन क्लब ने नहीं दिखाई थी रुचि

मैनचेस्टर यूनाइटेड ने यूरोप के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट चैंपियंस लीग के लिए क्वालीफाई नहीं किया। जिसकी वजह से रोनाल्डो सीजन की शुरुआत में ही क्लब छोड़ना चाहते थे। रिपोर्ट्स की माने तो उन्होंने कई क्लब को अप्रोच किया था। लेकिन किसी ने उन्हें अपने साथ जोड़ने में रुचि नहीं दिखाई। जिसके बाद उन्हें मैनचेस्टर यूनाइटेड के साथ ही रहना पड़ा लेकिन टीम मैनेजर के साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं रहे। उन्हें ज्यादा समय बेंच पर ही बैठना पड़ा।

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अजीत आगरकर बन सकते हैं BCCI सेलेक्शन कमेटी के नए हेड, इन दिग्गजों ने भी भरे आवेदन

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BCCI

BCCI Selection Committee: टी20 वर्ल्ड कप 2022 की हार के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की सेलेक्शन कमेटी में बड़े बदलाव देखने को मिले। बीसीसीआई ने सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन चेतन शर्मा और उनकी पूरी टीम को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इन पदों के आवेदन के लिए आखिरी तारीख निकल चुकी है और खाली पदों के लिए कई दिग्गजों ने अपने नाम दिए हैं।

कई दिग्गजों ने भरे आवेदन  

बाएं हाथ के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह, सलामी बल्लेबाज शिव सुंदर दास ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सीनियर चयनकर्ताओं के पद के लिए आवेदन किया है जिन्हें भारत के लिए 20 से अधिक टेस्ट खेलने का अनुभव है। यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि पूर्व तेज गेंदबाज अजित आगरकर ने आवेदन किया है या नहीं। कइयों का मानना है कि अगरकर अगर आवेदन करते हैं तो उनका चयन समिति का अध्यक्ष बनना तय है।

मुंबई से इन क्रिकेटर्स ने किया आवेदन

मुंबई की सीनियर टीम की चयन समिति के मौजूदा प्रमुख सलिल अंकोला, पूर्व विकेटकीपर समीर दिघे और पूर्व बल्लेबाज विनोद कांबली ने मुंबई से आवेदन किया है। नई चयन समिति के लिए आवेदन की आखिरी तारीख सोमवार को शाम 6 बजे तक थी। समझा जाता है कि 50 से अधिक लोगों ने आवेदन किया है। इनमें से सर्वाधिक टेस्ट मनिंदर सिंह (35 टेस्ट) और दास (21 टेस्ट) ने खेले हैं। मनिंदर ने 2021 में भी आवेदन किया था और इंटरव्यू राउंड में क्वालीफाई करने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ था।

उत्तर क्षेत्र से मनिंदर, अतुल वासन, निखिल चोपड़ा, अजय रात्रा और रीतिंदर सिंह सोढी ने आवेदन किया है। पूर्वी क्षेत्र से दास, प्रभंजन मलिक, रश्मि रंजन परीदा , शुभमय दास और सौराशीष लाहिड़ी ने आवेदन किया है। मध्य क्षेत्र से अमय खुरासिया और ज्ञानेंद्र पांडे ने आवेदन किया है।

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