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जूही चावला की खूबसूरत और ग्लैमरस बेटी जाह्नवी एक्टिंग नहीं क्रिकेट की हैं दीवानी, PHOTOS देख कर फैंस बोले- मम्मी की टू कॉपी

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जूही चावला की खूबसूरत और ग्लैमरस बेटी जाह्नवी एक्टिंग नहीं क्रिकेट की हैं दीवानी

नई दिल्ली :

जूही चावलाअपने समय की स्टार एक्ट्रेसेस में से एक रही हैं. उन्होंने उस दौर के लगभग सभी बड़े स्टार्स के साथ काम किया और बाद में बिजनेसमैन जय मेहता से शादी कर लिया. उनके दो बच्चे हैं, बेटी जाह्नवी मेहता और बेटा अर्जुन मेहता. उनके बच्चों को लाइम लाइट में रहना पसंद नहीं, हालांकि कुछ मौकों पर उनकी बेटी नजर आईं और फैंस को बेहद पसंद आईं और काफी चर्चा में रहीं. लुक में वह बेहद खूबसूरत हैं और काफी हद तक दिखने में वह अपनी मम्मी जैसी हैं. हालांकि जाह्नवी मेहता मम्मी की तरह एक्टिंग में करियर नहीं बनाना चाहती, उन्हें स्पोर्ट्स पसंद है और वह राइटर बनना चाहती हैं.

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एक इंटरव्यू में जूही चावला ने बताया कि जाह्नवी को पढ़ने का बहुत शौक है. जाह्नवी को पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा कुछ पसंद है तो वह है किताबें. जूही ने बताया था कि उनकी बेटी जाह्नवी एक राइटर बनना चाहती हैं, हालांकि एक समय में वह मॉडलिंग भी करना चाहती थी.

जूही ने एक पोस्ट में लिखा है, जब वह छोटी बच्ची थी, तभी से क्रिकेट देखना शुरू कर दिया. कमेंटेटरों की बात ध्यान से सुनकर वह खेल की पेचीदगियों को समझने लगी. जब वह लगभग 12 वर्ष की थी, तब हम घूमने गए थे. होटल में एक मोटी सी कॉफी टेबल बुक थी,  उसमें दुनिया के सभी क्रिकेटरों के जीवन की कहानियां, उपलब्धियां, रिकॉर्ड था. होटल में बिताए कुछ दिनों में उसने पूलसाइड बैठ कर उस किताब को पढ़ा. यह इतना असामान्य था, कौन सी 12 साल की लड़की ऐसा करती है. इसे देख कर मैं हैरान रह गई. समय के साथ खेल में उसकी दिलचस्पी बढ़ती गई.

जाह्नवी मेहता आर्यन खान के साथ आईपीएल ऑक्शन में नजर आईं थीं, तब वह काफी चर्चा में आ गई थीं. सोशल मीडिया पर दोनों की फोटो देख कर यूजर्स दोनों को जुनियर जूही और जुनियर शाहरुख कहने लगे थे. जूही चावला भी कोलकाता नाइट राइडर्स की की टीम का हिस्सा हैं, ऐसे में जूही की जगह जाह्नवी क्रिकेट टीम का काम देख रही थीं. जाह्नवी फिलहाल विदेश में पढाई कर रही हैं. 

वर्कफ्रंट की बात करें तो जूही चावला को हाल ही में वेब शो हश हश में देखा गया था. उन्होंने सोहा अली खान, कृतिका कामरा, करिश्मा तन्ना और शाहाना गोस्वामी के साथ अपना ओटीटी डेब्यू किया. उन्हें आखिरी बार ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म शर्माजी नमकीन में देखा गया था.

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21 साल के हुए अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा, डैशिंग पर्सनालिटी देख कर फैंस बोले- यह तो लुक में एकदम अपने नाना पर गया है 

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21 के हुए अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा

नई दिल्ली :

Amitabh Bachchan Grandson Agastya Nanda: अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने हाल ही में अपना 21वां जन्मदिन मनाया है. इस खास मौके को उनके परिवार ने काफी स्पेशल तरीके से सेलिब्रेट किया. सोशल मीडिया पर मम्मी श्वेता नंदा, बहन नव्या नवेली और मामा अभिषेक बच्चन ने उनकी तस्वीरें शेयर कर के उन्हें बर्थडे विश किया. आमिताभ बच्चन बॉलीवुड के शहंशाह कहे जाते हैं और आज भी उनकी स्टारडम कम नहीं हुई. एक के बाद एक उनकी लगातार फिल्में रिलीज हो रही हैं. फैंस हमेशा उनके बारे में जानने के लिए एक्साइटेड रहते हैं. फैंस को इंतजार है अब उनके परिवार से उनके नाती अगस्त्य को फिल्मों में देखने का और अब उनका इंतजार खत्म भी होने वाला है. 

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बता दें कि अमिताभ के बाद उनके बेटे अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan) ने भी फिल्मों में करियर बनाया और अपने करियर में कई सारी फिल्में की. अब अमिताभ बच्चन फैमिली के नेक्स्ट जेनरेशन से यानी उनके नाती अगस्त्य नंदा (Agastya Nanda) भी बॉलीवुड में करियर बनाने जा रहे हैं. 

अगस्त्य नंदा अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता बच्चन नंदा और निखिल नंदा के बेटे हैं. वह जोया अख्तर की फिल्म द आर्चीज से शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान और बोनी कपूर की बेटी खुशी कपूर के साथ बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रहे हैं. अमिताभ बच्चन ने अगस्त्य के बॉलीवुड डेब्यू को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा है कि, ‘अगस्त्य तुम्हारी लाइफ का एक नया चैप्टर शुरू हो रहा है और हम सब इस बात को लेकर बेहद खुश हैं. इस फिल्म को नेटफ्लिक्स पर दिखाया जाएगा. अगस्त्य नंदा जहां ‘आर्ची एंड्रयूस’ के किरदार में दिखाई देंगे. वहीं, सुहाना खान वेरॉनिका के किरदार में होंगी. 

अगस्त्य नंदा का जन्म 23 नवंबर 2000 में हुआ था. अगस्त्य ने 2019 में ही लंदन के seven oaks स्कूल से पढ़ाई खत्म की है. श्वेता नंदा ने अगस्त्य की ग्रैजुएशन सेरेमनी की तस्वीर शेयर की थी. लंदन के इसी स्कूल में श्वेता की बड़ी बेटी यानी अगस्त्य की बहन नव्या नवेली नंदा और शाहरुख खान के बच्चे आर्यन खान और सुहाना खान ने भी पढ़ाई की है. अगस्त्य लुक में काफी हद तक अपने नाना और मामा की तरह ही डैसिंग हैं. फिल्म रिलीज बाद देखने वाली बात होगी कि क्या फैंस उन्हें भी उनके नाना की तरह ही प्यार देते हैं. 

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मां का ख्याल रखने के लिए ऑफिस से छुट्टी ली, गूगल ने नौकरी से ही निकाल दिया

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दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल गूगल की ओर से असंवेदनशील तरीके से एक कर्मचारी को नौकरी से निकालने का मामला सामने आया है। गूगल में वीडियो प्रोडक्शन मैनेजर के तौर पर काम करने वाले इस कर्मचारी ने कैंसर से जूझ रहीं अपनी मां का ख्याल रखने के लिए लंबी छुट्टी ली थी। पॉल बेकर नाम के इस कर्मचारी ने अपना अनुभव साझा किया है। बता दें, बीते कुछ दिनों में गूगल के सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी गई है। 

पॉल ने बताया कि वह अपनी मां का ख्याल रखने के लिए छुट्टी पर थे । इस दौरान अचानक उनके लैपटॉप का कनेक्शन कट कर दिया गया और जब उन्होंने अपने पर्सनल कंप्यूटर से लॉगिन की कोशिश की तो पता चला कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। ऐसी ढेरों कहानियां हैं, जिनमें पता चला है कि किस तरह गूगल ने अचानक दर्जनों कर्मचारियों की नौकरी छीनकर उनकी जिंदगी पर असर डाला है। इसी तरह हाल ही में मां बनी एक कर्मचारी को भी निकाल दिया गया है। 

गूगल क्रोम इस्तेमाल करने वालों पर बड़ा खतरा, सरकार ने जारी की चेतावनी

टर्मिनल कैंसर से जूझ रही हैं बेकर की मां 

बेकर ने बताया कि उनकी मां टर्मिनल कैंसर से जूझ रही हैं और और उनका ख्याल रखने के लिए बेकर को करीब एक महीने की छूट लेनी पड़ी। इस छु्ट्टी के दौरान ही उन्हें जानकारी मिली कि कंपनी ने ढेरों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है। बाद में पता चला कि उनकी नौकरी भी गई है और वे अकेले नहीं हैं। कंपनी ने करीब 12 हजार कर्मचारियों को झटके में नौकरी से निकाल दिया है और कंपनी CEO सुंदर पिचाई ने ईमेल में कर्मचारियों को निकाले जाने की जानकारी दी है। 

लिंक्डइन पर नौकरी जाने की जानकारी दी 

वीडियो प्रोडक्शन मैनेजर के पद पर काम करने वाले बेकर ने लिंक्डइन पर लिखा, “12 हजार गूगल कर्मचारियों की नौकरी जाने के बाद ढेरों कहानियां सामने आ रही हैं। मैं अपनी कहानी साझा करने के लिए तैयार हूं। अपने परिवार के सदस्य के टर्मिनल कैंसर के इलाज के चलते मैं केयरर्स लीव पर था। मैं गूगल का करियर और कल्चर दोनों मिस करूंगा।” बेकर ने बताया कि उन्हें हमेशा से ही गूगल के ओवरस्टाफ्ड होने को लेकर चिंता थी। हालांकि, उन्हें अंदाजा नहीं था कि एकसाथ इतने कर्मचारियों की नौकरी जाएगी। 

कब-कहां जाते हैं आप? गूगल को सब पता है, फौरन बदल दें ये सेटिंग्स

नौकरी छीनने वाली अकेली कंपनी नहीं गूगल

गूगल अकेली कंपनी नहीं है, जिसने अपने कर्मचारियों की नौकरी छीनी है। साल की शुरुआत से ही अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य टेक कंपनियां इस तरह के फैसले ले रही हैं। ट्विटर ने केवल एक तिहाई स्टाफ बाकी रखते हुए बाकी सभी को नौकरी से निकाल दिया है और बाकी कर्मचारी भी अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहे हैं।  



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“कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिनका राष्ट्रहित में खुलासा..”: गुप्त रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर बोले कानून मंत्री

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इसी के जवाब में कानून मंत्री रिजिजू ने कहा कि पारदर्शिता के मानक अलग हैं. उन्होंने इंडिया टीवी न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिनका राष्ट्रहित में खुलासा नहीं किया जाना चाहिए और कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिन्हें सार्वजनिक हित में छिपाया नहीं जाना चाहिए.” सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया था कि जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जजों के केंद्र सरकार की खींचतान, जिसमें खुफिया एजेंसियों की आपत्तियां भी शामिल हैं. उससे सुरक्षा प्रतिष्ठान में बेचैनी बढ़ गई है. आपत्तियों को सार्वजनिक न करने और उन खुफिया एजेंसियों की गोपनीयता बनाए रखने की प्रथा रही है जो उच्च न्यायपालिका के पदों के लिए संभावित उम्मीदवारों की छानबीन करती हैं.

इस खुलासे ने सरकार के भीतर बड़ी चिंता पैदा कर दी है, जिसे लगता है कि इसका खुलासा नहीं किया जाना चाहिए था और सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था. कानून मंत्री रिजिजू ने कहा, ‘जब भी मुझे बोलना होगा, मैं कानून मंत्री के रूप में बोलूंगा. हम अपने आदरणीय पीएम की सोच और दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करते हैं, लेकिन मैं यहां यह सब नहीं बता सकता.’ उन्होंने आगे कहा कि वह न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर चर्चा नहीं कर सकते क्योंकि यह एक ‘संवेदनशील मुद्दा’ है, लेकिन जोर देकर कहा कि सरकार “सोच समझ कर निर्णय लेती है और एक नीति का पालन करती है.”

उन्होंने कहा, “न तो सरकार की ओर से और न ही न्यायपालिका की ओर से, ऐसे मामलों को सार्वजनिक तौर पर रखा जाना चाहिए. “न्यायपालिका पर हमले के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर, रिजिजू ने कहा कि उन्होंने कभी भी इसके अधिकारों को कम करने या खराब रोशनी में दिखाने की कोशिश नहीं की, लेकिन वो इस मामले पर प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर हुए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने लोगों को “गलत संदेश” भेजा. उन्होंने पूछा कि पीएम मोदी जी के पिछले साढ़े आठ साल के शासन का एक उदाहरण मुझे बताएं, जब हमने न्यायपालिका के अधिकारों को कम करने की कोशिश की या इसे खराब तरीके से दिखाने की कोशिश की?

मैंने न्यायपालिका के बारे में जो कुछ भी कहा है वह केवल प्रतिक्रिया में था. जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच से कहा गया कि सरकार फाइलों पर बैठी है, तो लोकतंत्र में मेरे लिए जवाब देना जरूरी हो जाता है. असल में हम फाइलों पर नहीं बैठते हैं, लेकिन हम आवश्यकतानुसार प्रक्रिया का पालन करते हैं. अदालतें उन्हें यह महसूस करना चाहिए कि उन्हें ऐसा कुछ भी नहीं कहना चाहिए जिससे लोगों में गलत संदेश जाए.” रिजिजू ने दोहराया कि उन्होंने न्यायपालिका पर कभी हमला नहीं किया, और कहा कि उन्हें “सही तरीके से” कहना था. उन्होंने कहा कि इसे हमले के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए.

हालांकि, रिजिजू ने एक ऐसी रेखा की ओर इशारा किया, जिसे राष्ट्रीय हित में पार नहीं किया जाना चाहिए. “हम सभी न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, और अगर भारतीय लोकतंत्र मजबूत है, तो सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारी न्यायिक संरचना मजबूत और मजबूत है. इसलिए हम कहते हैं, हम न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप नहीं करेंगे और न्यायपालिका को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.” कार्यपालिका और विधायिका के कार्य. बीच में एक ‘लक्ष्मण रेखा’ (विभाजन रेखा) खींची गई है. हमें यह हमारे संविधान से मिली है. यदि कोई पक्ष उस ‘लक्ष्मण रेखा’ को पार नहीं करता है तो यह देश के हित में होगा.

न्यायाधीशों को चुनाव लड़ने या सार्वजनिक जांच का सामना करने की अपनी हालिया टिप्पणी पर, लेकिन वे अपने कार्यों, अपने निर्णयों के माध्यम से जनता की नजर में हैं, उन्होंने कहा कि यह “हजारों” उनसे मिलने और उन्हें यह कहते हुए लिखने के संदर्भ में था. न्यायाधीशों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए.”जवाबदेही होनी चाहिए क्योंकि यह लोकतंत्र है, और लोकतंत्र में राजा नहीं हो सकता. मैं उन्हें बताना चाहता हूं, लोकतंत्र में जनता अंतिम निर्णायक होती है, और संविधान हमारा पवित्र ग्रंथ है. हम बस शासन करते हैं.”

संविधान के अनुसार इसलिए मैंने कहा कि चूंकि न्यायाधीशों को चुनाव नहीं लड़ना होता है, वे नियुक्त होते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका काम अच्छा हो क्योंकि लोग देख रहे हैं.’ सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति में बड़ी भूमिका के लिए दबाव बना रही है, जो कि 1993 से सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम या वरिष्ठतम न्यायाधीशों के पैनल का डोमेन रहा है. यह मुद्दा शीर्ष अदालत द्वारा पीछे धकेलने और यहां तक कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पीछे धकेलने के कारण बढ़ गया है.

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