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घर-घर गांजा पहुंचाएगी ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनी, ग्राहकों के पास होगा मेन्यू, इस देश में शुरू हुई अनोखी सर्विस

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टोरंटो : ऑनलाइन फूड डिलिवरी की सुविधा न सिर्फ ग्राहकों बल्कि कई रेस्तरां के लिए भी फायदेमंद साबित हुई। अब इसका दायरा बढ़ता जा रहा है। एक ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनी पहली बार मारिजुआना की डिलिवरी करने जा रही है और इस सुविधा की शुरुआत कनाडा में होगी। कनाडा में लोग अब ऐप से ऑनलाइन मारिजुआना ऑर्डर कर सकते हैं। इसके लिए जब ड्राइवर उनके दरवाजे पर पहुंचेगा तो ग्राहकों को यह साबित करना होगा कि वे कम से कम 19 साल के हैं।

ऑनलाइन ऑर्डर करते समय मेन्यू में मारिजुआना के कई उत्पाद शामिल होंगे, जैसे चॉकलेट और कैंडीज। ऑनलाइन डिलिवरी कंपनी का कहना है कि वह मारिजुआना लेने के एक ‘सुरक्षित और सुविधाजनक’ तरीका मुहैया कराएगी जो ब्लैक मार्केट को खत्म कर देगा। कई लोग इसका समर्थन कर रहे हैं तो कुछ मारिजुआना के इस्तेमाल के खिलाफ हैं। शोधकर्ता चेतावनी देते हैं कि मारिजुआना का बार-बार इस्तेमाल युवाओं में मस्तिष्क के विकास को बाधित कर सकता है।

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अमेरिकी बाजार में उतरने का इरादा नहीं
इसकी लत से डिप्रेशन का खतरा या करियर और संबंधों में समस्याएं पैदा हो सकती हैं। डेलीमेल से बात करते हुए कंपनी ने कहा कि उनका इरादा अमेरिकी बाजार में उतरने का नहीं है, जहां 19 राज्यों में इसके इस्तेमाल को वैध कर दिया गया है। आधिकारिक अनुमान बताते हैं कि 48.2 मिलियन से अधिक अमेरिकी हर साल मारिजुआना का सेवन करते हैं। युवा वयस्कों में यह आंकड़ा बढ़ गया है क्योंकि 19 राज्यों ने अब इसे इस्तेमाल के लिए वैध कर दिया है।

कम हो सकता है आईक्यू
मारिजुआना नशीला पदार्थ होता है जिसका धू्म्रपान के रूप में या गोली खाकर सेवन किया जाता है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से मस्तिष्क का विकास प्रभावित होता है और आईक्यू कम हो जाता है। कई मामलों में यह डिप्रेशन और दूसरी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बनता है। कनाडा में इसकी डिलिवरी लेने के लिए सभी ग्राहकों को अपनी आईडी दिखानी होगी जिसमें उनकी उम्र कम से कम 19 साल होनी चाहिए।



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नेपाल चुनाव में ओली को एक और बड़ा झटका, सभी 7 राज्‍यों में सरकार बना सकती है नेपाली कांग्रेस

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काठमांडू: नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को एक और बड़ा झटका लगा है। नेपाल की संघीय सरकार की तरह से प्रांतों में भी केपी ओली की पार्टी हार की ओर बढ़ रही है। नेपाली कांग्रेस के नेतृत्‍व वाला गठबंधन सभी 7 प्रांतों में बहुमत की ओर बढ़ रहा है। विश्‍लेषकों का कहना है कि अगर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्‍व वाला गठबंधन केंद्र में सरकार बना लेता है तो प्रांतों में भी पैकेज डील के तहत इसी गठबंधन की सरकार बन सकती है।

नेपाली कांग्रेस के गठबंधन ने दावा करना शुरू कर दिया है कि 5 दलों का उनका अलांयस संघीय सरकार बनाएगा। नेपाल कांग्रेस के नेता और गृहमंत्री बालकृष्‍ण खांड ने कहा कि 5 दलों वाला गठबंधन संघीय सरकार बनाएगा और यह गठबंधन अगले 5 साल तक चलेगा। शनिवार को प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और और पुष्‍प कमल दहल के बीच बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने गठबंधन को जारी रखने का फैसला किया और अगले कदम पर चर्चा की।
नेपाल में सरकार बनाने की कोशिशें हुईं तेज, शेर बहादुर देउबा फिर बन सकते हैं PM, गठबंधन से मिला समर्थन
रिजल्‍ट पर भारत, चीन और अमेरिका तीनों की ही नजरें

काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह होता है तो ताजा चुनावी नतीजों से इस बात के ज्‍यादा चांस हैं कि नेपाली कांग्रेस सभी 7 प्रांतों में सरकार बना सकती है। प्रचंड की पार्टी सीपीएन माओवादी के नेता गनेश शाह ने कहा कि 5 दलों के गठबंधन में जनता समाजवादी पार्टी के नेता उपेंद्र यादव भी शामिल होंगे। उन्‍होंने कहा कि दोनों ही मधेसी पार्टियों की मदद से हम आसानी से सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल कर लेंगे।

नेपाली कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले इस गठबंधन में प्रधानमंत्री देउबा, सीपीएन माओवादी के नेता प्रचंड, सीपीएन यूनिफाइड सोसलिस्‍ट के माधव नेपाल, महंत ठाकुर की पार्टी लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी और चित्र बहादुर के नेतृत्‍व वाला राष्‍ट्रीय जनमोर्चा शामिल है। सत्‍तारूढ़ गठबंधन को अब तक चुनाव में 82 सीटें मिली हैं। वहीं केपी ओली के गठबंधन को सीधे हुए चुनाव में 52 सीटें मिली हैं। इस चुनाव पर भारत, चीन और अमेरिका तीनों की ही नजरें हैं। चीन ने चुनाव से पहली ओली और प्रचंड को फिर से मिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई है।



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भारत के दो दोस्‍तों ने निभाई दोस्‍ती, हिंद महासागर पर खास मीटिंग से दूर रहकर चीन को दिखाया आईना

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चीन (China) ने 21 नवंबर को हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में आने वाले 19 देशों के साथ एक खास मीटिंग की। इस मीटिंग में भारत तो इनवाइटेड नहीं था लेकिन उसके दो दोस्‍तों ने भी इससे बाहर रहना बेहतर समझा। ऑस्‍ट्रेलिया की तरफ से भारत के साथ एक खास दोस्‍ती निभाई गई और मीटिंग का बहिष्‍कार किया गया।

 



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इन्होंने बना दिया दुनिया में लंबी अवधि तक राष्ट्रपति बने रहने का विश्व रिकॉर्ड, फिर बंपर मतों से जीते

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Image Source : AP
तियोदोरो ओबियांग (इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति)

Longest Serving President in the World: क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे लंबी अवधि तक निर्वाचित राष्ट्रपति बने रहने का रिकॉर्ड किसके पास है?…क्या आप जानते हैं कि हर बार चुनाव में एक ही शख्स आखिर किन वजहों से राष्ट्रपति के चुनाव में बार-बार जीत जाता है? …आखिर कुछ तो वजह होगी जो यह व्यक्ति हर बार चुनाव में विजय पताका फहराता आ रहा है। इस बार वर्ष 2022 के चुनाव में भी जीत हासिल कर 43 वर्षों तक लगातार राष्ट्रपति बने रहने का दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। आइए आपको बताते हैं कि यह शख्स है कौन?

अफ्रीकी देश इक्वेटोरियल गिनी का नाम आपने शायद सुना होगा। यह देश 1968 में स्पेन से आजाद हुआ था। इस देश के पहले राष्ट्रपति फ्रांसिस्को मैकियास थे। वर्ष 1979 में पहली बार तियोदोरो ओबियांग अपना चाचा फ्रांसिस्को का तख्तापलट कर सत्ता में आ गए। तब से वह लगातार राष्ट्रपति चुने जा रहे हैं। हर बार उन्हें 90 फीसदी से भी अधिक वोट मिलता है। वह करीब 43 वर्षों से इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति हैं। इस बार के चुनाव में भी ओबियांग को 95 फीसदी मत मिले हैं।

लगातार छठवीं बार ओबियांग ने जीता चुनाव


वर्ष 2022 में ओबियांग ने लगातार छठवीं बार राष्ट्रपति का चुनाव जीता है। इक्वोटोरियल गिनी को जब से आजादी मिली है तब से अब तक केवल दो ही राष्ट्रपति हुए हैं। ओबियांग दूसरे और मौजूदा राष्ट्रपति हैं। पिछले 43 वर्षों से उनका देश पर शासन है। वह काफी सख्त मिजाज के माने जाते हैं। उनका अपने विरोधियों पर पूर्ण नियंत्रण है। उनकी अफ्रीकी देशों में भी काफी अच्छी पकड़ बताई जाती है। ओबियांग वर्ष 2011 से 2012 तक अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

14 लाख है देश की आबादी

इक्वेटोरियल गिनी आबादी के लिहाज से बहुत छोटा देश है। यहां की कुल आबादी केवल 14 लाख है। बावजूद यहां के लोग गरीबी का जीवन जी रहे हैं। इस देश में लोगों की आय का कोई खास साधन नहीं है। वर्ष 1996 में यहां तेल का विशाल भंडार खोजा गया था। मगर उसका फायदा सिर्फ राजनीतिक लोगों को ही मिला। इससे उनकी आर्थिक तरक्की हुई, लेकिन जनता की हालत जस की तस है। यहां की जनता बदहाली की जिंदगी जी रही है। ओबियांग तानाशाह किस्म के बताये जाते हैं, उनका विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया जाता है।

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