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पूरे साल में 7 फीसदी विकास दर की उम्मीद

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मुद्रास्फीति में नरमी के संकेत के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अर्थव्यवस्था की ​स्थिति रिपोर्ट में उम्मीद जताई ​है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.1 से 6.3 फीसदी के दायरे में रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर ऐसा होता है तो पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7 फीसदी रह सकती है। आरबीआई ने अक्टूबर में मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान विकास दर के 7 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया था। 

जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी के आंकड़े इस महीने के अंत तक आएंगे। मौद्रिक नीति की समीक्षा में दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.3 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्र और कार्मिकों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया, ‘उच्च आवृ​त्ति वाले संकेतकों के आधार पर दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.1 से 6.3 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान है। अगर यह वृद्धि दर हासिल होती है तो पूरे साल के लिए 7 फीसदी वृद्धि दर प्राप्त की जा सकती है।’ 

रिपोर्ट में कहा गया कि अर्थव्यवस्था में आपूर्ति पक्ष मजबूत हो रहा है। इसके अनुसार, ‘मुद्रास्फीति में कमी के संकेत दिखने के साथ ही घरेलू व्यापक आर्थिक परिदृश्य में मजबूती है, लेकिन यह वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील भी है।’

देश के अक्टूबर महीने में खुदरा मुद्रास्फीति दर घटकर तीन महीने के निचले स्तर 6.77 फीसदी रह गई जो सितंबर में 7.41 फीसदी पर थी। इससे मौद्रिक नीति समिति दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी करने के लिए प्रेरित हो सकती है। इस साल मई से अब तक रीपो दर में 190 आधार अंकों का इजाफा किया जा चुका है, जिससे रीपो दर 5.9 फीसदी पर पहुंच गई है।

स्थानीय मुद्रा में हालिया सुधार पर रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका में मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा कम रहने से दुनिया भर के बाजारों में तेजी आई। इसका असर रुपये पर भी दिखा। 27 अक्टूबर से 11 नवंबर के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में 2.2 फीसदी की मजबूती आई है, जबकि ब्रिटिश पाउंड की तुलना में रुपया 1.2 फीसदी और यूरो के मुकाबले 0.5 फीसदी मजबूत हुआ है। हाल के समय में रुपये में नरमी की वजह से आयात बिल बढ़ने से घरेलू बाजार में मुद्रास्फीति का दबाव भी बढ़ा है। 

बैंकिंग तंत्र में तरलता की ​​स्थिति पर आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि तरलता की ​स्थिति को सामान्य किया जा रहा है लेकिन यह अभी भी अ​धिशेष ​स्थिति में है। आरबीआई दैनिक आधार पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी खींच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वा​णि​ज्यिक बैंकों की उधारी में वृद्धि हुई है और सेवा, पर्सनल लोन तथा उद्योग एवं कृ​षि ऋण की मांग भी बढ़ी है। बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 16 फीसदी से ऊपर बना हुआ है जो बैंकिंग क्षेत्र की पूंजी की बेहतर ह​स्थिति को दर्शाता है। बैंकों की सकल गैर-निष्पादित आ​स्तियों (जीएनपीए) में लगातार कमी आ रही है और शुद्ध एनपीए घटकर कुल परिसंप​त्ति के 1 फीसदी पर आ गया है।



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यूपी में होगा ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन

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उत्तर प्रदेश में हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक क्लस्टर बनाकर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा। प्रदेश में ग्रीन वैली की स्थापना कर ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक नीति का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित नीति के तहत हाइड्रोजन व अमोनिया जैसी गैसों का उत्पादन करने वाले निवेशकों को कई तरह की सहूलियतें व छूट दी जाएंगी।

अगले साल फरवरी में होने वाले वैश्विक निवेशक सम्मेलन से पहले योगी सरकार ग्रीन हाइड्रोजन नीति लागू कर निवेश के नए दरवाजे खोलेगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य 2028 तक खाद कारखानों व तेल शोधन संयंत्रों में कुल हाइड्रोजन के उपभोग का 20 फीसदी ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल का है। इसे 2035 तक बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया जाएगा।

इसके चलते प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन नीति में पूंजीगत व्यय में इलेक्ट्रोलाइजर के विकास पर 2023 में 60 फीसदी, 2024 में 55 फीसदी व 2025 में 45 फीसदी की सब्सिडी देने की योजना है। ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण में इलेक्ट्रोलाइजर सबसे अहम घटक है।

प्रस्तावित नीति के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया के परिवहन और स्टोरेज क्षमता को भी विकसित किया जाएगा। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जल्दी ही मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी दी जाएगी। प्रस्तावित नीति के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध, अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। 

ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया का उत्पादन करने वाले निवेशकों को 15 दिन के भीतर सिंगल विंडो पोर्टल के जरिए जरूरी मंजूरी दी जाएगी। तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 30 फीसदी या 5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। ग्रीन हाइड्रोजन व अमोनिया का उत्पादन संयंत्र लगाने वाले निवेशकों को स्टांप शुल्क एवं भूउपयोग शुल्क में सौ फीसदी की छूट दी जाएगी जबकि पानी के इस्तेमाल पर लगने वाले शुल्क में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी।



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क्रेडिट कार्ड से खर्च 1.29 लाख करोड़

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि त्योहारी सीजन के दौरान क्रेडिट कार्ड के खर्च ने अक्टूबर में वृद्धि की गति को जारी रखा और 1.29 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लिया। यह पिछले महीने की तुलना में 5.5 फीसदी अधिक है, तब कुल खर्च 1.22 लाख करोड़ रुपये था। 

उच्च आधार के बावजूद पिछले साल की समान अवधि की तुलना में खर्च 25 फीसदी ज्यादा रहा। पिछले साल अक्टूबर में त्योहारी सीजन के कारण क्रेडिट का खर्च पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये पहुंचा था। साथ ही एक साल से निष्क्रिय कार्डों को निरस्त करने के रिजर्व बैंक के नियम के बाद पिछले दो माह में क्रेडिट कार्ड संख्या में शुद्ध कमी आई। बैंकिंग व्यवस्था में 16.6 लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड जोड़े गए, जिसके बाद कुल कार्डों की संख्या 7.93 करोड़ हो गई। 

आरबीआई के नए मानदंड के लागू होने से पहले उद्योग एक महीने में औसतन 15 लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड जोड़ रहा था, क्योंकि महामारी में बैंकों ने असुरक्षित ऋण देने का कारोबार तेज कर दिया था। अक्टूबर के दौरान सबसे अधिक एसबीआई कार्ड्स और भुगतान सेवाओं ने 3,39,160 कार्ड जोड़े। इसके बाद ऐक्सिस बैंक ने 2,61,367 कार्ड्स और आईसीआईसीआई बैंक ने 2,21,280 कार्ड्स जोड़े। देश के सबसे बड़े क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता एचडीएफसी बैंक ने इस अवधि के दौरान 2,17,979 कार्ड जोड़े। 

जुलाई-सितंबर (दूसरी तिमाही) तिमाही में कार्ड की संख्या में 25.5 लाख की गिरावट आई। प्रमुख जारीकर्ताओं में देश के सबसे बड़े कार्ड जारीकर्ता एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट कार्डों की संख्या में वित्त वर्ष 23 की दूसरी तिमाही में 16.2 लाख की शुद्ध गिरावट आई। ई-कॉमर्स लेन-देन की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण पिछले आठ महीनों में कार्ड खर्च लगातार 1 लाख करोड़ रुपये के ऊपर रहा है। महामारी में कम हुए यात्रा और आतिथ्य खर्च मजबूती से वापस आ गए हैं।



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4.5 गीगावॉट बिजली आपूर्ति के लिए बोली आमंत्रित

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देश के सभी इलाकों में अगले साल खासकर ज्यादा मांग वाले गर्मी के महीनों में बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के वास्ते  केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने 4.5 गीगावॉट बिजली खरीदने के लिए बिजली उत्पादन कंपनियों (जेनको) से बोली आमंत्रित की है। आपूर्ति की अवधि 5 साल होगी। साथ ही इस योजना में पात्र पाई जाने वाली उत्पादन कंपनियों को अतिरिक्त कोयले का आवंटन किया जाएगा। 

बिजली मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘ पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड (पीएफसी लिमिटेड की पूर्ण मालिकाना वाली सहायक इकाई) को बिजली मंत्रालय की नोडल एजेंसी बनाया गया है। योजना के तहत पीएपसी कंसल्टिंग लिमिटेड ने 4,500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति के लिए बोली आमंत्रित की है। बिजली की आपूर्ति अप्रैल 2023 से शुरू होगी। कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया गया है कि वह सालाना करीब 2.7 करोड़ टन कोयले का आवंटन करे।’ 

यह बोली शक्ति योजना के तहत आमंत्रित की गई है, जिसे केंद्र ने 2017 में शुरू किया था, जिससे देश भर में बिजली की भरपूर आपूर्ति के लिए कोयला लिंकेज सुनिश्चित किया जा सके। बिजली मंत्रालय ने वित्त, स्वामित्व और संचालन (एफओओ) के आधार पर शक्ति (भारत में पारदर्शी रूप से कोयले के उपयोग और आवंटन की योजना) नीति के तहत बोली आमंत्रित की है। इसमें यह भी कहा गया है कि राज्यों के समूह भी बिजली की जरूरतों के मुताबिक किसी एजेंसी के माध्यम से बिजली की खरीद कर सकेंगे। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 21 दिसंबर 2022  तक है।



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