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पाकिस्‍तान में नए सेना प्रमुख की तैनाती कभी भी, बाजवा के गढ़ में इमरान खान, दहशत में आई जनता

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान में नए सेना प्रमुख को लेकर घमासान मचा हुआ है। पाकिस्तान के गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अगले सेना प्रमुख के नियुक्ति से जुड़ी परामर्श की प्रक्रिया पूरी कर ली है। एक या दो दिन में थल सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा के उत्तराधिकारी की घोषणा कर दी जाएगी। इस बीच पाकिस्तान में इमरान का लॉन्ग मार्च रावलपिंडी पहुंचने वाला है। सेना प्रमुख की नियुक्ति और मार्च के पहुंचने से रावलपिंडी में जनता घबराई हुई है और खाने-पीने से जुड़ी जरूरी चीजों की जमकर खरीदारी कर रही है।

पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल बाजवा 29 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। जियो न्यूज के कार्यक्रम नया पाकिस्तान में राणा सनाउल्लाह से नए सेना प्रमुख से जुड़ा सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि एक या दो दिन में घोषणा हो जाएगी। इशारों ही इशारों में सनाउल्लाह ने कहा कि नए जनरल का नाम तय हो गया है, बस अभी औपचारिक घोषणा की जानी बची है। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख की नियुक्ति प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है और वह जल्द ही अंतिम निर्णय लेंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे विचार से नए जनरल की नियुक्ति को लेकर और देर करना ठीक नहीं होगा।’
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बाजवा के गढ़ में इमरान खान
एक तरफ सेना प्रमुख की नियुक्ति तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का लॉन्ग मार्च रावलपिंडी में पहुंचने वाला है। यहीं पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख का आवास है। जैसे-जैसे इमरान का मार्च रावलपिंडी के करीब पहुंच रहा है, लोगों में डर का माहौल बन रहा है। लोग खानी पीने की चीजों की भर-भर कर खरीदारी कर रहे हैं, इससे शहर में महंगाई और खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ सकती है। 21 नवंबर से स्कूलों में मध्यावधि परीक्षा होनी थी, लेकिन PTI के मार्च को देखते हुए इसके स्थगित होने की आशंका है।
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जरदारी ने किया प्रधानमंत्री का समर्थन
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी ने सेना में प्रमोशन के वर्तमान सिस्टम का समर्थन किया है। जरदारी का यह बयान तब आया है जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने मांग की थी कि सेना प्रमुख की नियुक्ति ठीक उसी तरह होनी चाहिए जैसे पाकिस्तान के चीफ जस्टिस की होती है। दरअसल पीटीआई चीफ मेरिट के हिसाब से सेना प्रमुख के नियुक्ति की मांग कर रहे थे। जरदारी ने एक बयान में कहा कि सभी तीन स्टार जनरल बराबर हैं और सेना का नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री कानून के मुताबिक नए सेना प्रमुख की नियुक्ति करेंगे।’



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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज, लोगों के सपोर्ट में बोला UN- ”प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करना सीखे चीन’

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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज

चीन में कोरोना के चलते लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। एक तो कोरोना का प्रकोप ऊपर से सरकार की सख्ती और ना मानने पर पुलिस की कार्रवाई ने लोगों को प्रदर्शन करने पर मजूबर कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चीन को दो टूक सुनाया है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने चीन से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए लोगों को हिरासत में नहीं लेने का आग्रह किया है।

‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ का विरोध 

चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। वहीं कोरोना के चलते पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। 

लोगों को पुलिस की कारों में बांधा गया

शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। 

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दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी फटा, अमेरिका में बह रही आग की नदियां, आसमान हुआ लाल

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World Largest Volcano: दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिया ज्वालामुखी हवाई का मौना लोआ है। ये ज्वालामुखी रविवार को फट गया है। अभी ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा शिखर पर ही है। इससे स्थानीय लोगों को कोई खतरा नहीं है। यूनाइटेट स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे लगातार लावा के बहाव की निगरानी कर रहा है।

 



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चीन में ‘A4 क्रांति’, क्यों सादे कागज लहरा कर जिनपिंग की सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन?

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बीजिंग: चीन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कागज के खाली पन्ने एक प्रतिष्ठित वस्तु बन गए हैं, जिसे कई लोग ‘श्वेत पत्र क्रांति’, ‘कोरी चादर क्रांति’ या ‘ए4 क्रांति’ कहते हैं। देशभर में विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कागज की एक कोरी चादर पकड़े देखा गया। कुछ का कहना है कि यह सेंसरशिप से बचने का एक तरीका है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वायरल वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है, जिसमें नानजिंग के कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक महिला कोरे कागज के एक लंबे टुकड़े का एक छोर पकड़े हुई है और दूसरे छोर को एक अज्ञात व्यक्ति पकड़े हुआ है।

उस रात बाद के एक अन्य वीडियो में कैंपस में दर्जनों और छात्रों को श्वेत पत्र के टुकड़ों को पकड़े हुए देखा गया, जो मौन खड़े थे। सप्ताहांत में अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए। शनिवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला ने बीबीसी को बताया, ‘‘निश्चित रूप से कागज पर कुछ भी नहीं लिखा था, लेकिन हम जानते हैं कि यह किस चीज का प्रतीक है।’’

छात्रों के बीच प्रचलित है विरोध
कागज निर्माता शंघाई एम एंड जी स्टेशनरी ने उन अफवाहों का खंडन किया है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सभी ए4 पेपर को अलमारियों से हटा लिया है। कागज के खाली टुकड़े चीन में प्रदर्शनकारियों के लिए अवज्ञा का प्रतीक बन गए हैं, खासकर विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच। वे देश में लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं।

चीन में हो रहा मौन विरोध
यह मौन विरोध का एक रूप है, लेकिन उनके लिए सेंसरशिप या गिरफ्तार होने से बचने का एक तरीका है। सोमवार को कंपनी ने शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर एक आपातकालीन नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि एक जाली दस्तावेज ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। बीबीसी ने बताया कि एम एंड जी के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। उत्पादन और संचालन कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।



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