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पाकिस्‍तान के आने वाले हैं अच्‍छे दिन! FATF की ग्रे लिस्‍ट से आ सकता है बाहर… लेकिन धुल पाएगा आतंकवाद का दाग?

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इस्‍लामाबाद: चार साल के बाद लगता है पाकिस्‍तान, फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्‍ट से बाहर आ जाएगा। 18 से 21 अक्‍टूबर तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में पाकिस्‍तान पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। इस देश को आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद और मनी लॉन्ड्रिंग के चलते साल 2018 में लिस्‍ट में डाला गया था। सूत्रों की मानें तो फाइनेंशियल वॉचडॉग की तरफ से जो एक्‍शन प्‍लान दिया गया था, पाकिस्‍तान ने उसका पालन किया है। वॉचडॉग ने पाकिस्‍तान को 34 बिंदुओं वाला एक्‍शन प्‍लान दिया था। इसमें से 27 बिंदु टेरर फाइनेंसिंग से जुड़े थे तो सात प्‍वाइंट्स मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े थे।

क्‍या कहा FATF ने
जून में हुई मीटिंग के बाद एफएटीएफ की तरफ से एक बयान जारी किया गया था। इसमें कहा गया था, ‘जून 2022 की मीटिंग के बाद एफएटीएफ ने शुरुआती फैसला लिया है कि पाकिस्‍तान ने काफी हद तक दो एक्‍शन प्लान को पूरा कर 34 लक्ष्‍यों को हासिल किया है और उसने जांच के लिए ऑन साइट विजिट में भी मदद की। इसके तहत ही यह पाया गया कि पाकिस्‍तान में सुधार शुरू हो चुके हैं और स्थिर हैं। साथ ही उसने जरूरी राजनीतिक प्रतिबद्धता भी अपनी जगह है। आने वाले समय में देश में कुछ बेहतरी देखने को मिल सकती है।’जब अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडेन के सीनियर बिल क्लिंटन नहीं ले पाये पाकिस्‍तान को आतंकी देश घोषित करने का फैसला
जून 2018 से लिस्‍ट में
एफएटीएफ की 15 सदस्‍यों वाली टीम ने 29 अगस्‍त से दो सितंबर तक पाकिस्‍तान का दौरा किया था। टीम ने अधिकारियों से मुलाकात की और वित्‍त सिस्‍टम पर भी चिंता जाहिर की जिसमें स्‍टेट बैंक और वित्‍त मंत्रालय भी शामिल थे। इसके बाद ही एक ऑनसाइट रिपोर्ट तैयार की गई जो देश के हालातों से जुड़ी थी। टीम में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपियन यूनियन और दूसरे देशों से अधिकारी शामिल थे।

इस रिपोर्ट की फाइंडिंग्‍स को पेरिस में जमा किया गया था। पाकिस्‍तान का प्रतिनिधिदल भी मीटिंग में शामिल होगा जिसकी अगुवाई वित्त मंत्री हिना रब्‍बानी खार करेंगी। जून 2018 से पाकिस्‍तान इस लिस्‍ट में है। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी संगठनों पर लगाम कसने में विफल रहने पर उसे ग्रे लिस्‍ट में शामिल किया गया था।
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पाकिस्‍तान पर बढ़ती गईं मुश्किलें
ग्रे लिस्‍ट में आने के बाद से पाकिस्‍तान की समस्‍याएं भी बढ़ती गईं। इस लिस्‍ट में आने के बाद उसे अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (IMF) वर्ल्‍ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से आर्थिक मदद मिलने में खासी मुश्किल हुई। यूरोपियन यूनियन भी उसकी मुश्किलों को हल नहीं कर सका। इस वजह से देश पर आर्थिक संकट भी गहरा गया। एफएटीएफ को साल 1989 में स्‍थापित किया गया था।

भारत भी है शामिल
इसका मकसद मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी संगठनों को मदद और अंतरराष्‍ट्रीय वित्‍तीय सिस्‍टम पर खतरा पैदा करने वाले तत्‍वों से लड़ना है। इस संस्‍था में फिलहाल 39 सदस्‍य हैं जिसमें दो क्षेत्रीय संगठन यूरोपियन कमीशन और गल्‍फ को-ऑपरेशन कांउसिल भी शामिल हैं। भारत बतौर सलाहकार इसमें शामिल है और इसके एशिया पैसेफिक ग्रुप का सदस्‍य है।



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Pakistan Army India: बालाकोट… पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए खतरा बना भारत! परमाणु बम की बात क्यों कर रहे ना’पाक’ सैन्य एक्सपर्ट

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इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तानी सेना के मुखिया जनरल असीम मुनीर सत्‍ता संभालने के बाद ही भारत को गीदड़ भभकी देने में जुट गए हैं। जनरल मुनीर ने कहा कि अगर भारत जंग शुरू करता है तो हम करारा जवाब देंगे। जनरल मुनीर चाहे जो भी धमकी दें लेकिन पाकिस्‍तानी सेना के ही विशेषज्ञ यह खुलकर मानने लगे हैं कि मोदी राज में भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए बड़ा खतरा बन गया है। पाकिस्‍तानी सेना जुड़े रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि सर्जिकल स्‍ट्राइक, बालाकोट जैसी कार्रवाई‍यों ने भारत ने अब पाकिस्‍तान को अपने अस्तित्‍व को बचाने के लिए कठिन विकल्‍प चुनने को मजबूर कर दिया है।

पाकिस्‍तान की आजादी पर आयोजित इस्‍लामाबाद कान्‍क्‍लेव 2022 चर्चा में पाकिस्‍तान के पूर्व ज्‍वाइंट चीफ ऑफ स्‍टॉफ कमिटी रिटायर जनरल जुबैर हयात ने अपने भाषण में कहा कि भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व को स्‍वीकार नहीं करता है और विभिन्‍न मोर्चों पर हमारे के लिए चुनौती पेश करता है। इस वजह से भारत का खतरा अभी खत्‍म नहीं हुआ है। जुबैर हयात ने कहा कि भारत के नेता भी 1947 के बंटवारे को ऐतिहासिक गलती मानते हैं। जुबैर ने भारत के सर्जिकल स्‍ट्राइक और साल 2019 में ऑपरेशन बालाकोट का भी जिक्र किया।
जनरल जुबैर ने कहा कि पाकिस्‍तान की धरती पर पहली बार हमला किया गया। उन्‍होंने ब्रह्मोस मिसाइल के दुर्घटनावश पाकिस्‍तान में गिरने का भी उल्‍लेख किया। बांग्‍लादेश के जन्‍म पर जनरल जुबैर की हताशा साफ झलकी। उन्‍होंने रिटायर जनरल बाजवा के उस बयान से अपनी सहमति जताई जिसमें उन्‍होंने कहा था कि पूर्वी पाकिस्‍तान में हुई हार सेना के कारण नहीं बल्कि राजनीतिक नेताओं की वजह से हुई थी। बता दें कि जनरल बाजवा के बयान को खुद उन्‍हीं के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी खारिज कर चुके हैं।

पाकिस्‍तान के एयर यूनिवर्सिटी इस्‍ला‍माबाद में विशेषज्ञ डॉक्‍टर आदिल सुल्‍तान ने कहा कि विदेशी माहौल ऐसा है कि पाकिस्‍तान को आर्थिक संकट के बाद भी परमाणु और परंपरागत हथियारों पर अपना फोकस बरकरार रखना होगा। सुल्‍तान ने कहा कि भारत बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम, एंटी सैटलाइट वेपन, हाइपरसोनिक मिसाइल, एक साथ कई परमाणु बम ले जाने वाली मिसाइल, पनडुब्‍बी से दागे जाने वाली मिसाइल जैसी नई तकनीक को शामिल कर रहा है। यह पाकिस्‍तान की प्रतिरोधक क्षमता की परेशानी को बढ़ाएगा। वहीं पाकिस्‍तानी लेखक जावेद जब्‍बार ने सलाह दी कि पाकिस्‍तान को अपनी जनसंख्‍या की बढ़त को कंट्रोल करने की जरूरत है।



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Passport Ranking India: पाकिस्‍तान के लिए एक और शर्म का पल, दुनिया में सबसे खराब पासपोर्ट, जानिए क्‍या है भारत का हाल

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Pakistan India Passport Ranking: पाकिस्‍तान (Pakistan) जो दुनिया के एक खतरनाक देश में शामिल है, अब उसका पासपोर्ट भी अपनी साख गंवा चुका है। यहां तक कि यूएई का पासपोर्ट भी अब उससे आगे है। एक सर्वे की मानें तो पाकिस्‍तानी पासपोर्ट दुनिया में सोमालिया के बराबर रैंकिंग रखता है। उससे नीचे सीरिया जैसे ही देश हैं।

 



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Pakistan Food Crisis: कंगाल पाकिस्‍तान के पास सब्जियां खरीदने के पैसे नहीं, बंदरगाह पर सड़ रहा टनों प्‍याज

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कराची: पाकिस्‍तान की सरकार इस समय मुश्किल में है। वह यह तय नहीं कर पा रही है कि देश में जारी खाद्यान्‍न आपूर्ति संकट का समाधान करे या फिर विदेशी मुद्रा भंडार बचाए। कराची बंदरगाह पर इस समय सैंकड़ों ऐसे कंटेनर्स यूं ही पड़े हैं जिन पर सब्जियां लदी हुई हैं। पाकिस्‍तान के अखबार द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की तरफ से बताया गया है कि प्‍याज के 250 कंटेनर्स जिनकी कीमत 107 लाख डॉलर है, 816,480 डॉलर की कीमत वाली अदरक का कंटेनर और 2.5 लाख डॉलर वाले लहसुन के कंटेनर बंदरगाह पर ऐसे ही पड़े हैं। व्‍यापारी परेशान हैं और उन्‍हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्‍या किया जाए। अखबार की मानें तो 0.6 मिलियन टन सोयाबीन भी ऐसे ही अटका है क्‍योंकि सरकार की तरफ से साख पत्र जारी नहीं किया जा रहा है।

पहुंच से बाहर प्‍याज
सीमित साख पत्र की वजह से इन कंटेनर्स को ऐसे ही पड़े रहने दिया जा रहा है। प्‍याज के कंटेनर्स कराची बंदरगाह के कई टर्मिनल्‍स पर पड़े हुए हैं। देश के बैंक विदेशी मुद्रा के अभाव में साख पत्र जारी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से कंटेनर्स को ऐसे ही पड़े रहने दिया जा रहा है। पाकिस्‍तान फ्रूट एंड वेजीटेबल एक्‍सपोटर्स इंपोटर्स एंड मर्चेंट्स एसोसिएशन (PFVA) के सदस्‍य वाहीन अहमद की मानें तो साख पत्रों को जारी करने में हो रही देरी की वजह से कंटेनर्स की कीमत पर अलग असर पड़ रहा है, टर्मिनल और शिपिंग चार्जेस बढ़ जाएंगे। प्‍याज के कंटेनर्स पहले से ही महंगे हैं और इसकी वजह से एक आम आदमी पर बुरा असर पड़ने वाला है। आम आदमी की पहुंच से ही प्‍याज बाहर हो जाएगा।Pakistan Army : भारत नहीं पाकिस्‍तानी सेना के सामने ये हैं 5 बड़े खतरे, भारतीय सेना को गीदड़भभकी दे रहे जनरल असीम मुनीर
270 रुपए किलो प्‍याज
उन्‍होंने कहा कि आज प्‍याज 175 रुपए किलो थोक बाजार में और खुदरा बाजार में 250 से 270 रुपए किलो तक बिक रहा है। क्‍लीयरेंस में देरी से प्‍याज की कीमतें और बढ़ जाएंगी। सब्जियां भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएंगी। फेडरेशन ऑफ पाकिस्‍तान चैंबर्स आफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री (FPCCI) के कार्यवाहक प्रेसीडेंट सुलेमान चावला ने भी इस पर चिंता जताई है।
Indian Navy Day: भारत के विक्रांत को डुबोने आई पाकिस्‍तान की पनडुब्‍बी गाजी, कैसे समंदर में समाई, 1971 के जंग की शौर्य गाथा
उन्‍होंने कहा है कि पोल्‍ट्री और डेयरी प्रॉडक्‍ट्स पहले ही आम आदमी खरीद नहीं पा रहा है।कुछ ही दिनों पहले कीमतों में थोड़ी स्थिरता आई थी लेकिन अब इन हालातों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। उनकी मानें तो आयात काफी महंगा है और टर्मिनल चार्जेस भी दोगुने हो जाएंगे।

डॉलर न होने का खामियाजा
डॉलर देश में है नहीं और इसकी वजह से स्थिति बेकाबू हो सकती है। आयातकों को इसकी वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जिसकी भरपाई भी मुश्किल हो जाएगी। उन्‍होंने सरकार से मांग की है कि इस मसले को तेजी से सुलझाया जाए ताकि देश में गहराते खाद्यान्‍न संकट को टाला जा सके। चावला ने यह भी कहा कि अमेरिका से आयात होने वाले सोयाबीन को लेकर कभी कोई लाइसेंसिंग और अनुवंशिक संशोधन कोई मुद्दा नहीं रहा है। पिछले कई सालों से देश के वही सप्‍लायर्स सोयाबीन का आयात कर रहे हैं।



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