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देउबा की नेपाली कांग्रेस के प्रदर्शन से घबराए चीन समर्थक केपी ओली, प्रचंड की शरण में पहुंचे, दी चेतावनी

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काठमांडू: नेपाल के आम चुनाव में पीएम शेर बहादुर देउबा के नेतृत्‍व वाली सत्‍तारूढ़ नेपाली कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया है और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। रविवार को पूरे नेपाल में चुनाव के बाद वोटों की गणना जारी है और नेपाली कांग्रेस 40 सीटें जीतकर सबसे आगे चल रही है। वहीं चीन के इशारे पर नाचने वाले केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल 29 सीटों को जीतकर दूसरे स्‍थान पर है। यही नहीं नेपाली कांग्रेस अभी 11 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं ओली की पार्टी भी अभी 19 जगहों पर आगे चल रही है। पार्टी की खराब हालत के बाद अब केपी ओली ने प्रचंड को गठबंधन करके सरकार बनाने का ऑफर दिया है।

इस पूरी चुनावी लड़ाई में राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्रता पार्टी ने सबको चौंका दिया है और उसने 7 सीटों पर जीत हासिल की है। यह पार्टी अभी एक सीट पर आगे चल रही है। वहीं माधव कुमार नेपाल के नेतृत्‍व वाली यूनाइटेड सोशलिस्‍ट पार्टी ने 10 सीटों पर जीत हासिल की है। राष्‍ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने अब तक 5 सीटों पर जीत दर्ज की है और दो सीटों पर आगे चल रही है। वहीं प्रचंड के नेतृत्‍व वाली पार्टी माओवादी सेंटर 12 सीटों पर सफलता हासिल कर चुकी है और 5 सीटों पर आगे चल रही है।
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केपी ओली चुनाव परिणाम के बाद टेंशन में आ गए
चुनाव प्रचार के दौरान भारत के खिलाफ जहरीले बयान देने वाले केपी ओली चुनाव परिणाम के बाद टेंशन में आ गए हैं और उन्‍होंने अपने धुर विरोधी प्रचंड को फोनकर एक साथ काम करने का ऑफर दिया है। नेपाली मीडिया के मुताबिक प्रचंड ने ओली को झटका देते हुए चुनाव के पूरे परिणाम आने तक इंतजार करने को कहा है। यही नहीं केपी ओली ने पीएम शेर बहादुर देऊबा को भी फोन किया और उन्‍हें जीत पर बधाई दी। बताया जा रहा है कि करीब 15 मिनट तक ओली और प्रचंड के बीच चुनाव के परिणाम पर चर्चा हुई।

ओली ने प्रचंड को सलाह दी कि वह दुश्‍मनी को भुला दें और एक नया गठबंधन बनाएं ताकि देश का नेतृत्‍व किया जा सके। एक माओवादी नेता ने कहा, ‘चूंक‍ि हम सत्‍तारूढ़ गठबंधन के एक प्रमुख सदस्‍य हैं, हम चुनाव परिणाम के बारे में चर्चा करेंगे और अपने बीच भविष्‍य के कदमों को लेकर बातचीत करेंगे। इसके बाद किस राह पर जाना है, इसका फैसला करेंगे। वहीं ओली की पार्टी के एक नेता ने कहा है कि हम किसी के साथ गठबंधन करने को लेकर इच्‍छुक हैं। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता बिना नेपाली कांग्रेस की मदद के सरकार बनाने पर रहेगी।
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नेपाल अस्थिरता की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा: ओली
इस चुनाव में ओली की पार्टी ने 150 सीटों पर जीत का दावा किया था लेकिन चुनाव परिणाम में उसे करारा झटका लगा है। इस बीच गुरुवार को चुनाव परिणाम में करारी हार के बाद ओली भड़क गए और उन्‍होंने चेतावनी दी कि देश अस्थिरता की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। उन्‍होंने यह भी कहा कि सांसदों की खरीद-फरोख्‍त अब शुरू होगी। नेपाल में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 138 सीटों की जरूरत है। चुनाव परिणाम से लग रहा है कि नेपाली कांग्रेस के नेतृत्‍व में एक साधारण बहुमत वाली सरकार बन सकती है। यही वजह है कि ओली प्रचंड को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं।



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फुटबॉल देखने आए ब्राजील के एक परिवार ने कतर में कबूल किया इस्‍लाम, मौलवी के साथ बांटी अपनी खुशी

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दोहा: कतर की राजधानी दोहा में फुटबॉल के प्रशंसक वर्ल्‍ड कप का आनंद लेने के लिए जुटे हैं। इस वर्ल्‍ड कप के बीच ही यहां पर ब्राजील के एक परिवार के इस्‍लाम कुबूल करने की भी खबरें हैं। ब्राजील के छह लोगों के एक परिवार ने इस्‍लाम धर्म स्‍वीकार कर लिया और अपने फैसले पर परिवार को काफी गर्व है। इस परिवार में माता-पिता और चार बच्‍चों ने इस्‍लाम कबूला है। मौलवी के सामने इन्‍होंने धर्म स्‍वीकारा और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कतर पर फुटबॉल वर्ल्‍ड कप के बहाने इस्‍लाम के प्रचार के आरोप लग रहे हैं। पहले मैक्सिकन और अब ब्राजील के परिवार की तरफ से इस्‍लाम के कबूलनामे ने सभी खबरों पर मोहर लगा दी है।

बुर्के में कबूला इस्‍लाम
मां के अलावा उनकी तीनों बेटियों ने बुर्का पहना था और वीडियो में काफी खुश नजर आ रही थीं। पिछले दिनों एक खबर आई थी जिसमें कहा गया था कि कतर में किस तरह से वर्ल्‍ड कप के बहाने इस्‍लाम का प्रचार किया जा रहा है। मौलवी ने मां इस्‍लाम कबूल करने के बाद उनकी भावनाओं के बारे में पूछा। इस पर उनका जवाब था, ‘मुझे नहीं मालूम कि कैसे अपनी खुशी का इजहार करूं। यह बहुत ही मुश्किल है क्‍योंकि इसने मेरे दिल को छू लिया है।’

इसके बाद मौलवी ने बेटी से पूछा, ‘किसी ने उन पर इस्‍लाम कबूल करने का दबाव तो नहीं डाला?’ उनका जवाब न था और उन्‍होंने कहा कि किसी के कहने या डराने पर उन्‍होंने यह धर्म नहीं चुना है बल्कि यह उनका अपना फैसला है।

कतार में बनाई गई मस्जिद
ब्राजील के इस परिवार से पहले मैक्सिको के एक परिवार ने भी इस्‍लाम स्‍वीकार किया था। कतर के इस्‍लामिक मामलों पर बने मंत्रालय की तरफ से कतार सांस्‍कृतिक गांव मस्जिद जिसे दोहा में स्‍थापित किया गया है, वह इस समय ऐसे वर्ल्‍ड कप फैंस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है जो इस्‍लाम के बारे में जानना चाहते हैं। इस्‍लाम के बारे में इलेक्‍ट्रॉनिक बोर्ड्स 30 भाषाओं में लगे हैं। इन बोर्ड्स को एंट्री गेट पर इस तरह से लगाया गया है कि विजिटर्स को फोन से इन्‍हें देख सकें।

बुकलेट्स देकर प्रचार
साथ ही इस्‍लाम के बारे में बताने वाली बुकलेट्स भी अलग-अलग भाषाओं में छपी है और इन्‍हें लोगों के बीच बांटा जा रहा है।एक पैवेलियन बनाई गई। इस पैवेलियन का मकसद फुटबॉल वर्ल्‍ड कप के दौरान लोगों को इस्‍लाम और इसकी बातों के बारे में बताना है। वर्ल्‍ड कप फैंस को वर्ल्‍ड कप के दौरान पैंगबर मोहम्‍मद के शब्‍दों, उनके कामों और आदतों के बारे में बताया जा रहा है। इन बातों को सड़कों के किनारे दीवारों पर लिखा गया है।



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क्‍या चीन में दोहराया जा रहा तियानमेन कांड? सबसे बड़े प्रदर्शन ने बढ़ाया ‘तानाशाह’ शी जिनपिंग का ब्‍लड प्रेशर

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बीजिंग: चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग, जिन्‍हें दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार किया जाता है, उनकी नींद इन दिनों उड़ी हुई है। तीसरे कार्यकाल की तरफ देखने वाले जिनपिंग और उनकी सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि पिछले कुछ दिनों से जो प्रदर्शन जारी हैं, उन पर कैसे लगाम लगाई जाए। जीरो कोविड नीति के चलते देश में लॉकडाउन लगाया गया और अब जनता इसके खिलाफ सड़क पर उतर आई है। जीरो कोविड पॉलिसी और लॉकडाउन की वजह से जो प्रदर्शन हो रहे हैं, वो पिछले करीब तीन दशकों में सबसे बड़ा प्रदर्शन है। रविवार को जब यह प्रदर्शन हिंसक हो गया तो अथॉरिटीज की धड़कने और बढ़ गईं। लोगों को अब साल 1989 में हुआ तियानमेन स्‍क्‍वॉयर प्रदर्शन याद आ गया है। उस समय भी लोग शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे और लोगों को रोकने के लिए सरकार ने मासूमों पर टैंक तक चढ़वा दिए थे।

प्रदर्शन पर उतरे छात्र
बीजिंग की शिनगुआ यूनिवर्सिटी के हजारों छात्र तानाशाह सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। इन छात्रों के हाथ में कई प्‍लेकार्ड्स हैं जिन पर जिनपिंग के शासन के खिलाफ कई नारे लिखे हैं। छात्र ‘लोकतंत्र’ और ‘अभिव्‍यक्ति की आजादी’ की बात कर रहे हैं। यह यूनिवर्सिटी नया मामला है जहां पर विरोध भड़का है। 5 अप्रैल 1989 को चीन के तियानमेन में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। जून 1989 में जाकर इन प्रदर्शनों पर लगाम लग सकी थी। अब इस यूनिवर्सिटी के हजारों छात्र उसी तर्ज पर सड़क पर उतर आए हैं।चीन में क्‍यों लग रहे हैं ‘जिनपिंग गद्दी छोड़ो’ के नारे, क्‍या जाने वाली है सबसे ताकतवर नेता की कुर्सी!
जिनपिंग जिन्‍होंने साल 2012 में सत्‍ता संभाली थीं, गुस्‍साये छात्र अब उनसे सिहांसन छोड़ने के लिए कहने लगे हैं। रविवार को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर छात्र, कैंटीन के एंट्री गेट पर पहुंचे। देखते ही देखते यहां पर 200 से 300 छात्र इकट्ठा हो गए। ये छात्र राष्‍ट्रगीत गा रहे थे और लॉकडाउन के खिलाफ नारे लगा रहे थे। छात्र चिल्‍ला रहे थे, ‘ नो टू लॉकडाउन्‍स, हमें आजादी चाहिए।’ साथ ही सेंसरशिप के खिलाफ सादा कागज दिखाकर प्रदर्शन कर रहे थे।

विशेषज्ञों को याद आया तियानमेन
शंघाई, नानजिंग और गुआंगजौ में प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई है। स्‍थानीय पुलिसकर्मियों और छात्रों के बीच कई जगह से झड़प की खबरें आई हैं। ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ग्‍लोबल हिस्‍ट्री के प्रोफेसर पीटर फ्रैंकओपैन ने चेतावनी दी है कि सरकार इससे भी ज्‍यादा कड़े कदम उठाकर इन प्रदर्शनकारियों को जवाब देने की तैयारी कर चुकी है।

उन्‍होंने कहा, ‘सन् 1989 में हुए तियानमेन कांड के बाद यह सबसे गंभीर स्थिति है। यह प्रदर्शन रुकेंगे और स्थिति वापस से सामान्‍य होगी, यह कहना मुश्किल है। अब कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा, ऐसा लगने लगा है। और कोई नहीं जानता है कि अब आगे क्‍या होगा।’ चीन पर बने अंतर-संसदीय गठबंधन से जुड़े ल्यूक डी पुलफोर्ड ने कहते हैं, ‘मैं इन वीडियो को देखने और इस पर टिप्‍पणी करने से खुद को दूर नहीं कर सकता हूं। यह बहुत ही हिम्‍मत का काम है और आश्‍चर्यजनक है। लोकतंत्र की मांग कर रहे चीनी छात्र निश्चित तौर पर तियानमेन की याद दिलाते हैं।’
चीन में टूटा सब्र का बांध‍! कोरोना केस 30 हजार के पार लेकिन मंजूर नहीं लॉकडाउन, सड़कों पर भारी प्रदर्शन
शंघाई में भीड़ अनियंत्रित
2.6 करोड़ की आबादी वाले शंघाई में स्थिति बेकाबू है और यहां पर जिनपिंग के इस्‍तीफे की मांग तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर जो वीडियो आ रहे हैं, उनमें साफ नजर आ रहा है कि शंघाई में लगातार तीसरे दिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बसों पर चढ़ाए गए लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शनकारी पुलिस पर हमला कर रहे हैं। यहां पर 300 लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने काली मिर्च का स्‍प्ने तक यूज किया। यहां पर जनता नारे लगा रही थी, ‘जिनपिंग गद्दी छोड़ो, कम्‍युनिस्‍ट पार्टी गद्दी छोड़ो।’ इसके साथ ही लोग चिल्‍ला रहे थे, ‘शिनजियांग को अनलॉक करो, चीन को अनलॉक करो,’ ‘पीसीआर टेस्‍ट नहीं चाहिए, प्रेस की आजादी चाहिए।’
चीन में कोविड वायरस ने करा दिया बवाल, क्या कोरोना का कर्मफल भोग रहा ड्रैगन!
क्‍या है जीरो कोविड पॉलिसी
साल 2020 में कोविड ने दुनिया के कई देशों को शिकार बनाना शुरू कर दिया। उस समय चीन पर लापरवाही बरतने और वुहान को लॉक न करने के आरोप लगे। उसी समय खुद को और ज्‍यादा शर्मिंदगी से बचाने के लिए जिनपिंग ने जीरो कोविड नीति लॉन्‍च की थी। इस नीति के तहत बड़े पैमाने पर टेस्टिंग होती है, कड़े आइसोलेशन नियम लगाए जाते हैं, यात्रा पर प्रतिबंध लग जाते हैं और लोकल लॉकडाउन तक लगाया जाता है। चीन का मानना है कि जब तक कोविड का एक भी केस रहेगा, यह नीति लागू रहेगी। जिनपिंग सरकार की मानें तो यह पॉलिसी पूरी तरह से विज्ञान के नियमों पर आधारित है।



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कभी भी फट सकता है यह ज्वालामुखी, लगातार उगल रहा गैस और राख

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Image Source : AP
ज्वालामुखी की प्रतीकात्मक फोटो

Volcano of Ecuador Can Erupt Anytime: ज्वालामुखी विस्फोट को आपने भले कभी देखा नहीं हो, लेकिन इसके बारे में पढ़ा और सुना जरूर होगा। ज्वालामुखी विस्फोट होने के खतरे से भी आप वाकिफ होंगे। दरअसल जब कभी ज्वालामुखी विस्फोट होता है तो वह भारी मात्रा में लावा और राख उगलता है। इससे आसपास की धरती आग की तरह धधक कर पिखलने लगती है। साथ ही भारी मात्रा में धुआं और लावे का गुबार उठता है। इससे धरती की प्लेट्स भी इधर-उधर खिसक सकती हैं। यही भूकंप का बड़ा कारण भी बनता है। हम आपको एक ऐसे ही ज्वालामुखी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो फटने के कगार पर है।

इक्वाडोर का कोटोपेक्सी ज्वालामुखी कभी भी फट सकता है। यह लंबे समय से गैस, जलवाष्प उत्सर्जन और राख उगल रहा है। इसके साथ ही साथ यहां भूकंपीय गतिविधि में वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार इक्वाडोरन जियोफिजिकल इंस्टीट्यूट ने कहा कि रविवार सुबह 5.40 बजे ज्वालामुखी के पास निगरानी कैमरों ने क्रेटर के ऊपर 1.8 किमी तक एक कॉलम देखा। कहा गया कि राख गिरने से राजधानी क्विटो के दक्षिण और आसपास की घाटियां प्रभावित हुई हैं।

ज्वालामुखी वाले क्षेत्रों में कर्फ्यू


संस्थान ने कहा, “उचित उपाय करने और आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी का पालन करने की सिफारिश की जाती है।” 23 अक्टूबर को येलो अलर्ट जारी किया गया था, जिसका मतलब है मध्यम जोखिम। यह अलर्ट ज्वालामुखी के पास के क्षेत्रों में लागू है, जो सक्रिय है। हालांकि गनीमत है कि यह अभी तक फटा नहीं है। यह ज्वालामुखी समुद्र तल से 5,897 मीटर ऊंचाई पर है, जो देश में दूसरा सबसे ऊंचा ज्वालामुखी है। ज्वालामुखी का अंतिम बड़ा विस्फोट 26 जून, 1877 को हुआ था। 2015 में भी इस ज्वालामुखी में नई गतिविधियां देखी गई थीं, लेकिन यह फटा नहीं था। अब यही ज्वाला मुखी एक बार फिर से गैस और राख उगल रहा है। इससे लोगों में दहशत बढ़ती जा रही है।

 

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