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पेटीएम में जियो के दबाव से गिरावट

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पेटीएम का शेयर मंगलवार को 11 फीसदी की गिरावट के साथ 477 रुपये के अपने निम्नतम निचले स्तर पर पर पहुंच गया है। आईपीओ से पूर्व निवेशकों के लिए एक साल की लॉकिंग अवधि समाप्त होने की वजह से शेयर पर पहले से ही बिकवाली का दबाव था और मैक्वेरी की रिपोर्ट से इसमें और कमजोरी आ गई। रिपोर्ट में कहा गया कि जियो फाइनैशियल सर्विसेज (जेएफएस) के बाजार में उतारने से पेटीएम के लिए माहौल काफी हद तक प्रतिकूल हो जाएगा। पेटीएम के मुख्य कारोबार उपभोक्ता व कारोबारी ऋण पर ही जेएफसी अपना ध्यान केंद्रित करेगी। 

कारोबार की समाप्ति पर पेटीएम का मूल्यांकन 30,971 करोड़ रुपये आंका गया। कंपनी ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में  1.39 लाख करोड़ रुपये मूल्यांकन का लक्ष्य हासिल किया था। शेयर का मूल्य 2,150 रुपये तय किया गया था। इसके शेयर में 79 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इस महीने शेयर में 27 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। पिछले सप्ताह वैश्विक निवेशक सॉफ्टबैंक ने पेटीएम के 4.5 फीसदी शेयर 555.67 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेचकर 1,631 करोड़ रुपये जुटाए थे। 

मैक्वेरी ने कहा, ‘अभी जियो फाइनैंशियल के उपभोक्ताओं और लक्षित बाजार के बारे में आकलन करना जल्दबाजी होगी। यह स्पष्ट है कि जियो फाइनैंशियल उपभोक्ता और कारोबारी ऋण पर ध्यान केंद्रित करेगी जो गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी जैसे बजाज फाइनैंस और वित्तीय क्षेत्र की तकनीकी कंपनी पेटीएम का मुख्य कारोबार है।’  

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एनबीएफसी/वित्तीय तकनीकी कंपनियों में बजाज फाइनैंस और पेटीएम को सर्वाधिक जोखिम हो सकता है।’ रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जेफएएस का स्वामित्व है। जेएफएस डिमर्जर और लिस्टिंग के जरिए कुल पूंजी के मामले में देश की पांचवीं सबसे बड़ी वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी बन सकती है। जेएफएस को विस्तार के लिए पर्याप्त अवसर मिलेंगे। इस कारोबार में चार प्रमुख कंपनियां एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और ऐक्सिस बैंक हैं। 

रिपोर्ट में सुरेश गणपति, आदित्य सुरेश और परम सुब्रमण्यन ने कहा, ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज में 6.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ जेएफएस देश में पांचवीं सबसे बड़ी वित्तीय सेवा कंपनी बन सकती है।’ रिलायंस ने पिछले महीने अपनी दूसरी तिमाही की आय में कहा था कि वह अपने वित्तीय सेवा व्यवसाय को अलग करेगी।



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नवंबर में कोयला आयात 10 माह नीचे

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रॉयटर्स / कोलकाता 12 09, 2022






भारत के थर्मल कोयले का आयात नवंबर में 10 माह के निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुख्य रूप से घरेलू कोयले के उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण ऐसा हुआ है। कोलमिंट के आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर महीने में भारत में 108.3 लाख टन थर्मल कोयले का आय़ात हुआ है, जबकि अक्टूबर में 120.3 लाख टन और नवंबर 2021 में 94.5 लाख टन कोयले का आयात हुआ था।

सरकारी कंपनी कोल इंडिया के उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण आयात में कमी आई है, जिसकी भारत के कुल कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। विश्व की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी के उत्पादन में छठे हिस्से की बढ़ोतरी हुई है और वित्त वर्ष के पहले 8 महीने में यह 4,126 लाख टन हो गया है। 2010 के बाद पहली बार सालाना उत्पादन का लक्ष्य हासिल हो सका है।

 ईंधन की मांग 10.2 प्रतिशत बढ़ी

भारत में ईंधन की मांग नवंबर महीने में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10.2 प्रतिशत बढ़ी है। तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एलॉलिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में खपत 188.4 लाख टन रही है।

पेट्रोल की बिक्री 8.1 प्रतिशत बढ़कर 28.6 लाख टन रही है। रसोई गैस या तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की बिक्री 5.2 प्रतिशत बढ़कर 24.7 लाख टन हो गई है. वहीं नेफ्था की बिक्री 18.2 प्रतिशत गिरकर 10.1 लाख टन रह गई है।

सड़क बनाने के काम आने वाले बिटुमिन की बिक्री 30.3 प्रतिशत बढ़ी है। 



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गेहूं का रकबा पिछले साल से 25 फीसदी बढ़ा

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पिछले साल की तुलना में इस बार 9 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान गेहूं का रकबा 25 फीसदी तक बढ़ गया है। किसानों ने बेहतर रिटर्न की उम्मीद में अधिक क्षेत्र में इस बार फसल की बोआई की है। व्यापारियों को उम्मीद है कि रिकॉर्ड उच्च कीमतें और अगले कुछ महीनों में सरकारी भंडारों में घटते स्टॉक और निजी व्यापारियों के उत्साह के कारण बाजार गेहूं के लिए अनुकूल रहेगा। 

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार तक गेहूं की बोआई 2.55 करोड़ हेक्टेयर में की गई है। पिछले साल समान अवधि में 2.03 करोड़ हेक्टेयर में गेहूं की बोआई की गई थी। कुल मिलाकर, आमतौर पर गेहूं लगभग 3.0-3.1 करोड़ हेक्टेयर भूमि में बोया जाता है। हालांकि, उत्तर भारत में अब तक सामान्य से कम सर्दी और दिन के समय तापमान में वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष उत्तर भारत में सामान्य सर्दियों की तुलना में मौसम गर्म रहने का अनुमान जताया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार गेहूं को बढ़ते चरणों के दौरान दिन में लगभग 14-15 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है, लेकिन अगर यह इससे अधिक गर्म होता है तो उपज कम होने की आशंका बढ़ जाती है। 

व्यापारियों को भरोसा है कि कुल रकबा पिछले वर्षों की तुलना में 10-15 फीसदी अधिक होगा, लेकिन क्या यह बम्पर फसल में तब्दील होता है, यह जलवायु परिस्थितियों पर निर्भर करता है। पिछले साल, कटनी से ठीक पहले तापमान में अचानक वृद्धि के कारण गेहूं उत्पादन काफी गिर गया था।



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तकनीकी बदलाव के उपयुक्त नहीं पुरानी व्यवस्थाः डिप्टी गवर्नर

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सुब्रत पांडा / मुंबई 12 09, 2022






भारतीय रिजर्व बैंक  के डिप्टी गवर्नर एमके जैन ने कहा कि बैंक की परंपरागत कोर बैंकिंग प्रणाली (सीबीएस) मोबाइल के पहले के दौर में विकसित की गई थी और संभवतः वह प्रोडक्ट डिजाइन, गणना की क्षमता, एपीआई इंटीग्रेशन के हिसाब से त्वरित बदलाव के अनुकूल नहीं है। जैन ने कहा कि ऐसे में इन इकाइयों को टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाने की जरूरत है, जिससे बदलते वक्त के मुताबिक तालमेल बिठाया जा सके। 

नैशनल इंस्टीट्यूट फॉर बैंकिंग स्टडीज ऐंड  कॉरपोरेट मैनेजमेंट (निब्सकॉम) में अपने भाषण में जैन ने कहा बैंक और वित्त संस्थानों को निरंतर नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले गतिशील वातावरण में, वित्त क्षेत्र को आवश्यकताओं की पहले पहचान कर उसकी तैयारी करनी चाहिए। जैन के अनुसार, प्रौद्योगिकी वित्त सेवा उद्योग में क्रांति ला रही है और बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने में पीढ़ीगत बदलाव कर रही है।

जैसे-जैसे तकनीकी कंपनियों ने वित्तीय क्षेत्र में प्रवेश किया है, बैंकिंग सेवाओं को प्लेटफार्मों पर जोड़ा जा रहा है और मोबाइल के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को सीधे उनके मोबाइल फोन से बैंकिंग, पूंजी बाजार, बीमा और पेंशन के साथ-साथ गैर-वित्तीय क्षेत्र की सेवाएं मिल रही हैं।

जैन ने कहा, ‘परिणामस्वरूप कई बार यह नियामकीय परिधि और अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को धुंधला कर देता है।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि इस प्रौद्योगिकी क्रांति ने निश्चित रूप से वित्तीय संस्थाओं की दक्षता में वृद्धि की है और इसके परिणामस्वरूप बैंकों के साथ कामकाज करने में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। साथ ही इसने नई चुनौतियां भी पेश की हैं।’

जैन ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सलाह दी कि वे प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए सहयोग करें और लागत का अनुकूलन करने, राजस्व को अधिकतम करने और ग्राहक अनुभव को बढ़ाने के लिए साझा लाभ प्राप्त करें। साथ ही उन्होंने कहा कि हालांकि, ऐसा करते समय उन्हें डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के साथ-साथ उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करना और उन्हें अनुचित व्यवहार से बचाना सुनिश्चित करना चाहिए।

जैसा कि डेटा को नए बहुमूल्य वस्तु के रूप में देखा जा रहा है, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को डेटा का उपयोग करने के लिए, उन्हें प्रौद्योगिकी, विश्लेषण और मानव संसाधन में क्षमता का निर्माण करना होगा।

Keyword: तकनीकी बदलाव, बैंक,


























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