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पॉलिसी पोर्टफोलियो में बदलाव लाएगी एलआईसी

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सुब्रत पांडा / मुंबई 11 18, 2022






सरकार के स्वामित्व वाली बीमा कंपनी जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अगले कुछ वर्षों में व्यक्तिगत खंड में पार्टिसिपेटरी और नॉन-पार्टिसिपेटरी व्यवसाय के बीच 75:25 प्रतिशत का मिश्रण हासिल करना चाहती है। कंपनी प्रबंधन ने दूसरी तिमाही की आय घोषणा के बाद कहा कि ऐसा होने से कंपनी के नए व्यवसाय के मूल्य (वीएनबी) और वीएनबी मार्जिन को मजबूती मिलेगी। 

वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही तक, एलआईसी की व्यक्तिगत सालाना प्रीमियम इक्विलेंट (एपीई) आधार पर नॉन-पार भागीदारी 8.99 प्रतिशत जबकि पार्टिसिपेटरी व्यवसाय की भागीदारी 91.09 प्रतिशत पर दर्ज की गई। मार्च तिमाही में, नॉन-पार की भागीदारी 7.12 प्रतिशत थी और जून तिमाही में यह 7.75 प्रतिशत थी। एलआईसी के अध्यक्ष एमआर कुमार ने विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा, ‘हम हरेक तिमाही में अपने व्यक्तिगत व्यवसाय में नॉन-पार व्यवसाय की भागीदारी लगातार बढ़ाएंगे।’

प्रबंधन ने कहा है, ‘हम चाहते हैं कि अगले कुछ वर्षों में, इंडिविजुअल सेगमेंट में उत्पाद पोर्टफोलियो मिश्रण मौजूदा स्तरों से सुधरकर 75:25 के अनुपात पर पहुंच जाए। यह अल्पावधि लक्ष्य है और जब ऐसा हो जाएगा तो वीएनबी मार्जिन के साथ साथ वीएनबी में बड़ा बदलाव आ सकता है।’ 

एलआईसी ने इस साल सिर्फ नॉन-पार योजनाएं शुरू की हैं, जो नॉन-पार व्यवसाय बढ़ाने के लिए खास सेगमेंटों की जरूरतें पूरी करती हैं। प्रबंधन ने कहा है, ‘हमारे पास अब यूलिप सेगमेंट के प्रमुख उत्पाद मौजूद हैं। बचत योजनाएं और यूलिप की लोकप्रियता बढ़ रही है और इनमें तेजी से सुधार आ रहा है। बचत योजनाएं और यूलिप विकास की वाहक बन रही हैं। हमें अब अपने सुरक्षा संबंधित उत्पादों पर पुन: ध्यान देना होगा।’ 

नॉन-पार्टिसिपेटरी जीवन बीमा अनुबंध ऐसे उत्पाद होते हैं जिनमें पॉलिसी संबंधित डिविडेंड का भुगतान पॉलिसीधारक को नहीं किया जाता है और नॉन-पार पॉलिसी से पूरा लाभ शेयरधारकों से जुड़ा होता है। दूसरी तरफ, पार्टिसिपेटरी पॉलिसी ग्राहक को बीमा कंपनी का मुनाफा साझा करने में सक्षम बनाती है। यह मुनाफा बोनस या डिविडेंड के तौर पर साझा किया जाता है।

एलआईसी ने पारंपरिक तौर पर पार्टिसिपेटिंग व्यवसाय पर ध्यान दिया है, लेकिन आईपीओ से कुछ महीने पहले उसने अपनी नॉन-पार योजनाओं पर जोर दिया, जो मौजूदा समय में इस जीवन बीमा कंपनी के मार्जिन का मुख्य वाहक बन गई हैं।



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केरल में अदाणी पोर्ट पर निर्माण कार्य फिर से शुरू

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विझिंजम समुद्री बंदरगाह परियोजना स्थल पर निर्माण गुरुवार को फिर से शुरू किया गया है। परियोजना कार्य बंदरगाह निर्माण के खिलाफ मछुआरों के 130 दिनों से चल रहे आंदोलन के कारण बंद पड़ा था, जिसे दो दिन उन्होंने वापस लिया।

अदाणी समूह के एक सूत्र द्वारा साक्षा किए गए परियोजना स्थल की तस्वीरों में निर्माण सामग्री से लदे ट्रक दिखाई दे रहे हैं और आसपास के क्षेत्र में प्रदर्शनकारी नहीं हैं, जो वहां चार महीने से अधिक समय से बैठे हुए थे।

आंदोलन को मंगलवार को वापस ले लिया गया और अगले दिन प्रदर्शनकारियों ने केरल उच्च न्यायालय को सूचित किया कि बंदरगाह के बाहर विरोध स्थल पर लगाए गए तम्बू हटाए जा रहे हैं।

परियोजना स्थल पर बाधा नहीं डालने के अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने के लिए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अवमानना ​​​​कार्रवाई के लिए अडानी समूह द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया था।

आंदोलन के बंद होने और प्रदर्शनकारियों द्वारा विरोध स्थल पर तम्बू हटाने का आश्वासन देने के साथ ही उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिकाओं को बंद कर दिया। सूत्र ने मंगलवार को बताया कि को निर्माण कार्य को जल्द शुरू किया जाएगा, और साथ ही ये कुछ ही दिनों में अपनी पुरी गति पकड़ लेगा। इसके बाद बृहस्पतिवार को बंदरगाह पर निर्माण कार्य शुरू हुआ और सूत्र ने कहा कि जल्द ही नौकाओं आवाजाही शुरू हो जाएगी और कुछ दिनों में यह पूरे जोरों पर काम करेगा।

सूत्र ने कहा कि 2,960 मीटर लंबे बांध के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें से लगभग 1,400 मीटर का काम पूरा हो चुका है।



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आने वाले वक्त में शहरीकरण बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है: परमेश्वरन अय्यर

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नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) परमेश्वरन अय्यर ने कहा कि भारत की 50 फीसदी आबादी 2047 तक शहरी इलाकों में रहने लगेगी ऐसे में शहरीकरण बहुत अहम होने वाला है।

उद्योग संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में अय्यर ने कहा कि कई राज्यों ने ठोस कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में काफी अच्छा काम किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘शहरीकरण बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहा है क्योंकि 2047 तक भारत की 50 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्रों में रह रही होगी। यदि शहरी इलाकों में मूलभूत सुविधाएं नहीं होंगी तो यह एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगी।’’

उन्होंने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था का महत्व भी बढ़ता जा रहा है। भारत के पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई से जुड़े एक सवाल के जवाब में अय्यर ने कहा, ‘‘आप भारत में पर्यटन को आक्रामक तरीके से बढ़ावा देना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि आपके आसपास के स्थल स्वच्छ हों और आपका बर्ताव भी अच्छा हो।’’



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Himachal Election Result 2022: रुझानों में कांग्रेस को मिली बढ़त

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना के रुझानों में मुख्य विपक्षी कांग्रेस को स्पष्ट बढ़त मिलती नजर आ रही है। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध दोपहर 12.30 बजे के आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस 38 और भाजपा 27 सीटों पर आगे है।

तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। आम आदमी पार्टी फिलहाल किसी भी सीट पर आगे नहीं है। सेराज विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कांग्रेस के चेतराम से 34,050 मतों के अंतर से आगे चल रहे हैं।

दरंग से भाजपा के पूरन चंद, जुब्बल कोटखाई से पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा के पुत्र चेतन बरागटा, मंडी सदर से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम के बेटे अनिल शर्मा और किन्नौर से विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस प्रत्याशी जगत सिंह नेगी शामिल हैं।

नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता मुकेश अग्निहोत्री हरोली विधानसभा सीट से आगे हैं तो ठियोग विधानसभा सीट से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप राठौर तथा धर्मशाला से पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा आगे हैं। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता आशा कुमारी डलहौजी विधानसभा सीट से पीछे चल रही हैं तो कांग्रेस नेता कौल सिंह दरंग से पीछे हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश इकाई की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने अपनी पार्टी की जीत का दावा करते हुए कहा कि वह 68 में से 40 से अधिक सीटों पर जीत हासिल करेगी।

हिमाचल की 68 सदस्यीय विधानसभा के लिए 12 नवंबर को हुए चुनावों की मतगणना बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे शुरू हुई। राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा सत्ता बरकरार रखने की उम्मीद कर रही है। हिमाचल में 59 स्थानों पर वोटों की गिनती की जा रही है। इन चुनावों में 76.44 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था।

हिमाचल में कुल 412 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है, जिनमें 24 महिलाएं और 99 निर्दलीय शामिल हैं। पहले 30 मिनट में डाक मतपत्रों की गिनती हुई, जिसके बाद साढ़े आठ बजे से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में दर्ज वोटों की गणना आरंभ की गई।



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