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बैंगनी टमाटर की कहानी: जीएम-खाद्य पदार्थों की जीत

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आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों की कई नस्लों ने उन्हें रोग प्रतिरोधक बना दिया है
भाषा / नई दिल्ली November 22, 2022






आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) और जनता के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया जाने वाला भोजन टमाटर था, जिसका आविष्कार 1994 में अमेरिका में किया गया था। तब से, मकई, कपास, आलू और गुलाबी अनानस समेत कई अलग-अलग आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ बनाए गए हैं।

यद्यपि आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ अभी भी खराब माने जाते हैं, लेकिन कई अच्छे कारण भी हैं कि इन पदार्थों कह आनुवंशिकी को संशोधित करना सार्थक क्यों हो सकता है।

उदाहरण के लिए, आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों की कई नस्लों ने उन्हें रोग प्रतिरोधक बना दिया है। उन्हें अधिक पौष्टिक बनाने के लिए खाद्य पदार्थों को संशोधित करना भी संभव है। उदाहरण के लिए सुनहरे चावल लें।

गरीब देशों में इस पोषक तत्व की कमी से निपटने के लिए, इस अनाज को विटामिन ए के उच्च स्तर के लिए इंजीनियर किया गया था। लेकिन 1994 से आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों में सभी विकासों के बावजूद, कुछ ही उत्पाद वास्तव में बाजार में आ पाए हैं।

कुछ देशों में सरकारी नीति निर्माताओं की अनिच्छा के साथ-साथ जीएम उत्पादों के बारे में आम जनता की निरंतर अज्ञानता ने आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों की प्रयोगशाला से बाजार में जाने की प्रगति को बाधित किया है। यही कारण है कि इस सितंबर में अमेरिका में बैंगनी टमाटरों की विनियामक स्वीकृति इतनी रोमांचक है।

बैंगनी टमाटर बनाना



पिछले 14 वर्षों से, इंग्लैंड के नॉरफ़ॉक में जॉन इन्स सेंटर से कैथी मार्टिन और यूजेनियो बुटेली और उनकी टीम बैंगनी टमाटर विकसित करने पर काम कर रही है।

उनका उद्देश्य एक ऐसे टमाटर को तैयार करना था जिसमें एंथोसायनिन के उच्च स्तर हों – जिसका उपयोग एंथोसायनिन के लाभों का अध्ययन करने के लिए असंशोधित टमाटर के साथ किया जा सकता है। टीम ने टमाटर को संशोधित करने का फैसला किया क्योंकि यह फल स्वादिष्ट होते हैं और व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं। एंथोसायनिन स्वाभाविक रूप से कई फलों और सब्जियों में होता है जिनमें लाल, बैंगनी या नीला छिलका होता है – जैसे ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, बैंगन और लाल गोभी।

बैंगनी टमाटर का उत्पादन करने के लिए, टीम ने स्नैपड्रैगन से जीन को टमाटर के डीएनए में शामिल किया। इन प्रयोगों का अंतिम परिणाम एक अनोखा फल था – और केवल इसके रंग के कारण नहीं। वे इंजीनियरिंग टमाटर में भी सफल रहे जिसमें उच्च स्तर के एंथोसायनिन थे – ब्लूबेरी में पाई जाने वाली मात्रा के बराबर – जो कई कारणों से फायदेमंद है।

बैंगनी टमाटर में एंथोसायनिन का उच्च स्तर वास्तव में लाल टमाटर की तुलना में उनकी शेल्फ लाइफ को दोगुना करने का काम करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एंथोसायनिन अधिक पकने में देरी करने में मदद करता है और फसल के बाद फंगस के हमले के लिए फल की संवेदनशीलता को कम करता है। एंथोसायनिन के उच्च स्तर का एक अन्य लाभ यह है कि वे परागणकों और जानवरों को बीज फैलाने के लिए आकर्षित करते हैं, जिससे पौधों की प्रजनन क्षमता और उनकी उपज बढ़ जाती है।

एंथोसायनिन पौधों को यूवी क्षति से भी बचाता है और उन्हें रोगजनकों से बचाता है, जो उनके अस्तित्व को अधिकतम करता है। एंथोसायनिन आपके स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा हो सकता है। इनसे युक्त अन्य खाद्य पदार्थों पर अध्ययन ने उन्हें कम प्रदाह, टाइप 2 मधुमेह और कैंसर के कम जोखिम से जोड़ा है। वे मस्तिष्क को डिमेंशिया जैसी बीमारी से भी बचा सकते हैं।

जबकि विशेष रूप से मनुष्यों पर बैंगनी टमाटर के लाभों का अध्ययन अभी भी चल रहा है, एक अध्ययन जिसमें कैंसर-प्रवण चूहों को बैंगनी टमाटर के साथ पूरक भोजन दिया गया था, में पाया गया कि वे वास्तव में लाल टमाटर दिए गए चूहों की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक जीवित रहे।

जीएम का भविष्य



पिछले कुछ वर्षों में जीएम खाद्य पदार्थों के क्षेत्र में कई रोमांचक विकास हुए हैं, जिनमें जापान में पहला जीनोम-संपादित जीएबीए टमाटर और ब्रिटेन में विटामिन डी समृद्ध टमाटर शामिल हैं। दोनों सीआरआईएसपीआर जीनोम-एडिटिंग तकनीक का उपयोग करके विकसित किए गए थे।

आनुवंशिक संशोधन कई लाभ प्रदान कर सकता है। यह न केवल अधिक लचीली फसलों को विकसित करके जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में हमारी मदद कर सकता है, बल्कि कुछ विटामिनों और खनिजों के उच्च स्तर वाले प्रजनन पौधों से हमें स्वास्थ्य में सुधार करने और कई सामान्य बीमारियों के बोझ को कम करने में भी मदद कर सकता है। और, जीएम फसलें हमें यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकती हैं कि हर किसी को, भले ही वे कहीं भी रहते हों, उच्च गुणवत्ता वाली ताजा उपज तक पहुंच प्राप्त हो, जो उनके और पर्यावरण के लिए अच्छा हो। जीएम खाद्य पदार्थों को भी कई देशों में कड़ाई से विनियमित किया जाता है, जिसका अर्थ है कि उपभोग के लिए अनुमोदित कोई भी उत्पाद मानव, पौधे और पशु स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं। सबसे बड़ी चुनौती अब दुनिया भर में अधिक सरकारों को बिक्री के लिए इन आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों को मंजूरी देना है। हालांकि, जब जीन-संपादित फसलों के नियमन की बात आती है तो यूके अन्य देशों से आगे है, यह वर्तमान में अज्ञात है कि जीएम बैंगनी टमाटर को वहां बिक्री के लिए पेश किया जाएगा या नहीं। लेकिन उम्मीद है कि 2023 तक बैंगनी टमाटर अमेरिका में बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगा।

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यूपी में होगा ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन

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उत्तर प्रदेश में हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक क्लस्टर बनाकर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा। प्रदेश में ग्रीन वैली की स्थापना कर ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक नीति का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित नीति के तहत हाइड्रोजन व अमोनिया जैसी गैसों का उत्पादन करने वाले निवेशकों को कई तरह की सहूलियतें व छूट दी जाएंगी।

अगले साल फरवरी में होने वाले वैश्विक निवेशक सम्मेलन से पहले योगी सरकार ग्रीन हाइड्रोजन नीति लागू कर निवेश के नए दरवाजे खोलेगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य 2028 तक खाद कारखानों व तेल शोधन संयंत्रों में कुल हाइड्रोजन के उपभोग का 20 फीसदी ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल का है। इसे 2035 तक बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया जाएगा।

इसके चलते प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन नीति में पूंजीगत व्यय में इलेक्ट्रोलाइजर के विकास पर 2023 में 60 फीसदी, 2024 में 55 फीसदी व 2025 में 45 फीसदी की सब्सिडी देने की योजना है। ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण में इलेक्ट्रोलाइजर सबसे अहम घटक है।

प्रस्तावित नीति के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया के परिवहन और स्टोरेज क्षमता को भी विकसित किया जाएगा। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जल्दी ही मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी दी जाएगी। प्रस्तावित नीति के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध, अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। 

ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया का उत्पादन करने वाले निवेशकों को 15 दिन के भीतर सिंगल विंडो पोर्टल के जरिए जरूरी मंजूरी दी जाएगी। तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 30 फीसदी या 5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया का उत्पादन संयंत्र लगाने वाले निवेशकों को स्टांप शुल्क एवं भूउपयोग शुल्क में सौ फीसदी की छूट दी जाएगी जबकि पानी के इस्तेमाल पर लगने वाले शुल्क में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी।



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क्रेडिट कार्ड से खर्च 1.29 लाख करोड़

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि त्योहारी सीजन के दौरान क्रेडिट कार्ड के खर्च ने अक्टूबर में वृद्धि की गति को जारी रखा और 1.29 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लिया। यह पिछले महीने की तुलना में 5.5 फीसदी अधिक है, तब कुल खर्च 1.22 लाख करोड़ रुपये था। 

उच्च आधार के बावजूद पिछले साल की समान अवधि की तुलना में खर्च 25 फीसदी ज्यादा रहा। पिछले साल अक्टूबर में त्योहारी सीजन के कारण क्रेडिट का खर्च पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये पहुंचा था। साथ ही एक साल से निष्क्रिय कार्डों को निरस्त करने के रिजर्व बैंक के नियम के बाद पिछले दो माह में क्रेडिट कार्ड संख्या में शुद्ध कमी आई। बैंकिंग व्यवस्था में 16.6 लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड जोड़े गए, जिसके बाद कुल कार्डों की संख्या 7.93 करोड़ हो गई। 

आरबीआई के नए मानदंड के लागू होने से पहले उद्योग एक महीने में औसतन 15 लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड जोड़ रहा था, क्योंकि महामारी में बैंकों ने असुरक्षित ऋण देने का कारोबार तेज कर दिया था। अक्टूबर के दौरान सबसे अधिक एसबीआई कार्ड्स और भुगतान सेवाओं ने 3,39,160 कार्ड जोड़े। इसके बाद ऐक्सिस बैंक ने 2,61,367 कार्ड्स और आईसीआईसीआई बैंक ने 2,21,280 कार्ड्स जोड़े। देश के सबसे बड़े क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता एचडीएफसी बैंक ने इस अवधि के दौरान 2,17,979 कार्ड जोड़े। 

जुलाई-सितंबर (दूसरी तिमाही) तिमाही में कार्ड की संख्या में 25.5 लाख की गिरावट आई। प्रमुख जारीकर्ताओं में देश के सबसे बड़े कार्ड जारीकर्ता एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट कार्डों की संख्या में वित्त वर्ष 23 की दूसरी तिमाही में 16.2 लाख की शुद्ध गिरावट आई। ई-कॉमर्स लेन-देन की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण पिछले आठ महीनों में कार्ड खर्च लगातार 1 लाख करोड़ रुपये के ऊपर रहा है। महामारी में कम हुए यात्रा और आतिथ्य खर्च मजबूती से वापस आ गए हैं।



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4.5 गीगावॉट बिजली आपूर्ति के लिए बोली आमंत्रित

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देश के सभी इलाकों में अगले साल खासकर ज्यादा मांग वाले गर्मी के महीनों में बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के वास्ते  केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने 4.5 गीगावॉट बिजली खरीदने के लिए बिजली उत्पादन कंपनियों (जेनको) से बोली आमंत्रित की है। आपूर्ति की अवधि 5 साल होगी। साथ ही इस योजना में पात्र पाई जाने वाली उत्पादन कंपनियों को अतिरिक्त कोयले का आवंटन किया जाएगा। 

बिजली मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘ पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड (पीएफसी लिमिटेड की पूर्ण मालिकाना वाली सहायक इकाई) को बिजली मंत्रालय की नोडल एजेंसी बनाया गया है। योजना के तहत पीएपसी कंसल्टिंग लिमिटेड ने 4,500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति के लिए बोली आमंत्रित की है। बिजली की आपूर्ति अप्रैल 2023 से शुरू होगी। कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया गया है कि वह सालाना करीब 2.7 करोड़ टन कोयले का आवंटन करे।’ 

यह बोली शक्ति योजना के तहत आमंत्रित की गई है, जिसे केंद्र ने 2017 में शुरू किया था, जिससे देश भर में बिजली की भरपूर आपूर्ति के लिए कोयला लिंकेज सुनिश्चित किया जा सके। बिजली मंत्रालय ने वित्त, स्वामित्व और संचालन (एफओओ) के आधार पर शक्ति (भारत में पारदर्शी रूप से कोयले के उपयोग और आवंटन की योजना) नीति के तहत बोली आमंत्रित की है। इसमें यह भी कहा गया है कि राज्यों के समूह भी बिजली की जरूरतों के मुताबिक किसी एजेंसी के माध्यम से बिजली की खरीद कर सकेंगे। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 21 दिसंबर 2022  तक है।



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