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दोषियों में आदतन अपराधियों की संख्या 2016 के बाद सबसे कम

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महामारी के बाद बार-बार होने वाले अपराधों में सुधार हुआ है
सचिन मामपट्टा /  09 22, 2022






 2021 में जेल में बंद लोगों में दोबारा अपराध करके आए दोषियों की संख्या कई वर्षों बाद सबसे कम है। 2021 में दोषी ठहराए गए 1,04,735 लोगों में से कुल 3,333 अपराधी ऐसे लोग थे जिन्हें पहले से ही दोषी ठहराया गया था। इनकी संख्या कुल अपराधों की  3.2 फीसदी रही। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में जेलों को और पुनर्वासित करने की वकालत की और एक नए जेल कानून पर काम करने की बात कही। 

अपराधी द्वारा फिर से अपराध दोहराने की दर या पहले कैद किए गए दोषियों का अनुपात, 2020 में 4.7 फीसदी और 2019 में यह 3.6 फीसदी था। हाल के कुछ वर्षों में 2016 में 2.8 फीसदी के साथ सबसे कम था। 

नैशनल लॉ यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर क्रिमिनोलॉजी ऐंड विक्टिमोलॉजी रिसर्च के असिस्टेंट एस. मणिकंदन और रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी के अपराध- विज्ञान विभाग के प्रोफेसर के.जयशंकर के द्वारा 2018-19 में किए गए अध्ययन ‘तिहाड़ जेल में कैदियों के बीच पुनरावृत्ति और योगदान कारक: एक गुणात्मक अध्ययन’ के मुताबिक ऐसे अपराधों की कम दर इसलिए नहीं है क्योंकि भारत में पुनर्वास तकनीक या देखभाल कार्यक्रम अच्छी तरह से चल रहा है, बल्कि इसका कारण कम सजा दर है। 

अध्ययन में कहा गया है कि 2016 में दोषसिद्धि दर 46.8 फीसदी थी और लंबित मामलों की संख्या 87.4 फीसदी थी। 2021 के हालिया राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, दोषसिद्धि दर 57 फीसदी है जबकि लंबित मामले बढ़कर 91.2 फीसदी हो गए हैं। राज्यवार संख्या अपराधों के दोहराव में बड़े अंतर को दर्शाती है।

यह दिल्ली में 28.5 फीसदी, मिजोरम में 15.3 फीसदी और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए 8.8 फीसदी है। उत्तराखंड में यह 0.8 फीसदी, तमिलनाडु में 0.2 फीसदी और मध्य प्रदेश में 0.1 फीसदी है, ये कुछ ऐसे राज्य हैं जहां बार-बार अपराधी की सजा की रिपोर्ट करने वालों की कम है। अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा और गुजरात सहित 12 क्षेत्रों में दोबारा किए गए अपराधों की संख्या शून्य है।

वैश्विक अध्ययनों से यह बात साबित हो गई है कि लोगों को जेल भेजने से यह जरूरी नहीं है कि सोसाइटी की सुरक्षा में सुधार आ जाए।  ‘प्रिजन्स डू नॉट रिड्यूस रिसिडिविज्म: द हाई कॉस्ट ऑफ इग्नोरिंग साइंस’ नामक 2011 के एक अध्ययन के अनुसार, इससे ज्यादा लोग अपराध में संलिप्त हो सकते हैं। इस अध्ययन में सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के फ्रांसिस टी. कलन, उत्तरी केंटकी विश्वविद्यालय के चेरिल लेरो जोंसन और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी के डेनियल एस. नागिन शामिल थे। 

उन्होंने कहा कि हमने यह निष्कर्ष निकाला है कि कुछ सबूतों के अनुसार  कि कैदी बार-बार अपराध करना बंद कर देता है और कम से कम कुछ ऐसे मामले भी आए हैं जिनमें आपराधिक प्रभाव पाया गया हो। इस अध्ययन के नीतिगत निहितार्थ महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इसका मतलब है कि अक्षमता के माध्यम से बचाए गए अपराध के अलावा हिरासत प्रतिबंधों के उपयोग से समाज को कम सुरक्षित बनाने का अप्रत्याशित परिणाम हो सकता है। 

2011 के एक दूसरे अध्ययन के मुताबिक किया गया जिसका शीर्षक जेल की स्थिति और पुनरावृत्ति था। इसमें नेपल्स विश्वविद्यालय के फ्रांसेस्को ड्रैगो, रॉबर्टो गैल्बिएती (सीएनआरएस इकोनॉमिक्स एंड साइंसेज-पीओ) और बर्गामो विश्वविद्यालय के पिएत्रो वर्टोवा सहित कई लेखकों ने एक सुझाव दिया कि अत्यंत कठोर सजा भी कम अपराध की ओर इशारा नहीं करती हैं। 

उन्होंने कहा, ‘अध्ययन में ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि जेल की सख्ती से कोई निवारण निकल पाएगा। जेल की कठोर सजा के उपाय पुनरावृत्ति की संभावना को कम नहीं करते हैं। इसके बजाय कठोर जेल की स्थिति रिहाई के बाद आपराधिक गतिविधि को बढ़ाती है, हालांकि उनका हमेशा सटीक अनुमान नहीं लगाया जाता है।’



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सितंबर में विनिर्माण गतिविधियों की अच्छी स्थिति बरकारः S&P सर्वे

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भाषा / नई दिल्ली 10 03, 2022






भारत में विनिर्माण गतिविधियां सितंबर के महीने में आंशिक रूप से सुस्त पड़ने के बावजूद अच्छी स्थिति में बनी रहीं और कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती की। सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह आकलन पेश किया गया। 

S&P के ‘वैश्विक भारत विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक’ (PMI) के सितंबर आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय विनिर्माण उद्योग की सेहत में तगड़ा सुधार देखा गया है। इस दौरान कंपनियों ने अपना उत्पादन बढ़ाने के साथ ही नए कर्मचारियों की भर्ती भी की। सितंबर में PMI 55.1 पर रहा जो विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है। यह लगातार 15वां महीना है जब विनिर्माण में सुधार दर्ज किया गया है। 

हालांकि सितंबर का PMI अगस्त के 56.2 की तुलना में थोड़ा कम रहा। S&P की PMI सर्वेक्षण कहता है कि विनिर्माण विस्तार की दर अगस्त की तुलना में थोड़ा सुस्त पड़ने के बावजूद ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर बनी रही। बिक्री में बढ़त और उत्पादन बढ़ाने की जरूरत को पूरा करने के लिए कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की। लागत मूल्य में कमी आने से कंपनियों की खरीद में बढ़त का रुख रहा। 

सर्वेक्षण के मुताबिक, “कंपनियों की विनिर्माण खरीद से जुड़ी लागत दो साल में सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ी जबकि उत्पादन भार मुद्रास्फीति सात महीने के निचले स्तर पर आ गई।” 

PMI के 50 से अधिक रहने को विनिर्माण गतिविधियों में सुधार का संकेत माना जाता है जबकि इस सूचकांक के 50 से नीचे रहने को विनिर्माण उद्योग में सुस्ती का इशारा माना जाता है। S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस की आर्थिक सह निदेशक पॉलियाना डि लीमा ने कहा, “पीएमआई के नए आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र वैश्विक चुनौतियों और मंदी की आशंका के बावजूद अच्छी स्थिति में बना हुआ है।”

Keyword: pmi, manufacturing, manufacturing activities, corona epidemic, manufacturing PMI,Factory output,inflation,Weak Rupee,RBI,Repo Rate Hike,मैन्‍यूफैक्‍चरिंग पीएमआई, फैक्‍ट्री गतिविध,


























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Bajaj Auto की कुल बिक्री 2 प्रतिशत घटी, कंपनी को घाटा

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सितंबर माह में Bajaj Auto की कुल बिक्री में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शेयर बाजार को दी गई सूचना के मुताबिक कंपनी की बिक्री पिछले साल के सितंबर के मुकाबले 2 प्रतिशत तक कम हुई  है। सितंबर 2022 में कंपनी ने कुल 3,94,747 यूनिट बेचे जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 4,02,021 यूनिट था।

दोपहिया वाहनों की बिक्री घटी

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि बीते सितंबर माह में कंपनी के दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी गिरावट हुई है। सितंबर में दोपहिया वाहनों की बिक्री पिछले साल के समान अवधि के मुकाबले 4 प्रतिशत तक घटी है। सितंबर 2022 में कंपनी द्वारा कुल 3,48,355 दोपहिया वाहन बेचे गए जबकि पिछले साल 3,61,036 दोपहिया बेचे गए थे। 

Commercial van की बिक्री बढ़ी

हालांकि कंपनी के वाणिज्यिक वाहन (Commercial van) की बिक्री में काफी वृद्धि हुई है। सितंबर में 13 प्रतिशत अधिक वाणिज्यिक वाहन वाहन बिके। कंपनी द्वारा सितंबर में कुल 46,392 वाणिज्यिक वाहन बेचे गए। पिछले साल सितंबर में 40,985 वाणिज्यिक वाहन बिके थे। कंपनी ने आगे कहा कि बीते सितंबर में वाहन निर्यात में भी कमी आई है। सितंबर में वाहनों का कुल निर्यात 33 प्रतिशत गिरकर 1,40,083 यूनिट पर आ गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 2,09,673 वाहनों का निर्यात किया था।



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5G के बाद, रिलायंस जियो अब लाएगी 15000 का 4G लैपटॉप

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रिलायंस जियो यह लैपटॉप Qualcomm और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ मिल कर बना रही है
बीएस वेब टीम / नई दिल्ली October 03, 2022






1 अक्टूबर को देश में 5G सेवाओं की शुरुआत करने के बाद, रिलायंस जियो अब 4G सिम के साथ एक कम बजट वाला सस्ता लैपटॉप भी लॉन्च करने जा रही है। इसकी कीमत 15000 रुपए होगी। इस लैपटॉप का नाम जियोबुक हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इसे तीन महीने के अंदर लॉन्च कर सकती है। 


बता दें, रिलायंस जियो इस लैपटॉप को सस्ते 4जी स्मार्टफोन की तर्ज पर मार्केट में ला रही है। सूत्रों के अनुसार लैपटॉप इस महीने से ही स्कूलों और सरकारी संस्थानों के लिए उपलब्ध कराया जायेगा। रायटर्स के हवाले से कहा गया है कि रिलायंस जियो यह लैपटॉप Qualcomm और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ मिल कर बना रही है। 


बता दें, Qualcomm कंपनी ARM Ltd की टेक्नोलॉजी से तैयार चिपसेट लैपटॉप के लिए उपलब्ध कराएगी।  वहीं Microsoft लैपटॉप के लिए  Windows OS सपोर्ट देगी।


हालांकि रिलायंस जियो ने इस सस्ता लैपटॉप को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी इसे सबसे पहले एंटरप्राइज ग्राहकों को उपलब्ध करवाना चाहती है। इनमें स्कूल और सरकारी संस्थान को भी शामिल किया जायेगा। बाद में यह लैपटॉप आम लोगों के लिए भी बाजार में उपलब्ध होगा।



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