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पिक्चर अभी बाकी है! कैसे सौरव गांगुली BCCI से छुट्टी के बाद भी कर सकते हैं वापसी

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Sourav Ganguly: 90 के दशक में जन्म लेने वाले क्रिकेटप्रेमियों से जब आप उनके दौर के पसंदीदा किक्रेटरों की बात करेंगे तो ज्यादातर की लिस्ट में ‘बंगाल टाइगर’ यानी सौरव गांगुली का नाम टॉप-3 में जरूर आएगा। गांगुली, जिन्हें उनके फैन्स सिर्फ एक ऐसे पूर्व कप्तान के तौर पर नहीं याद करते हैं, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को दुनियाभर में एक अलग पहचान दी, बल्कि उन्हें ऐसे कप्तान की तौर पर भी याद किया जाता है, जिसने खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की तेज-तर्रार पिचों पर ड्रॉ नहीं, बल्कि जीत के लिए खेलने का चस्का लगवाया। ऐसा क्रिकेटर जिसने किसी भी कीमत पर हार माननी नहीं सीखी। वह गांगुली ही थे, जिन्होंने टीम को विदेशी पिचों पर और जीत दिलाने के लिए ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर ग्रेग चैपल का समर्थन किया और उन्हें टीम इंडिया का कोच बनवाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, बाद में चैपल ही गांगुली के खिलाफ खड़े हो गए। पूरे विवाद में जिस तरह दादा के साथ सलूक किया गया, वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। कुछ ही सालों में इससे भी दादा उबरकर वापस आए और टीम में शानदार कमबैक किया। यहां तक कि उन्होंने युवाओं के लिए माने जाने वाले आईपीएल में भी शानदार प्रदर्शन किया और केकेआर की कप्तानी तक की।

‘दादा’ का आज जिक्र इसलिए, क्योंकि बीसीसीआई के बॉस पद से उनकी अब छुट्टी हो गई है। साल 2019 में जब सौरव गांगुली को बीसीसीआई का अध्यक्ष बनाया गया, तो चुनिंदा लोगों को छोड़कर शायद ही किसी ने उनकी मुखालफत की होगी। कुछ दिनों पहले तक यही माना जा रहा था कि वे ही बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बीसीसीआई के नए बॉस रॉजर बिन्नी बनाए गए हैं। ‘बंगाल टाइगर’ को हटाए जाने के पीछे भले ही तमाम तरह की कहानियां सोशल मीडिया से लेकर पॉलिटिकल सर्किल्स में घूम रही हों, लेकिन एक बात जो सब मान रहे हैं कि ‘दादा’ इतनी जल्दी हार मानने वालों में नहीं हैं। वह एक बार फिर से जरूर वापसी करेंगे। यही दादा का इतिहास भी कहता है। वे टेस्ट में सबसे सफलतम कप्तानों में एक रहे। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 49 टेस्ट मैच खेले, जिसमें से 21 में टीम को जीत मिली। ओवरसीज में उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने शानदार 11 टेस्ट मैचों में जीत हासिल की। जब उन्होंने टीम इंडिया की कमान संभाली तब आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में भारतीय टीम आठवें नंबर पर थी, जिसे वे दूसरी रैंकिंग तक लेकर आ गए।

लॉर्ड्स में टी-शर्ट लहरा बता दिया कि भविष्य भारत का है 

आज के 25 साल से लेकर 35 साल की उम्र के लोगों के भीतर सौरव गांगुली को लेकर न जानें कितनी कहानियां बसी हैं। आखिर इंग्लैंड में उस पल को कौन भूल सकता है, जब टीम इंडिया ने नेटवेस्ट सीरीज पर कब्जा किया और क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान में दादा ने अपनी टी-शर्ट निकालकर हवा में लहरा दी। इस घटना का जिक्र करते हुए दादा ने बाद में यह भी खुलासा किया कि लॉर्ड्स की बालकनी में जब वह टी-शर्ट उतारने जा रहे थे, तब उनके पास खड़े वीवीएस लक्ष्मण ने उनकी टी-शर्ट को नीचे खींचते हुए ऐसा नहीं करने के लिए कहा था। हालांकि, दादा माने नहीं और उन्होंने टी-शर्ट उतार हवा में लहरा दी, जोकि ऐतिहासिक घटना बनी। इस घटना को भले ही तकरीबन दो दशक हो गया हो, लेकिन आज भी टीम इंडिया का फैन उस पल को नहीं भूल सकता। उन्होंने सिर्फ अपनी टी-शर्ट हवा में नहीं लहराई थी, बल्कि उन्होंने वह करके ऐलान कर दिया था, कि जो पुराना टाइम था वह चला गया। अब आने वाला समय भारत का है और सिर्फ एशिया में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भारत अब यहां से सिक्का जमाने वाला है। बाद में अगले साल ही जब 2003 में अफ्रीका समेत अन्य देशों में आईसीसी क्रिकेट विश्व कप का आठवां संस्करण आयोजित किया गया तो टीम इंडिया ने अपनी ताकत से दुनिया को रूबरू करवा दिया। गांगुली की कप्तानी में लड़ते हुए भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची। भले ही टीम को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने जिस तरह से खेला, उसने लाखों लोग दादा और उनकी कप्तानी के फैन बन गए। टूर्नामेंट में सचिन तेंदुलकर 673 रनों के साथ टॉप स्कोरर रहे और उनके बाद खुद सौरव गांगुली का नंबर आया, जिन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 465 रन बनाए।

ग्रेग चैपल कॉन्ट्रोवर्सी, जब लगा कि अब दादा का दौर खत्म, लेकिन…

जब सौरव गांगुली की बात हो और उसमें ग्रेग चैपल का विवाद न आए तो ऐसा हो नहीं सकता। दरअसल, जब टीम इंडिया के कोच रहे जॉन राइट ने कोच पद से हटना तय किया तो साल 2005 में ग्रेग चैपल टीम इंडिया के कोच बने। उनको कोच बनाने के पीछे वजह भी सौरव ही बने। सौरव और ग्रेग उस समय बहुत करीब हुआ करते थे और कहा जाता है कि दादा की बैटिंग दुरुस्त करने के पीछे चैपल का बहुत योगदान रहा। ग्रेग भी तब सौरव को बहुत मानते थे। लेकिन जब वे (चैपल) टीम से जुड़े तो पूरी तरह बदल गए। चैपल ने न सिर्फ गांगुली को कप्तानी से हटवाया, बल्कि कुछ समय में प्लेइंग इलेवन तक में गांगुली की जगह खत्म हो गई। चैपल दादा की जगह मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह, दोनों को टीम में रखने के पक्ष में थे। यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और भारत में चैपल किसी खलनायक की तरह नजर आने लगे। उनके खिलाफ नारेबाजी तक हुई। वहीं, टीम इंडिया से बाहर रह रहे गांगुली की वापसी साल 2006 में हुई। इस दौरान एक विज्ञापन ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा और लोगों को लग गया कि दादा किसी फाइटर से कम नहीं हैं। दरअसल, साल 2006 में एक कोल्ड ड्रिंक कंपनी के ऐड में नजर आए। इसमें उन्होंने कहा, ”मेरा नाम सौरव गांगुली है। आप सभी मुझे भूले तो नहीं। मैं टीम में वापस आने के लिए बहुत बहुत कोशिश कर रहा हूं, क्या पता हवा में टी-शर्ट घूमाने का एक और मौका मिल जाए। मैं चुप बैठने वाला नहीं हूं।” आधे मिनट के इस वीडियो में गांगुली ने उन लोगों को आईना दिखा दिया, जो उनको चुका हुआ मान रहे थे। सौरव ने चैपल कंट्रोवर्सी से उबरते हुए न सिर्फ टीम में वापसी की, बल्कि साल 2008 से शुरू हुए आईपीएल में भी केकेआर जैसी टीम की कप्तानी की।

बतौर बीसीसीआई अध्यक्ष भी दादा ने दिखाया दम

दादा के क्रिकेट से पूरी तरह से रिटायरमेंट लेने के बाद न जाने कितने क्रिकेट प्रेमियों ने मैच देखना छोड़ दिया और देखा भी तो पहले की तरह नहीं। धोनी और विराट के दौर में भी गांगुली के न खेलने के बाद भी उनको लेकर लोगों के मन में दीवानगी एक अलग स्तर की ही रही। फैन्स दादा की एक झलक पाने के लिए हमेशा ही उत्सुक रहे। बाद में उन्होंने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) की ओर रुख किया और साल 2015 से 2019 तक चार सालों तक उसके अध्यक्ष रहे। इसके बाद, साल 2019 में गांगुली की बीसीसीआई में बतौर अध्यक्ष एंट्री हुई, जहां पर कुछ विवादों को छोड़ दें, तो उनका कार्यकाल शानदार ही रहा। दादा ने नवंबर, 2019 में पिंक बॉल से पहला डे-नाइट मुकाबला करवाया। यह टेस्ट मैच भारत और बांग्लादेश के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन स्टेडियम में खेला गया। वहीं, भारत में डॉमेस्टिक क्रिकेटर्स को मिलने वाली फीस में भी इजाफा हुआ। कोविड काल में आईपीएल मैचों का सफलतापूर्वक आयोजन करवाना भी दादा की तमाम उपलब्धियों में से एक है। हालांकि, इस दौरान विराट कोहली को जिस तरह से कप्तानी और रवि शास्त्री की छुट्टी की गई, उसके तौर-तरीकों पर कई सवाल खड़े हुए। लेकिन रोहित शर्मा की कप्तानी और राहुल द्रविड़ के बतौर कोच के प्रदर्शन ने इन सवालों का जवाब भी दिया।

BCCI से हुई छुट्टी, लेकिन पिक्चर अभी बाकी है?

भले ही दादा की बीसीसआई अध्यक्ष के तौर पर छुट्टी हो गई हो, लेकिन उनके पिछले दो दशक के इतिहास को देखते हुए यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि उनका समय अभी खत्म नहीं हुआ है। कभी न हार मानने वाले सौरव गांगुली के लिए भविष्य की कई राहें इंतजार कर रही हैं। अभी वे एक बार फिर से CAB का चुनाव लड़ने जा रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में फिर से भारत के क्रिकेट के सेंटर में आ सकते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सौरव की करीबी से हर कोई अवगत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि सौरव को आईसीसी के पद के लिए इजाजत दी जानी चाहिए। हालांकि, यदि ऐसा नहीं भी होता है तो भी गांगुली के पास कई विकल्प मौजूद हैं। सूत्रों के अनुसार, दादा को राजनीति में आने का ऑफर कई बार बीजेपी और टीएमसी से मिला है, जिसे उन्होंने अब तक नकार दिया है। हालांकि, अब जब साल 2024 में लोकसभा चुनाव होंगे, तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या ममता बनर्जी के करीबियों में गिने जाने वाले सौरव गांगुली किसी पार्टी का दामन थामते हैं या फिर वह क्रिकेट को ही अपना भविष्य देखते हैं।



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पूर्व ओपनर ने कहा- ऋषभ पंत को मिल रहे मौके का फायदा नहीं उठा रहे हैं, इससे मैं बहुत निराश हूं

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ऋषभ पंत सीमित ओवरों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं और इससे उनकी आलोचना हो रही है। टेस्ट क्रिकेट में वे सफल नजर आते हैं, लेकिन लिमिटेड ओवर्स की क्रिकेट में वे सभी को निराश कर रहे हैं। एक बिग हिटर के रूप में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा था, लेकिन काफी मौके मिलने के बावजूद उन्होंने सभी को निराश किया है। फिर भी भारतीय टीम प्रबंधन उन्हें सपोक्ट कर रहा है। वहीं, पूर्व ओपनर क्रिस श्रीकांत का कहना है कि वह मौकों को भुना नहीं पा रहे हैं, जिससे मैं निराश हूं। 

हालांकि, T20I में उनके स्कोर पर एक नजर डालने से पता चलता है कि वह मौकों को भुनाने में नाकाम रहे हैं। भारत के लिए सबसे छोटे प्रारूप में अपनी पिछली 10 पारियों में पंत ने केवल एक बार 40 रन बनाए हैं। एकदिवसीय मैचों में उनकी पिछली 10 पारियों में एक शतक और तीन अर्धशतक जरूर हैं, लेकिन ओवरऑल रिकॉर्ड उतना अच्छा नहीं है। यह देखते हुए कि संजू सैमसन जैसा खिलाड़ी बेंच पर है। ऐसे में ऋषभ पंत की असफलताएं अधिक स्पष्ट दिखाई देती हैं।

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज और विश्व कप विजेता श्रीकांत का मानना है कि पंत को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने से ब्रेक देने का समय आ गया है, लेकिन जिस तरह से उनका समर्थन टीम मैनेजमेंट किया है। उसके लिए उन्होंने टीम प्रबंधन की भी आलोचना की है। अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “हो सकता है कि आप उसे (पंत) एक ब्रेक दे सकते हैं और उससे कह सकते हैं कि ‘थोड़ा इंतजार करो, भारत में आओ और घरेलू क्रिकेट खेलो’, उन्होंने उसे अच्छी तरह से हैंडल नहीं किया है।’ क्या आप उसे ब्रेक देने से पहले कुछ मैचों का इंतजार करेंगे या एक या दो गेम के बाद उसे हटा देंगे?” 

उन्होंने आगे कहा, “हां, ऋषभ पंत मिल रहे मौके का फायदा नहीं उठा रहे हैं। मैं बहुत निराश हूं।” श्रीकांत का सुझाव है कि पंत को अपने खेल को फिर से शुरू करने की जरूरत है और उन्हें मैदान पर कुछ समय बिताना चाहिए। श्रीकांत ने कहा, “आप इन अवसरों को खराब कर रहे हैं। यदि आप ऐसे मैचों में तोड़-फोड़ करते हैं, तो यह अच्छा होगा, क्योंकि विश्व कप आ रहा है। पहले से ही बहुत से लोग कह रहे हैं कि पंत रन नहीं बना रहे हैं इसलिए यह आग में घी डालेगा। वह खुद पर दबाव बना रहे हैं। उन्हें खुद को रीइनवेंट करने की जरूरत है। उसे कुछ सही करना है। क्रीज पर टिकना है, क्योंकि वह हर समय अपना विकेट फेंक रहा है।”   



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FIFA World Cup में मोरक्को से मिली हार के बाद नाराज हुए बेल्जियम के फैंस, कई इलाकों में भाड़की हिंसा; देखें Video

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Image Source : GETTY IMAGES, TWITTER
बेल्जियम की हार के बाद हुई हिंसा

FIFA World Cup 2022: कतर में फीफा वर्ल्ड कप में मोरक्को से मिली 2-0 की शर्मनाक हार के बाद बेल्जियम और नीदरलैंड के कई शहरों में दंगे भड़क उठे। बेल्जियम को मिली हार के बाद उनके लिए टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा और भी बड़ गया है। बेल्जियम को ग्रुप स्टेज में अपना अंतिम मैच 2018 वर्ल्ड कप की उपविजेता टीम क्रोएशिया से खेलना है। टूर्नामेंट के अगले राउंड में जाने के लिए बेल्जियम को किसी भी कीमत पर यह मैच जीतना होगा, जोकी उनके लिए आसान नहीं होगा। फैंस मोरक्को की जीत के बाद गुस्से में आ गए और सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर जमकर तोड़-पोड़ कर दिया।

ब्रसेल्स में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के बाद पुलिस ने करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया। दर्जनों दंगाइयों ने कारों को पलट दिया और आग लगा दी, इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगा दी और ईंटों से कारों पर पथराव किया। ब्रसेल्स की पुलिस प्रवक्ता इलसे वान डी कीरे ने कहा कि एक व्यक्ति के चेहरे पर चोट लगने के बाद पुलिस हरकत में आई। ब्रसेल्स के मेयर फिलिप क्लोज ने लोगों से शहर के केंद्र से दूर रहने का आग्रह किया और कहा है कि अधिकारी सड़कों पर व्यवस्था बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। यहां तक ​​कि पुलिस के आदेश पर मेट्रो और ट्राम यातायात भी बाधित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि“वे प्रशंसक नहीं हैं, वे दंगाई हैं। ”

एंटवर्प और लीज शहर में भी गड़बड़ी हुई। आंतरिक मंत्री एनेलिस वर्लिंडन ने कहा कि, “यह देखकर दुख होता है कि कैसे कुछ लोग स्थिति का दुरुपयोग कर आपा खो देते हैं।” पड़ोस के देश नीदरलैंड में पुलिस ने कहा कि रॉटरडैम के बंदरगाह शहर में हिंसा भड़क उठी, अधिकारियों ने दंगा रोकने के लिए आतिशबाजी और कांच के साथ पुलिस पर पथराव करने वाले 500 फुटबॉल समर्थकों के एक ग्रुप को तोड़ने का प्रयास किया। मीडिया ने राजधानी एम्स्टर्डम और हेग में अशांति की सूचना दी। मोरक्को की जीत वर्ल्ड कप में एक बड़ी उलटफेर थी और कई बेल्जियम और डच शहरों में मोरक्को के अप्रवासी मूल के फैंस ने टीम की जीत को उत्साहपूर्वक मनाया।

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हवा में जंप और सिर से करारा प्रहार, सिर्फ 68 सेकंड में दाग दिया सबसे तेज गोल

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रेयान (कतर): लियोनेल मेसी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो और रॉबर्ट लेवांडोव्स्की जैसे धाकड़ फुटबॉलरों का जलवा तो देख ही लिया होगा आपने, लेकिन ये खिलाड़ी जो काम नहीं कर सके उसे अलफोंसो डेविस ने कर दिखाया। बायर्न म्यूनिख के स्टार खिलाड़ी ने फीफा वर्ल्ड कप 2022 का सबसे तेज गोल दागा। उन्होंने मैदान पर उतरने के सिर्फ 68वें सेकंड में ही हेड किक से गेंद को जाल में उलझा दिया। हालांकि, उनकी टीम को करारी हार झेलनी पड़ी, क्योंकि विपक्षी टीम क्रोएशिया ने इसके बाद बैक टू बैक 4 गोल दागे।

क्रोएशिया की दमदार वापसी, आंद्रेज क्रैमारिच ने दागे 2 गोल
क्रोएशिया ने मजबूत वापसी करते हुए आंद्रेज क्रैमारिच के दो गोल की मदद से फीफा विश्व कप मैच में कनाडा को 4-1 से हराकर बाहर कर दिया। कनाडा की टीम 36 साल में पहली बार विश्व कप में खेल रही थी लेकिन कतर में दो मैचों के बाहर ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई। अलफोंसो डेविस ने दूसरे ही मिनट में कनाडा के लिए विश्व कप का पहला गोल दागा और अपनी टीम को बढ़त दिलाई।

शुरुआती मैच में मोरक्को से गोलरहित ड्रॉ खेलने वाली क्रोएशिया ने वापसी कर चार गोल दाग दिए। रूस में 2018 विश्व कप की उप विजेता रही क्रोएशिया के लिए खलीफा अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में क्रैमारिच (36वें और 70वें मिनट) के अलावा मार्को लिवाजा (44वें मिनट) और लोवरो माएर (90+4वें मिनट) ने भी गोल किए। कप्तान लुका मौद्रिच (37 वर्ष) टूर्नामेंट में अपने पहले गोल की तलाश में थे लेकिन सफल नहीं हुए।

यह संभवत: उनका अंतिम विश्व कप है। क्रोएशिया और बेल्जियम को 2-0 से हराकर उलटफेर करने वाली मोरक्को के ग्रुप एफ में चार चार अंक हैं। बेल्जियम के तीन अंक हैं और उसके पास अब भी अगले दौर में पहुंचने का मौका है। कनाडा को पहले दो मैचों में कोई अंक नहीं मिला और गुरुवार को मोरक्को के खिलाफ मुकाबले में जीत भी उसे अगले दौर में नहीं पहुंचा पाएगी। क्रोएशिया का सामना बेल्जियम से होगा। कनाडा इससे पहले 1986 में विश्व कप में पहुंची थी और तब भी ग्रुप चरण में ही बाहर हो गई थी।
Fifa: मोरक्को का गोलकीपर मैच से ठीक पहले रहस्यमयी तरीके से गायब, वर्ल्ड कप में मच गया हंगामाMessi World Cup: वाह मेसी वाह! झन्नाटेदार किक को रोकने में औंधे मुंह गिरा गोलकीपर, 7 प्लेयर्स को चीरते हुए जाल में समाई गेंदFifa World Cup: वाह रोनाल्डो… इतिहास रच दिया, 5 वर्ल्ड कप में गोल मारने वाले दुनिया के पहले आदमी



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