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तुर्की में बीते 24 घंटे में आए तीन शक्तिशाली भूकंप, 1900 से अधिक लोगों की मौत, 10 बातें

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झटकों से सन्न तुर्की के लोग बर्फ से ढके गलियों में पजामे में भागते दिखे.

इस्तांबुल:
तुर्की और सीरिया में सोमवार की अहले सबुह अत्यधिक शक्तिशाली भूकंप आया. भूकंप के कारण 1,904 लोग जो सो रहे थे के मारे जाने की खबर है. तेज झटकों के कारण इमारतें ध्वस्त हो गईं. ग्रीनलैंड तक झटको को महसूस किया गया. 

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  1. रात को आए भूकंप की तीव्रता 7.8 मैग्निट्यूड की थी. वहीं इसके कुछ घंटे बाद दो और शक्तिशाली भूकंप आए, जिसने सीरिया और अन्य संघर्षों में गृह युद्ध से भागे लाखों लोगों से भरे क्षेत्र तुर्की के प्रमुख शहरों के तहस नहस कर दिया. 

  2. सीरिया के राष्ट्रीय भूकंप केंद्र के प्रमुख रायद अहमद ने इसे “केंद्र के इतिहास में दर्ज सबसे बड़ा भूकंप” कहा. स्टेट मीडिया और मेडिकल सूत्रों ने कहा कि सीरिया के बागी और सरकार शासित क्षेत्रों में कम से कम 783 लोगों के मारे जाने की सूचना है. 

  3. इधर, राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के अनुसार, तुर्की में 1,121 लोगों की मौत हो गई, जो सत्ता में अपने दो दशकों की सबसे बड़ी आपदाओं को झेल रहे हैं. 

  4. प्रारंभिक भूकंप के बाद 50 से अधिक आफ्टरशॉक्स आए, जिनमें 7.5 और 6-तीव्रता के झटके शामिल थे. इसने सोमवार दोपहर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच क्षेत्र को झटका दिया. 

  5. एएफपी के संवाददाताओं और प्रत्यक्षदर्शियों ने दूसरे भूकंप के झटकों को तुर्की की राजधानी अंकारा और इरबिल के इराकी कुर्दिस्तान शहर तक में महसूस किया. 

  6. झटकों से सन्न तुर्की के लोग बर्फ से ढके गलियों में पजामे में भागते दिखे. इस दौरान उन्होंने बचावकर्मियों को क्षतिग्रस्त घरों के मलबे को अपने हाथों से खोदते हुए देखा. 

  7. तुर्की के कुर्द शहर (अस्पष्ट) दियारबकीर में जीवित बचे मुहित्तिन ओराकसी ने एएफपी को बताया, “मेरे परिवार के सात सदस्य मलबे में दबे हुए हैं.” उन्होंने कहा, “मेरी बहन, उसके तीन बच्चे, उसका पति और सास-ससुर सारे वहीं दबे हुए हैं.”

  8. बता दें कि सर्दियों के बर्फ़ीले तूफ़ान से बचावकार्य में बाधा आ रही थी. लगातर हुए बर्फबारी ने प्रमुख सड़कों को बर्फ से ढक दिया था.

  9. अधिकारियों ने कहा कि भूकंप ने क्षेत्र में तीन प्रमुख हवाईअड्डों को निष्क्रिय कर दिया, जिससे महत्वपूर्ण सहायता की डिलीवरी और मुश्किल हो गई है. 

  10. एर्दोगन ने अपनी सहानुभूति व्यक्त की और राष्ट्रीय एकता का आग्रह करते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि हम इस आपदा से एक साथ जल्द से जल्द और कम से कम क्षति के साथ रिकवर करेंगे.”

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वुमेंस प्रीमियर लीग यानी WPL को लेकर आईपीएल के चेयरमैन अरुण धूमल ने बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने इस बात की जानकारी दे दी है कि टूर्नामेंट कब से कब तक और कहां खेला जाएगा।



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सलमान रुश्दी बोले- टाइपिंग और लिखने में हो रही दिक्कत

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Image Source : INDIA TV/IANS
सलमान रुश्दी बोले- टाइपिंग करने और लिखने में हो रही दिक्कत

मशहूर लेखक और उपन्यासकार सलमान रुश्दी पर बीते दिनों अमेरिका में जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले में उनकी एक आंख की रोशनी चली गई। रुश्दी ने इस मामले पर कहा था कि वे भाग्यशाली हैं जो बच गएं। उन्होंने कहा कि मैं भाग्यशाली था, मैं कृतज्ञ हूं। मुझे अब ठीक लग रहा है। लेकिन मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूं कि मैं इतना बुरा भी नहीं हूं। उन्होंने द न्यूयॉर्कर के पत्रकार से बातचीत में बताया कि आंखों की रोशनी चली जाने के कारण उन्हें अब टाइपिंग करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लिखने में भी अब काफी परेशानी हो रही है।

बता दें कि सलमान रुश्दी पर यह हमला पिछले साल अगस्त महीने में हुआ था जब वे न्यूयॉर्क राज्य में एक कार्यक्रम में मंच पर थे। इस दौरान उनपर हमला हुआ जिसमें उनके एक आंख की रोशनी चली गई। इस घटना के बाद उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। हमले में उन्हें काफी चोट आई थी, जिसके बड़े घाव भर गएं। रुश्दी ने कहा कि फिजियोथिरेपी के बाद अंगूठे, तर्जनी और हथेली के निचले आधे हिस्से ने काम करना शुरू कर दिया है। मुजे बताया गया है कि अब मैं ठीक हूं। रुश्दी ने कहा कि उनकी कुछ उंगलियों में महसूस करने की कमी के कारण टाइप करने व लिखने में दिक्कत हो रही है।

रुश्दी ने कहा कि यह एक बड़ा हमला था। मैं खुद से चल सकता हूं और ठीक हूं। मैं जब कहता हूं कि मैं ठीक हूं इसका मतलब है कि मेरे शरीर के कुछ हिस्सों में लगातार जांच की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमले से उन्हें मानसिक चोटें बी आई हैं और उन्हें सुरक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण पर फिर से विचार करना पड़ रहा है। बता दें कि सलमान रुश्दी अपने लेखनी के कारण विवादों में बने रहते हैं। पिछले दो दशक से वे बिना किसी सुरक्षा के अपना जीवन जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब मैं लिखने बैठता हूं तब मैं लिख नहीं पाता। कभी कभी खालीपन सा लगता है। मैं जो लिखता हूं, उसे अगले दिन मिटा देता हूं। मैं हकीकत में अबतक उस हमले से उबर नहीं पाया हूं।

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