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पाकिस्तान में जल्द होंगे चुनाव? इमरान ने बाजवा और अल्वी का नाम लेकर किया बड़ा दावा

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एक मार्च के दौरान हमले में घायल हुए इमरान खान के पैरों पर अभी भी प्लास्टर चढ़ा हुआ है।

इस्लामाबाद: पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान की सियासत में जबरदस्त हलचल मची हुई है। सरकार और विपक्ष के बीच कड़वाहट इतनी बढ़ गई है कि इसका अंजाम काफी खतरनाक होने की आशंका जताई जाने लगी है। इन सबके बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को दावा किया कि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने तत्काल और पारदर्शी चुनाव के मुद्दे पर बातचीत के लिए आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा से मुलाकात की है। इससे पहले राष्ट्रपति अल्वी ने कहा था कि वह अगले आर्मी चीफ की नियुक्ति के बारे में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह के मुताबिक फैसला लेंगे।

29 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं बाजवा

अल्वी ने कहा कि वह इस आर्मी चीफ को चुने जाने की प्रक्रिया में अड़चन नहीं डाल सकते। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाहौर में वरिष्ठ पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में इमरान खान ने दावा किया कि देश में जल्द चुनाव को लेकर जनरल बाजवा और राष्ट्रपति अल्वी के बीच चर्चा हुई। उन्होंने इस दौरान अगले आर्मी चीफ की नियुक्ति के बारे में भी बात की। जनरल बाजवा 29 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक, इमरान खान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘आर्मी चीफ की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की तरह होनी चाहिए।’

‘मैंने जनरल बाजवा से मुलाकात नहीं की है’
खबर के मुताबिक, इमरान खान ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार अपने फायदे के लिए आर्मी ऐक्ट में संशोधन करने जा रही है। उन्होंने कहा, ‘आर्मी ऐक्ट में प्रस्तावित संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।’ पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने लाहौर में जनरल बाजवा से मुलाकात नहीं की है। बता दें कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री इमरान खान पर एक मार्च के दौरान हमला हुआ था, जिसमें गोली लगने से वह घायल हो गए थे। घटना के बाद से पाकिस्तान की सियासत एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई थी, और गृह युद्ध का खतरा मंडराने लगा था।

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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज, लोगों के सपोर्ट में बोला UN- ”प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करना सीखे चीन’

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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज

चीन में कोरोना के चलते लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। एक तो कोरोना का प्रकोप ऊपर से सरकार की सख्ती और ना मानने पर पुलिस की कार्रवाई ने लोगों को प्रदर्शन करने पर मजूबर कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चीन को दो टूक सुनाया है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने चीन से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए लोगों को हिरासत में नहीं लेने का आग्रह किया है।

‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ का विरोध 

चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। वहीं कोरोना के चलते पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। 

लोगों को पुलिस की कारों में बांधा गया

शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। 

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दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी फटा, अमेरिका में बह रही आग की नदियां, आसमान हुआ लाल

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World Largest Volcano: दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिया ज्वालामुखी हवाई का मौना लोआ है। ये ज्वालामुखी रविवार को फट गया है। अभी ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा शिखर पर ही है। इससे स्थानीय लोगों को कोई खतरा नहीं है। यूनाइटेट स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे लगातार लावा के बहाव की निगरानी कर रहा है।

 



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चीन में ‘A4 क्रांति’, क्यों सादे कागज लहरा कर जिनपिंग की सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन?

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बीजिंग: चीन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कागज के खाली पन्ने एक प्रतिष्ठित वस्तु बन गए हैं, जिसे कई लोग ‘श्वेत पत्र क्रांति’, ‘कोरी चादर क्रांति’ या ‘ए4 क्रांति’ कहते हैं। देशभर में विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कागज की एक कोरी चादर पकड़े देखा गया। कुछ का कहना है कि यह सेंसरशिप से बचने का एक तरीका है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वायरल वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है, जिसमें नानजिंग के कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक महिला कोरे कागज के एक लंबे टुकड़े का एक छोर पकड़े हुई है और दूसरे छोर को एक अज्ञात व्यक्ति पकड़े हुआ है।

उस रात बाद के एक अन्य वीडियो में कैंपस में दर्जनों और छात्रों को श्वेत पत्र के टुकड़ों को पकड़े हुए देखा गया, जो मौन खड़े थे। सप्ताहांत में अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए। शनिवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला ने बीबीसी को बताया, ‘‘निश्चित रूप से कागज पर कुछ भी नहीं लिखा था, लेकिन हम जानते हैं कि यह किस चीज का प्रतीक है।’’

छात्रों के बीच प्रचलित है विरोध
कागज निर्माता शंघाई एम एंड जी स्टेशनरी ने उन अफवाहों का खंडन किया है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सभी ए4 पेपर को अलमारियों से हटा लिया है। कागज के खाली टुकड़े चीन में प्रदर्शनकारियों के लिए अवज्ञा का प्रतीक बन गए हैं, खासकर विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच। वे देश में लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं।

चीन में हो रहा मौन विरोध
यह मौन विरोध का एक रूप है, लेकिन उनके लिए सेंसरशिप या गिरफ्तार होने से बचने का एक तरीका है। सोमवार को कंपनी ने शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर एक आपातकालीन नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि एक जाली दस्तावेज ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। बीबीसी ने बताया कि एम एंड जी के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। उत्पादन और संचालन कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।



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