Connect with us

Business

बड़े सरकारी बैंकों पर परिसंपत्ति गुणवत्ता की चुनौतियों से दबाव

Published

on


अभिजीत लेले / मुंबई 11 18, 2022






वैश्विक रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स ने कहा है कि भारतीय बैंकों के प्रदर्शन में अंतर 2023 में बरकरार रह सकता है, क्योंकि कई बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अभी भी कमजोर परिसंपत्ति, ऊंची ऋण लागत, और सुस्त आय से जूझना पड़ रहा है। एसऐंडपी ने कहा है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों ने अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता संबंधित चुनौतियों को काफी हद तक दूर करने में सफलता हासिल की है, और उनके मुनाफे में उद्योग के मुकाबले तेजी से सुधार आ रहा है। 

इसी तरह, भारत में फाइनैंस कंपनियों (फिनकॉस) द्वारा मिश्रित प्रदर्शन किए जाने की संभावना है। इन कंपनियों की परिसंपत्ति गुणवत्ता देश में निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों के मुकाबले अक्सर कमजोर रही है। भारत में आर्थिक सुधार से ऋण लागत में बदलाव आ रहा है। रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट ‘ग्लोबल बैंक कंट्री-बाई-कंट्री 2023 आउटलुक: ग्रेटर डाइवरजेंस अहेड’ में कहा है कि मजबूत बैलेंस शीट और ऊंची मांग से बैंक ऋण वृद्धि को मदद मिलने की संभावना है, लेकिन जमा वृद्धि पर दबाव रहेगा। 

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े से ऋण वितरण और जमा वृद्धि में बड़े अंतर का पता चलता है। जहां बैंक ऋण 21 अक्टूबर 2022 तक सालाना आधार पर 17.9 प्रतिशत तक बढ़े, वहीं जमा वृद्धि 9.5 प्रतिशत (अक्टूबर 2021 में 9.9 प्रतिशत) रही।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता में लगातार सुधार आएगा। बैंकिंग क्षेत्र के फंसे ऋण घटकर 31 मार्च 2024 तक कुल ऋणों के 4.5-5 प्रतिशत रह जाएंगे। इसी तरह, ऋण लागत वित्त वर्ष 2023 में सामान्य होकर 1.2 प्रतिशत और अगले कुछ वर्षों में 1.1-1.2 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना है। इससे ऋण लागत अन्य उभरते बाजारों और भारत के 15 वर्षीय औसत के मुकाबले तुलना योग्य बन गई है। 

बैंकों के क्रेडिट प्रोफाइल के लिए जोखिम संबंधित स्रोतों का जिक्र करते हुए एसऐंडपी ने कहा है कि छोटे एवं मझोले आकार के क्षेत्र एवं कम आय वर्ग वाले परिवार बढ़ती ब्याज दर और महंगाई से ज्यादा चिंतित हैं। लेकिन मध्यम ब्याज दर वृद्धि के परिदृश्य में जोखिम सीमित हैं। 

जमा और ऋण वृद्धि के परिदृश्य को लेकर एजेंसी ने कहा है कि अगले कुछ वर्षों में ऋण वृद्धि सामान्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की राह के अनुकूल रहने की संभावना है, और रिटेल क्षेत्र के लिए ऋण वृद्धि बरकरार रहेगी।

कॉरपोरेट उधारी में भी तेजी आ रही है, लेकिन अनिश्चित परिवेश से पूंजीगत खर्च संबंधित वृद्धि में विलंब हो सकता है। पूंजी बाजार के लिए वित्त पोषण में बदलाव से भी कॉरपोरेट ऋण वृद्धि में सुधार आ रहा है। 

जमाओं की रफ्तार बरकरार रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे ऋण-जमा अनुपात (सीडी अनुपात) में कमजोरी को बढ़ावा मिल रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस अनुपात में सुधार आया है। बैंकों का फंडिंग प्रोफाइल अच्छा बना हुआ है और उसे मजबूत जमा फ्रैंचाइजी से मदद मिली है। 21 अक्टूबर 2022 तक सीडी अनुपात 74.92 प्रतिशत पर था, जो एक साल पहले के 70.30 प्रतिशत से अधिक है।



Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Business

रीपो दर में 0.35 फीसदी से अधिक की वृद्धि नहीं करे रिजर्व बैंक : Assocham

Published

on

By


 












भाषा / नई दिल्ली 12 02, 2022






उद्योग मंडल एसोचैम (Assocham) ने शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अगले सप्ताह पेश होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर रीपो में बढ़ोतरी को कम रखने को कहा है। उद्योग मंडल का कहना है कि ब्याज दरों में अधिक वृद्धि होने पर इसका आर्थिक पुनरुद्धार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। RBI इस साल मई से अबतक रीपो दर में 1.90 फीसदी की वृद्धि कर चुका है। 

केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक सोमवार से शुरू होगी। मौद्रिक नीति की घोषणा सात दिसंबर (बुधवार) को की जाएगी। एसोचैम ने RBI को लिखे पत्र में कहा है, ‘रेपो दर में 0.25 से 0.35 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि नहीं होनी चाहिए।’ पत्र में उद्योग के समक्ष अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया गया है। उद्योग मंडल ने पत्र में अन्य सुझाव भी दिये हैं। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिये खुदरा कर्ज को रियायती ब्याज दर के साथ प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत लाने का सुझाव शामिल है। 

उल्लेखनीय है कि RBI ने 30 सितंबर को मौद्रिक नीति समीक्षा में महंगाई को काबू में लाने के लिये रीपो दर में 0.50 फीसदी की वृद्धि की थी। महंगाई इस साल जनवरी से ही छह फीसदी से ऊपर बनी हुई है। यह केंद्रीय बैंक के संतोषजनक स्तर से ऊंचा है। यह लगातार तीसरी बार है जब RBI ने रीपो दर में 0.50 फीसदी की वृद्धि की। सितंबर से पहले जून और अगस्त में भी रीपो दर में 0.50 फीसदी तथा मई में 0.40 फीसदी की वृद्धि की गयी थी। 

Keyword: Repo Rate, RBI, Assocham, MPC, Inflation,


























Source link

Continue Reading

Business

Rupee vs Dollar: रुपया नौ पैसे की गिरावट के साथ 81.35 प्रति डॉलर पर

Published

on

By


डॉलर के कमजोर होने के बावजूद स्थानीय बाजारों में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया नौ पैसे की गिरावट के साथ 81.35 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। 

संबंधित खबरें

बाजार सूत्रों ने कहा कि विदेशी पूंजी की बाजार से निकासी बढ़ने के कारण भी निवेशकों की कारोबारी धारणा प्रभावित हुई। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 81.11 पर खुला। कारोबार के दौरान रुपये का लाभ लुप्त हो गया और कारोबार के अंत में यह नौ पैसे की गिरावट दर्शाता 81.35 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपये ने 81.08 के उच्चस्तर और 81.35 के निचले स्तर को छुआ। 

पिछले सत्र में रुपया चार पैसे की तेजी के साथ 81.26 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर की कमजोरी या मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.18 फीसदी की गिरावट के साथ 104.53 पर आ गया। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.17 फीसदी बढ़कर 87.03 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 415.69 अंक घटकर 62,868.50 अंक पर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पूंजी बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने गुरुवार को 1,565.93 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। 



Source link

Continue Reading

Business

सेंसेक्स 416 अंक लुढ़का, शेयर बाजार में आठ दिन से जारी तेजी थमी

Published

on

By


स्थानीय शेयर बाजारों में पिछले आठ कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर शुक्रवार को विराम लगा और BSE सेंसेक्स करीब 416 अंक टूट गया। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और मुनाफावसूली से बाजार नुकसान में रहा। 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 415.69 अंक यानी 0.66 फीसदी की गिरावट के साथ 62,868.50 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 604.56 अंक तक टूट गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 116.40 अंक यानी 0.62 फीसदी की गिरावट के साथ 18,696.10 अंक पर बंद हुआ।

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली से बाजार में तेजी पर विराम लगा। बाजार में वाहन शेयरों में अगुवाई में गिरावट आई। निर्यात कम रहने से वाहनों की बिक्री का आंकड़ा उम्मीद से कम रहा है…।’

Top Gainers 

टाटा स्टील, डॉ. रेड्डीज, टेक महिंद्रा, इंडसइंड बैंक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज लाभ में रहने वाले शेयरों में शामिल हैं।

Top Losers

सेंसेक्स के शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंदुस्तान युनिलीवर, मारुति, नेस्ले इंडिया, एचडीएफसी, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस और पावरग्रिड प्रमुख रूप से नुकसान में रहे। 

International Indices 

एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में रहे। यूरोप के प्रमुख बाजारों में शुरुआती कारोबार में गिरावट का रुख था। अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट गुरुवार को नुकसान में रहा था। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.13 फीसदी की गिरावट के साथ 86.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। 

FIIs

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने गुरुवार को 1,565.93 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। 



Source link

Continue Reading