Connect with us

International

दुनिया के हर कंप्यूटर की पहचान रही है ये ‘तस्वीर’, डिलीवरी कंपनी ने भी ले जाने से कर दिया था मना, ये है इसकी रोमांचक कहानी

Published

on


वॉशिंगटन: कुछ साल पहले तक जब आप विंडो एक्सपी (Windows XP) का इस्तेमाल करते रहे होंगे तो आपने नीले आसमान और हरे रंग के पहाड़ का डिफॉल्ट वॉलपेपर को देखा होगा। हो सकता है कि इसे आज तक आप एक कंप्यूटर के जरिए बनाई गई तस्वीर मान रहे हों, लेकिन ये तस्वीर कंप्यूटर की बनाई हुई नहीं है। इस तस्वीर में दिखने वाली जगह सच में है। इस तस्वीर को कई बार दोबारा खींचने की कोशिश हुई, लेकिन ये कभी वैसी न आ सकी। आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी।

इस तस्वीर का नाम ब्लिस (Bliss) है। इसे 1996 में अमेरिकी फोटोग्राफर चार्ल्स ओ रियर (Charles O’Rear) ने खींचा था। ये जगह कैलिफोर्निया की नापा वैली है। नापा वैली वाइन और उसे बनाने के लिए उगाए जाने वाले अंगूरों के लिए मशहूर हैं। चार्ल्स इस रास्ते से अपनी गर्लफ्रेंड (अब पत्नी) से मिलने जा रहे थे, तभी उन्होंने इस खूबसूरत नजारे को देखा। उन्होंने देखा कि आसमान पूरी तरह नीला है और उसमें कुछ बादल हैं। जमीन अंगूरों की बेल के कारण हरी भरी है जो किसी सीनरी की तरह दिखती है।

विंडो XP के लॉन्च के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने चुनी तस्वीर
चार्ल्स ने जब यह सीन देखा तो उन्होंने अपनी गाड़ी रोक दी। 1980 के मामिया RZ67 SLR कैमरा के जरिए उन्होंने ये फोटो खींची। बाद में उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की एक वेबसाइट कॉरबिस पर इस तस्वीर को अपलोड कर दिया। यहां लोग तस्वीरों को अपने इस्तेमाल के लिए खरीद सकते थे। साल 2000 में जब विंडो XP को लॉन्च से पहले माइक्रोसॉफ्ट ने बैकग्राउंड इमेज के लिए कॉरबिस को खंगाला। इसके बाद उन्होंने चार्ल्स की तस्वीर को डिफॉल्ट वॉलपेपर के लिए सेलेक्ट कर लिया।
Secrets of Airlines: हवाई जहाज लैंड करने से पहले एयर होस्टेस क्यों बंद कर देती हैं लाइट? रहस्य जान कर घूम जाएगा सिरखुद जाकर दी निगेटिव
माइक्रोसॉफ्ट इस तस्वीर निगेटिव चाहता था। आज से 20 साल पहले किसी तस्वीर को भेजना ई-मेल की तरह आसान नहीं था। जब चार्ल्स ने माइक्रोसॉफ्ट को अपनी तस्वीर की निगेटिव भेजनी चाही तो कोरियर कंपनी ने उसे ले जाने से मना कर दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि चार्ल्स को माइक्रोसॉफ्ट से एक बड़ी धनराशि मिलने वाली थी, इस हिसाब से निगेटिव की वैल्यू बहुत ज्यादा हो गई थी। इस निगेटिव के खो जाने पर कोरियर कंपनी को इंश्योरेंस के रूप में एक बड़ी रकम चुकानी पड़ती। लगातार समय बीत रहा था ऐसे में फोटोग्राफर ओ रियर हवाई जहाज से माइक्रोसॉफ्ट को निगेटिव देने पहुंचे।



Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

International

Pakistan Army India: बालाकोट… पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए खतरा बना भारत! परमाणु बम की बात क्यों कर रहे ना’पाक’ सैन्य एक्सपर्ट

Published

on

By


इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तानी सेना के मुखिया जनरल असीम मुनीर सत्‍ता संभालने के बाद ही भारत को गीदड़ भभकी देने में जुट गए हैं। जनरल मुनीर ने कहा कि अगर भारत जंग शुरू करता है तो हम करारा जवाब देंगे। जनरल मुनीर चाहे जो भी धमकी दें लेकिन पाकिस्‍तानी सेना के ही विशेषज्ञ यह खुलकर मानने लगे हैं कि मोदी राज में भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए बड़ा खतरा बन गया है। पाकिस्‍तानी सेना जुड़े रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि सर्जिकल स्‍ट्राइक, बालाकोट जैसी कार्रवाई‍यों ने भारत ने अब पाकिस्‍तान को अपने अस्तित्‍व को बचाने के लिए कठिन विकल्‍प चुनने को मजबूर कर दिया है।

पाकिस्‍तान की आजादी पर आयोजित इस्‍लामाबाद कान्‍क्‍लेव 2022 चर्चा में पाकिस्‍तान के पूर्व ज्‍वाइंट चीफ ऑफ स्‍टॉफ कमिटी रिटायर जनरल जुबैर हयात ने अपने भाषण में कहा कि भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व को स्‍वीकार नहीं करता है और विभिन्‍न मोर्चों पर हमारे के लिए चुनौती पेश करता है। इस वजह से भारत का खतरा अभी खत्‍म नहीं हुआ है। जुबैर हयात ने कहा कि भारत के नेता भी 1947 के बंटवारे को ऐतिहासिक गलती मानते हैं। जुबैर ने भारत के सर्जिकल स्‍ट्राइक और साल 2019 में ऑपरेशन बालाकोट का भी जिक्र किया।
जनरल जुबैर ने कहा कि पाकिस्‍तान की धरती पर पहली बार हमला किया गया। उन्‍होंने ब्रह्मोस मिसाइल के दुर्घटनावश पाकिस्‍तान में गिरने का भी उल्‍लेख किया। बांग्‍लादेश के जन्‍म पर जनरल जुबैर की हताशा साफ झलकी। उन्‍होंने रिटायर जनरल बाजवा के उस बयान से अपनी सहमति जताई जिसमें उन्‍होंने कहा था कि पूर्वी पाकिस्‍तान में हुई हार सेना के कारण नहीं बल्कि राजनीतिक नेताओं की वजह से हुई थी। बता दें कि जनरल बाजवा के बयान को खुद उन्‍हीं के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी खारिज कर चुके हैं।

पाकिस्‍तान के एयर यूनिवर्सिटी इस्‍ला‍माबाद में विशेषज्ञ डॉक्‍टर आदिल सुल्‍तान ने कहा कि विदेशी माहौल ऐसा है कि पाकिस्‍तान को आर्थिक संकट के बाद भी परमाणु और परंपरागत हथियारों पर अपना फोकस बरकरार रखना होगा। सुल्‍तान ने कहा कि भारत बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम, एंटी सैटलाइट वेपन, हाइपरसोनिक मिसाइल, एक साथ कई परमाणु बम ले जाने वाली मिसाइल, पनडुब्‍बी से दागे जाने वाली मिसाइल जैसी नई तकनीक को शामिल कर रहा है। यह पाकिस्‍तान की प्रतिरोधक क्षमता की परेशानी को बढ़ाएगा। वहीं पाकिस्‍तानी लेखक जावेद जब्‍बार ने सलाह दी कि पाकिस्‍तान को अपनी जनसंख्‍या की बढ़त को कंट्रोल करने की जरूरत है।



Source link

Continue Reading

International

Passport Ranking India: पाकिस्‍तान के लिए एक और शर्म का पल, दुनिया में सबसे खराब पासपोर्ट, जानिए क्‍या है भारत का हाल

Published

on

By


Pakistan India Passport Ranking: पाकिस्‍तान (Pakistan) जो दुनिया के एक खतरनाक देश में शामिल है, अब उसका पासपोर्ट भी अपनी साख गंवा चुका है। यहां तक कि यूएई का पासपोर्ट भी अब उससे आगे है। एक सर्वे की मानें तो पाकिस्‍तानी पासपोर्ट दुनिया में सोमालिया के बराबर रैंकिंग रखता है। उससे नीचे सीरिया जैसे ही देश हैं।

 



Source link

Continue Reading

International

Pakistan Food Crisis: कंगाल पाकिस्‍तान के पास सब्जियां खरीदने के पैसे नहीं, बंदरगाह पर सड़ रहा टनों प्‍याज

Published

on

By


कराची: पाकिस्‍तान की सरकार इस समय मुश्किल में है। वह यह तय नहीं कर पा रही है कि देश में जारी खाद्यान्‍न आपूर्ति संकट का समाधान करे या फिर विदेशी मुद्रा भंडार बचाए। कराची बंदरगाह पर इस समय सैंकड़ों ऐसे कंटेनर्स यूं ही पड़े हैं जिन पर सब्जियां लदी हुई हैं। पाकिस्‍तान के अखबार द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की तरफ से बताया गया है कि प्‍याज के 250 कंटेनर्स जिनकी कीमत 107 लाख डॉलर है, 816,480 डॉलर की कीमत वाली अदरक का कंटेनर और 2.5 लाख डॉलर वाले लहसुन के कंटेनर बंदरगाह पर ऐसे ही पड़े हैं। व्‍यापारी परेशान हैं और उन्‍हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्‍या किया जाए। अखबार की मानें तो 0.6 मिलियन टन सोयाबीन भी ऐसे ही अटका है क्‍योंकि सरकार की तरफ से साख पत्र जारी नहीं किया जा रहा है।

पहुंच से बाहर प्‍याज
सीमित साख पत्र की वजह से इन कंटेनर्स को ऐसे ही पड़े रहने दिया जा रहा है। प्‍याज के कंटेनर्स कराची बंदरगाह के कई टर्मिनल्‍स पर पड़े हुए हैं। देश के बैंक विदेशी मुद्रा के अभाव में साख पत्र जारी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से कंटेनर्स को ऐसे ही पड़े रहने दिया जा रहा है। पाकिस्‍तान फ्रूट एंड वेजीटेबल एक्‍सपोटर्स इंपोटर्स एंड मर्चेंट्स एसोसिएशन (PFVA) के सदस्‍य वाहीन अहमद की मानें तो साख पत्रों को जारी करने में हो रही देरी की वजह से कंटेनर्स की कीमत पर अलग असर पड़ रहा है, टर्मिनल और शिपिंग चार्जेस बढ़ जाएंगे। प्‍याज के कंटेनर्स पहले से ही महंगे हैं और इसकी वजह से एक आम आदमी पर बुरा असर पड़ने वाला है। आम आदमी की पहुंच से ही प्‍याज बाहर हो जाएगा।Pakistan Army : भारत नहीं पाकिस्‍तानी सेना के सामने ये हैं 5 बड़े खतरे, भारतीय सेना को गीदड़भभकी दे रहे जनरल असीम मुनीर
270 रुपए किलो प्‍याज
उन्‍होंने कहा कि आज प्‍याज 175 रुपए किलो थोक बाजार में और खुदरा बाजार में 250 से 270 रुपए किलो तक बिक रहा है। क्‍लीयरेंस में देरी से प्‍याज की कीमतें और बढ़ जाएंगी। सब्जियां भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएंगी। फेडरेशन ऑफ पाकिस्‍तान चैंबर्स आफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री (FPCCI) के कार्यवाहक प्रेसीडेंट सुलेमान चावला ने भी इस पर चिंता जताई है।
Indian Navy Day: भारत के विक्रांत को डुबोने आई पाकिस्‍तान की पनडुब्‍बी गाजी, कैसे समंदर में समाई, 1971 के जंग की शौर्य गाथा
उन्‍होंने कहा है कि पोल्‍ट्री और डेयरी प्रॉडक्‍ट्स पहले ही आम आदमी खरीद नहीं पा रहा है।कुछ ही दिनों पहले कीमतों में थोड़ी स्थिरता आई थी लेकिन अब इन हालातों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। उनकी मानें तो आयात काफी महंगा है और टर्मिनल चार्जेस भी दोगुने हो जाएंगे।

डॉलर न होने का खामियाजा
डॉलर देश में है नहीं और इसकी वजह से स्थिति बेकाबू हो सकती है। आयातकों को इसकी वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जिसकी भरपाई भी मुश्किल हो जाएगी। उन्‍होंने सरकार से मांग की है कि इस मसले को तेजी से सुलझाया जाए ताकि देश में गहराते खाद्यान्‍न संकट को टाला जा सके। चावला ने यह भी कहा कि अमेरिका से आयात होने वाले सोयाबीन को लेकर कभी कोई लाइसेंसिंग और अनुवंशिक संशोधन कोई मुद्दा नहीं रहा है। पिछले कई सालों से देश के वही सप्‍लायर्स सोयाबीन का आयात कर रहे हैं।



Source link

Continue Reading