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‘बड़े नेटवर्क-माफिया को पकड़ना चाहते हैं’ : ड्रग्स मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारी पर NCB के डीडीजी

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मुंबई:

एनसीबी के डीडीजी ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा है कि हम एनसीबी के चरित्र को बदलना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि बड़े नेटवर्क और माफिया को पकड़ा जाए. अधिकारी ने कहा अभी हाल ही में एक बड़े ऑपरेशन में कोकीन के कार्टेल को बर्स्ट किया गया है. 5 किलो कोकीन दिल्ली में बरामद हुई है. जिसका लिंक मुंबई के एक होटल से मिला. यहां पर दो इथोपियान नागरिक को गिरफ्तार किया गया है. उसके बाद दो और इथोपियान और एक हिंदुस्तानी महिला पकड़ी गई थी. ये ट्रॉली में रख कर तस्करी करते थे. ये लोग विदेशों से माल लाकर यहां भारत में वितरित करता था.  इसके लिए गरीब देशों के नागरिकों का इस्तेमाल किया जाता है.  

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एक और जानकारी मिली है कि अफ्रीकन नागरिक यहां पर भारतीय महिलाओं से शादी कर उनका भी तस्करी के लिए इस्तेमाल करते हैं. ऐसी ही महिला के पास से 2 किलो कोकीन मिला है. कुल 7 किलो बरामद हुई है. बरामद ड्रग्स की कीमत 50 करोड़ रुपये है. ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर LSD जैसे ड्रग्स की तस्करी के गिरोह का पर्दाफाश किया गया है. ये ऑनलाइन कूरियर के जरिए डिलिवरी करते थे.

कोरोना के बाद देखने में आया है कि कुरियर बेस डिलिवरी बढ़ी है. इसके लिए हम कुरियर कंपनियों से बात कर रहे हैं.एनसीबी को एक डेटा बेस और तकनीकी आधारित बनाने की प्रक्रिया चल रही है. एनसीबी एनडीपीएस अपराधियों का एक डेटा बेस तैयार किया जा रहा है. जिसे निदान नाम दिया गया है. उसमे जेल में बंद सभी एनडीपीएस अपराधियों की पूरी जानकारी फीड होगी ताकि कोई अगर पकड़ा जाए तो तुरंत हमे उसका पूरा काला चिट्ठा मिल जाएगा.

अधिकारी ने कहा कि भारतीय समुद्र क्षेत्र का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी के लिए हो रहा है. अफगानिस्तान और म्यांमार  से जो भी ड्रग्स निकलता है वो जमीन के रास्ते कम समुद्र के रास्ते ज्यादा हो रहा है. भारत में आने वाली हीरोइन  का 70 फीसदी हिस्सा समुद्र के रास्ते आ रही हैं.इसके लिए हम नेवी और कोस्ट गार्ड से संपर्क में हैं.

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चिंताजनक: भारत से क्यों भाग रहे करोड़पति? यूएई, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर को बना रहे नया ठिकाना

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इस साल दुनियाभर में करीब 88 हजार मिलेनियर्स ने अपना मुल्क छोड़ा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मुल्क हैं, जहां से 8000 करोड़पति देश छोड़कर जा चुके हैं। चीन से सर्वाधिक 15 हजार तो रूस से 10 हजार ।



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चीन के हालात देख अमेरिका बोला, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सबका अधिकार, गलत कर रहा ड्रैगन

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अमेरिका का यह बयान चीन में उसकी 'शून्य कोविड नीति' के खिलाफ होते प्रदर्शनों के बीच आया है। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा, 'हम अमेरिका में शून्य कोविड नीति का पालन नहीं करते।



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बच्चे के रूप में किडनैप हुई थी अमेरिकी महिला, 51 साल बाद फिर परिवार से मिली

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अमेरिका के टेक्सास से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहां 51 साल पहले बच्चे के रूप में एक एक महिला लापता हो गई थी. लेकिन अब वह फिर से अपने अपने परिवार को फिर से मिल गई है. द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 23 अगस्त, 1971 को, मेलिसा हाईस्मिथ को फोर्ट वर्थ, टेक्सास से अपहरण कर लिया गया था.

उसकी मां, अल्टा अपेंटेंको ने एक समाचार पत्र में दाई को लेकर एक विज्ञापन पोस्ट किया था. उसने बिना मिले ही एक महिला को काम पर रख लिया क्योंकि किसी को उसकी बेटी को देखने की जरूरत थी, जबकि वह काम कर रही थी क्योंकि वह खुद ही छोटे बच्चे की परवरिश कर रही थी. एपेटेंको की रूममेट ने मेलिसा को दाई को दिया था, जिसने कथित तौर पर उसका अपहरण कर लिया और उसके साथ गायब हो गई.

इस साल सितंबर में, हाईस्मिथ के रिश्तेदारों को एक सूचना मिली कि वह चार्ल्सटन के पास है, जो फोर्ट वर्थ से 1,100 मील से अधिक दूर है. डीएनए परीक्षण के परिणाम, मेलिसा के जन्मचिह्न और उसके जन्मदिन सभी ने परिवार को यह साबित करने में मदद की कि मेलिसा वह बच्चा था जिसे 51 साल पहले उनसे अपहरण कर लिया गया था.

द गार्जियन द्वारा किए गए समूह के एक बयान के अनुसार, मेलिसा शनिवार को फोर्ट वर्थ में परिवार के चर्च में एक समारोह में अपनी मां, पिता और अपने चार भाई-बहनों से मिलीं. मेलिसा की बहन, शेरोन हाईस्मिथ के अनुसार, उनके परिवार ने महत्वपूर्ण डीएनए और मेलिसा को खोजने के लिए सार्वजनिक रूप से जानकारी खोजने में सहायता के लिए, एक नैदानिक ​​​​प्रयोगशाला वैज्ञानिक और शौकिया वंशावली विशेषज्ञ, लिसा जो शिएले से संपर्क किया.

शेरोन हाईस्मिथ ने कहा, “हमारा परिवार उन एजेंसियों के हाथों पीड़ित है जिन्होंने इस मामले को गलत तरीके से प्रबंधित किया है.” फिलहाल, हम सिर्फ मेलिसा को जानना चाहते हैं, उसका परिवार में स्वागत करते हैं और 50 साल के खोए हुए समय को पूरा करते हैं,” उसने द गार्जियन से बात करते हुए कहा. 

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