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गुजरात में भी सच होगी अरविंद केजरीवाल की भविष्यवाणी? पंजाब की तरह लिखकर दिया

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AAP और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के बीच गुजरात में मुस्लिम वोट बंटने से बीजेपी की हुई ‘बल्‍ले-बल्‍ले’

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गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने धमाकेदार प्रदर्शन कर सत्‍ता में वापसी की है

Gujarat Election Results 2022 : गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी की धमाकेदार जीत में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों ने भी अहम भूमिका निभाई. यह बात अलग है कि भगवा पार्टी ने चुनाव में एक भी मुस्लिम उम्‍मीदवार नहीं उतारा है. अब तक के रुझानों में राज्‍य की कई मुस्लिम बहुल सीटों पर सत्‍ताधारी पार्टी को कांग्रेस की जगह जीत हासिल करती नजर आ रही है. बड़ी आबादी वाली राज्‍य के 17 में से 12 सीटों पर बीजेपी बढ़त बनाए हुए है. यह संख्‍या वर्ष 2017 की तुलना में छह ज्‍यादा है.  कांग्रेस को इनमें से केवल सीटों पर ही बढ़त हासिल हुई है. खास बात यह है कि इसमें से अधिकांश सीटें कांग्रेस के वर्चस्‍व वाली रही हैं. 

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उदाहरण के तौर पर मुस्लिम बहुल दरियापुर सीट पर कांग्रेस का 10 सालों से कब्‍जा है, यहां कांग्रेस प्रत्‍याशी गयासुद्दीन शेख को बीजेपी के कौशिक जैन से हार मिली है. आम आदमी पार्टी (AAP), एक दर्जन से अधिक इन मुस्लिम बहुल सीटों में से किसी भी सीट पर बढ़त या जीत हासिल करने में नाकाम रही है. हालांकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP और असदुद्दीन ओवैसी की  AIMIM ने इन सीटों पर कांग्रेस के खाते में जाने वाले परंपरागत वोटों को विभाजित करने का काम किया है. AIMIM ने 13 प्रत्‍याशी उतारे थे जिसमें से दो गैर मुस्लिम थे जिन्‍होंने जमालपुर-खाड़‍िया और वडगाम सीट पर कांग्रेस के वोट बांटने का काम किया. जमालपुर-खाड़‍िया सीट से इमरान खेडावाला और वडमान सीट पर जिग्‍नेश मेवानी बारीक अंतर से पिछड़ रहे हैं.

गौरतलब है कि गुजरात के अब तक रुझानों में बीजेपी 157 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है जबकि विपक्षी पार्टियां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को उसने कोसों पीछे छोड़ दिया है. कांग्रेस जहां इस समय केवल 17 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है जबकि अरविंद केजरीवाल की AAP केवल पांच सीटों पर ही आगे है. पीएम मोदी का गृहराज्‍य होने के नाते गुजरात के नतीजों पर पूरे देश की नजर थी.  

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Mainpuri ByPoll: डबल इंजन की सरकार पर भारी ‘नेताजी‘ की सहानुभूति लहर, डिंपल यादव जीत की ओर

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Dimple Yadav

मैनपुरी उपचुनाव: उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित मैनपुरी सीट से मुलायम सिंह यादव की बहू और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव जीत की ओर अग्रसर हैं। वे इस समय सवादो लाख से अधिक वा मुलायम सिंह यादव यानी ‘नेताजी‘ के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई थी। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारा था। 

चुनाव में आरजेडी, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम जैसी पार्टियों ने मुलायम सिंह यादव की रही इस सीट पर सहानुभूति के रूप में अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे थे। हालांकि बीजेपी ने इस सीट को जीतने की भरसक कोशिश की। बीजेपी ने रघुराज शाक्य को मैदान में उतारा, लेकिन यूपी की बीजेपी सरकार यानी बीजेपी की केंद्र और राज्य की डबल इंजन की सरकार पर ‘नेताजी‘ की सहानुभूति लहर भारी पड़ी।

मैनपुरी उपचुनाव की मतगणना में शुरू से ही डिंपल यादव ने अपने प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के रघुराज शाक्य से बढ़त बनाए रखी। पहले 24 हजार, फिर 50 हजार से अधिक और फिर 1 लाख से अधिक वोट, फिर सवा दो लाख से अधिक वोटों से वे आगे रहीं। जैसे जैसे मतगणना आगे बढ़ती रही,ए डिंपल और शाक्य के वोटों का अंतर भी आगे बढ़ता रहा। 

सपा के लिए मुलायम सिंह यादव की सहानुभूति लहर

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जिस तरह से अपनी पत्नी डिंपल को मैदान में उतारा और हाल ही में चाचा शिवपाल यादव ने भी अपनी बहू के लिए प्रचार में जितना जोर लगाया है, उससे सपा इस बात पर आश्वस्त थी कि मैनपुरी चुनाव का परिणाम उनके पक्ष में ही जाएगा। दरअसल, यूपी में मुलायम सिंह यादव, का राजनीतिक कद काफी बड़ा था। उनके निधन के बाद सहानुभूति की लहर में डिंपल यादव के पक्ष में ये सीट चली गई। 

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मंत्रियों को समझाएं कि कॉलेजियम पर ना बोलें, हम संसद के कानून खारिज कर दें तो क्या होगा: SC

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अदालत ने गुरुवार को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी से कहा कि वह केंद्रीय मंत्रियों को सलाह दें कि कॉलेजियम की व्यवस्था की सार्वजनिक आलोचना करने से बचें। कानून मंत्री ने कॉलेजियम पर टिप्पणी की थी।



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