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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बम धमाका, कई लोगों के हताहत होने की खबर

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Highlights

  • विस्फोट में कम से कम 20 लोग घायल हो गए
  • सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है
  • घायलों को चिकित्सा सहायता मुहैया कराई जा रही है

Pakistan: बलूचिस्तान कोहलू जिले के मुख्य बाजार में शुक्रवार को हुए विस्फोट में कम से कम 20 लोग घायल हो गए। पाकिस्तानी प्रांत के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। बलूचिस्तान के शिक्षा मंत्री मीर नसीबुल्लाह मारी के अनुसार, घायलों को कोहलू जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया।

उन्होंने बताया, “बारह लोगों की हालत गंभीर है।” मैरी ने कहा कि अस्पताल में मेडिकल इमरजेंसी लगा दी गई है और घायलों को चिकित्सा सहायता मुहैया कराई जा रही है। उन्होंने कहा, “अगर घायलों की हालत बिगड़ती है, तो उन्हें चिकित्सा सहायता के लिए मुल्तान स्थानांतरित कर दिया जाएगा।” इस बीच, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है।

पहले भी हुआ है हमला 

इसी साल अप्रैल के महीने में कराची में आत्मधाती बम धमाके में तीन चीनी नागरिकों की मौत मौके पर हो गई थी। इसे पहले साल 2021 में खैबर पख्तूनख्वा में हुए बम धमाके में दस चीनी नगारिकों जान चली गई थी। वही उसी दिन बम धमाके में 26 अन्य चीनी लोगों की मौत हुई थी। 28 जुलाई 2021 में कराची शहर में ही एक चीनी नागरिक के गाड़ी के ऊपर गोलियां बरसाई की गई थी। अगर इन आकड़ो को देखा जाए तो साल-दर-साल बढ़ते जा रहे हैं। साल 2019 में भी ग्वादर के पांच सितारा होटल पर हमला हुआ था। उस होटल में कई चीनी लोग रुके थे। इसके बाद साल 23 नवंबर में चीनी वाणिज्य पर हमले से दहल गया, इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। वही 2018 में ही दालबंदीन, बलुचिस्तान में हुए आत्माघाती में तीन चीनी इंजीनियर घायल हो गए थे। साल 2017 में क्वेटा से अगवा करने के बाद चीनी की हत्या कर दी गई थी। 

आखिर चीनी क्यों हैं निशाने पर 

पाकिस्तान में तख्ता पलटते ही नए प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा था कि इमरान खान की सरकार में कानून व्यवस्था एक लचर हो गई थी, इन हमलों के जिम्मेदार इमरान ही है। सरकार ने चीनी नागरिकों के सुरक्षा के लिए एक स्पेशल सिक्यॉरिटी डिवीजन का गठन भी किया था। जो चीनी लोगों को सुरक्षा मुहैया कराते हैं। पाकिस्तान के बलुच अलगावादी चीनी नागरिकों के खिलाफ काफी आक्रामक है। चीन के लिए बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव परियोजना काफी महत्वपूर्ण है। चीन दशकों से पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के पड़ने वाले ग्वादर बंदरगाह को विकसित करने के प्रयास में लगा है। बलुच लोगों का आरोप है कि इस योजन के बार में या ऐसे कई योजनाएं है, जिनके बारे में बलुची को पता ही नहीं है। वहीं उन्हें लगता है कि चीन उनकी एरिया को कब्जा कर लेगा। इसलिए चीन के खिलाफ पाकिस्तान के इस हिस्से के लोग हैं।

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Pakistan Earthquake News : पाकिस्तान में जोरदार भूकंप से कांपा इस्लामाबाद और पंजाब, रिक्टर स्केल पर 6.3 मापी गई तीव्रता

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Earthquake in Pakistan : पाकिस्तान में भूकंप के तगड़े झटके महसूस हुए हैं। 6.3 तीव्रता का यह भूकंप बेहद जोरदार था जिसके झटके इस्लामाबाद और पंजाब में महसूस किए गए। इससे पहले ईरान में 5.9 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें 400 से अधिक घायल और 7 लोगों की मौत हो गई थी।

 



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India In AUKUS: ब्रिटेन की ख्‍वाहिश ऑकस में भारत को किया जाए शामिल, क्‍या यूके के लिए दोस्‍त फ्रांस के खिलाफ जाएंंगे पीएम मोदी?

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लंदन: यूनाइटेड किंगडम (यूके) चाहता है कि ऑकस (AUKUS) का विस्‍तार नाटो की तर्ज पर हो। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा को सुनिश्चित करने के मकसद से उसने इस संगठन के विस्‍तार की मंशा जाहिर की है। इसके लिए उसने भारत और जापान को भी इसमें शामिल करने का इरादा जताया है। ऑकस वह त्रिपक्षीय समझौता है जिसमें यूके के अलावा ऑस्‍ट्रेलिया और अमेरिका भी शामिल हैं। साल 2021 में हुए इस समझौते की वजह से ऑस्‍ट्रेलिया और फ्रांस के बीच काफी तनाव हो गया था।

फ्रांस और भारत के रिश्‍ते
यूके की रक्षा समिति की तरफ से प्रस्‍ताव दिया गया है कि भारत और जापान को ऑकस में शामिल किया जाना चाहिए। समिति का कहना है कि अब समय आ गया है जब इस संगठन के विस्‍तार के बारे में सोचना होगा। लेकिन भारत इसका हिस्‍सा बनेगा या नहीं, इस पर थोड़ी आशंका है। भारत और फ्रांस के बीच रिश्‍ते काफी मधुर हैं। ऐसे में अगर वह ऑकस का हिस्‍सा बनता है तो फिर फ्रांस के साथ रिश्‍ते थोड़े बिगड़ सकते हैं। भारत अभी सैन्‍य जरूरतों के लिए फ्रांस पर निर्भर है। ऐसे में उसके लिए ऑकस को ज्‍वॉइन करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
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डील से फ्रांस की नाराजगी
डील की वजह से फ्रांस काफी नाराज था और उसका आरोप था कि ब्रिटेन की वजह से ऑस्‍ट्रेलिया ने उसका भरोसा तोड़ दिया था। फ्रांस का कहना था कि ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में असाधारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है तो ऑस्‍ट्रेलिया ने उसकी पीठ में छुरा भोंका है। भारत ने अभी तक इस संगठन का हिस्‍सा बनने पर न तो हामी भरी और न ही इनकार किया है। ऐसे में उसका रुख क्‍या होगा, यह तो समय ही बताएगा।
ऑस्‍ट्रेलियाई मंदिरों पर हमले कर रहे खालिस्‍तानियों को मिला करारा जवाब, भारतीयों ने सूरत बिगाड़ दी, जनमत संग्रह कल
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ऑकस के लिए भारत अपने दोस्‍त फ्रांस को नाराज नहीं करेगा। दूसरी तरफ भारत, अभी क्‍वॉड का अहम हिस्‍सा है। क्‍वाड यानी जापान, ऑस्‍ट्रेलिया, भारत और अमेरिका। क्‍वाड वह संगठन है जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को मजबूत बनाने की दिशा में काम करता है। ऑकस एक सैन्‍य गठबंधन है और ऐसे में इसमें शामिल होने को लेकर रक्षा विशेषज्ञ थोड़े से आशंकित हैं।

क्‍या है ऑकस समझौता
ऑकस वह समझौता है जिसके तहत अमेरिका और ब्रिटेन मिलकर ऑस्‍ट्रेलिया के लिए परमाणु पनडुब्बी का निर्माण करने वाले हैं।लेकिन जब साल 2021 में जब ऑकस का ऐलान हुआ था तो कई देश इससे खासे नाराज थे। उनका मानना था कि इस संगठन के साथ ही उन्‍हें नजरअंदाज कर दिया गया है। कई विशेषज्ञों ने यह माना कि यह समझौता भारत और हिंद महासागर पर मौजूद साथी देशों के लिए उपयोगी साबित होगा। इस समझौते का मकसद चीन को उसकी किसी भी गुस्‍ताखी का जवाब देना था।



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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 के लिए ट्रंप ने शुरू किया प्रचार, जानें किससे होगा मुकाबला?

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डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व राष्ट्रपति अमेरिका

US Presidential Election 2024: अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव-2024 के लिए पूर्व प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने प्रचार शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अब और कटिबद्ध हूं। दो महीने से अधिक समय पहले उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव में किस्मत आजमाने की घोषणा की थी। सालेम के न्यू हैंपशायर में रिपब्लिकन पार्टी की सालाना बैठक में ट्रंप ने पार्टी नेताओं से कहाकि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर हम यहां से अपने अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। ट्रंप के इस ऐलान से मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन के खेमे में खलबली मच गई है।

ट्रंप कोलंबिया जाने से पहले सालेम में रुके थे। उन्हें सालेम में रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं को दक्षिण कैरोलाइना की अपनी प्रचार टीम से वाकिफ कराना था। ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं अब और नाराज हूं और पहले की तुलना में (राष्ट्रपित चुनाव के लिए) अधिक कटिबद्ध हूं।’’ ट्रंप और उनके सहयोगियों को आस है कि प्रत्याशी चयन को लेकर अधिक शक्तिशाली प्रांतों में चल रही घटनाएं पूर्व राष्ट्रपति के पीछे की ताकत को प्रदर्शित करेंगी, क्योंकि उनके अभियान की ढीली शुरुआत से राष्ट्रपति पद के चुनाव में उतरने की उनकी कटिबद्धता पर कई लोग सवाल उठाने लगे हैं। अभी सिर्फ ट्रंप ने ही 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी के लिए अपनी दावेदारी घोषित की है। अब देखना होगा कि जो बाइडन भी 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए ताल ठोंकते हैं या नहीं।

ये नेता भी फरवरी से कर सकते हैं प्रचार अभियान की शुरुआत


पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के अलावा फ्लोरिडा के गवर्नर आर डेसैंट्स, पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस, दक्षिण कैरोलाइना की पूर्व गवर्नर निक्की हैली समेत कई संभावित उम्मीदवारों द्वारा आगामी महीनों में अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू करने की उम्मीद है। इस बीच ट्रंप ने कहा कि मेम्फिस पुलिस के पांच अधिकारियों द्वारा अश्वेत नागरिक टायर निकोल्स की नृशंस पिटाई का जो वीडियो सामने आया है, वह ‘भयावह’ है और यह हमला ‘कभी होना ही नहीं चाहिए था।

ट्रंप ने शनिवार को एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मेरा मानना है कि यह भयावह है। वह बड़ी मुश्किल में था। उस पर लात घूसे बरसाए जा रहे थे। बाइडन प्रशासन ने 29 वर्षीय अश्वेत निकोल्स पर किए गए हमले का वीडियो जारी किया था। हमले के 3 दिन बाद उसकी मौत हो गई थी। हालांकि वर्ष 2020 में ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान जॉर्ज फ्लायड नामक एक अश्वेत व्यक्ति की पुलिस की कार्रवाई में मौत हो जाने के बाद अमेरिका में नस्ली हिंसा के खिलााफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे।

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