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जमाल खशोगी हत्याकांड पर बाइडन की सबसे बड़ी पलटी, रिश्तों में खटास फिर भी मोहम्मद बिन सलमान को बचा रहा अमेरिका

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वॉशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने गुरुवार को घोषणा की कि सऊदी अरब के प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को अमेरिका के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या मामले में उनकी भूमिका के लिए मुकदमे से छूट प्राप्त माना जाना चाहिए। यह अमेरिकी सरकार के रुख में एक बड़ा बदलाव है जिसकी वजह से बाइडन को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ सकता है। यह चौंकानेवाला इसलिए भी है क्योंकि राष्ट्रपति जो बाइडन इस नृशंस हत्या को लेकर मोहम्मद बिन सलमान की निंदा के लिए एक जोरदार अभियान चला चुके हैं।

अमेरिकी प्रशासन ने गुरुवार को कहा कि ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के मारे गए स्तंभकार की प्रेमिका और खशोगी के अधिकार समूह ‘डेमोक्रेसी फॉर द अरब वर्ल्ड नाउ’ की ओर से दायर मुकदमे से एमबीएस को राहत मिलनी चाहिए। प्रशासन ने इसके लिए क्राउन प्रिंस की वास्तविक स्थिति और उन्हें हाल में सऊदी का प्रधानमंत्री बनाए जाने का हवाला दिया। बाइडन प्रशासन ने कहा कि उसका यह अनुरोध गैर-बाध्यकारी है और उन्हें राहत दी जाए या नहीं, इस बारे में कोई न्यायाधीश ही आखिरी फैसला करेगा।

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रिश्तों में खटास फिर भी बचाने की गुहार
प्रशासन के इस कदम से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कई अमेरिकी सांसदों का नाराज होना तय है। सऊदी अरब ने देश और विदेश में शांतिपूर्ण आलोचकों के खिलाफ कारावास और अन्य जवाबी कार्रवाई को कड़ा करने समेत तेल उत्पादन में कटौती कर दी है। ओपेक प्लस मीटिंग में लिए तेल उत्पादन कटौती के फैसले ने अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में खटास डाल दी है। विदेश विभाग ने गुरुवार को खशोगी की हत्या में सऊदी क्राउन प्रिंस को अमेरिका की अदालती कार्यवाही से बचाने के आह्वान को पूरी तरह से एक कानूनी निर्णय करार दिया।

इस्तांबुल में हुई थी खशोगी की हत्या
अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार खशोगी की अक्टूबर 2018 में इस्तांबुल में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास के भीतर हत्या कर दी गई थी। इतना ही नहीं, उनके शव को भी दूतावास के अंदर ही गायब कर दिया गया था। इस हत्याकांड के बाद बाइडन ने खुलकर बिन सलमान की आलोचना की थी और उनसे सीधे बात करने से इनकार कर दिया था। वहीं तुर्की ने भी खशोगी की हत्या को लेकर सऊदी के कई नागरिकों को आरोपी बनाया था।



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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज, लोगों के सपोर्ट में बोला UN- ”प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करना सीखे चीन’

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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज

चीन में कोरोना के चलते लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। एक तो कोरोना का प्रकोप ऊपर से सरकार की सख्ती और ना मानने पर पुलिस की कार्रवाई ने लोगों को प्रदर्शन करने पर मजूबर कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चीन को दो टूक सुनाया है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने चीन से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए लोगों को हिरासत में नहीं लेने का आग्रह किया है।

‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ का विरोध 

चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। वहीं कोरोना के चलते पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। 

लोगों को पुलिस की कारों में बांधा गया

शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। 

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दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी फटा, अमेरिका में बह रही आग की नदियां, आसमान हुआ लाल

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World Largest Volcano: दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिया ज्वालामुखी हवाई का मौना लोआ है। ये ज्वालामुखी रविवार को फट गया है। अभी ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा शिखर पर ही है। इससे स्थानीय लोगों को कोई खतरा नहीं है। यूनाइटेट स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे लगातार लावा के बहाव की निगरानी कर रहा है।

 



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चीन में ‘A4 क्रांति’, क्यों सादे कागज लहरा कर जिनपिंग की सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन?

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बीजिंग: चीन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कागज के खाली पन्ने एक प्रतिष्ठित वस्तु बन गए हैं, जिसे कई लोग ‘श्वेत पत्र क्रांति’, ‘कोरी चादर क्रांति’ या ‘ए4 क्रांति’ कहते हैं। देशभर में विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कागज की एक कोरी चादर पकड़े देखा गया। कुछ का कहना है कि यह सेंसरशिप से बचने का एक तरीका है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वायरल वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है, जिसमें नानजिंग के कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक महिला कोरे कागज के एक लंबे टुकड़े का एक छोर पकड़े हुई है और दूसरे छोर को एक अज्ञात व्यक्ति पकड़े हुआ है।

उस रात बाद के एक अन्य वीडियो में कैंपस में दर्जनों और छात्रों को श्वेत पत्र के टुकड़ों को पकड़े हुए देखा गया, जो मौन खड़े थे। सप्ताहांत में अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए। शनिवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला ने बीबीसी को बताया, ‘‘निश्चित रूप से कागज पर कुछ भी नहीं लिखा था, लेकिन हम जानते हैं कि यह किस चीज का प्रतीक है।’’

छात्रों के बीच प्रचलित है विरोध
कागज निर्माता शंघाई एम एंड जी स्टेशनरी ने उन अफवाहों का खंडन किया है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सभी ए4 पेपर को अलमारियों से हटा लिया है। कागज के खाली टुकड़े चीन में प्रदर्शनकारियों के लिए अवज्ञा का प्रतीक बन गए हैं, खासकर विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच। वे देश में लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं।

चीन में हो रहा मौन विरोध
यह मौन विरोध का एक रूप है, लेकिन उनके लिए सेंसरशिप या गिरफ्तार होने से बचने का एक तरीका है। सोमवार को कंपनी ने शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर एक आपातकालीन नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि एक जाली दस्तावेज ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। बीबीसी ने बताया कि एम एंड जी के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। उत्पादन और संचालन कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।



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